महाशिवरात्रि व्रत पूजा विधि।। Mahashivratri Vrat 2026

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महाशिवरात्रि व्रत पूजा विधि।। Mahashivratri Vrat 2026.

महाशिवरात्रि व्रत पूजा विधि।। Mahashivratri Vrat 2026
मित्रों, महाशिवरात्रि का व्रत इस बार 15 फरवरी 2026 को मनाया जा रहा है। इस वर्ष यह पर्व विशेष मुहूर्त में पड़ रहा है। हृषिकेश पञ्चांग के अनुसार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को कुम्भ मकर राशि में और सूर्य भी कुंभ राशि में ही हैं। ऐसे में महाशिवरात्रि (Mahashivratri) पर्व इस वर्ष सूर्य-चन्द्र के एक साथ रहने के साथ ही शुरू हो रहा है। इस दिन रात 12 बजकर 06 मिनट से 12 बजकर 55 मिनट तक अभिजित मुहूर्त भी पड़ रहा है। अत: इस शुभ मुहूर्त में पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होगी। आइए जानते हैं इस दिन का महत्व, पूजा का सही समय, विधि, पारण मुहूर्त एवं अन्य विस्तृत जानकारियाँ।।

महाशिवरात्रि पूजा विधि।। Mahashivratri Vrat 2026.

मित्रों, भगवान भोले नाथ को प्रसन्न करने के लिए महाशिवरात्रि पर तीन पत्तों वाला 108 बेल पत्र चढ़ाना चाहिये। इस दिन दूध में भांग मिलाकर भी शिवलिंग पर चढ़ाने की परम्परा है। ऐसी मान्यता है, कि उन्हें भांग बेहद पसंद है। इसके अलावा धतूरा और गन्ने का रस शिव शंभू को जरूर अर्पित करना चाहिए। आज के दिन सामान्य जल में गंगाजल मिलाकर शिवलिंग पर चढ़ाना चाहिए।।

रात्रि की पूजा करने से पहले स्नान जरूर कर लें। पूरी रात्रि भगवान शिव के समक्ष एक दीपक जरूर जलाएं। भगवान भोलेनाथ को पंचामृत से स्नान कराएं। इसके बाद केसर घुले हुए जल से अथवा दूध से अभिषेक करें। फिर चंदन का तिलक लगाएं। अब तीन पत्तों वाला 108 बेलपत्र चढ़ाएं। भांग, धतूरा, गन्ने का रस भी भगवान शिव को काफी पसंद है। ऐसे में उन्हें जरूर अर्पित करें।।

इसके अलावा तुलसी, जायफल, फल, मिष्ठान, कमल गट्टे, मीठा पान, इत्र एवं दक्षिणा भी चढ़ाना न भूलें। इस पूजन काल के दौरान "ॐ नमो भगवते रूद्राय, ॐ नमः शिवाय रूद्राय शम्भवाय भवानीपतये नमो नमः इत्यादि मंत्रों का जप करते रहें। अथवा सर्वाधिक प्रभावी मन्त्र माना जाता है "ॐ नमः शिवाय" इसी का जप करते-करते ही पूजन करें। भस्म का लेपन अवश्य करें। अंतिम में केसर से बने खीर का प्रसाद शिव जी को चढ़ाएं।।

संभव हो तो शिव पुराण पढ़े, चालीसा और आरती करें। यथासंभव रात्रि जागरण भी करें। महाशिवरात्रि वह पावन दिन है, जिस दिन "शिव भक्त" भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती की प्रसन्नता और उनका आशीर्वाद पाने के लिए व्रत रखकर इनकी पूजा करते हैं। पुराणों में ऐसी कथा मिलती है, कि पूर्वजन्म में यक्षराज कुबेर ने अनजाने में ही महाशिवरात्रि के दिन भगवान भोलेनाथ की उपासना कर ली थी। जिससे उन्हें अगले जन्म में शिव भक्ति की प्राप्ति हुई और वह देवताओं के कोषाध्यक्ष बने।।

वैसे तो वर्ष के हर महीने में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को शिवरात्रि आती है। जिसे मास शिवरात्रि व्रत कहते हैं। काशी की मान्यता के अनुसार फाल्गुन मास के कृष्णपक्ष की चतुर्दशी एवं गुजराती पञ्चांग के अनुसार माघ मास के कृष्णपक्ष की चतुर्दशी सबसे श्रेष्ठ मानी जाती है। इसलिए इसे शिवरात्रि नहीं "महाशिवरात्रि" कहते हैं। इसका कारण यह है, कि इसी दिन प्रकृति को धारण करने वाली देवी पार्वती और पुरुष रूपी महादेव का गठबंधन यानी विवाह हुआ था।।

महाशिवरात्रि पर रात का क्यों महत्व है।। Mahashivratri Vrat 2026.

वैदिक सनातन धर्म में रात्रि कालीन विवाह मुहूर्त को उत्तम माना गया है। इसी कारण भगवान शिव का विवाह भी देवी पार्वती से रात्रि के समय ही हुआ था। इसलिए हृषिकेश पञ्चांग के अनुसार जिस दिन फाल्गुन मास की चतुर्दशी तिथि मध्य रात्रि यानी निशीथ काल में होती है उसी दिन को महाशिवरात्रि का दिन माना जाता है।।

इस वर्ष 15 फरवरी को सायं 4 बजकर 23 मिनट से चतुर्दशी तिथि लगेगी जो मध्यरात्रि में भी रहेगी और तारीख 16 फरवरी को दिन में 5 बजकर 09 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। इसलिए 16 तारीख को उदय काल में चतुर्दशी होने पर भी 16 मार्च को ही महाशिवरात्रि मनाई जाएगी। 16 फरवरी का पञ्चांग देखने से पता चलता है, कि इस दिन का आरंभ शनिप्रदोष के साथ हो रहा है जिसे शिव आराधना के लिए शुभ माना गया है।।

महाशिवरात्रि पर सिद्ध योग का लाभ।। Mahashivratri Vrat 2026.

परन्तु सिद्ध योग को मंत्र साधना, जप, ध्यान के लिए शुभ फलदायी माना जाता है। इस योग में किसी नई चीज को सीखने या काम को आरंभ करने के लिए श्रेष्ठ कहा गया है। ऐसे में सिद्ध योग में मध्य रात्रि में शिवजी के मंत्रों का जप उत्तम फलदायी होगा। निशीथ काल 11 मार्च मध्य रात्रि के बाद 12 बजकर 24 मिनट से 1 बजकर 12 मिनट तक। प्रदोष काल 18:46 PM बजे से 21:11 PM बजे तक। वैसे शिवयोग 11 मार्च सुबह 9 बजकर 24 मिनट तक ही है। परन्तु सिद्ध योग 9 बजकर 25 मिनट से अगले दिन 8 बजकर 25 मिनट तक है।।

इस वर्ष महाशिवरात्रि पर पूजा के लिए समय अर्थात मुहूर्त का अभाव नहीं है। गृहस्थों एवं साधकों के लिए भी मुहूर्त की कोई कमी नहीं है। उपरोक्त सभी मुहूर्त अनुकूल हैं। महाशिवरात्रि के अवसर पर तंत्र, मंत्र साधना, तांत्रिक पूजा, रुद्राभिषेक करने के लिए 12 बजकर 25 मिनट से 1 बजकर 12 मिनट तक का समय श्रेष्ठ रहेगा। सामान्य गृहस्थों को मनोकामना पूर्ति के लिए सुबह और प्रदोष काल में शिव की आराधना करनी चाहिए। 2 बजककर 40 मिनट से चतुर्दशी लग जाने से दोपहर बाद शिवजी की पूजा का विशेष महत्व रहेगा।।

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