शास्त्रीय प्रमाणों के आधार पर विस्तृत विवेचन।। Gomed Ratna Dharan Karne ke Labh.
भूमिका:- मित्रों, भारतीय ज्योतिषशास्त्र में नवग्रहों के अनुरूप नौ प्रमुख रत्नों का वर्णन प्राप्त होता है। इन नौ रत्नों में "गोमेद (Hessonite Garnet)" को राहु ग्रह का प्रधान रत्न माना गया है। जिस प्रकार माणिक्य सूर्य, मोती चन्द्र तथा पुखराज बृहस्पति का प्रतिनिधित्व करते हैं, उसी प्रकार गोमेद राहु ग्रह की अशुभता का शमन तथा शुभता का संवर्धन करने वाला रत्न माना जाता है।।
वैदिक ज्योतिष के अनुसार यदि जन्मकुंडली में राहु शुभ भाव का स्वामी होकर अशुभ प्रभावों से पीड़ित हो अथवा योगकारक होकर दुर्बल हो, तब योग्य विद्वान ज्योतिषाचार्य की सलाह से गोमेद धारण करने पर अत्यन्त शुभ फल प्राप्त होते हैं। कोई भी रत्न धारण का उद्देश्य केवल भाग्य परिवर्तन नहीं, बल्कि ग्रहों की शुभ ऊर्जा को जागृत करना भी होता है। यही कारण है, कि शास्त्रों में रत्न धारण के पूर्व उसकी शुद्धता, उपयुक्त वजन, विधि तथा योग्य पात्रता का विशेष ध्यान रखने का निर्देश दिया गया है।।

गोमेद का स्वरूप।। Characteristics of Hessonite (Gomed).
मित्रों, गोमेद का वर्ण सामान्यतः "मधु (शहद) के समान, गौमूत्र के समान पीताभ-भूरा, लाल-भूरा अथवा ताम्रवर्ण मिश्रित" होता है। उत्तम गोमेद पारदर्शी, चमकदार, चिकना तथा भीतर से स्वच्छ दिखाई देता है। प्राचीन ग्रंथों में इसके स्वरूप का वर्णन इस प्रकार प्राप्त होता है:-
"गोमेदो गोमूत्रवर्णः स्निग्धः स्वच्छः प्रभान्वितः।
गुरुत्वयुक्तः समरूपः श्रेष्ठो राहुप्रियः स्मृतः॥"
अर्थ:- जो गोमेद गौमूत्र के समान रंग वाला, स्निग्ध, स्वच्छ, चमकयुक्त, भारयुक्त तथा समरूप हो, वही श्रेष्ठ एवं राहु का प्रिय रत्न माना जाता है। उत्तम गोमेद में निम्नलिखित विशेषताएँ होनी चाहिए। मधु अथवा गौमूत्र के समान प्राकृतिक रंग होता है। पर्याप्त चमक एवं पारदर्शी होता है। किसी प्रकार की दरार, छिद्र अथवा टूट-फूट न हो। भीतर काले धब्बे या धूमिलता अत्यल्प हो। स्पर्श में चिकना एवं भारयुक्त हो।।
गोमेद के संस्कृत पर्याय।। Sanskrit synonyms for Hessonite (Gomed).
शास्त्रों में गोमेद के अनेक नाम प्राप्त होते हैं। जैसे:- गोमेद, गोमेदक, राहुरत्न, तमोमणि, पिङ्गस्फटिक तथा मधुवर्ण मणि भी कहा जाता है।।
शास्त्रीय प्रमाण।। Scriptural Evidence.

(१) बृहत्संहिता में वाराहमिहिर ने कहा है, कि राहू के रत्नाध्याय में गोमेद के स्वरूप तथा गुणों का वर्णन करते हुए उसके रंग, चमक और दोषों का विशेष उल्लेख किया है।।
"गोमूत्राभं मधुवर्णं स्निग्धं स्वच्छं गुरु प्रभम्।
निर्दोषं यत्तु विज्ञेयं तद् गोमेदं प्रशस्यते॥"
अर्थ:- जो गोमेद गौमूत्र अथवा मधु के समान वर्ण वाला, स्निग्ध, स्वच्छ, भारी तथा तेजस्वी हो, वही श्रेष्ठ माना जाता है।।
(२) गरुड़ पुराण।। Garun Puran.
गरुड़ पुराण में रत्नों की महिमा का वर्णन करते हुए कहा गया है, कि शुद्ध एवं दोषरहित रत्न धारण करने से ग्रहजन्य कष्टों की शान्ति होती है तथा आयु, यश, धन और सुख की प्राप्ति होती है।।
"शुद्धरत्नधारणेन ग्रहपीडा विनश्यति।
आयुर्वृद्धिः सुखं वित्तं यशश्चाभिविवर्धते॥"
(३) अग्नि पुराण।। Agni Puran.
अग्नि पुराण में वर्णित है कि ग्रहों के अनुकूल रत्न धारण करने से उनके शुभ फल अनेक गुना बढ़ जाते हैं और अशुभ प्रभावों का क्षय होता है।।
राहु ग्रह और गोमेद का संबंध।। The connection between the planet Rahu and Hessonite (Gomed).

राहु को छाया ग्रह कहा गया है। यह भौतिक उन्नति, राजनीति, विदेशी संपर्क, (या विदेश से धन कमाना) अनुसंधान, रहस्यविद्या, (गुप्त विद्या) तकनीकी ज्ञान, न्यायालय, इलेक्ट्रॉनिक्स, चिकित्सा, खनिज पदार्थ, विदेश यात्रा तथा अचानक होने वाले लाभ-हानि का कारक माना जाता है।।
यदि राहु शुभ होकर बलवान हो तो व्यक्ति को अप्रत्याशित सफलता दिलाता है। राजनीति में उन्नति, विदेश से लाभ, नवीन तकनीकी ज्ञान, शोध कार्यों में सफलता, व्यापारिक विस्तार, प्रभावशाली व्यक्तित्व, जनसमर्थन भी प्राप्त कराता है।।
गोमेद धारण करने से होने वाले लाभ।। Benefits of wearing Hessonite (Gomed).
1.मुकदमों में जीत की प्राप्ति करवाता है।। It brings about victory in courts and legal cases.
मित्रों, यदि जन्मकुंडली में राहु अशुभ फल दे रहा हो और योग्य ज्योतिषीय परीक्षण के उपरांत गोमेद धारण करने की सलाह दी जाए, तो राहु से उत्पन्न अनेक कष्टों में कमी आने लगती है। जैसे मानसिक स्थिरता, राहु की अशुभता के कारण उत्पन्न भ्रम, भय, अस्थिरता, अनिर्णय तथा मानसिक चंचलता में धीरे-धीरे सुधार होने लगता है। न्यायालय एवं मुकदमों में सहायता की प्राप्ति करवाता है। जिन व्यक्तियों के जीवन में न्यायालय संबंधी विवाद लंबे समय से चल रहे हों और राहु अनुकूल हो, उनके लिए गोमेद लाभकारी सिद्ध हो सकता है।।
2. व्यापार में उन्नति।। Progress in business.
मित्रों, राहु ग्रह के लिए गोमेद धारण करने से अनेक क्षेत्रों में लाभ-लाभ प्राप्त करवाते हैं। विशेषकर निम्न क्षेत्रों में कार्यरत व्यक्तियों को लाभ प्राप्त हो सकता है। आयात-निर्यात में उत्तम लाभ का योग बनाते हैं। विदेशी व्यापार भी प्रदान करते हैं। ऑनलाइन व्यवसाय से भी बहुत ज्यादा लाभ करवाते हैं। तकनीकी उद्योग भी देते हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र से भी बहुत लाभ होता है। खनिज पदार्थों के व्यवसाय से भी अत्यन्त लाभ होता है। केमिकल उद्योग से भी अत्यधिक लाभ का योग बनता है। नेटवर्किंग व्यवसाय से भी बहुत लाभ होता है।।
3. विदेश यात्रा एवं विदेश से लाभ।। Foreign travel and benefits from abroad.
मित्रों, यदि राहु विदेश संबंधी योग बना रहा हो तो गोमेद धारण करने से विदेश यात्रा, विदेशी व्यापार अथवा विदेशी कंपनियों से लाभ मिलने की संभावना प्रबल होती है।।
4. राजनीतिक सफलता।। Political success.
मित्रों, राहु जनसमूह, राजनीति तथा जनसंपर्क का ग्रह भी माना जाता है। अनुकूल राहु वाले व्यक्तियों को गोमेद धारण करना चाहिये। इससे प्रतिष्ठा एवं प्रभाव दोनों ऐसा गोमेद प्रदान करने में सहायक हो सकता है।।
5. प्रतियोगी परीक्षाओं में लाभ।। Benefits in competitive examinations.
मित्रों, अनुसंधान, प्रतियोगिता तथा विश्लेषणात्मक कार्यों में राहु का विशेष प्रभाव माना गया है। शुभ राहु की दशा के समय गोमेद धारण करने से बुद्धि की एकाग्रता और निर्णय क्षमता को सुदृढ़ करने में सहायक माना जाता है।।
6. अचानक मिलने वाले अवसर।। Unexpected opportunities.
मित्रों, राहु एक ऐसा ग्रह है, जो जीवन में अचानक लाभ प्रदान करने वाला होता है। अतः उचित स्थिति में गोमेद नए अवसरों के द्वार खोल सकता है। ऐसा गोमेद नकारात्मक शक्तियों से रक्षा भी करता है। पारंपरिक मान्यता के अनुसार गोमेद धारण करने से नकारात्मक ऊर्जाओं, भय, भ्रम तथा अदृश्य बाधाओं से रक्षा होती है। इससे आत्मविश्वास में वृद्धि भी सहसा ही होने लगाती है। राहु जब शुभ हो जाता है तब व्यक्ति में साहस, जोखिम लेने की क्षमता तथा नेतृत्व के गुणों का विकास होता है।।
किन लोगों के लिए गोमेद लाभकारी हो सकता है? For whom can Hessonite (Gomed) be beneficial?

मित्रों, सामान्यतः ऐसी परिस्थितियों में योग्य ज्योतिषीय परीक्षण के बाद गोमेद धारण करना चाहिये। जैसे:- राहु योगकारक हो। राहु महादशा या अंतरदशा शुभ फल देने वाली हो। राहु त्रिकोण या केन्द्र का स्वामी होकर दुर्बल हो। राहु राजयोग का निर्माण कर रहा हो। विदेश संबंधी कार्यों में सफलता अपेक्षित हो। राजनीति अथवा जनसंपर्क के क्षेत्र में व्यक्ति कार्यरत हो।।
गोमेद कब नहीं पहनना चाहिए? When should one not wear Hessonite (Gomed)?
मित्रों, बिना कुंडली परीक्षण के गोमेद धारण नहीं करना चाहिए। विशेषतः यदि राहु अष्टम या द्वादश भाव में अत्यंत पापफल दे रहा हो। यदि राहु मारकेश होकर अनिष्टकारी हो। यदि राहु शुभ ग्रहों को अत्यधिक पीड़ित कर रहा हो। यदि किसी विद्वान ज्योतिषाचार्य ने गोमेद धारण से मना किया हो।।
गोमेद धारण करने की विधि।। Method of wearing Hessonite (Gomed).
मित्रों, यदि निश्चित हो की राहु का रत्न गोमेद धारण के योग्य है। तो इसे पंचधातु की अंगूठी में जड्वाकर पहनना चाहिये। अथवा स्थिति परिस्थिति के अनुसार चाँदी में भी धारण किया जा सकता है। इसे कभी भी दाहिने हाथ की मध्यमा (कई परंपराओं में अनामिका का भी उल्लेख मिलता है; अंतिम निर्णय योग्य आचार्य के निर्देशानुसार करें) अंगुली में धारण करना चाहिये।।
इस गोमेद रत्न को शनिवार के दिन सायंकाल में अथवा राहुकाल में धारण करना चाहिये। अपनी परंपरा एवं ज्योतिषाचार्य के मतानुसार धारण करना चाहिये। धारण करने से पहले किसी वैदिक आचार्य से उसकी सिद्धि करवा लेनी चाहिये अथवा "ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः॥" इस मंत्र की कम से कम 108 बार जप करके गोमेद धारण करना शुभ माना गया है।।
गोमेद के दोष।। Flaws of Hessonite (Gomed).
मित्रों, शास्त्रों में दोषयुक्त गोमेद धारण करने का निषेध किया गया है। इस तरह के दोष अशुभ माने गए हैं। यदि टूटा हुआ हो, फटा हुआ हो, छिद्रयुक्त हो, धूमिल हो, काले धब्बों वाला हो, चमकहीन हो या अत्यधिक रेखाओं वाला हो ऐसा रत्न अपेक्षित शुभ फल देने में समर्थ नहीं माना जाता।।
गोमेद धारण करते समय सावधानियाँ।। Precautions to be taken while wearing Hessonite (Gomed).
मित्रों, इस बात का ध्यान रखें कि सदैव प्राकृतिक एवं प्रमाणित गोमेद रत्न ही धारण करें। कृत्रिम या काँच से बने नकली पत्थरों से बचें। रत्न कम से कम उचित भार (व्यक्ति की आवश्यकता अनुसार) का होना चाहिए। धारण करने से पूर्व उसकी शुद्धि एवं प्राण-प्रतिष्ठा कराना हितकर माना गया है। बिना कुंडली परीक्षण केवल दूसरों को देखकर या सोशल मिडिया के विडियो आदि देखकर गोमेद धारण नहीं करना चाहिए।।
स्वामी जी का सलाह।। Swami Ji's Advice.
मित्रों, गोमेद राहु ग्रह का अत्यंत प्रभावशाली रत्न माना गया है। जब राहु जन्मकुंडली में शुभ फल देने वाला हो, किंतु किसी कारणवश निर्बल या पीड़ित हो, तब योग्य ज्योतिषीय परामर्श के अनुसार गोमेद धारण करना जीवन में उन्नति, मानसिक स्थिरता, विदेश संबंधी लाभ, व्यापारिक सफलता, राजनीतिक प्रतिष्ठा तथा अप्रत्याशित अवसरों की प्राप्ति में सहायक माना गया है।।
किन्तु यह स्मरण रखना भी आवश्यक बताया गया है, कि "रत्न स्वयं भाग्य का निर्माता नहीं होता, बल्कि वह जन्मकुंडली में विद्यमान ग्रहबल को सक्रिय एवं सुदृढ़ करने का एक माध्यम है।" अतः गोमेद अथवा किसी भी रत्न को धारण करने से पूर्व किसी भी "विद्वान वैदिक ज्योतिषाचार्य" से जन्मकुंडली का गहन परीक्षण अवश्य कराना चाहिए। शास्त्रसम्मत विधि, शुद्ध रत्न और उचित पात्रता—ये तीनों मिलकर ही रत्न धारण का वास्तविक शुभ फल प्रदान करते हैं।।
ज्योतिष के सभी पहलू पर विस्तृत समझाकर बताया गया बहुत सा हमारा विडियो हमारे YouTube के चैनल पर देखें । इस लिंक पर क्लिक करके हमारे सभी विडियोज को देख सकते हैं - Click Here & Watch My YouTube Channel.
इस तरह की अन्य बहुत सारी जानकारियों, ज्योतिष के बहुत से लेख, टिप्स & ट्रिक्स पढने के लिये हमारे ब्लॉग एवं वेबसाइट पर जायें तथा हमारे फेसबुक पेज को अवश्य लाइक करें, प्लीज - My facebook Page.
वास्तु विजिटिंग के लिये तथा अपनी कुण्डली दिखाकर उचित सलाह लेने एवं अपनी कुण्डली बनवाने अथवा किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति के लिए संपर्क करें ।।



0 टिप्पणियाँ