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आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 17 जुलाई 2026 दिन शुक्रवार।।
मित्रों, तारीख 17 जुलाई 2026 दिन शुक्रवार को आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि है। आज वैनायकी श्रीगणेश चतुर्थी का पावन व्रत है। इसे समान्य भाषा में गणेश चौथ के नाम से भी जाना जाता है। आज का यह वैनायकी श्रीगणेश चतुर्थी का व्रत सनातनी स्त्रियाँ अपने पुत्रों के दीर्घायु के लिए दिन भर अखण्ड उपवास रखकर, सायंकाल में भगवान श्रीगणेश जी की पुजा करने के बाद चन्द्रमा देवता के निकलने (चंद्रोदय 21:12 PM बजे) होने पर चन्द्रमा देवता को देखकर फिर चन्द्रमा देवता को अर्घ्य देकर फिर व्रत खोलती हैं। आज सूर्य देवता मिथुन राशी से चलकर कर्क राशी में (दिन में 11:11 AM बजे) पहुँच जायेंगे। आज इस कर्क की संक्रान्ति के पूण्यकाल में मन्दाकिनी का स्नान श्रेयस्कर बताया गया है। साथ ही आज घि और धेनु दान का भी बहुत महत्त्व बताया गया है। कहा जाता है, कि आज से दक्षिणायन भी सूर्य हो जाते है। आज से देवताओं की रात्रि और दैत्यों का दिन भी शुरू हो जाता है। आज से वर्षा ऋतू का भी आरम्भ माना जाता है। आज से पंचक भी आरम्भ हो जाता है। आज स्थायीजययोग भी है। आज रवियोग भी है। आप सभी सनातनियों को "वैनायकी श्रीगणेश चतुर्थी के पावन व्रत" की हार्दिक शुभकामनायें।।
हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी), आज के योग और आज के करण। आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातकों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव ही सर्वश्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो। ऐसी मेरी आप सभी आज के अधिष्ठात्री देवों से हार्दिक प्रार्थना है।।
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वैदिक सनातन हिन्दू पञ्चांग, Vedic Sanatan Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi), 2:- वार (Day), 3:- नक्षत्र (Nakshatra), 4:- योग (Yog) और 5:- करण (Karan).
पञ्चांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग का श्रवण करते थे। शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन-श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पञ्चांग को देखना, पढ़ना एवं सुनना चाहिए।।

आज का पञ्चांग 17 जुलाई 2026 दिन शुक्रवार।।
Aaj ka Panchang 17 June 2026.
विक्रम संवत् - 2083.
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर - रौद्र.
शक - 1748.
अयन – सौम्यायनम्.
गोल - याम्य.
ऋतु – ग्रीष्म.
मास - आषाढ़.
पक्ष - शुक्ल.
गुजराती पंचांग के अनुसार – आषाढ़ शुक्ल पक्ष.
Panchang 17 July 2026
तिथि - तृतीया 09:00 AM बजे तक उपरान्त चतुर्थी तिथि है।।
नक्षत्र - मघा 18:36 PM तक उपरान्त पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र है।।
योग - व्यतिपात 22:47 PM तक उपरान्त तक उपरान्त वरियान योग है।।
करण - गर 06:29 AM तक उपरान्त वणिज 17:31 PM तक उपरान्त विष्टि करण है।।
चन्द्रमा - सिंह राशि पर।।
सूर्य – मिथुन राशि एवं पुनर्वसु नक्षत्र पर गोचर कर रहे हैं।।
मुम्बई सूर्योदय - प्रातः 06:08:56
मुम्बई सूर्यास्त - सायं 19:19:17
वाराणसी सूर्योदय - प्रातः 05:17:41
वाराणसी सूर्यास्त - सायं 18:43:24
राहुकाल (अशुभ) - सुबह 11:06 बजे से 12:45 बजे तक।।
विजय मुहूर्त (शुभ) - दोपहर 12.32 बजे से 12.56 बजे तक।।
Panchang 17 July 2026
तृतीया तिथि विशेष - तृतीया तिथि में नमक का दान तथा भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। तृतीया तिथि एक सबला अर्थात बल प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह तृतीया तिथि आरोग्यकारी रोग निवारण करने वाली तिथि भी मानी जाती है। इस तृतीया तिथि की स्वामिनी माता गौरी और इसके देवता कुबेर देवता हैं। यह तृतीया तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह तृतीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी जाती है।।
तृतीया तिथि केवल बुधवार की हो तो अशुभ मानी जाती है। अन्यथा इस तृतीया तिथि को सभी शुभ कार्यों में लिया जा सकता है। आज तृतीया तिथि को माता गौरी की पूजा करके व्यक्ति अपनी मनोवाँछित कामनाओं की पूर्ति कर सकता है। आज तृतीया तिथि में एक स्त्री माता गौरी की पूजा करके अचल सुहाग की कामना करे तो उसका पति सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। आज तृतीया तिथि को भगवान कुबेर जी की विशिष्ट पूजा करनी चाहिये। देवताओं के कोषाध्यक्ष की पूजा आज तृतीया तिथि को करके मनुष्य अतुलनीय धन प्राप्त कर सकता है।।
मित्रों, तृतीया तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति मानसिक रूप से अस्थिर होता है अर्थात उनकी बुद्धि भ्रमित होती है। इस तिथि का जातक आलसी और मेहनत से जी चुराने वाला होता है। ये दूसरे व्यक्ति से जल्दी घुलते मिलते नहीं हैं बल्कि लोगों के प्रति इनके मन में द्वेष की भावना भी रहती है। इनके जीवन में धन की कमी रहती है, इन्हें धन कमाने के लिए काफी मेहनत और परिश्रम करना पड़ता है।।
Panchang 17 July 2026
मघा नक्षत्र के जातकों का गुण एवं स्वभाव:- यदि आपका जन्म मघा नक्षत्र में हुआ है तो आप ठिगने कद के साथ सुदृढ वक्षस्थल और मजबूत जंघाओं के मालिक हैं। आपकी वाणी थोड़ी कर्कश एवं गर्दन थोड़ी मोटी हो सकती है। मघा नक्षत्र में जन्म लेने वालों की आँखें विशेष चमक लिए हुए होती हैं। चेहरा शेर के समान भरा हुआ एवं रौबीला होता है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति प्रायः अपने पौरुष और परुशार्थ के प्रदर्शन के लिए सदा ललायित रहते हैं। मघा नक्षत्र के जातकों को अपने रौबिलेपन को बढाने के लिए शानदार मूंछे रखने का शौक होता है।।
ऐसे लोग थोडा अभिमानी भी होते है और इसीलिए किसी की छोटी से छोटी बात पर भी शीघ्र ही नाराज़ भी हो जाते हैं। नाराज़गी में सामने वाले को नीचा दिखाने के लिए अपनी बलशाली शक्ति और मर्दानगी का दुरूपयोग करने से भी नहीं हिचकिचाते। मघा नक्षत्र में जन्मा व्यक्ति परम तेजस्वी होता है। आप स्वभाव से बहुत धार्मिक प्रवृत्ति के होते हैं। देवताओं और पितरों को पूजे बिना कोई कार्य आरम्भ नहीं करते हैं।।
मघा नक्षत्र में जन्मी कन्याएं बहुमूल्य पकवान बनाना पसंद करती हैं। स्वादिष्ट पकवान एवं सुंदर और आकर्षक वस्त्रों की शौक़ीन होती हैं। मघा नक्षत्र की महिलाएं हर प्रकार के सुख सुविधा का भोग करती हैं। माता पिता और बड़ों का आदर सम्मान प्राकृतिक रूप से आपके व्यवहार में ही होता है। परन्तु ऐसी जातिकाएं ईश्वर और पितरों से डरने वाली होती है।।
मघा नक्षत्र में जन्मे लोगों की आयु यदि लम्बी हो तो जातक अत्यधिक धनवान होता है। परन्तु ऐसे लोगों को हार्ट अटैक, फ़ूड पोइस्निंग, पीठ का दर्द, किडनी सम्बन्धी समस्याएं होने की संभावनायें होती हैं।।
प्रथम चरण:- मघा नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी मंगल हैं। यहाँ लग्न स्वामी, नक्षत्र स्वामी और नक्षत्र चरण स्वामी सभी में परम शत्रुता होती है। इसलिए मघा नक्षत्र के प्रथम चरण में जन्मा व्यक्ति अल्प पुत्र अर्थात संतति वाला होता है। लग्न बलि न हो तो जातक का विकास कार्य रुका हुआ रहता है। साथ ही सूर्य की दशा कमज़ोर फल देने वाली होती है।।
द्वितीय चरण:- मघा नक्षत्र के द्वितीय चरण का स्वामी शुक्र हैं। मघा नक्षत्र के दूसरे चरण में जन्मा व्यक्ति तेजस्वी पुत्र अर्थात संतति वाला होता है। लग्नेश सूर्य की दशा उत्तम फलदायी होती है। मंगल की दशा भाग्योदय कारक होती है एवं शुक्र की दशा में पराक्रम बढता है।।
तृतीय चरण:- मघा नक्षत्र के तृतीय चरण का स्वामी बुध हैं। मघा नक्षत्र के तीसरे चरण में जन्मा व्यक्ति प्रायः रोगी होता है। जातक को संक्रामक रोग शीघ्र ही पकड लेते हैं। लग्नेश सूर्य की दशा उत्तम फलदायी होती है। मंगल की दशा भाग्योदय कारक होती है एवं धन प्राप्ति के योग बुध की दशा में प्रबल बनेंगे।।
चतुर्थ चरण:- मघा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का स्वामी सूर्य हैं। मघा नक्षत्र के चौथे चरण में जन्मा व्यक्ति अपने क्षेत्र का विद्वान् पंडित होता है। लग्नेश सूर्य की दशा उत्तम फल फलदायी होती है। मंगल की दशा भाग्योदय कारक होती है।।
Panchang 17 July 2026
शुक्रवार का विशेष - शुक्रवार के दिन तेल मर्दन अर्थात तेल शरीर में मालिश करने से बिघ्न बाधायें आती हैं - (मुहूर्तगणपति)।।
शुक्रवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से लाभ और यश की प्राप्ति होती है । (महाभारत अनुशासनपर्व)।।
दिशाशूल - शुक्रवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो दही खाकर यात्रा कर सकते है।।
शुक्र के अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए यह उपाय करना चाहिए। शुक्र की अशुभता दूर करने के लिए अपने सामर्थ्य के अनुसार रुई और दही किसी मंदिर में दान करना चाहिए। किसी भी स्त्री एवं अपनी पत्नी का भी कभी भी अपमान या निरादर नहीं करना चाहिए। उन्हें सदैव आदर और सम्मान देने का प्रयास करना चाहिए।।
शुक्रवार को सफ़ेद वस्त्र धारण करना चाहिए। इत्र एवं परफ्यूम लगाने से अशुभ शुक्र का दु:ष्प्रभाव दूर होता है। किसी नेत्रहीन व्यक्ति को सफ़ेद वस्त्र या मिठाई दान करने से अशुभ शुक्र का दु:ष्प्रभाव दूर होता है। दश वर्ष से कम आयु की कुवांरी कन्याओं को गाय के दूध से बने खीर खिलाने से अशुभ शुक्र का दु:ष्प्रभाव दूर होता है। मछलियों को आटे की गोलियां खिलाने से अशुभ शुक्र का दु:ष्प्रभाव दूर होता है। चाँदी का कड़ा पहनने एवं श्रीसूक्त का पाठ करने से अशुभ शुक्र का दु:ष्प्रभाव दूर होता है।।
शुक्रवार का विशेष टिप्स - मित्रों, आज शुक्रवार को दक्षिणावर्ती शंख से भगवान नारायण (शालिग्राम भगवान) का अभिषेक करें। यथोपचार से पूजन करें और पूजन के उपरान्त अथवा मध्य में ही श्वेत चन्दन में केशर मिलाकर भगवान को श्रद्धापूर्वक तिलक लगायें। शुक्रवार को इस प्रकार किया गया भगवान नारायण का पूजन माता महालक्ष्मी को बलात आपके घर की ओर खिंच लाता है। आज लक्ष्मी घर में आयें इसके लिये घर के ईशान कोण में देशी गाय के घी से रुई के जगह लाल धागे की बत्ती का एक दीपक जलायें।।
Panchang 17 July 2026
शुक्रवार को भूलकर भी ये काम न करें:- हमारे वैदिक सनातन धर्म में हर दिन किसी न किसी देवी-देवता का होता है। जिसके अनुसार शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी का होता है। शुक्रवार के दिन जो भक्त मां लक्ष्मी की पूजा विधिपूर्वक करते हैं, उन्हें संसार के सभी सुखों की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में लक्ष्मी मां को धन की देवी माना गया है। मान्यता अनुसार शुक्रवार के दिन माँ की पूजा-आराधना करने से उनका आशीर्वाद सदैव बना रहता है।।
लेकिन इस दिन कुछ काम जिसे कभी भूलकर भी नहीं करना चाहिए। दैनिक जीवन में भी कुछ ऐसे काम होते हैं, जैसे भूलकर भी कभी किसी को भी शुक्रवार के दिन धन ना दें और ना ही उधार लें। मान्यता है, कि शुक्रवार के दिन दिया गया धन वापस लौटकर नहीं आता है। इसदिन किसी को कर्ज देने से मां लक्ष्मी नाराज होती हैं और संबंध भी खराब होते हैं।।
वैसे तो आपको कभी किसी का अपमान नहीं करना चाहिए, लेकिन शुक्रवार के दिन इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इस दिन भूलकर भी महिलाओं, कन्याओं और किन्नरों का अपमान नहीं करना चाहिए। उनके बारे में अपशब्द नहीं बोलने चाहिए। महिलाओं में मां लक्ष्मी का वास होता है और उनके अपमान करने से मां लक्ष्मी भी नाराज हो जाती हैं।।
शुक्रवार के दिन अगर आप व्रत-पूजन नहीं भी करते हैं तो तामसिक भोजन खासतौर पर मांसाहार और मदिरा के सेवन से परहेज रखना चाहिए। इस दिन पूर्ण सात्विक भोजन करना चाहिए। अगर संभव हो सके तो इसको आप अपनी आदत भी बना लें।।
शुक्रवार के दिन भूलकर भी किसी को भी शक्कर नहीं देनी चाहिए। क्योंकि ज्योतिष में शक्कर का संबंध शुक्र और चंद्र दोनो से हैं। इसलिए शुक्रवार के दिन शक्कर देने से आपका शुक्र कमजोर होता है और शुक्र भौतिक सुखों का स्वामी है। शुक्र के नाराज होने से भौतिक सुख-सुवधिओं में कमी आती है और आर्थिक स्थिति भी खराब होती है।।
शुक्रवार के दिन माता लक्ष्मी के साथ नारायण की भी पूजा करनी चाहिए। लक्ष्मी के साथ नारायण की पूजा करने से देवी-देवता प्रसन्न होते हैं और दोनों का आशीर्वाद भी बना रहता है। अगर संभव हो सके तो सुबह या शाम किसी भी एक समय मीठा घर में जरूर बनाना चाहिए और उसको सबसे पहले घर की सबसे बड़ी स्त्री को देना चाहिए।।
शुक्रवार के दिन किसी से अपशब्दन न बोलें। ऐसा करने से माता लक्ष्मी आप से अप्रसन्नम हो जाती हैं और फिर आपके साथ धन संबंधी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। घर में अपव्यमय बढ़ जाता है। लोग बीमार रहने लगते हैं। व्यापार धंधे में नुकसान होने लगता है।
साफ-सुथरे रसोईघर में मां लक्ष्मी का वास होता है। इससे घर में वैभव और सुख-शांति का प्रवाह निरंतर होता रहता है। भूलकर भी रात के समय किचन में गंदे बर्तन छोड़ना चाहिए, इससे लक्ष्मी माता रूठ जाती है और घर में अशांति फैल जाती है। साथ ही स्वास्थ्य के खराब रहने की आशंका बनी रहती है।।
Panchang 17 July 2026
मित्रों, जिस व्यक्ति का जन्म शुक्रवार को होता है वह व्यक्ति चंचल स्वभाव का होता है। ये सांसारिक सुखों में लिप्त रहने वाले होते हैं तथा तर्क करने में निपुण और नैतिकता में बढ़ चढ कर होते हैं। ऐसे लोग धनवान और कामदेव के गुणों से प्रभावित रहते हैं और इनकी बुद्धि अत्यन्त तीक्ष्ण होती है। ये ईश्वर की सत्ता में अंधविश्वास नहीं रखते हैं तथा कला के प्रति रूचि रखने वाले, सुन्दर एवं आकर्षक व्यक्तित्व के धनी होते हैं।।
ऐसे लोग सौंदर्यप्रेमी, मधुरभाषी, यात्राओं के शौकिन, सुंदर स्थानों पर घुमने वाले एवं कलाकार स्वभाव के होते हैं। इनमें सेक्स की भावना अन्यों के मुकाबले अधिक होती है। सुन्दर कपडे़ पहनने के शौकिन तथा आभूषण अर्थात ज्वेलरी प्रिय होते हैं। इनको अपना कैरियर पर्यटन से जुडे क्षेत्र, फैशन डिजायनर, कलाकार, सेक्स विशेषज्ञ, मनोचिकित्सक अथवा ज्वेलरी से सम्बन्धित व्यदवसायों में आजमाना चाहिये। इनका शुभ अंक 7 होता है तथा इनका शुभ दिन बुधवार और शुक्रवार होता है।।
आज का सुविचार - मित्रों, अगर कोई आपको नीचा दिखाना चाहता हैं तो इसका मतलब हैं आप उससे ऊपर हैं। जिनमें आत्मविश्वास की कमी होती हैं वही दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं। मुझे कौन याद करेगा इस भरी दुनिया में, हे प्रभु! बिना मतल़ब के तो लोग तुझे भी याद नही करते।।
Panchang 17 July 2026
विवाह में हो रहे विलम्ब के लिये इन साधारण उपायों से अपने जीवन को रसमय बनायें।।.... आज के इस लेख को पूरा पढने के लिये इस लिंक को क्लिक करें..... वेबसाईट पर पढ़ें: & ब्लॉग पर पढ़ें:
Panchang 17 July 2026
बृहत्पाराशर होराशास्त्रम् के 19वें अध्याय में वर्णित अनेकयोगाध्यायः में ज्योतिष के सभी महत्वपूर्ण योगों का विस्तृत वर्णन किया गया है । जातक के जीवन में इन योगों का क्या असर होता है, इस बात का विस्तृत वर्णन हम कर रहे हैं । तो आइये जानें इस विडियो टुटोरियल में मृदंग योग एवं उसके फल के विषय में - मृदंग योग एवं उसके फल.
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