कुंडली के छठे भाव चन्द्रमा का फल और उपाय।। Chandra Chhathe Ghar Me Effects And Remedies.
षष्ठ भाव और चंद्रमा का संबंध।। Introduction.
मित्रों, षष्ठ भाव को शत्रु भाव, रोग भाव तथा ऋण भाव भी कहा जाता है। और इसी से जातक के शत्रु, प्रतिस्पर्धा, रोग, ऋण, सेवा-कार्य तथा दैनिक संघर्षों का आकलन किया जाता है। यह भाव कठिनाइयों का प्रतिनिधित्व तो अवश्य करता है। परन्तु इसे उपचय भाव भी नहीं माना जाता। इसलिए यहाँ स्थित ग्रहों की प्रकृति के अनुसार ही फल में विविधता देखने को मिलती है। षष्ठ भाव जातक के जीवन में आने वाली प्रतिदिन की छोटी-बड़ी लड़ाइयों का दर्पण भी है।।
अब चंद्रमा की प्रकृति पर विचार करें तो यह मन, भावना, मानसिक शांति तथा जनसामान्य से जुड़ाव का कोमल तथा अत्यंत संवेदनशील ग्रह माना गया है। चंद्रमा जीवन में स्थिरता, धैर्य तथा भावनात्मक संतुलन का प्रतिनिधित्व करता है। और यही कारण है कि इसे शांत तथा सुखद भावों में विशेष रूप से बलवान माना जाता है। जब यह कोमल ग्रह षष्ठ भाव जैसे संघर्षपूर्ण भाव में जाकर बैठ जाता है। तो एक विशेष तथा रोचक द्वंद्व की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।।
यह द्वंद्व इस प्रकार समझा जा सकता है कि षष्ठ भाव जातक से निरंतर संघर्ष, प्रतिस्पर्धा तथा दृढ़ता की मांग करता है। जबकि चंद्रमा स्वभाव से कोमल, भावुक तथा शांतिप्रिय ग्रह है। इसलिए जब मन का कारक चंद्रमा इसी षष्ठ भाव में बैठ जाता है। तब जातक के स्वास्थ्य, सेवा भाव तथा प्रतिस्पर्धियों से संबंधों पर एक विशेष तथा गहरा प्रभाव देखने को मिलता है। जो सामान्य ग्रह-भाव संयोगों से भिन्न होता है।।
षष्ठ भाव को चंद्रमा जैसे कोमल ग्रह के लिए ज्योतिषीय दृष्टिकोण से दुःस्थान माना जाता है। अतः यहाँ चंद्रमा की स्थिति सामान्यतः कुछ चुनौतीपूर्ण मानी जाती है। तथापि यह जातक को सेवा क्षेत्र में विशेष सफलता भी प्रदान करती है। और यहाँ तो मैं यही कहूँगा कि दुःस्थान होने का अर्थ यह कदापि नहीं कि यह भाव सदैव अशुभ ही रहेगा। अपितु सेवा तथा करुणा जैसे गुणों के माध्यम से यही स्थिति जातक को समाज में विशेष पहचान भी कई बार दिलाती है। परन्तु वास्तविक फल का निर्णय तो सदैव संपूर्ण जन्मकुंडली, ग्रहों की दशा और गोचर के आधार पर ही किया जाता है।।
षष्ठ भाव में चंद्रमा का सामान्य स्वभाव।। General Nature of Moon in the Sixth House.
मित्रों, षष्ठ भाव में चंद्रमा जातक को सेवाभावी, संवेदनशील तथा जनसामान्य से गहरा जुड़ाव रखने वाला स्वभाव प्रदान करता है। ऐसे जातक दूसरों की सहायता करने में विशेष रुचि रखते हैं। तथा सेवा क्षेत्र में स्वाभाविक रूप से आकर्षित होते हैं। इनके भीतर एक ऐसी करुणा तथा सहानुभूति होती है, जो इन्हें औरों की पीड़ा को अपनी पीड़ा की भाँति अनुभव करने की क्षमता देती है। और यही गुण इन्हें एक उत्तम सेवक अथवा चिकित्सक की भूमिका के लिए विशेष रूप से उपयुक्त बनाता है।।
स्वभाव में भावुकता तथा चिंता की प्रवृत्ति के कारण ये छोटी-छोटी बातों को लेकर भी मानसिक रूप से प्रभावित हो जाते हैं। जीवन के दैनिक संघर्षों को ये अक्सर अत्यधिक गंभीरता से लेते हैं। जिस कारण मन में निरंतर उथल-पुथल बनी रहती है। शत्रुओं अथवा प्रतिस्पर्धियों के साथ व्यवहार में भी ये भावनात्मक दृष्टिकोण ही अपनाते हैं। जिसके कारण कभी-कभी निर्णय क्षमता प्रभावित हो जाती है।।
इनका मन बार-बार परिवर्तित होता रहता है। जो चंद्रमा के स्वाभाविक गुण से जुड़ा हुआ है। और यही चंचलता कभी-कभी दैनिक कार्यों में भी असंतुलन उत्पन्न करती है। फिर भी इनकी सबसे बड़ी शक्ति यही है कि ये विपरीत परिस्थितियों में भी अपने भीतर के सेवा-भाव को जीवित रखते हैं। और यही गुण अंततः इन्हें समाज में विशेष सम्मान भी दिलाता है।।
शुभ चंद्रमा का षष्ठ भाव में फल।। Effects of an Auspicious Moon in the Sixth House.
मित्रों, यदि षष्ठ भाव का चंद्रमा शुक्ल पक्ष का हो, शुभ ग्रहों की दृष्टि से युक्त होकर बलवान हो, तो जातक को सेवा क्षेत्र, चिकित्सा अथवा जनसंपर्क से जुड़े कार्यों में विशेष सफलता प्राप्त होती है। ऐसे जातक जनसामान्य से भावनात्मक जुड़ाव के कारण लोकप्रियता भी अर्जित करते हैं। तथा इनके पास आने वाला हर व्यक्ति स्वयं को समझा हुआ तथा सम्मानित अनुभव करता है।।
शत्रुओं तथा प्रतिस्पर्धियों पर विजय प्राप्त करने की क्षमता भी बनी रहती है। तथा जातक कठिन परिस्थितियों में भी संयम बनाए रखता है। सेवा भाव के कारण जातक को समाज में सम्मान तथा जनसामान्य का स्नेह भी प्राप्त होता है। और अनेक बार यही सेवा-भाव जातक के लिए आजीविका का साधन भी बन जाता है। विशेषकर चिकित्सा, परामर्श अथवा समाज-सेवा जैसे क्षेत्रों में ऐसे लोग सफल हो जाते हैं।।
ऐसे जातकों में रोगों से लड़ने की मानसिक शक्ति भी विशेष रूप से प्रबल होती है। जिस कारण ये कठिन स्वास्थ्य चुनौतियों से भी शीघ्रता से उबर जाते हैं। शत्रुओं के प्रति भी इनका दृष्टिकोण बदले की भावना से रहित, बल्कि समझदारी तथा धैर्य से भरा होता है। जिससे किसी भी प्रकार के विवाद स्वतः ही समाप्त होने लगते हैं।।
अशुभ चंद्रमा का षष्ठ भाव में फल।। Effects of an Inauspicious Moon in the Sixth House.
मित्रों, यदि षष्ठ भाव का चंद्रमा कृष्ण पक्ष का, नीचस्थ, पापग्रहों से पीड़ित अथवा निर्बल हो, तो जातक को मानसिक तनाव, चिंता तथा अनावश्यक भय की प्रवृत्ति देखी जाती है। ऐसे जातकों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का बार-बार सामना करना पड़ता है। तथा इनका मन सदैव किसी न किसी आशंका से घिरा रहता है। भले ही उसके जीवन में वास्तविक धरातल पर स्थिति उतनी गंभीर हो या न हो।।
शत्रुओं से भावनात्मक रूप से प्रभावित होने की प्रवृत्ति के कारण जातक निर्णय लेने में कई बार असमर्थ होता है। ऋण संबंधी समस्याएँ तथा कार्यक्षेत्र में अस्थिरता भी कई बार उत्पन्न होती है। जिससे मानसिक अशांति कई बार और भी बढ़ जाती है। कई बार ऐसे जातक अपने ही मन की उथल-पुथल के कारण साधारण समस्याओं को भी असाधारण रूप से बड़ा मान बैठते हैं। जिससे तनाव और अधिक गहरा हो जाता है।।
ऐसी स्थिति में जातकों को चाहिए कि वे अपने मन को अनुशासित रखने का प्रयास करें। तथा भय एवं चिंता को अपने ऊपर हावी न होने दें। सेवा-भाव को बनाए रखना ही इस पीड़ा से मुक्ति का सबसे स्वाभाविक मार्ग बताया गया है। क्योंकि जब मन दूसरों की सहायता में लगा रहता है, तो स्वयं की चिंताएँ भी स्वतः ही कम होने लगती हैं।।
स्वास्थ्य प्रभाव।। Health Effects.
मित्रों, वैदिक ज्योतिष के अनुसार षष्ठ भाव का संबंध रोग तथा आंतरिक अंगों से भी माना गया है। और चंद्रमा का संबंध मन तथा शरीर के तरल पदार्थों से होता है। षष्ठ भाव में चंद्रमा यदि शुभ हो तो रोगों से लड़ने की मानसिक शक्ति बनी रहती है। तथा जातक की रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी सामान्य से अधिक देखी जाती है।।
इसके विपरीत यदि चंद्रमा अशुभ हो तो पाचन संबंधी विकार, मानसिक तनाव अथवा बार-बार बीमार पड़ने की स्थिति भी उत्पन्न होती है। ऐसे जातकों को नींद संबंधी अनियमितता अथवा भावनात्मक असंतुलन के कारण उत्पन्न होने वाली शारीरिक थकान का भी सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में सावधानी बरतने के साथ-साथ ज्योतिषीय उपाय जो चन्द्रमा के लिए बताये गए हैं, उन्हें अवश्य करना चाहिए।।
और यहाँ भी मैं यही कहूँगा कि ज्योतिषीय उपाय के साथ-साथ चिकित्सक की सलाह को कभी नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। दवा और दुआ दोनों साथ-साथ चलनी चाहिए। मानसिक स्वास्थ्य के प्रति भी विशेष सजगता आवश्यक है। क्योंकि चंद्रमा की पीड़ा प्रायः शारीरिक से अधिक मानसिक धरातल पर ही अपना प्रभाव दिखाती है।।
वैदिक उपाय।। Vedic Remedies.
मित्रों, षष्ठ भाव के चंद्रमा को शुभ अथवा बलवान बनाए रखने के लिए आप चंद्र देवता के मंत्र "ॐ सों सोमाय नमः" का श्रद्धापूर्वक अधिकाधिक जप करें। शिवजी की उपासना करें तथा सोमवार का व्रत करना भी अत्यन्त शुभ फलदायी माना गया है। क्योंकि भगवान शिव को स्वयं चंद्रमा को धारण करने वाला देवता माना गया है। इसलिए इनकी उपासना चंद्रमा की पीड़ा को शांत करने में विशेष रूप से सहायक सिद्ध होती है।।
एक विकल्प यह भी है, कि जरूरतमंदों की सेवा करना चाहिए तथा मन को शांत रखने हेतु नियमित ध्यान करना भी शुभ माना जाता है। यहाँ आप सफेद वस्तुओं का दान जैसे चावल अथवा दूध दान भी कर सकते हैं। इस षष्ठ भाव के चंद्रमा को संतुलित बनाने में यह भी अत्यन्त सहायक उपाय माना जाता है। तथा सोमवार के दिन यह दान विशेष रूप से फलदायी सिद्ध होता है।।
और मेरी सलाह तो यही रहेगी कि इन उपायों को केवल औपचारिकता के लिए नहीं, बल्कि पूर्ण श्रद्धा तथा निरंतरता के साथ करें। तभी इनका वास्तविक फल प्राप्त होता है। सेवा-कार्य को जीवन का नियमित अंग बना लेना भी इस छठे भाव में स्थित चन्द्रमा के लिए सबसे स्वाभाविक तथा प्रभावी उपाय माना गया है।।
शास्त्रीय प्रमाण।। Scriptural References.
मित्रों, बृहत्पाराशर होरा शास्त्र में चंद्रमा को मन, भावना तथा जनसामान्य से जुड़ाव का प्रमुख कारक ग्रह बताया गया है। फलदीपिका के अनुसार षष्ठ भाव को दुःस्थान मानते हुए यहाँ स्थित चंद्रमा जातक को मानसिक चुनौतियाँ देता है। परंतु सेवा के क्षेत्र में सफलता भी प्रदान करता है। विशेषकर जब चंद्रमा शुक्ल पक्ष का हो तब तो बहुत अधिक।।
बृहज्जातक में षष्ठस्थ चंद्रमा को सेवा तथा जनसंपर्क में सफलता का कारक माना गया है। इसी प्रकार जातक पारिजात में भी षष्ठ भाव के चंद्रमा को स्वास्थ्य तथा शत्रु दोनों पर प्रत्यक्ष प्रभाव डालने वाला ग्रह बताया गया है। तथा यह भी स्पष्ट किया गया है कि इसका अंतिम फलादेश षष्ठेश की स्थिति तथा संपूर्ण जन्मकुंडली के समन्वित अध्ययन के पश्चात ही निश्चित किया जाना चाहिए।।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न।। Frequently Asked Questions. (FAQ)
प्रश्न 1. षष्ठ भाव में चंद्रमा क्या फल देता है? Effects of Moon in 6th House.
उत्तर:- षष्ठ भाव का चंद्रमा सेवा के क्षेत्र में सफलता दिलाता है, जनसंपर्क क्षमता बढ़ता है तथा शत्रुओं पर विजय भी दिलाने जैसे शुभ फल भी प्रदान करता है। यद्यपि यह भाव चंद्रमा के लिए सामान्यतः चुनौतीपूर्ण ही माना जाता है।।
प्रश्न 2. षष्ठ भाव में अशुभ चंद्रमा क्या नुकसान देता है? Problems Caused by Malefic Moon in 6th House.
उत्तर:- षष्ठ भाव का अशुभ चंद्रमा मानसिक तनाव, चिंता, पाचन संबंधी विकार तथा बार-बार बीमार पड़ने जैसी बाधाएँ उत्पन्न करता है।।
प्रश्न 3. षष्ठ भाव के चंद्रमा से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएँ कौन-सी हैं? Health Issues Linked to Moon in 6th House.
उत्तर:- वैदिक ज्योतिष में षष्ठ भाव का संबंध रोग तथा आंतरिक अंगों से माना गया है। पीड़ित चंद्रमा पाचन तथा मानसिक तनाव संबंधी समस्याओं का संकेत देता है। ऐसे में ज्योतिषीय परामर्श के साथ-साथ डॉक्टर से इलाज भी करवाना चाहिए।।
प्रश्न 4. षष्ठ भाव के चंद्रमा को बलवान बनाने का सबसे प्रभावी वैदिक उपाय क्या है? Most Effective Remedy for Moon in 6th House.
उत्तर:- "ॐ सों सोमाय नमः" इस मंत्र का जप, शिवजी की उपासना, सोमवार का व्रत तथा जरूरतमंदों की सेवा ज्योतिषीय दृष्टिकोण से सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है।।
प्रश्न 5. क्या षष्ठ भाव का चंद्रमा सेवा क्षेत्र में सफलता दिलाता है? Does Moon in 6th House Help in Service Sector Career.
उत्तर:- हाँ, षष्ठ भाव का चंद्रमा जातक को सेवाभावी स्वभाव प्रदान करता है। जिससे चिकित्सा, परामर्श अथवा जनसंपर्क जैसे सेवा के क्षेत्रों में सफलता की प्रबल संभावना बनती है।।
लेख का निष्कर्ष।। Conclusion.
मित्रों, कुंडली के षष्ठ भाव में स्थित चंद्रमा जातक को सेवा भाव, जनसंपर्क क्षमता तथा शत्रुओं पर विजय प्रदान करता है। वहीं पीड़ित होने पर मानसिक तनाव तथा पाचन संबंधी विकार जैसी चुनौतियाँ भी उत्पन्न करता है। यह छठे भाव और चन्द्र ग्रह का संयोग हमें यह सिखाता है कि कोमलता तथा संघर्ष का मेल भी जीवन में एक विशेष तथा सार्थक दिशा प्रदान कर सकता है। बशर्ते जातक अपने मन को अनुशासित रखना सीख ले।।
वैदिक ज्योतिष के अनुसार चंद्र देवता के मंत्र का जप, भगवान शिव की उपासना, सोमवार का व्रत तथा सेवा भाव इसे संतुलित एवं बलवान बनाने में सहायक माना गया है। और यहाँ मैं यही कहूँगा कि सेवा भाव को अपने स्वभाव का ही एक अंग बना लेना चाहिए। क्योंकि यही इस भाव की स्थिति का सबसे बड़ा उपाय भी है और सबसे बड़ा गुण भी।।
जो जातक अपने भीतर की इस करुणा को पहचान लेता है, वह अपनी सबसे बड़ी चुनौती को ही अपनी सबसे बड़ी शक्ति में बदल लेता है। परन्तु मेरी आपको यही सलाह है कि किसी भी विशेष उपाय अथवा निर्णायक निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले किसी विद्वान, योग्य, अनुभवी वैदिक ज्योतिषी से अपनी संपूर्ण जन्मकुंडली का विश्लेषण विधिपूर्वक अवश्य करवाना चाहिए। ताकि सही एवं व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्राप्त हो सके।।
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