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आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 23 अगस्त 2026 दिन रविवार।।
मित्रों, तारीख 23 अगस्त 2026 दिन रविवार को श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है। अर्थात आज श्रावण पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जाएगा। यह एकादशी विशेष रूप से संतान-सुख, संतान की उन्नति और परिवार की खुशहाली के लिए की जाती है। इस एकादशी को कुछ लोग वैष्णवों की एकादशी के नाम पर कल अर्थात सोमवार को भी रखेंगे। क्योंकि पञ्चांग में सोमवार को वैष्णवों की एकादशी व्रत लिखा है, परन्तु एकादशी तिथि नाम मात्र के लिए भी सोमवार को नहीं है। झूलनयात्रा भी आज ही है। आज दिखनेवाले अगस्त्य तारा का उदय हो जायेगा। आज सर्वार्थसिद्धियोग भी है। शास्त्रानुसार इस एकादशी को श्रावण पुत्रदा एकादशी कहा जाता है। आप सभी सनातनियों को "श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत" की हार्दिक शुभकामनायें एवं मंगलकामनाएँ है।।
हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी), आज के योग और आज के करण। आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातकों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव ही सर्वश्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो। ऐसी मेरी आप सभी आज के अधिष्ठात्री देवों से हार्दिक प्रार्थना है।।
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वैदिक सनातन हिन्दू पञ्चांग, Vedic Sanatan Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi), 2:- वार (Day), 3:- नक्षत्र (Nakshatra), 4:- योग (Yog) और 5:- करण (Karan).
पञ्चांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग का श्रवण करते थे। शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन-श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पञ्चांग को देखना, पढ़ना एवं सुनना चाहिए।।
आज का पञ्चांग 23 अगस्त 2026 दिन रविवार।।
Aaj ka Panchang 23 August 2026.
विक्रम संवत् - 2083.
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर - सिद्धार्थ.
शक - 1948.
अयन – याम्यायनम्.
गोल - सौम्य.
ऋतु – वर्षा.
मास - श्रावण.
पक्ष - शुक्ल.
गुजराती पंचांग के अनुसार – श्रावण शुक्ल पक्ष.
#Panchang_23_August_2026
तिथि - दशमी 02:01 AM बजे तक उपरान्त एकादशी तिथि है।।
नक्षत्र - मूल 17:45 PM तक उपरान्त पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र है।।
योग - विष्कुम्भ 06:15 AM तक उपरान्त प्रीति योग है।।
करण - गर 02:01 AM तक उपरान्त वणिज 15:11 PM तक उपरान्त विष्टि करण है।।
चन्द्रमा - धनु राशि पर।।
सूर्य – सिंह राशि एवं मघा नक्षत्र पर गोचर कर रहे हैं।।
मुम्बई सूर्योदय - प्रातः 06:21:17
मुम्बई सूर्यास्त - सायं 18:59:48
वाराणसी सूर्योदय - प्रातः 05:37:40
वाराणसी सूर्यास्त - सायं 18:23:52
राहुकाल (अशुभ) - सायं 17:26 बजे से 19:01 बजे तक।।
विजय (शुभ) मुहूर्त - दोपहर 12.29 PM से 12.53 बजे तक।।
#Panchang_23_August_2026
मित्रों, तारीख 23 अगस्त 2026 दिन रविवार को श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है। अर्थात आज श्रावण पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जाएगा। यह एकादशी विशेष रूप से संतान-सुख, संतान की उन्नति और परिवार की खुशहाली के लिए की जाती है। इस एकादशी को कुछ लोग वैष्णवों की एकादशी के नाम पर कल अर्थात सोमवार को भी रखेंगे। क्योंकि पञ्चांग में सोमवार को वैष्णवों की एकादशी व्रत लिखा है, परन्तु एकादशी तिथि नाम मात्र के लिए भी सोमवार को नहीं है। झूलनयात्रा भी आज ही है। आज दिखनेवाले अगस्त्य तारा का उदय हो जायेगा। आज सर्वार्थसिद्धियोग भी है। शास्त्रानुसार इस एकादशी को श्रावण पुत्रदा एकादशी कहा जाता है। आप सभी सनातनियों को "श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत" की हार्दिक शुभकामनायें एवं मंगलकामनाएँ है।।
एकादशी तिथि विशेष - एकादशी तिथि को चावल एवं दाल नहीं खाना चाहिये। चावल खाना इस एकादशी तिथि में त्याज्य बताया गया है। एकादशी को चावल न खाने अथवा रोटी खाने से व्रत का आधा फल सहज ही प्राप्त हो जाता है। एकादशी तिथि एक आनन्द प्रदायिनी और शुभफलदायिनी तिथि मानी जाती है। एकादशी को सूर्योदय से पहले स्नान के जल में आँवला या आँवले का रस डालकर स्नान करना चाहिये। ऐसा करने से पुण्यों कि वृद्धि, पापों का क्षय एवं भगवान नारायण के कृपा कि प्राप्ति होती है।।
एकादशी तिथि के देवता विश्वदेवताओं को बताया गया है। यह एकादशी तिथि नन्दा नाम से विख्यात मानी गयी है। यह एकादशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। एकादशी तिथि एक आनंद प्रदायिनी और शुभ फलदायी तिथि मानी जाती है। इसलिये आज दक्षिणावर्ती शंख के जल से भगवान नारायण का पुरुषसूक्त से अभिषेक करने से माँ लक्ष्मी प्रशन्न होती है एवं नारायण कि भी पूर्ण कृपा प्राप्त होती है।।
एकादशी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है वो धार्मिक तथा सौभाग्यशाली होता है। मन, बुद्धि और हृदय से ऐसे लोग पवित्र होते हैं। इनकी बुद्धि तीक्ष्ण होती और लोगों में बुद्धिमानी के लिए जाने जाते है। इनकी संतान गुणवान और अच्छे संस्कारों वाली होती है, इन्हें अपने बच्चों से सुख एवं सहयोग भी प्राप्त होता है। समाज के प्रतिष्ठित लोगों से इन्हें मान सम्मान मिलता है।।
श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत कथा एवं पूजा विधि:: Read more.
एकादशी व्रत विधि एवं कामहात्म्य कथा:: Read more.
#Panchang_23_August_2026
वैदिक सनातन धर्म में एकादशी तिथि बहुत ही पुण्य फलदायी तिथि मानी जाती है। प्रत्येक मास में एकादशी तिथि दो बार आती है। इसके अनुसार प्रत्येक वर्ष में 24 एकादशी तिथियां आती हैं। लेकिन अधिक मास की एकादशियों के साथ इनकी संख्या 26 हो जाती है। वैदिक पञ्चांग की ग्यारहवीं तिथि एकादशी कहलाती है। इस तिथि का नाम ग्यारस या ग्यास भी है। यह तिथि चंद्रमा की ग्यारहवीं कला है, इस कला में अमृत का पान उमा देवी करती हैं।।
एकादशी तिथि का निर्माण शुक्ल पक्ष में तब होता है जब सूर्य और चंद्रमा का अंतर 121 डिग्री से 132 डिग्री तक होता है। वहीं कृष्ण पक्ष में एकादशी तिथि का निर्माण सूर्य और चंद्रमा का अंतर 301 से 312 डिग्री तक होता है। एकादशी तिथि के स्वामी विश्वेदेवा को माना गया है। संतान, धन-धान्य और घर की प्राप्ति के लिए इस तिथि में जन्मे जातकों को विश्वेदेवा की पूजा अवश्य करनी चाहिए।।
यदि एकादशी तिथि रविवार और मंगलवार को पड़ती है तो मृत्युदा योग बनाती है। इस योग में शुभ कार्य करना वर्जित है। इसके अलावा एकादशी तिथि शुक्रवार को होती है तो सिद्धा कहलाती है। ऐसे समय में किसी भी कार्य की सिद्धि प्राप्ति का योग निर्मित होता है। यदि किसी भी पक्ष में एकादशी सोमवार के दिन पड़ती है तो क्रकच योग बनाती है, जो अशुभ होता है। इसमें शुभ कार्य निषिद्ध बताये गये हैं। एकादशी तिथि नंदा तिथियों की श्रेणी में आती है। वहीं किसी भी पक्ष की एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा करना शुभ माना जाता है।।
#Panchang_23_August_2026
मूल नक्षत्र के जातकों का गुण एवं स्वभाव:- यदि आपका जन्म मूल नक्षत्र में हुआ है तो आपका जीवन सुख समृद्धि के साथ बीतेगा। धन की कमी आपको कभी नहीं आएगी और आप अपने कार्यों द्वारा अपने परिवार का नाम और सम्मान और बढ़ाएंगे। आप कोमल हृदयी परन्तु अस्थिर दिमाग के व्यक्ति होंगे। कभी आप बहुत दयालु और कभी अत्यधिक नुक्सान पहुंचाने वाले होते है।।
ऐश्वर्य पूर्ण जीवन के कारण आपका उठना बैठना समाज के धनि एवं उच्च वर्ग के व्यक्तियों के साथ ही होता है। इस कारण आपके व्यक्तित्व में घमंड आना स्वाभाविक ही है। आपका व्यवहार बहुत ही अनिश्चित होता है। समय और स्थान के साथ ये परिवर्तित भी हो जाता है। अपनी आकर्षक आँखों और सम्मोहक व्यक्तित्व के कारण आप अनायास ही लोगों के आकर्षण का केंद्र बन जाते हैं।।
आप शांतिप्रिय और एक सकारात्मक सोच वाले व्यक्ति होंगे। जो भविष्य की चिंता छोड़ केवल आज में जीना पसंद करते हैं। मूल नक्षत्र में जन्मे जातक सिद्धांतों और नैतिकता में बहुत अधिक विश्वास करते हैं। परन्तु अपनी अस्थिर सोच के कारण कभी-कभी आपके व्यवहार को समझना बेहद कठिन हो जाता है। आपमें गंभीरता की कमी होगी परन्तु ईश्वर पर आपका विश्वास अटूट होगा।।
मूल नक्षत्र के जातक अपने कार्य के प्रति मेहनती और निष्ठावान होतें हैं। ऐसे लोग अधिकतर कला, लेखन, प्रशासनिक, मेडिकल या हर्बल क्षेत्र में सफल माने जाते हैं। आप एक प्रभावशाली, बुद्धिमान और नेतृत्व के गुणों से भरपूर व्यक्ति होंगे। इसलिए यदि आप सामाजिक या राजनीतिक क्षेत्रों में भाग्य अजमाए तो आप शीघ्र ही उच्चस्थ पद प्राप्त कर सकते हैं।।
अपनी अस्थिर सोच के कारण जीवन में कई बार आप अपने कार्यक्षेत्र बदलते हैं। आप एक अच्छे वित्तीय सलाहकार होते हैं परन्तु केवल दूसरों के लिए। आप बिना सोचे समझे धन खर्च करने वालों में से हैं। इसलिए जीवन में कई बार आपको आर्थिक संकट से सामना करना पड़ सकता है। आपको विदेश में कार्य का प्रस्ताव कभी ठुकराना नहीं चाहिए। क्योंकि विदेश में आपका भाग्योदय निश्चित है।।
मूल नक्षत्र में जन्मे जातकों के जीवन के शरुआती वर्षों में पिता या भाई-बहन का सहयोग ना के बराबर मिलने के कारण स्वयं संघर्ष कर जीवन में सफल होते हैं। मूल नक्षत्र के जातकों का दांपत्य जीवन बेहद सुखमय एवं संतोषजनक होता है। आपकी पत्नी के कारण आप जीवन में शांति और आनंद का अनुभव करते हैं। मूल नक्षत्र की जातिका सामान्य से अधिक लम्बी कद वाली होती हैं। यह अच्छे और बुरे कार्यों में भेद नहीं करती इसलिए पाप कर्मों में रूचि लेने लगती हैं।।
मूल नक्षत्र में जन्मे जातकों की पहचान किसी को मूर्ख बना कर घमंड करना होता है। परन्तु इन्हें कमर और कुल्हे का दर्द, टी बी और लकवा जैसी बिमारियों से परेशानी का योग बनते रहता है।।
प्रथम चरण:- मूल नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी मंगल होता है। इस नक्षत्र चरण का स्वामी मंगल की गुरु एवं केतु से शत्रुता के कारण इस नक्षत्र चरण में जन्मा जातक जीवन भर भौतिक सुखों की प्राप्ति हेतु संघर्षरत रहता है। लग्नबली न होने के कारण जातक का विकास रुका हुआ रहेगा परन्तु सूर्य की दशा अच्छी जाएगी।।
द्वितीय चरण:- मूल नक्षत्र के द्वितीय चरण का स्वामी शुक्र होता है। लग्नेश गुरु की नक्षत्र स्वामी केतु से शत्रुता है। परन्तु नक्षत्र चरण का स्वामी शुक्र की केतु से मित्रता के कारण जातक में त्याग अथवा दान की प्रवृत्ति अधिक होगी। सूर्य की दशा में जातक का भाग्योदय होता है। शुक्र की दशा भी ख़राब नहीं जाएगी और केतु की दशा शुभ फल देगी।।
तृतीय चरण:- मूल नक्षत्र के तृतीय चरण का स्वामी बुध होता है। मूल नक्षत्र के तीसरे चरण में जन्म लेने वाले जातक के अधिक मित्र होंगे एवं सभी सुयोग्य होंगे। लग्नेश गुरु की दशा अति उत्तम फल देगी। सूर्य की दशा में जातक का भाग्योदय होगा। केतु एवं बुध की दशाएं भी शुभ फल ही देंगी।।
चतुर्थ चरण:- मूल नक्षत्र के चतुर्थ चरण का स्वामी चन्द्र होता है। लग्नेश गुरु और चन्द्रमा की मित्रता के कारण मूल नक्षत्र के चौथे चरण में जन्म लेने वाला जातक राजा के समान सम्मान एवं ऐश्वर्य प्राप्त करता है। लग्नेश गुरु की दशा अति उत्तम फल देगी। सूर्य की दशा में जातक का भाग्योदय होगा। शुक्र की दशा भी ख़राब नहीं जाएगी।।
#Panchang_23_August_2026
मित्रों, आज रविवार को सुबह भगवान सूर्य को ताम्बे के एक लोटे में लाल चन्दन, गुड़ और लाल फुल मिलाकर अर्घ्य इस मन्त्र से प्रदान करें। अथ मन्त्रः- एही सूर्य सहस्रांशो तेजो राशे जगत्पते। अनुकम्प्य मां भक्त्या गृहाणार्घ्य दिवाकर।। अथवा गायत्री मन्त्र से भी सूर्यार्घ्य दे सकते हैं।।
इसके बाद आदित्यह्रदयस्तोत्रम् का पाठ करना चाहिये। भोजन में मीठा भोजन करना चाहिये नमक का परित्याग करना अत्यन्त श्रेयस्कर होता है। इस प्रकार से किया गया रविवार का पूजन आपको समाज में सर्वोच्च प्रतिष्ठा एवं अतुलनीय धन प्रदान करता है। क्योंकि सूर्य धन और प्रतिष्ठा का कारक ग्रह है।।
दिशाशूल - रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।।
रविवार का विशेष - रविवार के दिन तेल मर्दन करने से ज्वर (बुखार लगता) होता हैं - (मुहूर्तगणपति)।।
रविवार को क्षौरकर्म (बाल, दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से बुद्धि और धर्म की हानि होती है। (महाभारत अनुशासनपर्व)।।
विशेष जानकारी - मित्रों, रविवार के दिन, चतुर्दशी एवं अमावस्या तिथियों में तथा श्राद्ध एवं व्रत के दिन स्त्री सहवास नहीं करना चाहिये। साथ ही तिल का तेल, लाल रंग का साग तथा कांसे के पात्र में भोजन करना भी शास्त्रानुसार मना है अर्थात ये सब नहीं करना चाहिये।।
#Panchang_23_August_2026
रविवार ध्रुव प्रकृति का दिन माना जाता है। रविवार भगवान सूर्य का दिन होता है। यह भगवान विष्णु का दिन भी माना जाता है। वैदिक सनातन धर्म में इसे सर्वश्रेष्ठ वार माना गया है। अच्छा स्वास्थ्य व तेजस्विता पाने के लिए रविवार के दिन उपवास रखना चाहिए। प्रचलन से सप्ताह का पहला वार सोमवार को माना जाता है क्योंकि रविवार को छुट्टी का नाम घोषित है। परंतु सही मायने में तो रविवार सप्ताह का प्रथम वार ही है। परंतु रविवार को कुछ ऐसे कार्य जिसे यदि आप करते हैं तो इससे आपन नुकसान उठाना पड़ सकता है।।
रविवार के दिन पश्चिम और वायव्य दिशा में यात्रा न करें। इन दिशाओं में यात्रा करना जरूरी हो तो रविवार को दलिया, घी या पान खाकर या इससे पहले पांच कदम पीछे चलकर ही इस दिशा में जाएं क्योंकि इस दिन खासकर पश्चिरम में दिशा का शूल माना जाता है। रविवार को तांबे से निर्मित चीजों को बेचने से बचना चाहिए। तांबे के अलावा सूर्य से संबंधित अन्य धातु या वस्तुएं भी ना बेचें।।
रविवार के दिन नीले, काले, कत्थई और ग्रे कलर के कपड़े नहीं पहनना चाहिए। काले या नीले से मिलते जुलते कपड़े तो कदापि ना पहनें। रविवार को नमक नहीं खाना चाहिए। इससे स्वास्थ्य पर असर पड़ता है और हर कार्य में बाधा आती है। खास कर सूर्यास्त के बाद तो नमक बिलकुल भी नहीं खाना चाहिए।।
रविवार को दिन में सहवास करना और मांस एवं मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन शनि से संबंधित पदार्थों का सेवन भी नहीं करना चाहिए। आमतौर पर लोग रविवार को ही बाल कटाते हैं परंतु इस दिन बाल कटाने से सूर्य कमजोर होता है। इस दिन शरीर में तेल मालिश भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि यह सूर्य का दिन होता है और तेल शनि का होता है।।
Panchang 23 August 2026
मित्रों, रविवार सप्ताह का प्रथम दिन होता है, इसके अधिष्ठात्री देव सूर्य को माना जाता है। इस दिन जिस व्यक्ति का जन्म होता है वह व्यक्ति तेजस्वी, गर्वीले और पित्त प्रकृति के होते है। इनके स्वभाव में क्रोध और ओज भरा होता है तथा ये चतुर और गुणवान होते हैं। इस दिन जन्म लेनेवाले जातक उत्साही और दानी होते हैं तथा संघर्ष की स्थिति में भी पूरी ताकत से काम करते हैं।।
रविवार को जन्म लेनेवाले जातक सुन्दर एवं गेंहूए रंग के होते हैं। इनमें तेजस्विता का गुण स्वाभाविक ही होता है। महत्वाकांक्षी होने के साथ ही प्रत्येक कार्य में जल्दबाजी करते है और सफल भी होते हैं। उत्साह इनमें कूट-कूट कर भरा होता है तथा ये परिश्रम से कभी भी घबराते नहीं हैं। ये हर कार्य में रूचि लेने वाले होते हैं परन्तु ये लोग समय के पाबंद नहीं होते। ये जातक अपना करियर किसी भी क्षेत्र में अपने कठिन परिश्रम से बनाने की क्षमता रखते हैं। इनका शुभ दिन रविवार तथा शुभ अंक 7 होता है।।
आज का सुविचार - मित्रों, गलती कबूल़ करने और गुनाह छोङने में कभी देर ना करना। क्योंकि सफर जितना लंबा होगा वापसी उतनी ही मुशिकल हो जाती हैं। दुनिया में सिर्फ माँ-बाप ही ऐसे हैं जो बिना किसी स्वार्थ के प्यार करते हैं। कोई देख ना सका उसकी बेबसी जो सांसें बेच रहा हैं गुब्बारों में डालकर।।
Panchang 23 August 2026
सूर्य की महादशा में मंगल विजय और बुध कुष्ठ रोग देता है।।.... आज के इस पुरे लेख को पढ़ने के लिये इस लिंक को क्लिक करें.... वेबसाईट पर पढ़ें: & ब्लॉग पर पढ़ें:
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