शनिदेव इंजीनियर और चार्टर्ड एकाउंटेंट बनाते हैं।।

Swami Ji Maharaj
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शनिदेव इंजीनियर और चार्टर्ड एकाउंटेंट बनाते हैं।। Shani Engineer And Accountant Banate Hain.

शनिदेव इंजीनियर और चार्टर्ड एकाउंटेंट बनाते हैं।। Shani Engineer And Accountant Banate Hain


शनि देव और तकनीकी-गणनात्मक क्षेत्रों का संबंध।। Introduction.


मित्रों, वैदिक ज्योतिष में शनि देव को न्याय, अनुशासन, धैर्य, कठोर परिश्रम तथा दीर्घकालिक परिणाम का देवता माना गया है। शनि देव को कर्मफलदाता भी कहा जाता है। अर्थात व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार ही फल प्रदान करने वाला ग्रह। यह देवता किसी भी प्रकार का शॉर्टकट अथवा जल्दबाजी में मिलने वाली सफलता पसंद नहीं करते। बल्कि निरंतर परिश्रम, धैर्य तथा नियमों के पालन से प्राप्त होने वाली सफलता को ही शुभ मानते हैं।।


अब इंजीनियरिंग तथा चार्टर्ड एकाउंटेंसी जैसे व्यवसायों की प्रकृति पर विचार करें, तो ये दोनों ही क्षेत्र संरचना, गणना, तकनीकी सूक्ष्मता तथा नियमों के कठोर पालन पर आधारित होते हैं। एक इंजीनियर को भवन, यंत्र अथवा संरचना बनाते समय प्रत्येक माप तथा गणना में अत्यंत सटीकता बरतनी पड़ती है। जबकि एक चार्टर्ड एकाउंटेंट को अंकों, नियमों तथा वित्तीय अनुशासन के जटिल जाल में निरंतर सटीकता बनाए रखनी होती है। यही कारण है कि इन दोनों ही व्यवसायों की आत्मा शनि देव के गुणों से पूर्णतः मेल खाती है।।


मित्रों, शनिदेव को धातु, लोहा, निर्माण-कार्य, भूमि तथा संरचनात्मक विषयों का भी कारक ग्रह माना गया है। जिस कारण इंजीनियरिंग क्षेत्र, विशेषकर सिविल तथा मैकेनिकल इंजीनियरिंग, शनि से गहरा संबंध रखता है। इसी प्रकार शनि देव अंकगणित, हिसाब-किताब तथा दीर्घकालिक योजना के भी कारक ग्रह माने जाते हैं। जिससे चार्टर्ड एकाउंटेंसी जैसा अत्यंत अनुशासित तथा नियम-आधारित व्यवसाय भी शनि की कृपा से विशेष रूप से फलित होता है।।


यदि किसी जातक की कुंडली में शनिदेव बलवान, शुभ स्थिति में अथवा शुभ ग्रहों की दृष्टि से युक्त हों, तो जातक को इन अनुशासित तथा तकनीकी क्षेत्रों में असाधारण सफलता प्राप्त होती है। परन्तु वास्तविक फल का निर्णय तो सदैव संपूर्ण जन्मकुंडली, ग्रहों की दशा तथा योगों के आधार पर ही किया जाता है।।


इंजीनियर बनने के लिए आवश्यक शनि योग।। Shani Yogas Required to Become an Engineer.


मित्रों, ज्योतिष शास्त्र में इंजीनियरिंग क्षेत्र में सफलता के लिए शनि देव के साथ-साथ मंगल, बुध तथा दशम भाव की स्थिति का भी विशेष महत्व माना गया है। यदि शनि दशम भाव में स्थित होकर मंगल से युक्त अथवा दृष्ट हो, तो यह जातक को तकनीकी तथा निर्माण-संबंधी क्षेत्रों में विशेष योग्यता प्रदान करता है। क्योंकि मंगल साहस तथा यांत्रिक कुशलता का कारक है। जबकि शनि अनुशासन तथा संरचनात्मक सोच का।।


यदि शनि पृथ्वी तत्व की राशियों, अर्थात वृषभ, कन्या अथवा मकर राशि में स्थित हों, तो यह स्थिति भी इंजीनियरिंग जैसे स्थायी तथा संरचनात्मक व्यवसायों के लिए विशेष रूप से अनुकूल मानी जाती है। ऐसे जातकों में स्वाभाविक रूप से धैर्य, तकनीकी सूझबूझ तथा जटिल समस्याओं को व्यवस्थित ढंग से सुलझाने की क्षमता पाई जाती है। जिससे ये इंजीनियरिंग की पढ़ाई तथा व्यवसाय दोनों में ही सहजता से सफल होते हैं।।


शनि की महादशा अथवा अंतर्दशा में यदि जातक तकनीकी शिक्षा प्राप्त करता है, तो शनि देव की यह अवधि उसे विशेष रूप से अनुकूल परिणाम प्रदान करती है। क्योंकि इसी अवधि में शनि से जुड़े व्यवसायों में प्रवेश तथा सफलता का सर्वाधिक योग बनता है।।


चार्टर्ड एकाउंटेंट बनने के लिए आवश्यक शनि योग।। Shani Yogas Required to Become a Chartered Accountant.


मित्रों, चार्टर्ड एकाउंटेंसी जैसे अंकों तथा नियमों पर आधारित व्यवसाय में सफलता के लिए शनिदेव के साथ-साथ बुध की स्थिति भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। यदि शनि तथा बुध की युति अथवा परस्पर दृष्टि संबंध बने, तो यह योग जातक को अंकगणित, विश्लेषण तथा वित्तीय नियमों की गहन समझ प्रदान करता है। क्योंकि बुध ग्रह को बुद्धि तथा गणना का कारक माना गया है। जबकि शनि अनुशासन तथा दीर्घकालिक स्थिरता का।।


यदि शनि द्वितीय भाव अर्थात धन भाव अथवा दशम भाव अर्थात कर्म भाव में बलवान होकर स्थित हों, तो यह स्थिति भी जातक को वित्तीय क्षेत्र में विशेष सफलता दिलाने में सहायक सिद्ध होती है। ऐसे जातकों में स्वाभाविक रूप से संयम, सत्यनिष्ठा तथा नियमों के प्रति गहरी निष्ठा पाई जाती है। जो एक सफल चार्टर्ड एकाउंटेंट के लिए अनिवार्य गुण माने जाते हैं।।


शनि की साढ़ेसाती अथवा ढैय्या के दौरान भी अनेक जातकों को चार्टर्ड एकाउंटेंसी जैसी कठिन परीक्षाओं में सफलता प्राप्त होते देखा गया है। क्योंकि यह अवधि जातक के भीतर असाधारण धैर्य, अनुशासन तथा दीर्घकालिक परिश्रम की क्षमता विकसित करती है। जो इस क्षेत्र की सबसे बड़ी आवश्यकता भी होती है। ऐसा कई पूर्वाचार्यों के द्वारा कई बार स्वीकार भी किया गया है।।


शनिदेव के अशुभ होने पर इन क्षेत्रों में आने वाली बाधाएँ।। Challenges When Shani is Inauspicious.


मित्रों, यदि शनिदेव पीड़ित, नीचस्थ अथवा पापग्रहों से युक्त हों, तो जातक को इंजीनियरिंग अथवा चार्टर्ड एकाउंटेंसी जैसी परीक्षाओं में बार-बार असफलता, अध्ययन में एकाग्रता की कमी अथवा तकनीकी विषयों के प्रति अरुचि का सामना करना पड़ता है। ऐसे जातकों को अपनी पढ़ाई पूर्ण करने में अपेक्षा से अधिक समय भी लग जाता है। क्योंकि पीड़ित शनि विलंब का भी कारक माना जाता है।।


परन्तु यह ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है कि शनि देव विलंब अवश्य कर सकते हैं। परन्तु न्यायप्रिय होने के कारण सच्चे परिश्रम को अंततः सफलता से वंचित नहीं रखते। ऐसे जातकों को धैर्य न खोकर निरंतर अभ्यास तथा अनुशासन बनाए रखना चाहिए। क्योंकि शनि की यह परीक्षा ही अंततः उन्हें अधिक सुदृढ़ तथा योग्य बनाती है।।


शनि देव को प्रसन्न करने के वैदिक उपाय।। Vedic Remedies to Please Shani Dev.


मित्रों, तकनीकी अथवा वित्तीय क्षेत्र में सफलता हेतु शनि देव को प्रसन्न रखने के लिए शनिदेव के मंत्र "ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः" का नियमित जप करना चाहिए। शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिए तथा हनुमान जी की उपासना करना भी विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है। क्योंकि हनुमान जी की भक्ति से शनि देव की पीड़ा शांत होती है।।


शनिवार के दिन काले तिल, सरसों का तेल, लोहा अथवा काले वस्त्र का दान करना भी शनिदेव को प्रसन्न करने का प्रभावी उपाय माना जाता है। श्रमिकों, वृद्धजनों तथा असहायों की सेवा करना भी शनि देव की कृपा प्राप्त करने का सबसे सरल तथा सशक्त मार्ग माना गया है। क्योंकि शनि देव को न्याय तथा सेवा का देवता कहा जाता है।।


और मेरी सलाह तो यही रहेगी कि इंजीनियरिंग अथवा चार्टर्ड एकाउंटेंसी जैसी कठिन पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों को अनुशासन, समय-पालन तथा निरंतर अभ्यास को अपने जीवन का अभिन्न अंग बना लेना चाहिए। क्योंकि यही आचरण शनि देव के शुभ प्रभाव को कई गुना बढ़ा देता है। और कठिन संघर्षों के उपरान्त अंततः परिणाम बेहतर से भी अच्छा मिलता है।।


शास्त्रीय प्रमाण।। Scriptural References.


मित्रों, बृहत्पाराशर होरा शास्त्र में शनि को धैर्य, अनुशासन तथा दीर्घकालिक परिश्रम का प्रमुख कारक ग्रह बताया गया है। फलदीपिका के अनुसार दशम भाव में स्थित बलवान शनि जातक को तकनीकी तथा संरचनात्मक क्षेत्रों में विशेष सफलता प्रदान करता है। विशेषकर जब यह मंगल अथवा बुध से शुभ संबंध बनाए।।


परंपरागत ज्योतिष ग्रंथों में यह भी उल्लेख मिलता है कि शनि तथा बुध के शुभ संबंध से बना योग जातक को गणना, विश्लेषण तथा वित्तीय अनुशासन में विशेष दक्षता प्रदान करता है। वैसे इस विषय का अंतिम फलादेश तो संपूर्ण जन्मकुंडली, ग्रह-बल तथा दशा के समन्वित अध्ययन के पश्चात ही निश्चित किया जाना चाहिए।।


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न।। Frequently Asked Questions. (FAQ)


प्रश्न 1. शनि देव इंजीनियरिंग क्षेत्र में सफलता क्यों दिलाते हैं।। Why does Shani Dev bring success in the field of engineering.


उत्तर:- शनि देव संरचना, धातु, अनुशासन तथा तकनीकी सूक्ष्मता के कारक ग्रह माने जाते हैं। इसलिए इंजीनियरिंग जैसे संरचनात्मक तथा तकनीकी व्यवसायों में शनि की कृपा विशेष रूप से फलदायी सिद्ध होती है।।


प्रश्न 2. चार्टर्ड एकाउंटेंसी में सफलता के लिए कौन-सा शनि योग आवश्यक है।। Which Shani yoga is necessary for success in chartered accountancy.


उत्तर:- शनि तथा बुध की शुभ युति अथवा दृष्टि संबंध चार्टर्ड एकाउंटेंसी जैसे अंकों तथा नियमों पर आधारित व्यवसाय में सफलता के लिए विशेष रूप से अनुकूल माना जाता है।।


प्रश्न 3. यदि शनि अशुभ हो तो इन क्षेत्रों में क्या बाधाएँ आती हैं।। What obstacles arise in these fields if Shani is inauspicious.


उत्तर:- पीड़ित शनि परीक्षाओं में बार-बार असफलता, पढ़ाई में विलंब अथवा एकाग्रता की कमी जैसी बाधाएँ उत्पन्न करता है। परन्तु मेरा मानना है, कि सच्चे परिश्रम को शनि देव अंततः सफलता से वंचित नहीं रखते।।


प्रश्न 4. शनि देव को प्रसन्न करने का सबसे प्रभावी उपाय क्या है।। What is the most effective remedy to please Shani Dev.


उत्तर:- शनिदेव के मंत्र का जप, शनिवार को पीपल के नीचे दीपक जलाना। हनुमान जी की उपासना तथा वृद्धजनों और असहायों की सेवा करना ज्योतिषीय दृष्टिकोण से सबसे प्रभावी उपाय माने जाते हैं।।


प्रश्न 5. क्या शनि की साढ़ेसाती में भी करियर में सफलता संभव है।। Is career success possible even during Shani's Sade Sati.


उत्तर:- हाँ, साढ़ेसाती की अवधि जातक में असाधारण धैर्य तथा अनुशासन विकसित करती है। जिस कारण अनेक जातक इसी अवधि में कठिन परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करते देखे गए हैं।।


लेख का निष्कर्ष।। Conclusion.


मित्रों, शनिदेव यदि किसी जातक पर मेहरबान हों, तो वे उसे इंजीनियरिंग तथा चार्टर्ड एकाउंटेंसी जैसे अनुशासित, तकनीकी तथा गणनात्मक क्षेत्रों में असाधारण सफलता प्रदान करते हैं। क्योंकि इन दोनों ही व्यवसायों की मूल आत्मा शनि देव के धैर्य, अनुशासन तथा सटीकता के गुणों से पूर्णतः मेल खाती है। यह संबंध हमें सिखाता है कि शनि देव जिस क्षेत्र में भी अपनी कृपा बरसाते हैं। वहाँ किसी प्रकार का कोई भी शॉर्टकट नहीं होता। बल्कि निरंतर तथा ईमानदार परिश्रम की ही प्रधानता होती है।।


वैदिक परंपरा के अनुसार शनिदेव के मंत्र का जप, शनिवार का व्रत, शनि से सम्बंधित दान तथा सेवा-भाव इस दिशा में विशेष रूप से सहायक माने गए हैं। इसके साथ ही विद्यार्थियों को अपने अध्ययन में अनुशासन, धैर्य तथा निरंतरता बनाए रखनी चाहिए। क्योंकि यही आचरण शनि देव की कृपा को आकर्षित करने का सबसे स्वाभाविक तथा स्थायी मार्ग है।।


परन्तु किसी भी जातक को अपने करियर संबंधी निर्णय लेने से पहले किसी अनुभवी, विद्वान तथा योग्य वैदिक ज्योतिषी से अपनी संपूर्ण जन्मकुंडली का विश्लेषण अवश्य करवाना चाहिए। ताकि सही तथा व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्राप्त हो सके।।


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