सीढ़ी की दिशा और संख्या कितनी होनी चाहिए।।

Swami Ji Maharaj
By -
0

सीढ़ी की दिशा और संख्या कितनी होनी चाहिए।। Sidhi kis Disha Me Hona Chahiye.

सीढ़ी की दिशा और संख्या कितनी होनी चाहिए।। Sidhi kis Disha Me Hona Chahiye


सीढ़ी और वास्तु शास्त्र का संबंध।। Introduction.

मित्रों, वास्तु शास्त्र में भवन की सीढ़ी को अत्यंत महत्वपूर्ण संरचना माना गया है। क्योंकि यह केवल एक तल से दूसरे तल तक जाने का साधन मात्र नहीं होता है। बल्कि यह घर की ऊर्जा को ऊपरी तलों तक पहुँचाने का भी प्रमुख माध्यम माना जाता है। जिस प्रकार शरीर में रीढ़ की हड्डी संपूर्ण शरीर को सहारा देती है। उसी प्रकार सीढ़ी को भी भवन की रीढ़ के समान माना गया है। जिसके सहारे संपूर्ण भवन की ऊर्जा संचालित होती है।।

सीढ़ी का संबंध मुख्यतः पृथ्वी तत्व से माना जाता है। तथा इसकी दिशा, आकार तथा घुमाव का सीधा प्रभाव परिवार की स्थिरता, प्रगति तथा आर्थिक उन्नति पर पड़ता है। यदि सीढ़ी गलत दिशा में बनी हो, तो यह घर में ऊर्जा के प्रवाह को अवरुद्ध अथवा असंतुलित करती है। जिससे परिवार को उन्नति में बाधा, आर्थिक अस्थिरता अथवा पारिवारिक कलह जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।।

इसके विपरीत यदि सीढ़ी वास्तु के अनुरूप सही दिशा में बनी हो, तो यह परिवार के लिए निरंतर उन्नति, स्थायित्व तथा समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करती है। यही कारण है कि प्राचीन वास्तु ग्रंथों में सीढ़ी के निर्माण से जुड़े नियमों का अत्यंत सूक्ष्मता से वर्णन किया गया है। जिसमें इसकी दिशा से लेकर सीढ़ियों की संख्या तथा घुमाव तक का विस्तृत उल्लेख मिलता है।।

सीढ़ी के लिए सर्वाधिक शुभ दिशा।। Most Auspicious Direction for the Staircase.

मित्रों, वास्तु शास्त्र के अनुसार सीढ़ी बनाने के लिए दक्षिण, पश्चिम अथवा दक्षिण-पश्चिम अर्थात नैऋत्य दिशा को सर्वाधिक शुभ माना गया है। इसका कारण यह है कि ये दिशाएँ भारी तथा स्थिर मानी जाती हैं। और सीढ़ी जैसी भारी संरचना को इन्हीं दिशाओं में बनाना वास्तु-संतुलन की दृष्टि से सर्वाधिक उपयुक्त माना जाता है। दक्षिण-पश्चिम दिशा में सीढ़ी होने पर परिवार को स्थायित्व, दृढ़ता तथा निरंतर उन्नति की प्राप्त होती है।।

इसके विपरीत उत्तर-पूर्व अर्थात ईशान कोण में सीढ़ी बनाने से पूर्णतः बचना चाहिए। क्योंकि यह दिशा देवताओं की दिशा मानी जाती है। तथा यहाँ भारी संरचना का निर्माण करना इस दिशा की पवित्र तथा हल्की ऊर्जा को असंतुलित कर देता है। इससे परिवार को स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ। आर्थिक हानि अथवा मानसिक अशांति का सामना करना पड़ता है।।

घर के ठीक मध्य भाग अर्थात ब्रह्मस्थान में भी सीढ़ी कभी नहीं बनानी चाहिए। क्योंकि यह स्थान संतुलन तथा शांति का केंद्र माना जाता है। और यहाँ सीढ़ी जैसी गतिशील तथा भारी संरचना होने से संपूर्ण भवन की ऊर्जा में असंतुलन उत्पन्न हो जाता है। इसीलिए वास्तु शास्त्र का यह नियम मुझे स्वयं के लिए भी सर्वाधिक उपयुक्त लगता है।।

सीढ़ियों की चढ़ाई की दिशा।। Direction of Ascent of the Staircase.

मित्रों, सीढ़ियों की दिशा केवल उनके स्थान तक ही सीमित नहीं होती है। बल्कि यह भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है कि सीढ़ियाँ किस दिशा की ओर चढ़ती हुई बनाई गई हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार सीढ़ियों का चढ़ाव दक्षिण से उत्तर की ओर अथवा पश्चिम से पूर्व की ओर होना शुभ माना जाता है। अर्थात सीढ़ी चढ़ते समय व्यक्ति का मुख उत्तर अथवा पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए।।

इसके विपरीत यदि सीढ़ियाँ इस प्रकार बनी हों कि चढ़ते समय मुख दक्षिण अथवा पश्चिम दिशा की ओर हो, तो इसे अपेक्षाकृत कम शुभ माना जाता है। यद्यपि यह पूर्णतः वर्जित नहीं है। इस सिद्धांत के पीछे यह मान्यता है कि उत्तर तथा पूर्व दिशाओं की ओर बढ़ते हुए ऊर्जा-प्रवाह व्यक्ति के जीवन में सकारात्मकता तथा उन्नति लेकर आता है।।

सीढ़ियों की संख्या तथा घुमाव संबंधी नियम।। Rules Regarding the Number and Turn of Steps.

मित्रों, वास्तु शास्त्र में सीढ़ियों की संख्या को भी विशेष महत्व दिया गया है। तथा सामान्यतः सीढ़ियों की कुल संख्या को विषम रखना शुभ माना जाता है। अर्थात इसे इस प्रकार गिना जाना चाहिए कि यह संख्या नौ के पूर्ण गुणज पर समाप्त न हो। बल्कि नौ से एक कम अथवा एक अधिक पर समाप्त हो। इसके पीछे यह मान्यता है कि इससे घर में ऊर्जा का प्रवाह निरंतर तथा संतुलित बना रहता है।।

सीढ़ियों का घुमाव भी सामान्यतः दक्षिणावर्त अर्थात घड़ी की सुइयों की दिशा में होना शुभ माना जाता है। तथा सीढ़ियों के नीचे की जगह को खाली अथवा स्वच्छ रखना चाहिए। सीढ़ियों के नीचे शौचालय अथवा पूजा-स्थान बनाने से बचना चाहिए। अर्थात बिलकुल ही नहीं बनाना चाहिए। क्योंकि यह दोनों ही स्थिति वास्तु की दृष्टि से अशुभ मानी जाती है।।

सीढ़ी की चौड़ाई तथा ऊँचाई के संबंध में भी यह ध्यान रखना चाहिए कि यह न तो अत्यधिक संकरी हो और न ही अत्यधिक तीव्र ढाल वाली हो। क्योंकि इससे न केवल भौतिक दृष्टि से असुविधा होती है। बल्कि ऊर्जा का प्रवाह भी असंतुलित हो जाता है। यहाँ बिलकुल निश्चिन्तता होनी चाहिए चाहे फिर चढ़ते समय हो या उतरते समय। व्यक्ति एकदम निश्चिन्त रहे ऐसा होना चाहिए।।

सीढ़ी से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण वास्तु नियम।। Other Important Vastu Rules Related to Staircase.

मित्रों, सीढ़ी का प्रारंभ बिंदु कभी भी मुख्य द्वार के ठीक सामने नहीं होना चाहिए। क्योंकि इससे घर में प्रवेश करने वाली सकारात्मक ऊर्जा सीधे ऊपरी तल की ओर चली जाती है। तथा भूतल के कमरे उस ऊर्जा से वंचित रह जाते हैं। इसी प्रकार सीढ़ी का समापन बिंदु भी किसी शयनकक्ष के ठीक सामने नहीं होना चाहिए। इससे ऊपर पहुंची उर्जा को निचे की तरफ प्रवाह हो जाने का संकेत मिलता है।।

सीढ़ियों में पर्याप्त प्रकाश की व्यवस्था होनी चाहिए। तथा इन्हें सदैव स्वच्छ एवं अव्यवस्था से मुक्त रखना चाहिए। क्योंकि अव्यवस्थित सीढ़ियाँ ऊर्जा के प्रवाह में बाधायें उत्पन्न करती हैं। सीढ़ियों के मध्य कोई टूट-फूट अथवा दरार नहीं होनी चाहिए। क्योंकि यह भी परिवार में स्थिरता की कमी का प्रतीक मानी जाती है। परिवार स्थिर नहीं रह पाता।।

और मेरी सलाह तो यही रहेगी कि यदि भवन नवीन बन रहा हो, तो नींव की योजना बनाते समय ही सीढ़ी की दिशा, स्थान तथा संरचना का निर्धारण किसी योग्य वास्तुविद् से करवा लेना चाहिए। क्योंकि निर्माण पूर्ण होने के पश्चात सीढ़ी की दिशा बदलना अत्यंत कठिन तथा व्ययसाध्य कार्य सिद्ध होता है। और जिससे काफी मात्रा में नुकशान भी हो जाता है।।

सीढ़ी वास्तु दोष के निवारण के उपाय।। Remedies for Staircase Vastu Dosha.

मित्रों, यदि किसी कारणवश सीढ़ी गलत दिशा में बन चुकी हो, तो उसे तोड़कर पुनर्निर्माण करने की बजाय कुछ सरल उपायों से भी इसके दोष को काफी हद तक संतुलित किया जा सकता है। सीढ़ियों के नीचे के स्थान को खाली अथवा हल्के भंडारण हेतु उपयोग करना। तथा वहाँ नियमित रूप से स्वच्छता बनाए रखना दोष-निवारण में सहायक माना जाता है।।

सीढ़ियों के आरंभ अथवा समापन बिंदु पर वास्तु यंत्र स्थापित करना। तथा नियमित रूप से वहाँ धूप-दीप करना भी नकारात्मक ऊर्जा को संतुलित करने में विशेष रूप से लाभकारी माना जाता है। इसके साथ ही सीढ़ियों में सफ़ेद कलर करवाना। तथा पर्याप्त प्रकाश बनाए रखना भी इस दोष के प्रभाव को कम करने में सहायक सिद्ध होता है।।

शास्त्रीय प्रमाण।। Scriptural References.

मित्रों, मयमतम् तथा विश्वकर्मा वास्तुशास्त्र जैसे प्राचीन ग्रंथों में सीढ़ी के निर्माण को भवन की स्थिरता तथा दीर्घायु से सीधे जोड़ा गया है। तथा इसमें स्पष्ट रूप से बताया गया है कि दक्षिण अथवा पश्चिम दिशा में स्थित सीढ़ी भवन को स्थायित्व तथा सुरक्षा प्रदान करती है। इसके विपरीत यदि हो तो बहुत सारी परेशानियों को खुला आमंत्रण देने जैसा हो जाता है।।

बृहत्संहिता में भी गृह-निर्माण के प्रसंग में भारी संरचनाओं को दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखने का सिद्धांत प्रतिपादित किया गया है। जो सीढ़ी जैसी संरचना पर भी समान रूप से लागू होता है। तथा इसका उल्लंघन करने पर भवन में असंतुलन उत्पन्न होने की बात कही गई है। और असंतुलन का अर्थ तो बीमारी और परेशानियों के रूप में हमारे सामने प्रकट होता है।।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न।। Frequently Asked Questions. (FAQ)

प्रश्न 1. घर की सीढ़ी किस दिशा में बनानी चाहिए।। In which direction should the house staircase be built.

उत्तर:- घर की सीढ़ी दक्षिण, पश्चिम अथवा दक्षिण-पश्चिम अर्थात नैऋत्य दिशा में बनाना सर्वाधिक शुभ माना जाता है।।

प्रश्न 2. सीढ़ी किस दिशा में कदापि नहीं बनानी चाहिए।। In which direction should the staircase never be built.

उत्तर:- सीढ़ी को उत्तर-पूर्व अर्थात ईशान कोण में तथा घर के मध्य भाग अर्थात ब्रह्मस्थान में कभी नहीं बनाना चाहिए।।

प्रश्न 3. सीढ़ी चढ़ते समय मुख किस दिशा में होना चाहिए।। Which direction should one face while climbing the stairs.

उत्तर:- सीढ़ी चढ़ते समय मुख उत्तर अथवा पूर्व दिशा की ओर होना शुभ माना जाता है। अर्थात सीढ़ियों का चढ़ाव दक्षिण से उत्तर अथवा पश्चिम से पूर्व की ओर होना चाहिए।।

प्रश्न 4. सीढ़ियों की संख्या कैसी होनी चाहिए।। What should be the number of steps in a staircase.

उत्तर:- सीढ़ियों की कुल संख्या विषम होनी चाहिए। तथा यह नौ के पूर्ण गुणज पर समाप्त होने की बजाय एक कम अथवा एक अधिक पर समाप्त होनी चाहिए।।

प्रश्न 5. यदि सीढ़ी गलत दिशा में बनी हो तो क्या उपाय करना चाहिए।। What remedies should be done if the staircase is in the wrong direction.

उत्तर:- सीढ़ियों के नीचे स्वच्छता तथा हल्का भंडारण रखना, वास्तु यंत्र स्थापित करना तथा नियमित धूप-दीप करना इस दोष को कम करने में सहायक माना जाता है।।

लेख का निष्कर्ष।। Conclusion.

मित्रों, घर की सीढ़ी किस दिशा में हो, यह प्रश्न वास्तु शास्त्र में अत्यंत गंभीरता से लिया गया है। क्योंकि सीढ़ी भवन की रीढ़ के समान मानी जाती है। जिसके सहारे संपूर्ण घर की ऊर्जा संचालित होती है। दक्षिण-पश्चिम दिशा में स्थित सीढ़ी, उत्तर अथवा पूर्व की ओर चढ़ने वाला क्रम तथा विषम संख्या में बनी सीढ़ियाँ, ये सभी नियम मिलकर घर में स्थायित्व तथा समृद्धि का निर्माण करते हैं।।

वैदिक वास्तु परंपरा के अनुसार सीढ़ी के निर्माण को अत्यंत सूक्ष्मता तथा सावधानी के साथ करना चाहिए। तथा किसी भी वास्तु दोष की स्थिति में सरल उपायों के माध्यम से भी उसे संतुलित करना चाहिए। इससे न केवल भवन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह सुनिश्चित होता है। बल्कि परिवार का दीर्घकालिक सुख, स्वास्थ्य तथा समृद्धि भी सुरक्षित रहती है।।

अतः किसी भी नवीन भवन-निर्माण से पूर्व ही सीढ़ी की दिशा तथा संरचना के संबंध में किसी योग्य तथा शास्त्र-सम्मत वास्तुविद् अथवा ज्योतिषी से अवश्य परामर्श करना चाहिए। ताकि सही तथा व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्राप्त हो सके।।

#सीढ़ी_किस_दिशा_में_हो #सीढ़ी_वास्तु_टिप्स #घर_की_सीढ़ी_की_सही_दिशा #सीढ़ी_वास्तु_दोष_उपाय #सीढ़ियों_की_संख्या_वास्तु
#Staircase_Direction_Vastu #Correct_Staircase_Direction_Tips #Staircase_Vastu_Dosha_Remedies #Number_Of_Steps_Vastu #Vastu_Tips_For_Staircase

ज्योतिष के सभी पहलू पर विस्तृत समझाकर बताया गया बहुत सा हमारा विडियो हमारे  YouTube के चैनल पर देखें । इस लिंक पर क्लिक करके हमारे सभी विडियोज को देख सकते हैं - Click Here & Watch My YouTube Channel.

इस तरह की अन्य बहुत सारी जानकारियों, ज्योतिष के बहुत से लेख, टिप्स & ट्रिक्स पढने के लिये हमारे ब्लॉग एवं वेबसाइट पर जायें तथा हमारे फेसबुक पेज को अवश्य लाइक करें, प्लीज - My facebook Page.

वास्तु विजिटिंग के लिये तथा अपनी कुण्डली दिखाकर उचित सलाह लेने एवं अपनी कुण्डली बनवाने अथवा किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति के लिए संपर्क करें ।।

किसी भी तरह के पूजा-पाठ, विधी-विधान, ग्रह दोष शान्ति आदि के लिए तथा बड़े से बड़े अनुष्ठान हेतु योग्य एवं विद्वान् ब्राह्मण हमारे यहाँ उपलब्ध हैं ।।
 
संपर्क करें:- बालाजी ज्योतिष केन्द्र, गायत्री मंदिर के बाजु में, मेन रोड़, मन्दिर फलिया, आमली, सिलवासा ।।
 
WhatsAap & Call: +91 - 8690 522 111.
E-Mail :: balajijyotish11@gmail.com

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)