करवा चौथ व्रत कथा और विधि।।

Swami Ji Maharaj
By -
0

करवा चौथ व्रत कथा और विधि।। Karwa Chauth Vrat katha.

करवा चौथ व्रत कथा और विधि।। Karwa Chauth Vrat katha

करवा चौथ का परिचय।। Introduction.


मित्रों, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को सुहागिन स्त्रियों द्वारा किया जाने वाला करवा चौथ का व्रत। भारतीय संस्कृति में पति-पत्नी के अटूट प्रेम, त्याग तथा समर्पण का प्रतीक माना जाता है। इस दिन स्त्रियाँ सूर्योदय से चंद्रोदय तक निर्जला उपवास रखकर अपने पति की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य तथा सुखी दाम्पत्य जीवन की कामना करती हैं।।

यह चतुर्थी तिथि भगवान श्री गणेश को भी समर्पित होती है। क्योंकि कार्तिक कृष्ण चतुर्थी संकष्टी चतुर्थी के रूप में भी मान्य है। इसी कारण करवा चौथ के पूजन में शिव-पार्वती, भगवान श्रीगणेश, कार्तिकेय तथा करवा माता का एक साथ पूजन करने की परंपरा प्रचलित है। आज हम इसी व्रत के महात्म्य तथा संपूर्ण विधि पर विस्तार से चर्चा करेंगे।।

करवा चौथ 2026 की तिथि एवं मुहूर्त।। Karwa Chauth 2026 Date And Muhurat.

मित्रों, वर्ष 2026 में करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा। मुंबई के रेखांश के अनुसार चतुर्थी तिथि 29 अक्टूबर को प्रातः लगभग 1 बजकर 8 मिनट से आरंभ होकर रात्रि लगभग 10 बजकर 11 मिनट तक रहेगी। तथा सूर्योदय लगभग प्रातः 6 बजकर 39 मिनट पर होगा।।

पूजा का शुभ मुहूर्त सायंकाल लगभग 5 बजकर 40 मिनट से 7 बजकर 00 मिनट तक बताया गया है। तथा चंद्रोदय का समय रात्रि लगभग 8 बजकर 19 मिनट रहेगा। मित्रों, ये समय स्थान-भेद से भिन्न हो सकते हैं। इसलिए अपने नगर का सटीक चंद्रोदय तथा पूजा-मुहूर्त स्थानीय पंचांग से अवश्य देख लें।।

करवा चौथ व्रत का महात्म्य।। Mahatmya Of Karwa Chauth Vrat.

मित्रों, शास्त्रीय तथा लोक-परंपरा के अनुसार करवा चौथ का व्रत अखंड सौभाग्य प्रदान करने वाला माना गया है। जो सुहागिन स्त्री श्रद्धा तथा नियमपूर्वक यह व्रत करती है। उसे पति की दीर्घायु, गृहस्थ-जीवन में सुख-शांति तथा परिवार में प्रेम एवं सामंजस्य की प्राप्ति होती है।।

इस व्रत का महत्व केवल धार्मिक ही नहीं, अपितु सामाजिक तथा मनोवैज्ञानिक भी है। यह व्रत स्त्री को संयम, धैर्य तथा अनुशासन सिखाता है। पति-पत्नी के मध्य परस्पर आदर तथा स्नेह को सुदृढ़ करता है। तथा सास-बहू एवं स्त्रियों के मध्य आत्मीय संबंधों को भी प्रगाढ़ बनाता है।।

ज्योतिषीय दृष्टि से चंद्रमा मन, सौम्यता तथा दाम्पत्य-सुख का कारक माना गया है। तथा शुक्र दाम्पत्य एवं प्रेम का कारक ग्रह है। इसी कारण चंद्र-दर्शन तथा अर्घ्य के साथ किया गया यह व्रत मानसिक शांति तथा वैवाहिक जीवन में माधुर्य का सूचक माना जाता है। अविवाहित कन्याएँ भी भावी पति की कामना से यह व्रत रख सकती हैं।।

करवा चौथ व्रत की पूर्व-तैयारी एवं सरगी।। Preparation And Sargi.

मित्रों, व्रत की पूर्व-संध्या पर पूजन-सामग्री एकत्र कर लेनी चाहिए। जिसमें करवा अर्थात मिट्टी का पात्र, छलनी, दीपक, रोली, कुमकुम, अक्षत, सिंदूर, सुहाग-सामग्री, फल, फूल, मिष्ठान्न तथा जल का पात्र सम्मिलित होता है। स्त्रियाँ इस दिन हाथों में मेहंदी लगाती हैं तथा सोलह श्रृंगार की तैयारी करती हैं।।

व्रत के दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान कर सरगी ग्रहण की जाती है। जो परंपरागत रूप से सास द्वारा अपनी बहू को दी जाती है। सरगी में फल, मेवे, मिठाई, मठरी, फेनी आदि सात्विक पदार्थ होते हैं। सरगी ग्रहण करने के पश्चात सूर्योदय से चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखा जाता है।।

करवा चौथ की पूजा विधि।। Puja Vidhi.

मित्रों, सायंकाल पूजा के मुहूर्त में पूजन-स्थल को स्वच्छ कर, चौकी अथवा पटले पर शिव-पार्वती, श्रीगणेश जी, कार्तिकेय तथा करवा माता की प्रतिमा अथवा चित्र स्थापित करें। इसके पश्चात घी का दीपक प्रज्वलित कर संकल्प लें कि मैं अपने पति की दीर्घायु तथा अखंड सौभाग्य के लिए यह व्रत कर रही हूँ।।

सर्वप्रथम भगवान गणेश का पूजन करें, तत्पश्चात शिव-पार्वती तथा करवा माता को रोली, कुमकुम, अक्षत, पुष्प, सिंदूर तथा सुहाग-सामग्री अर्पित करें। जल से भरे करवे में दीपक अथवा सींक रखकर उसकी पूजा की जाती है। साथ ही फल एवं मिष्ठान्न का भोग लगाया जाता है।।

पूजन के पश्चात सभी स्त्रियाँ एकत्र होकर करवा चौथ की व्रत कथा श्रवण करती हैं। कुछ परंपराओं में स्त्रियाँ एक-दूसरे के करवे का आदान-प्रदान भी करती हैं। साथ ही थाली को सात बार घुमाकर यह रस्म संपन्न करती हैं। अंत में आरती उतारकर बड़ों का आशीर्वाद लिया जाता है।।

चंद्र-पूजन एवं व्रत-पारण की विधि।। Moon Worship And Breaking The Fast.

मित्रों, चंद्रोदय होने पर चंद्रमा को जल मिश्रित दूध से अर्घ्य दें। पुष्प तथा दीपक अर्पित करें, तथा अपने सौभाग्य की प्रार्थना करें। इसके पश्चात छलनी में दीपक रखकर पहले चंद्रमा के दर्शन करें। और फिर उसी छलनी से अपने पति का मुख भी देखें।।

तत्पश्चात पति के हाथ से जल ग्रहण कर तथा मिष्ठान्न खाकर व्रत का पारण करें। व्रत खोलने के बाद सास-ससुर तथा बड़ों के चरण-स्पर्श कर आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए। उसके उपरांत सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए।।

करवा चौथ व्रत कथा।। Karwa Chauth Vrat Katha.

मित्रों, प्राचीन काल में एक साहूकार के सात पुत्र तथा वीरवती नाम की एक सुंदर पुत्री थी। विवाह के पश्चात जब वीरवती पहली बार अपने मायके आई, तो उसने अपनी भाभियों के साथ करवा चौथ का निर्जला व्रत रखा। सारा दिन भूख-प्यास सहने के कारण संध्या होते-होते वह मूर्छित-सी होने लगी।।

अपनी लाडली बहन की यह दशा भाइयों से देखी न गई। उन्होंने एक पेड़ की ओट में दीपक जलाकर उसे छलनी से ढक दिया, और बहन से कहा कि देखो, चंद्रमा निकल आया है। भोली वीरवती ने इसे सच मानकर उस दीपक को चंद्रमा समझा, अर्घ्य दिया और भोजन ग्रहण कर लिया। जबकि भाभियों ने उसे समझाने का प्रयास किया था।।

भोजन आरंभ करते ही व्रत भंग होने के अपशकुन प्रकट होने लगे। पहले ग्रास में बाल निकला, दूसरे ग्रास पर छींक आई। उसके बाद तीसरे ग्रास के समय ससुराल से बुलावा आ गया। जब वह ससुराल पहुँची, तो उसने अपने पति को मृत पाया, और वह शोक में डूब गई।।

वीरवती ने अपनी भूल के लिए पश्चाताप किया तथा पूरे वर्ष श्रद्धा एवं तपस्या के साथ अपने पति के शव की सेवा करती रही। साथ ही प्रत्येक चतुर्थी का व्रत विधिपूर्वक करती रही। अगले वर्ष जब पुनः करवा चौथ आया, तब उसने पुरे नियम तथा सम्पूर्ण निष्ठा से व्रत रखा।।

उसके तप तथा सच्ची भक्ति से प्रसन्न होकर देवी ने उसके पति को पुनः जीवन प्रदान किया। तभी से यह मान्यता प्रचलित हुई कि जो स्त्री पूर्ण श्रद्धा तथा नियम से करवा चौथ का व्रत करती है, उसे अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। मित्रों, इस कथा के विवरण क्षेत्र तथा परिवार के अनुसार भिन्न-भिन्न रूपों में प्रचलित हैं।।

अन्य प्रचलित मान्यताएँ।। Other Popular Beliefs.

मित्रों, लोक-परंपरा में करवा चौथ से जुड़ी अन्य कथाएँ भी प्रचलित हैं। एक मान्यता के अनुसार द्रौपदी ने पांडवों पर आए संकट के निवारण हेतु भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर यह व्रत किया था। तथा दूसरी मान्यता में सावित्री द्वारा यमराज से सत्यवान के प्राण वापस लेने की कथा को भी इस व्रत की भावना से जोड़ा जाता है।।

इस दिन सूर्योदय से पूर्व सरगी अवश्य ग्रहण करें। तथा सूर्योदय से चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखें। नए अथवा स्वच्छ वस्त्र धारण करें। सोलह श्रृंगार करें, मेहंदी लगाएँ तथा पूजा के समय व्रत कथा अवश्य सुनें अथवा पढ़ें। चंद्रोदय के पश्चात अर्घ्य देकर ही व्रत खोलें।।

पति के प्रति कृतज्ञता का भाव रखें, तथा व्रत खोलने के बाद बड़ों का आशीर्वाद लें। जो स्त्रियाँ गर्भवती हों, रोगी हों अथवा किसी औषधि पर निर्भर हों, उन्हें अपने चिकित्सक की सलाह लेकर ही व्रत का स्वरूप निर्धारित करना चाहिए। क्योंकि स्वास्थ्य की रक्षा सर्वोपरि मानी गयी है।।

करवा चौथ के नियम: क्या न करें।। Don'ts Of Karwa Chauth.

मित्रों, चंद्रोदय से पूर्व अन्न-जल का ग्रहण कदापि न करें। साथ ही दिन में शयन करने से भी बचें। इस दिन क्रोध, कटु-वाणी तथा परस्पर कलह से दूर रहना चाहिए। क्योंकि यह दाम्पत्य-सुख का व्रत होता है। सुहागिन स्त्रियों को काले, गहरे नीले, भूरे, स्लेटी अथवा सफेद वस्त्र भी पहनने से परहेज करना चाहिए। साथ ही लाल, गुलाबी, पीले जैसे शुभ रंग की साड़ी या अन्य वस्त्र धारण करने चाहिए।।

व्रत के दिन कैंची, चाकू अथवा सुई जैसी नुकीली वस्तुओं का प्रयोग यथासंभव टालना चाहिए। तथा सिंदूर, बिंदी, चूड़ी जैसी सुहाग-सामग्री का दान अथवा आदान-प्रदान अपने परिवार की परंपरा के अनुसार ही करना चाहिए। मांसाहार तथा तामसिक भोजन का सर्वथा त्याग रखना चाहिए।।

दाम्पत्य-सुख हेतु वैदिक उपाय।। Vedic Remedies For Marital Harmony.

मित्रों, जिन दंपतियों के जीवन में कलह अथवा दूरी बनी रहती हो, उन्हें करवा चौथ की रात्रि चंद्र-पूजन के समय "ॐ सों सोमाय नमः" इस मंत्र का जप करना चाहिए। साथ ही शिव-पार्वती का पूजन कर पति-पत्नी दोनों को मिलकर आरती करनी चाहिए। इस उपाय से परस्पर प्रेम में वृद्धि होती है।।

शुक्रवार को माँ पार्वती अथवा माँ लक्ष्मी को श्वेत पुष्प तथा दूध से निर्मित खीर का भोग अर्पित करना चाहिए। साथ ही दाम्पत्य जीवन में शुक्र ग्रह की शांति हेतु श्वेत वस्त्र अथवा मिश्री का दान करना भी शुभ माना गया है। कुंडली में शुक्र अथवा सप्तम भाव पीड़ित हो, तो किसी योग्य ज्योतिषी से परामर्श कर विशेष उपाय करवाना उचित रहता है।।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न।। Frequently Asked Questions.

प्रश्न- करवा चौथ 2026 में कब है? When is Karwa Chauth in 2026.

उत्तर- मित्रों, करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार को रखा जाएगा। तथा चंद्रोदय का समय मुंबई में लगभग रात्रि 8 बजकर 54 मिनट रहेगा। जो स्थान-भेद से भिन्न हो सकता है।।

प्रश्न- क्या अविवाहित कन्याएँ करवा चौथ का व्रत रख सकती हैं? Can unmarried girls observe the Karva Chauth fast.

उत्तर- जी हाँ, अविवाहित कन्याएँ भी भावी पति की कामना से श्रद्धापूर्वक यह व्रत रख सकती हैं।।

प्रश्न- सरगी क्या होती है तथा इसे कब खाना चाहिए? What is Sargi, and when should it be eaten.

उत्तर- सरगी सास द्वारा बहू को दिया जाने वाला सात्विक आहार होता है। जिसे सूर्योदय से पूर्व स्नान के पश्चात ग्रहण किया जाता है। तथा इसके बाद निर्जला व्रत आरंभ होता है।।

प्रश्न- क्या करवा चौथ का व्रत निर्जला ही रखना आवश्यक है? Is it mandatory to observe the Karwa Chauth fast without consuming any water (nirjala).

उत्तर- परंपरा निर्जला व्रत की है, परंतु गर्भवती, रोगी अथवा दुर्बल स्त्रियाँ अपने चिकित्सक की सलाह से फलाहार अथवा जल सहित व्रत रख सकती हैं। क्योंकि स्वास्थ्य सर्वोपरि होता है।।

प्रश्न- यदि चंद्रमा बादलों के कारण न दिखे तो क्या करें? What should you do if the moon is not visible due to clouds.

उत्तर- ऐसी स्थिति में पंचांग में बताए गए चंद्रोदय के समय के पश्चात चंद्रमा की दिशा में अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जा सकता है। तथा अपने कुल-परंपरा के अनुसार बड़ों से परामर्श भी कर लेना चाहिए।।

लेख का निष्कर्ष।। Conclusion.

मित्रों, करवा चौथ का व्रत केवल उपवास मात्र नहीं। अपितु पति-पत्नी के अटूट बंधन, आपसी विश्वास तथा त्याग की भावना का उत्सव होता है। श्रद्धा, नियम तथा पवित्र भाव से किया गया यह व्रत दाम्पत्य जीवन में प्रेम, सौभाग्य तथा सुख-शांति की वृद्धि करता है।।

परन्तु मेरी आपको यही सलाह है कि व्रत, पूजन अथवा दाम्पत्य जीवन से संबंधित किसी भी विशेष समस्या के समाधान हेतु किसी विद्वान, योग्य, अनुभवी वैदिक ब्राह्मण अथवा ज्योतिषी से अपनी कुंडली का विश्लेषण अवश्य करवाना चाहिए। ताकि सही एवं व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्राप्त हो सके।।

#करवा_चौथ_व्रत_विधि #करवा_चौथ_महात्म्य #करवा_चौथ_2026 #करवा_चौथ_व्रत_कथा #करवा_चौथ_पूजा_मुहूर्त #Karwa_Chauth_Vrat_Vidhi #Karwa_Chauth_2026 #Karwa_Chauth_Katha

ज्योतिष के सभी पहलू पर विस्तृत समझाकर बताया गया बहुत सा हमारा विडियो हमारे  YouTube के चैनल पर देखें । इस लिंक पर क्लिक करके हमारे सभी विडियोज को देख सकते हैं - Click Here & Watch My YouTube Channel.

इस तरह की अन्य बहुत सारी जानकारियों, ज्योतिष के बहुत से लेख, टिप्स & ट्रिक्स पढने के लिये हमारे ब्लॉग एवं वेबसाइट पर जायें तथा हमारे फेसबुक पेज को अवश्य लाइक करें, प्लीज - My facebook Page.

वास्तु विजिटिंग के लिये तथा अपनी कुण्डली दिखाकर उचित सलाह लेने एवं अपनी कुण्डली बनवाने अथवा किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति के लिए संपर्क करें ।।

किसी भी तरह के पूजा-पाठ, विधी-विधान, ग्रह दोष शान्ति आदि के लिए तथा बड़े से बड़े अनुष्ठान हेतु योग्य एवं विद्वान् ब्राह्मण हमारे यहाँ उपलब्ध हैं ।।
 
संपर्क करें:- बालाजी ज्योतिष केन्द्र, गायत्री मंदिर के बाजु में, मेन रोड़, मन्दिर फलिया, आमली, सिलवासा ।।
 
WhatsAap & Call: +91 - 8690 522 111.
E-Mail :: balajijyotish11@gmail.com

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)