माता कात्यायनी की विशेष भोग-पूजन विधि एवं विशिष्ट मंत्र।।

Swami Ji Maharaj
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माता कात्यायनी की विशेष भोग-पूजन विधि एवं विशिष्ट मंत्र।। Ma Katyayani Special Bhog And Mantras.

माता कात्यायनी की विशेष भोग-पूजन विधि एवं विशिष्ट मंत्र।। Ma Katyayani Special Bhog And Mantras


माता कात्यायनी के पूजन का परिचय।। Introduction.

मित्रों, नवरात्रि के षष्ठम दिवस माँ दुर्गा के षष्ठम स्वरूप, माता कात्यायनी की उपासना की जाती है। महर्षि कात्यायन ने घोर तपस्या करके देवी को अपनी पुत्री के रूप में प्राप्त करने का वरदान प्राप्त किया था। तथा महर्षि के आश्रम में ही पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारण इन्हें कात्यायनी कहा जाता है। माता का यह स्वरूप महिषासुर-वध के लिए समस्त देवताओं के तेज से प्रकट हुआ था। अतः इन्हें विशेष रूप से शक्ति तथा युद्ध की देवी माना जाता है। माता सिंह पर आरूढ़ होकर, अपने चार हाथों में तलवार, कमल-पुष्प, अभय-मुद्रा तथा वर-मुद्रा धारण करती हैं।।

वैदिक शास्त्रों में माता कात्यायनी को बृहस्पति अर्थात गुरु ग्रह का भी अधिष्ठाता माना गया है। अतः इनकी उपासना से साधक के भीतर साहस, तेज तथा विवाह-बाधाओं के निवारण की शक्ति का संचार होता है। जो कन्याएँ अपने विवाह में आ रही बाधाओं से मुक्ति तथा योग्य वर-प्राप्ति की कामना रखती हैं। उनके लिए षष्ठम दिवस का यह पूजन सर्वाधिक फलदायी माना जाता है।।

परन्तु आप बिलकुल घबराएँ नहीं। आज हम इसी विषय पर विस्तार से समझेंगे कि माता कात्यायनी का पूजन किस प्रकार करना चाहिए। इन्हें कौन सा भोग सर्वाधिक प्रिय होता है। तथा किस विशिष्ट श्रृंगार एवं मंत्र-जप से माता की शीघ्र प्रसन्नता प्राप्त होती है। आज के इस लेख में हम इस विषय को विस्तार से समझेंगे।।

माता कात्यायनी की पूजन-विधि।। Puja Vidhi Of Maa Katyayani.

मित्रों, नवरात्रि के षष्ठम दिवस प्रातःकाल ब्रह्म-मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके पश्चात पूजा-स्थान को शुद्ध करके, माता कात्यायनी की प्रतिमा अथवा चित्र को एक स्वच्छ चौकी पर स्थापित करना चाहिए।।

सर्वप्रथम श्रीगणेश जी तथा कलश का स्मरण करके पूजन आरंभ करना चाहिए। तत्पश्चात माता कात्यायनी का आवाहन करना चाहिए। माता को रोली-अक्षत अर्पित करने के पश्चात लाल रंग के पुष्प, विशेषकर गुड़हल का पुष्प अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके पश्चात धूप-दीप प्रज्वलित करके माता की आरती करनी चाहिए। तथा अंत में क्षमा-प्रार्थना के साथ पूजन संपन्न करना चाहिए।।

माता को सर्वाधिक प्रिय भोग, मधु अर्थात शहद का योग।। The Bhog Most Dear To The Mother, The Offering Of Honey.

मित्रों, शास्त्रों के अनुसार माता कात्यायनी को मधु अर्थात शहद का भोग सर्वाधिक प्रिय माना जाता है। क्योंकि इससे साधक की वाणी में मधुरता तथा व्यवहार में आकर्षण उत्पन्न होता है। जो विशेषकर विवाह-संबंधी बाधाओं के निवारण में अत्यंत सहायक सिद्ध होता है।।

इसके साथ ही माता को शहद से निर्मित मिठाई, तथा लाल रंग की मिठाई जैसे गुड़ अथवा बतासे का भोग लगाना भी अत्यंत प्रिय माना जाता है। कुछ विद्वानों के अनुसार माता को अदरक का भी भोग अर्पित करना भी विशेष फलदायी सिद्ध होता है। जिससे साधक रोग-मुक्त रहकर दीर्घायु प्राप्त करता है।।

माता का विशिष्ट श्रृंगार, लाल वस्त्र तथा स्वर्ण-आभूषण का योग।। Special Adornment Of The Mother, Red Attire And Golden Ornaments.

मित्रों, माता कात्यायनी को अपनी वीर तथा तेजस्वी प्रकृति के अनुरूप लाल रंग के वस्त्र अर्पित करना अत्यंत प्रिय माना जाता है। जो शक्ति तथा शुभता के प्रतीक माने जाते हैं। इनके श्रृंगार में स्वर्ण-आभूषण धारण कराना विशेष शुभ माना जाता है। तथा विशेष रूप से उन कन्याओं को, जो विवाह-बाधा से पीड़ित हैं, माता को सुहाग की संपूर्ण सामग्री, जैसे चूड़ी, बिंदी, सिंदूर तथा मेहंदी अर्पित करनी चाहिए।।

इसके साथ ही माता को लाल पुष्पों की माला पहनाना भी अत्यंत फलदायी माना जाता है। जो शक्ति तथा वीरता का प्रतीक होता है। इस प्रकार के भव्य तथा सुहाग-युक्त श्रृंगार से माता शीघ्र प्रसन्न होकर साधक की विवाह-बाधाओं को दूर करने का आशीर्वाद प्रदान करती हैं।।

माता कात्यायनी के विशिष्ट मंत्र, जप से शीघ्र प्रसन्नता का योग।। Special Mantras Of Maa Katyayani, The Yoga Of Swift Grace Through Chanting.

मित्रों, माता कात्यायनी की प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए अग्रलिखित मूल-मंत्र का श्रद्धापूर्वक नियमित जप करना चाहिए। मन्त्र "ॐ देवी कात्यायन्यै नमः।।" इसके साथ ही इस ध्यान-मंत्र के रूप में निम्न श्लोक का भी पाठ करना चाहिए।।

"चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी।।"

मित्रों, इस मंत्र का अर्थ है कि चंद्रमा के समान चमकने वाली तलवार धारण करने वाली। सिंह पर आरूढ़ तथा दानवों का संहार करने वाली देवी कात्यायनी मुझे शुभ फल प्रदान करें। विशेष रूप से विवाह-बाधा के निवारण के लिए निम्न मंत्र का भी जप किया जाता है।।

"ॐ ह्रीं कात्यायन्यै च विद्महे कन्याकुमार्ये च धीमहि।
      तन्नो            दुर्गिः                      प्रचोदयात्।।"

प्रातः तथा सायं दोनों समय इन मंत्रों का कम से कम एक माला अर्थात एक सौ आठ बार जप करने से माता शीघ्र प्रसन्न होती हैं। मंत्र-जप के समय कुछ सावधानियाँ अवश्य रखनी चाहिए। जैसे मंत्र-जप सदैव स्वच्छ आसन पर बैठकर, पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख करके करना चाहिए। जप के समय रुद्राक्ष अथवा स्फटिक की माला का प्रयोग विशेष रूप से शुभ माना जाता है। विवाह-बाधा निवारण हेतु जप करते समय साधक को पूर्ण श्रद्धा तथा धैर्य के साथ, मन में किसी भी प्रकार की जल्दबाज़ी अथवा अधीरता लाए बिना ही जप करना चाहिए।।

इस पूजन से प्राप्त होने वाले फल।। Benefits Obtained From This Worship.

मित्रों, जो साधक नवरात्रि के षष्ठम दिवस विधिपूर्वक माता कात्यायनी का पूजन, निर्धारित भोग-अर्पण तथा मंत्र-जप करता है। उसे विवाह-संबंधी समस्त बाधाओं से मुक्ति तथा योग्य वर अथवा वधू की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही आज्ञा-चक्र के जागृत होने से साधक के भीतर निर्णय-शक्ति तथा दूरदर्शिता भी सुदृढ़ होती है।।

और मेरी सलाह तो यही रहेगी कि इन उपायों को केवल औपचारिकता के लिए नहीं। बल्कि पूर्ण श्रद्धा तथा निरंतरता के साथ करना चाहिए। माता का पूजन शुद्ध मन, निर्भीक भाव तथा सच्ची भक्ति-भावना के साथ ही करना चाहिए। क्योंकि बाह्य आडंबर की अपेक्षा आंतरिक श्रद्धा तथा धैर्य ही माता की वास्तविक प्रसन्नता का कारण बनता है।।

शास्त्रीय प्रमाण।। Scriptural References.

मित्रों, देवी भागवत पुराण तथा दुर्गा-सप्तशती में माता कात्यायनी को नवदुर्गाओं में षष्ठम तथा आज्ञा-चक्र की अधिष्ठात्री देवी बताया गया है। स्कंद पुराण में भी यह उल्लेख मिलता है कि षष्ठम नवरात्रि में इनकी विधिपूर्वक उपासना करने से साधक को विवाह-बाधा से मुक्ति तथा सुखद वैवाहिक जीवन की प्राप्ति होती है।।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न।। Frequently Asked Questions. (FAQ)

प्रश्न 1. माता कात्यायनी को कौन सा भोग सर्वाधिक प्रिय है।। Which Bhog Is Most Dear To Maa Katyayani.

उत्तर:- मधु अर्थात शहद, तथा शहद से निर्मित मिठाई माता को सर्वाधिक प्रिय मानी जाती है।।

प्रश्न 2. माता कात्यायनी का मूल-मंत्र क्या है।। What Is The Primary Mantra Of Maa Katyayani.

उत्तर:- "ॐ देवी कात्यायन्यै नमः।।" यह माता का मूल-मंत्र माना जाता है। जिसका नियमित जप माता की शीघ्र प्रसन्नता प्रदान करता है।।

प्रश्न 3. माता की उपासना से विशेष रूप से किस समस्या का निवारण होता है।। Which Problem Is Especially Resolved Through The Worship Of This Mother.

उत्तर:- माता कात्यायनी की उपासना से विशेष रूप से विवाह-संबंधी बाधाओं का निवारण तथा योग्य वर-वधू की प्राप्ति होती है।।

प्रश्न 4. माता कात्यायनी किस चक्र की अधिष्ठात्री देवी हैं।। Which Chakra Is Maa Katyayani The Presiding Deity Of.

उत्तर:- माता कात्यायनी को आज्ञा-चक्र की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। जो निर्णय-शक्ति तथा दूरदर्शिता का संचार करती हैं।।

प्रश्न 5. मंत्र-जप कितनी बार तथा किस समय करना चाहिए।। How Many Times And At What Time Should The Mantra Be Chanted.

उत्तर:- प्रातः तथा सायं दोनों समय कम से कम एक माला अर्थात एक सौ आठ बार मंत्र-जप करना चाहिए। जिससे माता शीघ्र प्रसन्न होती हैं।।

लेख का निष्कर्ष।। Conclusion.

मित्रों, नवरात्रि के षष्ठम दिवस माता कात्यायनी की विधिपूर्वक उपासना, मधु के भोग का अर्पण, सुहाग-युक्त श्रृंगार चढ़ाना चाहिए। तथा "ॐ देवी कात्यायन्यै नमः" इस मंत्र के नियमित जप से साधक को माता की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह पूजन न केवल आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है। बल्कि साधक के विवाह-संबंधी समस्त बाधाओं का निवारण भी करता है। जो आगामी नवरात्रि-साधना के लिए अत्यंत आवश्यक मानी जाती है।।

परन्तु मेरी आपको यही सलाह है कि इस पूजन को विधिपूर्वक संपन्न करने हेतु किसी विद्वान तथा अनुभवी ब्राह्मण अथवा आचार्य से विस्तृत मार्गदर्शन अवश्य प्राप्त करना चाहिए। ताकि पूजन में किसी प्रकार की त्रुटि न रह जाए तथा माता की पूर्ण कृपा प्राप्त हो सके।।

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