माता ब्रह्मचारिणी की विशेष भोग-पूजन विधि एवं विशिष्ट मंत्र।।

Swami Ji Maharaj
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माता ब्रह्मचारिणी की विशेष भोग-पूजन विधि एवं विशिष्ट मंत्र।। Maa Brahmacharini Special Bhog Mantras And Puja Vidhi.

माता ब्रह्मचारिणी की विशेष भोग-पूजन विधि एवं विशिष्ट मंत्र।। Maa Brahmacharini Special Bhog Mantras And Puja Vidhi


माता ब्रह्मचारिणी के पूजन का परिचय।। Introduction.

मित्रों, नवरात्रि के द्वितीय दिवस माँ दुर्गा के द्वितीय स्वरूप, माता ब्रह्मचारिणी की उपासना की जाती है। "ब्रह्म" का अर्थ तपस्या भी होता है, तथा "चारिणी" का अर्थ आचरण करने वाली, अतः ब्रह्मचारिणी का अर्थ है घोर तप का आचरण करने वाली देवी। यह स्वरूप माता पार्वती के उस रूप का प्रतीक है। जब उन्होंने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए अत्यंत कठोर तपस्या की थी। माता के एक हाथ में जप-माला तथा दूसरे हाथ में कमंडल सुशोभित होता है। जो तप, संयम तथा त्याग की प्रतीक भी मानी जाती हैं।।

वैदिक शास्त्रों में माता ब्रह्मचारिणी को मंगल ग्रह का भी अधिष्ठाता माना गया है। अतः इनकी उपासना से साधक के भीतर धैर्य, संयम तथा आत्म-नियंत्रण की शक्ति का संचार होता है। जो साधक अपने जीवन में तप, त्याग तथा दृढ़ता के साथ किसी लक्ष्य की प्राप्ति की कामना रखते हैं। उनके लिए द्वितीय दिवस का यह पूजन अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है।।

परन्तु आप बिलकुल घबराएँ नहीं। आज हम इसी विषय पर विस्तार से समझेंगे कि माता ब्रह्मचारिणी का पूजन किस प्रकार करना चाहिए। इन्हें कौन सा भोग सर्वाधिक प्रिय होता है। तथा किस विशिष्ट श्रृंगार एवं विशिष्ट मंत्र के जप से माता की शीघ्र प्रसन्नता प्राप्त होती है।।

माता ब्रह्मचारिणी की पूजन-विधि।। Puja Vidhi Of Maa Brahmacharini.

मित्रों, नवरात्रि के द्वितीय दिवस प्रातःकाल ब्रह्म-मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ अथवा सात्विक वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके पश्चात पूजा-स्थान को शुद्ध करके, माता ब्रह्मचारिणी की प्रतिमा अथवा चित्र को एक स्वच्छ चौकी पर स्थापित करना चाहिए।।

सर्वप्रथम गणेश जी तथा कलश का स्मरण करके पूजन आरंभ करना चाहिए। तत्पश्चात माता ब्रह्मचारिणी का आवाहन करना चाहिए। माता को रोली-अक्षत अर्पित करने के पश्चात सफेद अथवा पीले पुष्प, विशेषकर गुड़हल अथवा कमल का पुष्प अर्पित करना शुभ माना जाता है। माता को चंदन अर्पित करना भी विशेष रूप से शुभ फलदायी सिद्ध होता है। इसके पश्चात धूप-दीप प्रज्वलित करके माता की आरती करनी चाहिए। तथा अंत में क्षमा-प्रार्थना के साथ पूजन संपन्न करना चाहिए।।

माता को सर्वाधिक प्रिय भोग, शक्कर एवं पंचामृत का योग।। The Bhog Most Dear To The Mother, The Offering Of Sugar And Panchamrit.

मित्रों, शास्त्रों के अनुसार माता ब्रह्मचारिणी को शक्कर अर्थात सफेद मिश्री से निर्मित भोग सर्वाधिक प्रिय माना जाता है। क्योंकि यह दीर्घायु तथा सुख-समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है। माता को शक्कर अथवा मिश्री का भोग अर्पित करने से साधक को आरोग्य तथा दीर्घायु की प्राप्ति होती है।।

इसके साथ ही माता को पंचामृत अर्थात दूध, दही, घी, शहद तथा शक्कर से निर्मित भोग भी अत्यंत प्रिय माना जाता है। कुछ विद्वानों के अनुसार माता को देशी घी से बनी वस्तुओं का भोग लगाना भी विशेष शुभ फलदायी सिद्ध होता है। जिससे साधक के परिवार में सुख-शांति का वास होता है। तथा समस्त रोग एवं समस्त दोष सहज ही दूर हो जाते हैं।।

माता का विशिष्ट श्रृंगार, श्वेत वस्त्र तथा रुद्राक्ष की माला का योग।। Special Adornment Of The Mother, White Attire And A Garland Of Rudraksha.

मित्रों, माता ब्रह्मचारिणी तपस्विनी स्वरूपा होने के कारण इन्हें अत्यंत सादगीपूर्ण तथा सात्विक श्रृंगार प्रिय माना जाता है। माता को श्वेत अथवा हल्के पीले रंग के वस्त्र अर्पित करने चाहिए। जो संयम तथा सादगी के प्रतीक होते हैं। इनके श्रृंगार में अत्यधिक आभूषणों की अपेक्षा रुद्राक्ष की माला अथवा साधारण तुलसी की माला अर्पित करना विशेष शुभ माना जाता है।।

इसके साथ ही माता को श्वेत पुष्पों की माला पहनाना भी अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है। जो तप तथा पवित्रता का प्रतीक भी माना जाता है। इस प्रकार के सात्विक तथा संयमित श्रृंगार से माता शीघ्र प्रसन्न होकर साधक को धैर्य तथा आत्म-संयम का आशीर्वाद प्रदान करती हैं।।

माता ब्रह्मचारिणी के विशिष्ट मंत्र, जिसके जप से शीघ्र प्रसन्नता का योग।। Special Mantras Of Maa Brahmacharini, The Yoga Of Swift Grace Through Chanting.

मित्रों, माता ब्रह्मचारिणी की प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए अग्रलिखित मूल-मंत्र का श्रद्धापूर्वक नियमित जप करना चाहिए। जैसे "ॐ ऐं ह्रीं ब्रह्मचारिण्यै नमः।।" इसके साथ ही ध्यान-मंत्र के रूप में निम्न श्लोक का भी पाठ करना चाहिए।।

"दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।"

मित्रों, इस मंत्र का अर्थ है कि जो देवी अपने कमल-सदृश हाथों में अक्षमाला तथा कमंडल धारण करती हैं। वह सर्वोत्तम ब्रह्मचारिणी देवी मुझ पर प्रसन्न हों। प्रातः तथा सायं दोनों समय इस मंत्र का कम से कम एक माला अर्थात एक सौ आठ बार जप करने से माता शीघ्र प्रसन्न होती हैं।।

मंत्र-जप के समय सावधानियाँ।। Precautions While Chanting The Mantra.

मित्रों, मंत्र-जप सदैव स्वच्छ आसन पर बैठकर, पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख करके करना चाहिए। जप के समय रुद्राक्ष अथवा तुलसी की माला का प्रयोग विशेष रूप से शुभ माना जाता है। चूँकि माता ब्रह्मचारिणी तप तथा संयम की देवी मानी जाती हैं। अतः इस दिन साधक को विशेष रूप से संयमित आचरण, सात्विक विचार तथा इंद्रिय-निग्रह का पालन करते हुए ही जप करना चाहिए।।

इस पूजन से प्राप्त होने वाले फल।। Benefits Obtained From This Worship.

मित्रों, जो साधक नवरात्रि के द्वितीय दिवस विधिपूर्वक माता ब्रह्मचारिणी का पूजन, निर्धारित भोग-अर्पण तथा मंत्र-जप करता है। उसे जीवन में धैर्य, तप तथा संयम की शक्ति प्राप्त होती है। इसके साथ ही स्वाधिष्ठान-चक्र के जागृत होने से साधक की इच्छा-शक्ति भी सुदृढ़ होती है। जो किसी भी कठिन लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आवश्यक दृढ़ता प्रदान करती है।।

और मेरी सलाह तो यही रहेगी कि इन उपायों को केवल औपचारिकता के लिए नहीं। बल्कि पूर्ण श्रद्धा तथा निरंतरता के साथ करना चाहिए। माता का पूजन शुद्ध मन, सात्विक आचरण तथा सच्ची भक्ति-भावना के साथ ही करना चाहिए। क्योंकि बाह्य आडंबर की अपेक्षा आंतरिक तप तथा संयम ही माता की वास्तविक प्रसन्नता का कारण होता है।।

शास्त्रीय प्रमाण।। Scriptural References.

मित्रों, देवी भागवत पुराण तथा दुर्गा-सप्तशती में माता ब्रह्मचारिणी को नवदुर्गाओं में द्वितीय तथा स्वाधिष्ठान-चक्र की अधिष्ठात्री देवी बताया गया है। स्कंद पुराण में भी यह उल्लेख मिलता है कि द्वितीय नवरात्रि में इनकी विधिपूर्वक उपासना करने से साधक को तप तथा त्याग की शक्ति प्राप्त होती है।।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न।। Frequently Asked Questions. (FAQ)

प्रश्न 1. माता ब्रह्मचारिणी को कौन सा भोग सर्वाधिक प्रिय है।। Which Bhog Is Most Dear To Maa Brahmacharini.

उत्तर:- शक्कर अर्थात सफेद चीनी अथवा मिश्री से निर्मित भोग, तथा पंचामृत माता को सर्वाधिक प्रिय माना जाता है।।

प्रश्न 2. माता ब्रह्मचारिणी का मूल-मंत्र क्या है।। What Is The Primary Mantra Of Maa Brahmacharini.

उत्तर:- "ॐ ऐं ह्रीं ब्रह्मचारिण्यै नमः।।" यह माता का मूल-मंत्र माना जाता है। जिसका नियमित जप माता की शीघ्र प्रसन्नता प्रदान करता है।।

प्रश्न 3. माता को किस प्रकार का श्रृंगार अर्पित करना चाहिए।। What Kind Of Adornment Should Be Offered To The Mother.

उत्तर:- माता को सात्विक तथा सादगीपूर्ण श्रृंगार प्रिय होता है। अतः श्वेत वस्त्र तथा रुद्राक्ष अथवा तुलसी की माला अर्पित करना विशेष शुभ माना जाता है।।

प्रश्न 4. माता ब्रह्मचारिणी किस चक्र की अधिष्ठात्री देवी हैं।। Which Chakra Is Maa Brahmacharini The Presiding Deity Of.

उत्तर:- माता ब्रह्मचारिणी को स्वाधिष्ठान-चक्र की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। जो इच्छा-शक्ति तथा संयम का संचार करती हैं।।

प्रश्न 5. मंत्र-जप कितनी बार तथा किस समय करना चाहिए।। How Many Times And At What Time Should The Mantra Be Chanted.

उत्तर:- प्रातः तथा सायं दोनों समय कम से कम एक माला अर्थात एक सौ आठ बार मंत्र-जप करना चाहिए। जिससे माता शीघ्र प्रसन्न होती हैं।।

लेख का निष्कर्ष।। Conclusion.

मित्रों, नवरात्रि के द्वितीय दिवस माता ब्रह्मचारिणी की विधिपूर्वक उपासना करना। शक्कर तथा पंचामृत के भोग का अर्पण करना। सात्विक श्रृंगार तथा "ॐ ऐं ह्रीं ब्रह्मचारिण्यै नमः" माता के इस मंत्र के नियमित जप से साधक को माता की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह पूजन न केवल आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है। बल्कि साधक के भीतर तप, संयम तथा दृढ़-इच्छाशक्ति भी उत्पन्न करता है। जो आगामी नवरात्रि-साधना के लिए अत्यंत आवश्यक मानी जाती है।।

परन्तु मेरी आपको यही सलाह है कि इस पूजन को विधिपूर्वक संपन्न करने हेतु किसी विद्वान तथा अनुभवी ब्राह्मण अथवा आचार्य से विस्तृत मार्गदर्शन अवश्य प्राप्त करना चाहिए। ताकि पूजन में किसी प्रकार की त्रुटि न रह जाए तथा माता की पूर्ण कृपा प्राप्त हो सके।।

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