नवरात्रि में देवी को कौन-कौन से भोग लगाने चाहिए।। Navratri Bhog Offerings to Goddess Durga.
नवरात्रि भोग का परिचय।। Introduction.
मित्रों, नवरात्रि के नौ दिवसों में माँ जगदंबा के नौ स्वरूपों की विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है। और प्रत्येक स्वरूप को प्रसन्न करने के लिए शास्त्रों में पृथक-पृथक भोग का विधान बताया गया है। यह मान्यता है कि देवी को उनके प्रिय भोग अर्पित करने से साधक की मनोकामनाएँ शीघ्र पूर्ण होती हैं।।
ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि एवं सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। आज हम इसी विषय पर विस्तार से चर्चा करेंगे। और जानेंगे कि नवरात्रि के नौ दिनों में किस देवी को कौन-सा भोग अर्पित करना चाहिए। यह बात इस लेख के माध्यम से हम आपको प्रत्येक बात समझायेंगे।।
प्रथम दिवस- माँ शैलपुत्री का भोग।। Bhog For Maa Shailaputri On The First Day.
मित्रों, नवरात्रि के प्रथम दिवस माँ शैलपुत्री की पूजा की जाती है। जो हिमालय-पुत्री तथा सती के रूप में जानी जाती हैं। इस दिन माँ को शुद्ध गाय के घी का भोग अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि यह भोग अर्पित करने से साधक को आरोग्य की प्राप्ति होती है। तथा उसके जीवन में सुख-समृद्धि सदैव बनी रहती है। साथ ही परिवार में व्याप्त समस्त रोग-दोष भी दूर हो जाते हैं।।
द्वितीय दिवस- माँ ब्रह्मचारिणी का भोग।। Bhog For Maa Brahmacharini On The Second Day.
मित्रों, द्वितीय दिवस माँ ब्रह्मचारिणी की आराधना की जाती है। जो तप एवं त्याग की देवी मानी जाती हैं। इस दिन माँ को शक्कर, मिश्री अथवा पंचामृत का भोग अर्पित करना चाहिए। इस भोग के अर्पण से साधक की आयु में वृद्धि होती है। तथा उसे मानसिक शांति एवं स्थिरता की प्राप्ति होती है। जिन जातकों के जीवन में अस्थिरता अथवा मानसिक उलझन बनी रहती हो। उनके लिए यह भोग विशेष लाभकारी माना गया है।।
तृतीय दिवस- माँ चंद्रघंटा का भोग।। Bhog For Maa Chandraghanta On The Third Day.
मित्रों, तृतीय दिवस माँ चंद्रघंटा की पूजा होती है। जिनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित होता है। इस दिन माँ को खीर अथवा दूध से निर्मित मिष्ठान्न का भोग अर्पित करना चाहिए। इससे जातक के जीवन में व्याप्त कष्ट तथा प्रतिकूल परिस्थितियों का निवारण होता है। साथ ही मन को शांति प्राप्त होती है। यह भोग विशेष रूप से उन साधकों के लिए अत्यन्त लाभकारी होता है। जो जीवन में व्याप्त अशांति से मुक्ति चाहते हैं।।
चतुर्थ दिवस- माँ कूष्मांडा का भोग।। Bhog For Maa Kushmanda On The Fourth Day.
मित्रों, चतुर्थ दिवस माँ कूष्मांडा की आराधना की जाती है। जिन्हें सृष्टि की आदि-शक्ति माना जाता है। इस दिन माँ को मालपुए का भोग अर्पित करना चाहिए। तथा पूजा के पश्चात इसे दीन-दुखियों तथा आवश्यकतामंद व्यक्तियों में वितरित करना विशेष फलदायी माना जाता है। इस भोग से जातक की बुद्धि तथा निर्णय-क्षमता में निरंतर वृद्धि होती है। और उसके निर्णय शुद्ध तथा विवेकपूर्ण होते हैं।।
पंचम दिवस- माँ स्कंदमाता का भोग।। Bhog For Maa Skandamata On The Fifth Day.
मित्रों, पंचम दिवस माँ स्कंदमाता की पूजा की जाती है। जो भगवान कार्तिकेय की माता के रूप में पूजी जाती हैं। इस दिन माँ को केले का भोग अर्पित करना चाहिए। तथा इसे प्रसाद रूप में परिवारजनों एवं अन्य भक्तों में बाँट देना चाहिए। इस भोग के प्रभाव से जातक की बुद्धि तीव्र होती है। तथा उसके जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।।
षष्ठम दिवस- माँ कात्यायनी का भोग।। Bhog For Maa Katyayani On The Sixth Day.
मित्रों, षष्ठम दिवस माँ कात्यायनी की आराधना का विधान है। जिन्हें विवाह तथा मनोवांछित वर की प्राप्ति की देवी माना जाता है। इस दिन माँ को शहद अर्थात मधु का भोग अर्पित करना चाहिए। इस भोग से जातक के जीवन में मधुरता तथा सकारात्मकता का संचार होता है। और वाणी-दोष तथा संबंधों में व्याप्त कटुता भी दूर होती है।।
सप्तम दिवस- माँ कालरात्रि का भोग।। Bhog For Maa Kalaratri On The Seventh Day.
मित्रों, सप्तम दिवस माँ कालरात्रि की पूजा होती है। जो दुष्ट शक्तियों का संहार करने वाली देवी मानी जाती हैं। इस दिन माँ को गुड़ का भोग अर्पित करना चाहिए। इस भोग के प्रभाव से जातक भय तथा नकारात्मक शक्तियों से मुक्त हो जाता है। तथा उसके जीवन से शत्रु-बाधा एवं सभी संकट भी दूर हो जाते हैं।।
अष्टम दिवस- माँ महागौरी का भोग।। Bhog For Maa Mahagauri On The Eighth Day.
मित्रों, अष्टम दिवस अर्थात महाष्टमी को माँ महागौरी की पूजा की जाती है। जो शांति तथा सौम्यता की प्रतीक मानी जाती हैं। इस दिन माँ को नारियल का भोग अर्पित करना चाहिए। इस भोग से जातक की समस्त मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं। तथा परिवार में सुख-शांति एवं सामंजस्य बना रहता है। इसी दिन कन्या-पूजन का भी विशेष महत्व माना गया है।।
नवम दिवस- माँ सिद्धिदात्री का भोग।। Bhog For Maa Siddhidatri On The Ninth Day.
मित्रों, नवम दिवस अर्थात महानवमी को माँ सिद्धिदात्री की आराधना की जाती है। जो समस्त सिद्धियाँ प्रदान करने वाली देवी मानी जाती हैं। इस दिन माँ को हलवा, चना, पूरी तथा खीर का भोग अर्पित करना चाहिए। इसे कन्याओं तथा आवश्यकतामंद व्यक्तियों में अवश्य वितरित करना चाहिए। इस भोग से जातक के जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि का स्थायी वास होता है।।
भोग अर्पण के शास्त्रोक्त नियम।। Shastric Rules For Offering Bhog.
मित्रों, भोग अर्पित करते समय कुछ मूल नियमों का पालन करना आवश्यक माना गया है। भोग सदैव शुद्धता तथा पवित्रता के साथ, स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण कर ही तैयार करना चाहिए। भोग में प्याज-लहसुन तथा तामसिक पदार्थों का सर्वथा त्याग करना चाहिए। साथ ही संभव हो तो भोग शुद्ध देशी घी में ही निर्मित करना चाहिए। भोग अर्पित करने के पश्चात उसे प्रसाद रूप में परिवारजनों, कन्याओं तथा आवश्यकतामंद व्यक्तियों में अवश्य वितरित करना चाहिए। क्योंकि इसी से भोग की पूर्णता मानी जाती है।।
भोग से जुड़े वैदिक उपाय।। Vedic Remedies Related To Bhog.
मित्रों, जो साधक नवरात्रि में नित्य देवी को उनके प्रिय भोग अर्पित करते हैं। उन्हें प्रतिदिन दुर्गा सप्तशती के पाठ अथवा न्यूनतम देवी के बीज मंत्रों के जप का भी संकल्प लेना चाहिए। इसके साथ ही अखंड ज्योति प्रज्वलित रखना, तथा संध्याकाल में माँ की आरती करना भी भोग के फल को कई गुणा बढ़ा देता है। जो जातक नौ दिवस व्रत-उपवास नहीं रख सकते, वे भी केवल श्रद्धापूर्वक भोग अर्पित कर माँ की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।।
भोग का शास्त्रीय आधार।। Shastric Reference.
मित्रों, देवी भागवत पुराण तथा दुर्गा सप्तशती में नवदुर्गा के नौ स्वरूपों तथा उनकी उपासना-विधि का विस्तृत वर्णन प्राप्त होता है। कालिका पुराण एवं मार्कण्डेय पुराण में भी देवी की प्रसन्नता हेतु भोग, पुष्प तथा उपासना-विधि का उल्लेख मिलता है। जिसके अनुसार प्रत्येक स्वरूप को भिन्न-भिन्न भोग अत्यंत प्रिय माना गया है।।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न।। Frequently Asked Questions.
प्रश्न- क्या नवरात्रि में सभी नौ दिन अलग-अलग भोग अर्पित करना आवश्यक है?
उत्तर- मित्रों, शास्त्रोक्त विधि के अनुसार नौ भिन्न भोग अर्पित करना श्रेष्ठ माना गया है। परंतु जो जातक ऐसा सम्भव न कर सकें, वे श्रद्धापूर्वक किसी भी सात्विक मिष्ठान्न का भोग अर्पित कर सकते हैं।।
प्रश्न- क्या भोग अर्पित करने के पश्चात उसे प्रसाद रूप में वितरित करना आवश्यक है?
उत्तर- जी हाँ, भोग अर्पित करने के पश्चात उसे परिवारजनों, कन्याओं अथवा आवश्यकतामंद व्यक्तियों में वितरित करना अत्यंत शुभ तथा शास्त्र-सम्मत माना गया है।।
प्रश्न- क्या भोग में प्याज-लहसुन का प्रयोग किया जा सकता है?
उत्तर- नहीं, भोग सदैव सात्विक पद्धति से ही निर्मित करना चाहिए। तथा इसमें प्याज-लहसुन अथवा किसी भी तामसिक पदार्थ का प्रयोग वर्जित माना गया है।।
प्रश्न- यदि कोई जातक व्रत न रखे, तो क्या वह भोग अर्पित कर सकता है?
उत्तर- जी हाँ, व्रत न रखने वाले जातक भी श्रद्धापूर्वक देवी को भोग अर्पित कर सकते हैं। और इससे भी माँ की कृपा प्राप्त होती है।।
प्रश्न- अष्टमी तथा नवमी के भोग में क्या विशेष अंतर है?
उत्तर- अष्टमी को माँ महागौरी को नारियल का भोग प्रिय है। जबकि नवमी को माँ सिद्धिदात्री को हलवा-पूरी-चना तथा खीर का भोग अर्पित किया जाता है। तथा इसी दिन कन्या-भोज का विशेष विधान है।।
लेख का निष्कर्ष।। Conclusion.
मित्रों, नवरात्रि के नौ दिवसों में माँ जगदंबा के नौ स्वरूपों को उनके प्रिय भोग श्रद्धा तथा पवित्रता के साथ अर्पित करने से साधक को आरोग्य, बुद्धि, समृद्धि तथा मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। यह परंपरा केवल भोग अर्पण मात्र नहीं, अपितु सेवा-भाव तथा त्याग की भी शिक्षा देती है। क्योंकि भोग का वास्तविक फल तभी प्राप्त होता है जब उसे प्रसाद रूप में अन्य आवश्यकतामंद व्यक्तियों के साथ साझा किया जाए।।
परन्तु मेरी आपको यही सलाह है कि किसी भी व्रत, पूजन अथवा अनुष्ठान से संबंधित विस्तृत तथा व्यक्तिगत मार्गदर्शन हेतु किसी विद्वान, योग्य, अनुभवी वैदिक ब्राह्मण अथवा ज्योतिषी से अवश्य परामर्श करना चाहिए। ताकि विधि-विधान पूर्ण रूप से शास्त्र-सम्मत रहे।।
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