कालसर्प दोष के बुरे प्रभाव एवं शान्ति की विस्तृत एवं अचूक विधी ।।

कालसर्प दोष के बुरे प्रभाव एवं शान्ति की विस्तृत एवं अचूक विधी ।। Kalsarp Dosh Efects And Shanti Vidhi.

जय श्रीमन्नारायण,

मित्रों, आज आपलोगों को संपूर्ण कालसर्प दोष की शांति के विषय में विस्तार से बताता हूँ । ये तो सर्वविदित है कि कालसर्प योग का निर्माण ग्रहों की एक विषेष स्थिति के फलस्वरूप होता है ।।

यह स्थिति है राहु और केतु के बीच एक ओर अन्य सभी सात ग्रहों का आ जाना । जनसाधारण में एक धारणा या कहें कि भ्रम व्याप्त है कि यह एक परम अनिष्टकारी योग है ।।

किंतु यह मात्र एक भ्रम ही है । यह योग अनिष्टकारी तो है, किंतु वहीं यह भी सच है कि इससे प्रभावित अनेकानेक जातक सफलता के शीर्ष पर भी पहुंचे हैं ।।

बुरे प्रभावों को देखें तो पाते हैं कि राहु जिस भाव में बैठा होता है उस भाव के शुभ प्रभाव कम और नेष्ट प्रभाव अधिक मिलते हैं । मुख्यतः कालसर्प दोष के कारण जातक को शुभ कर्म का फल प्राप्त नहीं होता है ।।

यदि बीमार हो, तो दवा असर नहीं करती । यदि कर्ज हो, तो चुकता नहीं है । यदि कलह हो, तो शांति नहीं प्राप्त होती है । इसलिए राहु की स्थिति के अनुसार 12 प्रकार के कालसर्प दोष कहे गए हैं ।।

 

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