हस्तरेखा में चन्द्र पर्वत की अच्छी स्थिति व्यक्ति को कलाकार संगीतकार एवं लेखक बनाता है ।।

हस्तरेखा में चन्द्र पर्वत की अच्छी स्थिति व्यक्ति को कलाकार संगीतकार एवं लेखक बनाता है ।। Hastrekha Me Chandra Parvat And Bhavishyvani.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,

मित्रों, आपके हाथ में चन्द्र पर्वत, अंगूठे के सामने हथेली के आधार पर स्थित होता है । यह पर्वत एक मजबूत कल्पना शक्ति को दर्शाता है । यह लोगों में भावनात्मक या कलात्मक और सौंदर्य, रोमांस, रचनात्मकता, आदर्शवाद आदि को प्रदर्शित करता है ।।

किसी की हाथ में पूर्ण विकसित चंद्र पर्वत व्यक्ति को कला प्रेमी बनाता है । ऐसे लोग कलाकार, संगीतकार और उच्च श्रेणी के लेखक बनते हैं । ऐसे व्यक्ति मजबूत कल्पना शक्ति के धनी होते हैं ।।

यह लोग अति रुमानी होते हैं लेकिन अपनी इच्छाओं के प्रति आदर्शवादी होते हैं । शुक्र पर्वत की तरह इनमें भावुकता या कामुकता वाला स्वभाव नही होता है । पूर्ण विकसित चन्द्र पर्वत वाला व्यक्ति किसी के भावनाओं मे बह जाने वाला होता है ।।

ऐसा व्यक्ति किसी को भी उदास न देखने वाला होता है । प्रायः यह लोग वास्तविकता से परे कल्पनाप्रधान तथा अच्छे लेखक और कलाकार होते हैं । परन्तु प्रतिकूल परिस्थितियों में ऐसे लोग उन्मादी और तर्कहीन व्यवहार करते हैं ।।

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इसके अतिरिक्त ये निर्णय लेने में अधिक समय लेने वाले और अत्यधिक महत्वाकांक्षी होते हैं । हाथ में अति विकसित चन्द्र पर्वत व्यक्ति को आलसी और सनकी बनाता है । ऐसे व्यक्ति कल्पना से पूर्ण और वास्तविकता से दूर रहते हैं ।।

कभी-कभी यह एक हल्के रूप में विकसित हो कर एक प्रकार का पागलपन भी दे सकता है । यदि चन्द्र पर्वत अविकसित हो तो व्यक्ति में अच्छी कल्पना का अभाव, दूरदर्शिता का अभाव देखा जा सकता है ।।

इतना ही नहीं ऐसे लोगों में नए और रचनात्मक विचारों का अभाव रहता है तथा यह लोग क्रूर और स्वार्थी भी होते हैं । यदि चन्द्र पर्वत का शिखर अंगूठे के आधार की ओर स्थित हो तो व्यक्ति अपने उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए दृढ संकल्पी होता है ।।

जब इसके शिखर का झुकाव शुक्र पर्वत की ओर हो तो व्यक्ति का झुकाव संगीत, कला तथा रंगमंच की ओर होता है । जब यह मणिबंध की ओर झुका हो तो व्यक्ति की रुचि यात्राओं की ओर रहती है लेकिन उसे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है ।।

एक हथेली में राहू और केतु इन दोनों ग्रहों के पर्वत की स्थिति विवादास्पद होती है । प्राचीन हस्तरेखा शास्त्र ने इन ग्रहों के पर्वत के विषय में अधिक विवरण नहीं दिया है । राहु वर्तमान परिस्थितियों का प्रतिक माना गया है ।।

जबकि केतु अतीत की घटनाओं के लिए हमारे प्रतिक्रियाओं का प्रतिनिधित्व करता है । राहु पर्वत मस्तिष्क रेखा और मंगल पर्वत के नीचे स्थित होता है । साथ ही इसके विपरीत केतु चन्द्र पर्वत और शुक्र पर्वत के मध्य स्थित होता है ।।

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