धन वृद्धि एवं कर्ज से मुक्ति हेतु इस तरह करे शनिदेव की पूजा ।।

धन वृद्धि एवं कर्ज से मुक्ति हेतु इस तरह करे शनिदेव की पूजा ।। Karj Mukti And Shani Pooja.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,

मित्रों, विरक्त और सन्यासियों को छोड़कर शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति होगा जिसे धन की इच्छा नहीं होगी । जिनको धन-प्राप्ति की प्रबल इच्छा होती है वो सब लोग उनके लिए सतत प्रयत्नशील होते है । फिर भी हम देखते है, की कठिन से कठिन मेहनत करने के बावजूद भी कुछ लोगों को यथा-योग्य धन प्राप्त नहीं हो पाता । कुछेक को सिर्फ आवश्यकता भर ही मिलता है और किसी को आवश्यकता के अनुसार भी नहीं मिलता ।।

किसी को भी जब उसकी आवश्यकता से कम आमदनी हो तो उसे उसके लिए कर्ज लेना पड़ता है । जन्म-कुंडली में दों भाव धन-विषयक है, पहला दूसरा घर अथवा भाव जिसे धन स्थान कहा जाता है और दूसरा ग्यारहवाँ या एकादश भाव जिसे लाभ स्थान कहा जाता है । ग्यारवें भाव को आय का भाव भी माना गया है । परन्तु आज के समय में कर्ज लेना बुरा या कष्टकारी नहीं अपितु उन्नति हेतु पहला कदम माना जाता है ।।

परन्तु कई बार योजना या परिस्थिति के अनुकूल ना होने से यही कर्ज दुख, परेशानी एवं अपयश का कारण भी बन जाता हैं । ज्योतिष में अर्थ प्राप्ति अथवा धन संचय की जानकारी जन्म पत्रिका के प्रथम, द्वितीय, पंचम, नवम, दशम और एकादश भाव से होता है । प्रथम भाव से जातक के संपूर्ण व्यक्तित्व एवं स्वास्थ्य का आकलन करते हैं । द्वितीय भाव से जातक के संचित धन अथवा धन संचय की जानकारी प्राप्त की जा सकती है ।।

पञ्चम भाव से धन प्राप्ति हेतु किया-कलाप, नवम से धन प्राप्ति हेतु भाग्य, दशम से व्यवसाय तथा ग्यारहवें भाव से लाभ का ज्ञान होता है । इन स्थानों के स्वामी ग्रह के अनुकूल या प्रतिकूल स्थिति से धन की स्थिति का आकलन किया जा सकता है । साथ ही इन स्थानों पर स्थित ग्रह की अनुकूलता या प्रतिकूलता का प्रभाव भी जातक के धन संबंधी विषय पर पड़ता है ।।

छठवें स्थान से ऋण देखा जाता है अतः उपरोक्त स्थानों से संबंधित ग्रह का संबंध किसी भी प्रकार से छठवें स्थान से बनना उसके ऋण या कर्ज की स्थिति को प्रदर्षित करता है । यदि जातक की कुंडली में छठा भाव या छठवें भाव का स्वामी अस्त, नीच, शत्रुराशि या पीड़ित या कमजोर हो तो व्यक्ति कर्ज से मुक्त रहता है । इसके विपरीत कर्ज लेने से लेकर पटने की दशा, ग्रहों की स्थिति तथा संबंध जीवन को सुखमय या दु:खमय बनाती हैं ।।

कई बार ऐसा होता है, कि छठवें स्थान का स्वामी अनुकूल हो तो कर्ज से समृद्धि का भी कारक हो जाता है । ज्योतिष के अनुसार कर्ज से संबंधित ग्रहों या स्वामियों का राहु से संबंध हो या राहु अष्टम या भाग्य स्थान में हो तो भी आकस्मिक हानि होने की संभावनायें बढ़ जाती है । अतः कर्ज लेकर हानि उठाकर दोहरे कष्ट हो सकते हैं ।।

ऐसे में यदि आप कर्ज से बहुत परेशान हैं और साथ ही कर्ज किसी भी प्रयत्न से उतर ना रहा हो तो आपको कर्ज मुक्ति हेतु इस उपाय को कर सकते हैं । इस उपाय से आपको लाभ अवश्य होगा । आप पूरी श्रद्धा से शनिवार को शनिदेव का व्रत करें । शनिदेव का पूजन पूरी श्रद्धा से करें । शनिदेव के किसी मंदिर में जायें और तिल के तेल के साथ अन्य सामग्रियां जो शनिदेव पर चढ़ाई जाती है वो सभी चढ़ायें ।।

साथ ही पूरी श्रद्धा से इस दुर्गा सप्तशती के मंत्र:- “सर्वाबाधाविनिर्मुक्तो धनधान्यसुतान्वितः । मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संसयः” का जप कम से कम एक माला करें । साथ ही काली वस्तुओं विशेषकर तिल का दान और शनि मंत्र का जप करें । अगर संभव और समय हो तो कर्ज मुक्ति का मंत्र का भी जप कर सकते हैं । इससे और भी अधिक एवं जल्द लाभ होगा । इस उपाय को कम से कम सात शनिवार अवश्य करें । शनिवार को भूलकर भी मांस एवं मदिरा से दूर रहें ।।

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