मांगलिक योग या दोष, इसका दु:ष्प्रभाव एवं शान्ति का उपाय ।।

मांगलिक योग या दोष, इसका दु:ष्प्रभाव एवं शान्ति का उपाय ।। Mangalik Yoga Ya Dosha Dushprabhav And Upay.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,

मित्रों, हिन्दू ज्योतिष में मंगल को लग्न, द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम और द्वादश भाव में दोष पूर्ण माना जाता है । इन भावों में उपस्थित मंगल मांगलिक दोष का निर्माण करता है ।।

इन भावों में मंगल को वैवाहिक जीवन के लिए अनिष्टकारक बताया गया है । जन्म कुण्डली में इन पांचों भावों में मंगल के साथ जितने क्रूर ग्रह बैठे हों मंगल उतना ही दोषपूर्ण होता है ।।

जैसे दो क्रूर ग्रह साथ होने पर दोष दुगुना हो जाता है । द्वितीय भाव में (भावदीपिका नामक ग्रंथ) में बैठे मंगल को मांगलिक दोष बताया गया है । पर अधिकांश ज्योतिषी द्वितीय भाव में मंगल दोष नहीं मानते ।।

क्योंकि हमारे वैदिक ज्योतिष में केवल किसी एक ग्रंथ को आधार मान कर निर्णय नहीं लिया जाता । किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने के लिए अनेको ग्रंथो को पढ़ना और समझना पड़ता है ।।

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यह दोष शादी शुदा ज़िंदगी के लिए कष्टकारी माना जाता है । अगर मंगल दोष वाले पुरुष या स्त्री का विवाह मंगल दोष वाले ही पुरुष या स्त्री से न हो तो यह वैवाहिक जीवन को कलह पूर्ण बना देता है ।।

कई लोगों ने भ्रांतिया फैला रखी है, कि मंगल दोष वाले का विवाह मंगल दोष वाले से न हो तो दोनों में से किसी एक की मृत्यु हो जाती है । परन्तु यह किसी-किसी परिस्थितियों में होता है । वैसे किसी की मृत्यु के लिए अकेला मंगल ही जिम्मेदार नहीं होता ।।

उसके साथ कुण्डली में और भी कई स्थितियां होनी चाहिये । जैसे लग्नेश का कमजोर होना, मृत्यु स्थान और लग्न का राशि परिवर्त्तन इत्यादि । परन्तु मृत्यु न सही पर यदि मंगलिक का विवाह अगर मंगलिक से न हो तो जीवन में कई बार मृत्यु तुल्य कष्ट अवश्य भोगना पड़ता है ।।

मंगल दोष पहला उपाय तो यही है, कि मंगल दोष वाले व्यक्ति का किसी मंगलिक से ही विवाह संस्कार करवाया जाये । अगर प्रेम विवाह हो रहा हो या मंगलिक जीवनसाथी खोजने में परेशानी आ रही हो तो इस के लिए शास्त्रो में कई प्रकार के उपाय बतलाये गए है ।।

जैसे कुम्भ विवाह या घट विवाह । भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा जो की एक विधि से की जाती है उसको किसी शिव मंदिर में करवायें । हनुमान जी की पूजा करे प्रीतिदिन करें और हनुमान चालीसा का पाठ करें ।।

अगर कुण्डली में मंगल देवता ज्यादा मारक हों तो मंगल देवता के श्री मंगलनाथ मंदिर (उज्जैन) जोकि मंगल से सम्बंधित हर प्रकार के दोषो के निवारण के लिए अत्यंत प्राचीन मंदिर है । वहां जाकर उनकी पूजा विधि विधान से करवायें ।।

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