मीन लग्न की कुंडली में द्वादश भावों में गुरु का शुभाशुभ फल ।।

मीन लग्न की कुंडली में द्वादश भावों में गुरु का शुभाशुभ फल ।। Meen Lagna Kundali me Guru (Jupiter).

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,

मित्रों, हमारे वैदिक ज्योतिष में वृहस्पति को देवगुरु की उपाधि प्राप्त है । स्वभाव से साधू देव गुरु धनु एवं मीन राशि के स्वामी माने गए हैं । ये कर्क राशि में उच्च एवं मकर राशि में नीच के माने जाते हैं । मीन लग्न की कुंडली में गुरु लग्नेश और दशमेश होकर एक कारक ग्रह के रूप में मान्य हैं । इस लग्न कुंडली के जातक गुरु के शुभ स्थित होने पर पुखराज रत्न धारण कर सकते हैं ।।

फिर भी इस बात का पूरा ध्यान रखें, कि किस जानकार ज्योतिषी से जन्म कुण्डली का समुचित विश्लेषण करवाने के बाद ही उपाय संबंधी निर्णय लेना चाहिये । ज्योतिषी के सलाह के बाद ही किसी भी ग्रह को रत्न से बलवान किया जाना चाहिये । हो सकता है, कि दान से ग्रह का प्रभाव कम करना है, कुछ तत्वों के जल प्रवाह से ग्रह को शांत करना है या की मंत्र साधना से उक्त ग्रह का आशीर्वाद प्राप्त करके रक्षा प्राप्त करनी है आदि-आदि ।।

मंत्रों की साधना अथवा अनुष्ठान आदि लगभग सभी के लिए लाभदायक होती है । आइये आज हम मीन लग्न की कुंडली के १२ भावों में देवगुरु बृहस्पति के शुभाशुभ प्रभाव को जानने का प्रयास करते हैं ।।

मीन लग्न ।। प्रथम भाव में गुरु ।। Meen Lagan ।। Guru pratham bhav me ।।

प्रथम भाव में गुरु के आने से जातक उत्तम स्वास्थ्य से युक्त एक ज्ञानवान व्यक्तित्व वाला होता है साथ ही बुद्धिमान होता है । गुरु की महादशा में पुत्र प्राप्ति का योग बनता है । दाम्पत्य जीवन सुखी रहता है और साझेदारी के काम से लाभ का योग बनता है । जातक का भाग्य साथ देता है । ऐसा जातक पितृ भक्त एवं विदेश यात्राएं करने वाला होता है ।।

मीन लग्न ।। द्वितीय भाव में गुरु ।। Meen Lagan ।। Guru Dwitiya bhav me ।।

गुरु यदि द्वितीय भाव में स्थित हों तो जातक को परिवार कुटुंब का भरपूर साथ मिलता है । गुरु की दशा में जातक के परिवार में धन का आगमन होता है । प्रतियोगिता, कोर्ट केस में जीत होती है, बुद्धि बल से ही सभी रुकावटें दूर होती हैं तथा प्रोफेशनल लाइफ में उन्नति होती है ।।

मीन लग्न ।। तृतीय भाव में गुरु ।। Meen Lagan ।। Guru tritiy bhav me ।।

यहाँ गुरु को केन्द्राधिपत्य दोष लगता है । ऐसे जातक का अपने छोटे भाई बहन से विशेष लगाव होता है । गुरु की महदशा में परिश्रम के बाद भी जातक का भाग्य उसका साथ कम ही देता है । छोटे भाई का योग बनता है । दाम्पत्य जीवन, पार्टनरशिप में मुश्किलें आती है । जातक धार्मिक नहीं होता है । बड़े भाई बहनों के साथ ही पिता से भी मन मुटाव के योग बनते है तथा संभावित लाभ में कमी आती है ।।

मीन लग्न ।। चतुर्थ भाव में गुरु ।। Meen Lagan ।। Guru chaturth bhav me ।।

चतुर्थ भाव में गुरु के विद्यमान होने से जातक को भूमि, भवन, वाहन एवं माता का पूर्ण सुख प्राप्त होता है । रुकावटें आसानी से दूर होती हैं । कार्य क्षेत्र में उन्नती का योग बनता है । विदेश यात्राएं होती हैं, विदेश सेटल मेंट की सम्भावना भी बनती है । छाती में यदि कोई बीमारी हो तो ठीक हो जाती है ।।

मीन लग्न ।। पंचम भाव में गुरु ।। Meen Lagan ।। Guru pncham bhav me ।।

पंचमस्थ गुरु के वजह से जातक की बुद्धि बहुत तीक्ष्ण होती है । गुरु की महादशा में पुत्र प्राप्ति का योग बनता है । जातक का स्वास्थ्य उत्तम रहता है । पिता एवं बड़े भाई बहनों के साथ संबंधों में मधुरता रहती है तथा लाभ प्राप्ति का योग बनता है । जातक का मन शांत रहता है ।।

मीन लग्न ।। षष्टम भाव में गुरु ।। Meen Lagan ।। Guru shashtham bhav me ।।

ऐसे जातक का स्वास्थ्य एवं बिज़नेस अथवा नौकरी खराब स्थिति में होते हैं । कोर्ट केस तथा हॉस्पिटल में खर्चा होता है । दुर्घटना का भय बना रहता है । प्रतियोगिता में बहुत मेहनत के बाद विजयश्री हाथ आती है । प्रोफेशन बद्तर स्थिति में आ जाता है । गुरु की दशा में कोई न कोई टेंशन बनी रहती है । किसी कुटुंबजन का स्वास्थ्य खराब रहता है तथा कुटुम्बिजनों को समस्याएँ आती हैं । कुटुंब का साथ प्राप्त नहीं होता और विदेश सेटेलमेंट का योग भी बनता है ।।

मीन लग्न ।। सप्तम भाव में गुरु ।। Meen Lagan ।। Guru saptam bhav me ।।

दैनिक आय के स्त्रोत में वृद्धि होती है । जातक का वैवाहिक जीवन सुखी रहता है, व्यवसाय एवं साझेदारों से लाभ का योग बनता है । बड़े भाई-बहन से सम्बन्ध अच्छे रहते हैं तथा लाभ की भी प्राप्ति होती है । जातक परिश्रमी एवं धार्मिक प्रवृति का होता है ।।

मीन लग्न ।। अष्टम भाव में गुरु ।। Meen Lagan ।। Guru ashtam bhav me ।।

यहां गुरु के अष्टम भाव में स्थित होने की वजह से जातक का स्वास्थ्य खराब रह सकता है । जातक के हर काम में रुकावट आती है । फिजूल का व्यय होता रहता है । कुटुंब का साथ नहीं मिलता है तथा धन की हानि होती है । भूमि, भवन एवं वाहन के सुख में कमी आती है । माता के साथ संबंधों में भी कड़वाहट रहती है । जातक के घर से दूर रहने का योग भी बनता है ।।

मीन लग्न ।। नवम भाव में गुरु ।। Meen Lagan ।। Guru Navam Bhav me ।।

नवमस्थ गुरु जातक उच्च शिक्षा प्राप्त करवाता है । स्वास्थ्य उत्तम रहता है तथा सुदूर यात्राओं से लाभ की प्राप्ति होती है । ऐसा जातक छोटे भाई-बहन से लगाव रखता है । गुरु की महादशा में पुत्र प्राप्ति का योग बनता है ।।

मीन लग्न ।। दशम भाव में गुरु ।। Meen Lagan ।। Guru Dasham bhav me ।।

गुरु की महादशा में जातक का प्रोफेशन उत्तम स्थिति में होता है । धन, परिवार एवं सम्पूर्ण कुटुंब का पूर्ण साथ मिलता है । जातक को भूमि, भवन, वाहन एवं माता का पूर्ण सुख प्राप्त होता है । कॉम्पिटिशन एवं मुकदमों में विजय की प्राप्ति होती है । लोन (यदि लोन लिया हो) का भुक्तान समय पर होता है । विदेश सेटेलमेंट हो सकती है ।।

मीन लग्न ।। एकादश भाव में गुरु ।। Meen Lagan ।। Guru ekaadash bhav me ।।

यहाँ नीच राशिस्थ होने पर अपनी दशा/अन्तर्दशा में बड़े-छोटे भाई बहनों से संबंध उत्तम नहीं रहते । हानि होती है तथा दुःख भी मिलता है । संतान प्राप्ति में विलम्ब होता है । जातक बहुत मेहनती होता है । दाम्पत्य जीवन में कलह रहती है एवं पार्टनरशिप से घाटा मिलता है । दैनिक आय में गिरावट आती है । गुरु की महादशा में प्रोफेशनल लाइफ सेटल ही नहीं हो पाती है ।।

मीन लग्न ।। द्वादश भाव में गुरु ।। Meen Lagan ।। Guru dwadash bhav me ।।

प्रोफेशनल लाइफ में बहुत परेशानी झेलनी पड़ती है । यदि विदेश में जॉब करे तो थोड़ा उत्तम रहता है । अन्यथा हमेशा कोई ना कोई टेंशन बनी रहती है । मन परेशान रहता है । माता को अथवा माता से कष्ट प्राप्त होता है । भवन, वाहन एवं भूमि का सुख जातक को नहीं मिलता है । कोर्ट केस तथा हॉस्पिटल में खर्चा होता है । दुर्घटना का भय बना रहता है । गुरु की महदशा में व्यर्थ का खर्च बना रहता है । हर काम में रुकावट आती है ।।

मित्रों, यहाँ वर्णित व्याख्यान एक अनुमान है, गुरु के फलादेश में बलाबल के अनुसार कमी या वृद्धि हो सकता है । बलाबल की उचित जानकारी प्राप्त करने के लिए गुरु की डिग्री, षड्बल एवं नवमांश का निरिक्षण अवश्य करें । गुरु यदि ३,६,८,११,१२ भाव में से कहीं स्थित हो तो पुखराज रत्न कदापि धारण न करें ।।

गुरु जनों का सम्मान करें, पूजा पाठ में मन लगाएं, गुरूवार का व्रत रखें एवं पीले चावल का सेवन करें । ये उपाय सभी के लिए लाभदायक हैं । किसी योग्य विद्वान से कुंडली विश्लेषण आवश्य करवाएं तत्पश्चात उपाय अमल में लाएं ।।

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