मनचाही संतान प्राप्ति हेतु शीघ्र गर्भाधान के तरीके ।।

मनचाही  संतान प्राप्ति हेतु शीघ्र गर्भाधान के तरीके ।। Santan Prapti hetu Garbh Dharan Ke Tarike.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,

मित्रों, हजारों वर्ष पहले के प्रसिद्ध चिकित्सक एवं सर्जन ऋषि सुश्रुत ने अपनी पुस्तक सुश्रुत संहिता में स्पष्ट लिखा है कि मासिक स्राव के बाद 4, 6, 8, 10, 12, 14 एवं 16वीं रात्रि के गर्भाधान से पुत्र तथा 5, 7, 9, 11, 13 एवं 15वीं रात्रि के गर्भाधान से कन्या जन्म लेती है ।।

हजारों वर्ष पूर्व लिखित चरक संहिता में लिखा हुआ है, कि भगवान अत्रिकुमार के कथनानुसार स्त्री में रज की सबलता से पुत्री तथा पुरुष में वीर्य की सबलता से पुत्र पैदा होता है ।।

मित्रों, प्राचीन संस्कृत पुस्तक ‘सर्वोदय’ में भी लिखा है, कि गर्भाधान के समय स्त्री का दाहिना श्वास चले तो पुत्री और बायां श्वास चले तो पुत्र होगा ।।

Is Upay Se Pyar Shiksha And Bigada Kam Ban Jayega

यूनान के प्रसिद्ध चिकित्सक तथा महान दार्शनिक अरस्तु का कथन है, कि पुरुष और स्त्री दोनों के दाहिने अंडकोष से लड़का तथा बाएं से लड़की का जन्म होता है ।।

मित्रों, चन्द्रावती ऋषि का कथन है, कि लड़का-लड़की का जन्म गर्भाधान के समय स्त्री-पुरुष के दायां-बायां श्वास क्रिया, पिंगला-तूड़ा नाड़ी, सूर्यस्वर तथा चन्द्रस्वर की स्थिति पर निर्भर करता है ।।

कुछ विशिष्ट पंडितों तथा ज्योतिषियों का भी कहना है, कि सूर्य के उत्तरायण रहने की स्थिति में गर्भ ठहरने पर पुत्र तथा दक्षिणायन रहने की स्थिति में गर्भ ठहरने पर पुत्री जन्म लेती है ।।

उनका यह भी कहना है, कि मंगलवार, गुरुवार तथा रविवार पुरुष दिन हैं । अतः उस दिन के गर्भाधान से पुत्र होने की संभावना बढ़ जाती है । सोमवार और शुक्रवार कन्या का दिन हैं, जो पुत्री पैदा करने में सहायक होते हैं ।।

बुध और शनिवार नपुंसक दिन हैं । अतः समझदार व्यक्ति को इन दिनों का ध्यान करके ही गर्भाधान करना चाहिए ।।

जापान के सुविख्यात चिकित्सक डॉ. कताज का विश्वास है, कि जो औरत गर्भ ठहरने के पहले तथा बाद कैल्शियमयुक्त भोज्य पदार्थ तथा औषधि का इस्तेमाल करती है, उसे अक्सर लड़का तथा जो मेग्निशियमयुक्त भोज्य पदार्थ जैसे मांस, मछली, अंडा आदि का इस्तेमाल करती है, उसे लड़की पैदा होती है ।।

विश्वविख्यात वैज्ञानिक प्रजनन एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. लेण्डरम बी. शैटल्स ने हजारों अमेरिकन दंपतियों पर प्रयोग कर प्रमाणित कर दिया है, कि स्त्री में अंडा निकलने के समय से जितना करीब स्त्री को गर्भधारण कराया जाए, उतनी अधिक पुत्र होने की संभावना बनती है ।।

उनका कहना है कि गर्भधारण के समय यदि स्त्री का योनि मार्ग क्षारीय तरल से युक्त रहेगा तो पुत्र तथा अम्लीय तरल से युक्त रहेगा तो पुत्री होने की संभावना बनती है ।।

इन उपरोक्त बातों का ध्यान रखकर आप भी अपने जीवन में संतान अपनी इच्छानुसार प्राप्त कर सकते हैं । इसमें कोई संसय नहीं है, कि इतने महापुरुषों ने अपने अनुभव को बताया है तो सत्य नहीं होगा ।।

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