राशि अनुसार इन मन्त्रों के जप से आपकी शादी अवश्य हो जाएगी ।।

राशि अनुसार इन मन्त्रों के जप से आपकी शादी अवश्य हो जाएगी ।। Shadi Ke Mantra Totke.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,

मेष राशि वाले केतु के इस वैदिक या लौकिक मन्त्र का जप करें । वैदिक मंत्र- ॐ केतुं कृण्वन्नकेतवे पेशो मर्य्याऽपेशसे। समुषभ्दिरजायथाः।। अथवा पौराणिक मंत्र- ॐ पलाश पुष्प सकाशं तारका ग्रह मस्तकम्। रौद्रं रौद्रात्मकं घोरं तं केतुं प्रणमाम्यहम्।। अथवा तंत्रोक्त मंत्र- ॐ स्रां, स्रीं, स्रौं, सः केतवे नमः ।।

वृषभ राशि वाले राहु के इस वैदिक या लौकिक मन्त्र का जप करें । वैदिक मंत्र- ॐ कयानश्चित्रऽआभुवदूती सदावृधः सखा कया शचिष्ठया वृता ।। अथवा पौराणिक मंत्र- ॐ अर्धकायं महावीर्यं चन्द्रादित्य विमर्दनम्। सिंहिका गर्भ सम्भूतं तं राहुं प्रणमाम्यहम् ।। अथवा तंत्रोक्त राहु मंत्र- ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः ।।

मिथुन राशि वाले राहु के इस वैदिक या लौकिक मन्त्र का जप करें । वैदिक मंत्र- ॐ शन्नो देवी रभिष्टय आपो भवन्तु पीतये। शंय्यो रभिस्त्रवन्तु नः ।। अथवा पौराणिक मंत्र- ॐ नीलाजंन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम्। छाया मार्तण्ड सम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम् ।। अथवा तंत्रोक्त मंत्र- ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः ।।

कर्क राशि वाले राहु के इस वैदिक या लौकिक मन्त्र का जप करें । वैदिक मंत्र – ॐ अन्नात्परिस्रुतो रसं ब्रह्मणा क्षत्रं पयः सोमं प्रजापति। ऋतेन सत्यमिन्द्रियं वियान ℧ शुक्रमन्धस इन्द्रस्येन्द्रियमिदं पयोऽमृतं मधु ।। अथवा पौराणिक मंत्र – ॐ हिम कुन्द मृणालाभं दैत्यानां परमं गुरूम् सर्व शास्त्रप्रवक्तारं भार्गवं प्रणमाम्यहम् ।। अथवा तन्त्रोक्त मंत्र – ॐ द्रां, द्रीं दौं सः शुक्राय नमः ।।

सिंह राशि वाले राहु के इस वैदिक या लौकिक मन्त्र का जप करें । वैदिक मंत्र- ॐ बृहस्पते अति यदर्यो अर्हाद् द्युमद्विभाति क्रतुमज्जनेषु। यद्दीदयच्दवस ऋतप्रजात तदस्मासु द्रविणं धेहि चित्रम् ।। अथवा पुराणोक्त मंत्र- ॐ देवानां च ऋषीणां च गुरु कांचन संन्निभम्। बुद्धिभूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पतिम् ।। अथवा तंत्रोक्त मंत्र- ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः ।।

कन्या राशि वाले बुध के इस वैदिक या लौकिक मन्त्र का जप करें । वैदिक मंत्र- ॐ उद्बुध्यस्वाग्ने प्रति जागृहि त्वमिष्टापूर्ते स℧ सृजेथामयं च। अस्मिन्त्सधस्थे अध्युत्तरस्मिन् विश्वेदेवा यजमानश्च सीदत ।। अथवा पुराणोक्त बुध मंत्र- ॐ प्रियंगु कलिका श्यामं रूपेणाप्रतिमं बुधम्। सौम्यं सौम्यगुणोपेतं तं बुधं प्रणमाम्यहम् ।। अथवा तंत्रोक्त बुध मंत्र- ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः ।।

तुला राशि वाले मंगल के इस वैदिक या लौकिक मन्त्र का जप करें । वैदिक मंत्र- ॐ अग्निमूर्धा दिवः ककुत्पतिः पृथिव्या अयम्। अपा℧ रे ता℧ सिजिन्वति ।। अथवा पुराणोक्त मंत्र- ॐ धरणी गर्भ संभूतं विद्युत्कान्ति समप्रभम्।कुमारं शक्ति हस्तं ते मंगल प्रणमाम्यहम् ।। अथवा तन्त्रोक्त मंत्र- ॐ क्रां क्री क्रौं सः भौमाय नमः ।।

वृश्चिक राशि वाले चन्द्रमा के इस वैदिक या लौकिक मन्त्र का जप करें । वैदिक मंत्र– ॐइमं देवा असपत्न℧ सुवध्वं महते क्षत्राय महते ज्यैष्ठाय महते जानराज्यायेन्द्रस्येन्द्रियाय । इमममुष्य पुत्रममुष्यै पुत्रमस्यै विश वोऽमी राजा सोमोऽस्माकं ब्राह्मणाना ℧ राजा ।। अथवा…

पुराणोक्त मंत्र- ॐ दधिशंख, तुषाराम्भं क्षीरोदार्णव सम्भवम् । नमामि शशिनं सोमं शंभोः मुकुट भूषणम् ।। अथवा स्नान तथा दान के समय में इस मंत्र का जप लाभप्रद होता है । तंत्रोक्त मंत्र- ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः ।।

धनु राशि वाले सूर्य के इस वैदिक या लौकिक मन्त्र का जप करें । वेदोक्त मंत्र – ॐ आकृष्णेन रजसा वर्तमानो निवेशयन्नमृतं मत्र्यं च।हिरण्ययेन सविता रथेना देवो याति भुवनानि पश्यन् ।। अथवा पुराणोक्त मंत्र – जपा कुसुम संकाशं काशिपेयं महाद्युतिम । तमोऽरिं सर्व पापघ्नं प्रणतोऽस्मि दिवाकरम् ।। अथवा सूर्य गायत्री मंत्र – ॐ आदित्याय विद्महे भास्कराय धीमहि। तन्नो भानुः प्रचोदयात् ।।

मकर राशि वाले केतु गायत्री मन्त्र का जप करें । केतु गायत्री- ॐ पद्म पुत्राय विद्महे अमृतेशाय धीमहि तन्नो केतु प्रचोदयात् ।। अथवा राहु गायत्री मंत्र – ॐ शिरो रूपाय विद्महे अमृतेशाय धीमहि तन्नो राहुः प्रचोदयात् ।। अथवा शनि गायत्री- ॐ सूर्यपुत्राय विद्महे मृत्युरूपाय धीमहि । तन्न: सौरि: प्रचोदयात ।।

कुंभ राशि वाले शुक्र गायत्री मन्त्र का जप करें । शुक्र गायत्री मंत्र – ॐ भृगुराजाय विद्महे दिव्य देहाय धीमहि। तन्नो शुक्र प्रचोदयात् ।। अथवा गुरु गायत्री मंत्र- ॐ अंगिरो जाताय विद्महे वाचस्पतये धीमहि। तन्नो गुरु प्रचोदयात् ।। अथवा मंगल गायत्री मंत्र- ॐ अंगारकाय विद्महे शक्ति हस्ताय धीमहि। तन्नो भौमः प्रचोदयात् ।।

मीन राशि वाले चन्द्रमा के इस गायत्री मन्त्र का जप करें । चन्द्र गायत्री मंत्र- ॐ अमृतांगाय विद्महे कला रूपाय धीमहि। तन्नो सोमः प्रचोदयात् ।। अथवा सूर्य गायत्री मंत्र – ॐ आदित्याय विद्महे भास्कराय धीमहि। तन्नो भानुः प्रचोदयात् ।।

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