नौ ग्रहों से शनि का सम्बन्ध, स्वाभाव एवं प्रशन्न करने का सरल उपाय ।।

नौ ग्रहों से शनि का सम्बन्ध, स्वाभाव एवं प्रशन्न करने का सरल उपाय ।। Shani Ka Grahon Se Sambandh And Prabhav.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,

मित्रों, ज्योतिष में नौ ग्रह सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु बताए गए हैं । इन ग्रहों में बुध और शुक्र शनि के मित्र ग्रह हैं । सूर्य, चंद्र और मंगल, ये तीनों शनि के शत्रु ग्रह माने गए हैं । इनके अलावा गुरु से शनि सम भाव रखता है ।।

शेष दो ग्रह राहु और केतु को छाया ग्रह माना जाता है । इन दोनों ग्रहों से भी शनि देव मैत्री भाव ही रखते हैं । शनि देव के स्वरूप की बात करें तो शनिदेव का शरीर इंद्रनीलमणि के समान बताया गया है । इनका रंग श्यामवर्ण माना जाता है ।।

शनि के मस्तक पर स्वर्णमुकुट शोभित रहता है एवं नीले वस्त्र धारण किए रहते हैं । शनिदेव का वाहन कौआं है तथा शनि की चार भुजाएं हैं । इनके एक हाथ में धनुष, एक हाथ में बाण, एक हाथ में त्रिशूल और एक हाथ में वरमुद्रा सुशोभित है ।।

शनिदेव का तेज करोड़ों सूर्य के समान बताया गया हैं । शनिदेव की प्रकृति की बात अगर करें तो शनिदेव न्याय, श्रम और प्रजा के देवता हैं । यदि किसी व्यक्ति के कर्म पवित्र हैं तो शनि सुखी-समृद्धि जीवन प्रदान करते हैं । साथ ही किसानों के लिए शनि मददगार होते हैं ।।

गरीब और असहाय लोगों पर शनि की विशेष कृपा रहती है । जो लोग किसी गरीब को परेशान करते हैं, उन्हें शनि के कोप का सामना करना पड़ता है । शनि पश्चिम दिशा के स्वामी माने जाते हैं । वायु इनका तत्व है, साथ ही, शनि व्यक्ति के शारीरिक बल को भी प्रभावित करते हैं ।।

शनिदेव को प्रशन्न करने के लिये इस मंत्र का प्रयोग कर सकते हैं । शनि आराधना के लिए कई मंत्र बताए गए हैं । परन्तु सबसे सरल और प्रभावी मंत्र इस प्रकार है- मंत्र: ऊँ शं श्नैश्चराय नम: । इस मंत्र से शनि आराधना करने पर शनि बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं । रुके हुए कार्य बनने लगते हैं ।।

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