अथ श्री गुरु अष्टोत्तरशत नामावलि: ।।

ॐ सद्गुरवे नमः ॥
ॐ अज्ञाननाशकाय नमः ॥
ॐ अदम्भिने नमः ॥
ॐ अद्वैतप्रकाशकाय नमः ॥
ॐ अनपेक्षाय नमः ॥
ॐ अनसूयवे नमः ॥
ॐ अनुपमाय नमः ॥
ॐ अभयप्रदात्रे नमः ॥
ॐ अमानिने नमः ॥
ॐ अहिंसामूर्तये नमः ॥
ॐ अहैतुक-दयासिन्धवे नमः ॥
ॐ अहंकार-नाशकाय नमः ॥
ॐ अहंकार-वर्जिताय नमः ॥
ॐ आचार्येन्द्राय नमः ॥
ॐ आत्मसन्तुष्टाय नमः ॥
ॐ आनन्दमूर्तये नमः ॥
ॐ आर्जवयुक्ताय नमः ॥
ॐ उचितवाचे नमः ॥
ॐ उत्साहिने नमः ॥
ॐ उदासीनाय नमः ॥
ॐ उपरताय नमः ॥
ॐ ऐश्वर्ययुक्ताय नमः ॥

 

 

 

ॐ कृतकृत्याय नमः ॥
ॐ क्षमावते नमः ॥
ॐ गुणातीताय नमः ॥
ॐ चारुवाग्विलासाय नमः ॥
ॐ चारुहासाय नमः ॥
ॐ छिन्नसंशयाय नमः ॥
ॐ ज्ञानदात्रे नमः ॥
ॐ ज्ञानयज्ञतत्पराय नमः ॥
ॐ तत्त्वदर्शिने नमः ॥
ॐ तपस्विने नमः ॥
ॐ तापहराय नमः ॥
ॐ तुल्यनिन्दास्तुतये नमः ॥
ॐ तुल्यप्रियाप्रियाय नमः ॥
ॐ तुल्यमानापमानाय नमः ॥
ॐ तेजस्विने नमः ॥
ॐ त्यक्तसर्वपरिग्रहाय नमः ॥
ॐ त्यागिने नमः ॥
ॐ दक्षाय नमः ॥
ॐ दान्ताय नमः ॥
ॐ दृढव्रताय नमः ॥
ॐ दोषवर्जिताय नमः ॥
ॐ द्वन्द्वातीताय नमः ॥
ॐ धीमते नमः ॥
ॐ धीराय नमः ॥
ॐ नित्यसन्तुष्टाय नमः ॥
ॐ निरहंकाराय नमः ॥
ॐ निराश्रयाय नमः ॥
ॐ निर्भयाय नमः ॥
ॐ निर्मदाय नमः ॥
ॐ निर्ममाय नमः ॥
ॐ निर्मलाय नमः ॥
ॐ निर्मोहाय नमः ॥
ॐ निर्योगक्षेमाय नमः ॥

 

 

ॐ निर्लोभाय नमः ॥
ॐ निष्कामाय नमः ॥
ॐ निष्क्रोधाय नमः ॥
ॐ निःसंगाय नमः ॥
ॐ परमसुखदाय नमः ॥
ॐ पण्डिताय नमः ॥
ॐ पूर्णाय नमः ॥
ॐ प्रमाणप्रवर्तकाय नमः ॥
ॐ प्रियभाषिणे नमः ॥
ॐ ब्रह्मकर्मसमाधये नमः ॥
ॐ ब्रह्मात्मनिष्ठाय नमः ॥
ॐ ब्रह्मात्मविदे नमः ॥
ॐ भक्ताय नमः ॥
ॐ भवरोगहराय नमः ॥
ॐ भुक्तिमुक्तिप्रदात्रे नमः ॥
ॐ मंगलकर्त्रे नमः ॥
ॐ मधुरभाषिणे नमः ॥
ॐ महात्मने नमः ॥
ॐ महावाक्योपदेशकर्त्रे नमः ॥
ॐ मितभाषिणे नमः ॥
ॐ मुक्ताय नमः ॥
ॐ मौनिने नमः ॥
ॐ यतचित्ताय नमः ॥
ॐ यतये नमः ॥
ॐ यद्दृच्छालाभसन्तुष्टाय नमः ॥
ॐ युक्ताय नमः ॥
ॐ रागद्वेषवर्जिताय नमः ॥
ॐ विदिताखिलशास्त्राय नमः ॥
ॐ विद्याविनयसम्पन्नाय नमः ॥
ॐ विमत्सराय नमः ॥
ॐ विवेकिने नमः ॥
ॐ विशालहृदयाय नमः ॥
ॐ व्यवसायिने नमः ॥
ॐ शरणागतवत्सलाय नमः ॥

 

 

ॐ शान्ताय नमः ॥
ॐ शुद्धमानसाय नमः ॥
ॐ शिष्यप्रियाय नमः ॥
ॐ श्रद्धावते नमः ॥
ॐ श्रोत्रियाय नमः ॥
ॐ सत्यवाचे नमः ॥
ॐ सदामुदितवदनाय नमः ॥
ॐ समचित्ताय नमः ॥
ॐ समाधिक-वर्जिताय नमः ॥
ॐ समाहितचित्ताय नमः ॥
ॐ सर्वभूतहिताय नमः ॥
ॐ सिद्धाय नमः ॥
ॐ सुलभाय नमः ॥
ॐ सुशीलाय नमः ॥
ॐ सुहृदे नमः ॥
ॐ सूक्ष्मबुद्धये नमः ॥
ॐ संकल्पवर्जिताय नमः ॥
ॐ सम्प्रदायविदे नमः ॥
ॐ स्वतन्त्राय नमः ॥

।। इति श्री गुरु अष्टोत्तरशत नामावलि समाप्तः ।।

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