अथ श्री शुक्र ग्रह अष्टोत्तरशत नामावलिः ।।

शुक्र ग्रह बीज मन्त्र – ॐ द्राँ द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः ।।

 

 

ॐ शुक्राय नमः ॥
ॐ शुचये नमः ॥
ॐ शुभगुणाय नमः ॥
ॐ शुभदाय नमः ॥
ॐ शुभलक्षणाय नमः ॥
ॐ शोभनाक्षाय नमः ॥
ॐ शुभ्रवाहाय नमः ॥
ॐ शुद्धस्फटिकभास्वराय नमः ॥

 

 

ॐ दीनार्तिहरकाय नमः ॥
ॐ दैत्यगुरवे नमः ||
ॐ देवाभिवन्दिताय नमः ॥
ॐ काव्यासक्ताय नमः ॥
ॐ कामपालाय नमः ॥
ॐ कवये नमः ॥
ॐ कल्याणदायकाय नमः ॥
ॐ भद्रमूर्तये नमः ॥
ॐ भद्रगुणाय नमः ॥
ॐ भार्गवाय नमः ॥

 

 

ॐ भक्तपालनाय नमः ॥
ॐ भोगदाय नमः ||
ॐ भुवनाध्यक्षाय नमः ॥
ॐ भुक्तिमुक्तिफलप्रदाय नमः ॥
ॐ चारुशीलाय नमः ॥
ॐ चारुरूपाय नमः ॥
ॐ चारुचन्द्रनिभाननाय नमः ॥
ॐ निधये नमः ॥
ॐ निखिलशास्त्रज्ञाय नमः ॥
ॐ नीतिविद्याधुरंधराय नमः ॥

 

 

 

ॐ सर्वलक्षणसंपन्नाय नमः ॥
ॐ सर्वापद्गुणवर्जिताय नमः ||
ॐ समानाधिकनिर्मुक्ताय नमः ॥
ॐ सकलागमपारगाय नमः ॥
ॐ भृगवे नमः ॥
ॐ भोगकराय नमः ॥
ॐ भूमिसुरपालनतत्पराय नमः ॥
ॐ मनस्विने नमः ॥
ॐ मानदाय नमः ॥
ॐ मान्याय नमः ॥

 

 

 

ॐ मायातीताय नमः ॥
ॐ महायशसे नमः ||
ॐ बलिप्रसन्नाय नमः ॥
ॐ अभयदाय नमः ॥
ॐ बलिने नमः ॥
ॐ सत्यपराक्रमाय नमः ॥
ॐ भवपाशपरित्यागाय नमः ॥
ॐ बलिबन्धविमोचकाय नमः ॥
ॐ घनाशयाय नमः ॥
ॐ घनाध्यक्षाय नमः ॥

 

 

 

ॐ कम्बुग्रीवाय नमः ॥
ॐ कलाधराय नमः ||
ॐ कारुण्यरससंपूर्णाय नमः ||
ॐ कल्याणगुणवर्धनाय नमः ॥
ॐ श्वेताम्बराय नमः ॥
ॐ श्वेतवपुषे नमः ॥
ॐ चतुर्भुजसमन्विताय नमः ॥
ॐ अक्षमालाधराय नमः ॥
ॐ अचिन्त्याय नमः ॥
ॐ अक्षीणगुणभासुराय नमः ॥

 

 

 

ॐ नक्षत्रगणसंचाराय नमः ॥
ॐ नयदाय नमः ||
ॐ नीतिमार्गदाय नमः ॥
ॐ वर्षप्रदाय नमः ||
ॐ हृषीकेशाय नमः ॥
ॐ क्लेशनाशकराय नमः ॥
ॐ कवये नमः ॥
ॐ चिन्तितार्थप्रदाय नमः ॥
ॐ शान्तमतये नमः ॥
ॐ चित्तसमाधिकृते नमः ॥

 

 

 

ॐ आधिव्याधिहराय नमः ॥
ॐ भूरिविक्रमाय नमः ||
ॐ पुण्यदायकाय नमः ॥
ॐ पुराणपुरुषाय नमः ॥
ॐ पूज्याय नमः ॥
ॐ पुरुहूतादिसन्नुताय नमः ॥
ॐ अजेयाय नमः ॥
ॐ विजितारातये नमः ॥
ॐ विविधाभरणोज्ज्वलाय नमः ॥
ॐ कुन्दपुष्पप्रतीकाशाय नमः ॥

 

 

 

ॐ मन्दहासाय नमः ॥
ॐ महामतये नमः ||
ॐ मुक्ताफलसमानाभाय नमः ॥
ॐ मुक्तिदाय नमः ॥
ॐ मुनिसन्नुताय नमः ॥
ॐ रत्नसिंहासनारूढाय नमः ॥
ॐ रथस्थाय नमः ॥
ॐ रजतप्रभाय नमः ॥
ॐ सूर्यप्राग्देशसंचाराय नमः ॥
ॐ सुरशत्रुसुहृदे नमः ॥

 

 

 

ॐ कवये नमः ॥
ॐ तुलावृषभराशीशाय नमः ||
ॐ दुर्धराय नमः ॥
ॐ धर्मपालकाय नमः ॥
ॐ भाग्यदाय नमः ॥
ॐ भव्यचारित्राय नमः ॥
ॐ भवपाशविमोचकाय नमः ॥
ॐ गौडदेशेश्वराय नमः ॥
ॐ गोप्त्रे नमः ॥
ॐ गुणिने नमः ॥

 

 

 

ॐ गुणविभूषणाय नमः ॥
ॐ ज्येष्ठानक्षत्रसंभूताय नमः ||
ॐ ज्येष्ठाय नमः ॥
ॐ श्रेष्ठाय नमः ॥
ॐ शुचिस्मिताय नमः ॥
ॐ अपवर्गप्रदाय नमः ॥
ॐ अनन्ताय नमः ॥
ॐ सन्तानफलदायकाय नमः ॥
ॐ सर्वैश्वर्यप्रदाय नमः ॥
ॐ सर्वगीर्वाणगणसन्नुताय नमः ॥

 

 

 

॥ इति शुक्र अष्टोत्तरशतनामावलिः सम्पूर्णम् ॥

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