शुक्र, शनि, राहू और केतु के नकारात्मक प्रभाव एवं उसके निवारण के उपाय ।।

शुक्र, शनि, राहू और केतु के नकारात्मक प्रभाव एवं उसके निवारण के उपाय ।। Sukra Shani Rahu And Ketu Ke Dushprabhav And Upay.

हैल्लो फ्रेण्ड्सzzz,

मित्रों, मैंने कल के अपने आर्टिकल में सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध और गुरु के विषय में आपलोगों को विस्तृत बताया था । आज हम शुक्र एवं उसके आगे बाकी के सभी ग्रहों के विषय में बातें करेंगे ।।

जैसा कि आप सभी जानते हैं, कि शुक्र भी दो राशिओं का स्वामी है, वृषभ और तुला । शुक्र की अवस्था तरुण है, जो कि किशोरावस्था का सूचक है । मौज मस्ती, घूमना फिरना, दोस्त-मित्र इसके प्रमुख लक्षण है । कुंडली में शुक्र के अशुभ प्रभाव में होने पर मन में चंचलता बनी रहती है, एकाग्र नहीं हो पाती ।।

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खान पान में अरुचि, भोग विलास में रूचि और धन का नाश करवाता है । अँगूठे का रोग होता है, अँगूठे में दर्द बना रहता है । चलते समय अगूँठे को चोट पहुँच सकती है । चर्म रोग हो जाता है । स्वप्न दोष की शिकायत रहती है ।।

कुण्डली में शुक्र अशुभ हो तो शुभ फल प्राप्ति हेतु माँ लक्ष्मी की सेवा आराधना करनी चाहिये । श्री सूक्त का पाठ करें, खोये के मिष्टान्न एवं मिश्री का भोग लगायें । सपत्निक किसी ब्राह्मण को भोजन एवं उनकी सेवा करें ।।

स्वयं के भोजन में से गाय को प्रतिदिन कुछ हिस्सा अवश्य दें । कन्या भोजन करायें, ज्वार का दान करें । गरीब बच्चों एवं विद्यार्थिओं को अध्यन सामग्री का वितरण करें । नि:सहाय, निराश्रय के पालन-पोषण का जिम्मा ले सकते हैं । अन्न का दान करें और ॐ शुं शुक्राय नमः का १०८ बार नित्य जप करें ।।

मित्रों, शनि की बात करें तो शनि की गति धीमी होती है । इसके दूषित होने पर अच्छे से अच्छे काम में गतिहीनता आ जाती है । कुंडली में शनि के अशुभ प्रभाव में होने पर मकान या मकान का हिस्सा गिर जाता या क्षतिग्रस्त हो जाता है ।।

अशुभ शनि के वजह से अंगों के बाल झड़ जाते हैं । शनिदेव की भी दो राशियाँ होती है, मकर और कुम्भ । शरीर में विशेषकर निचले हिस्से में अर्थात कमर से नीचे की हड्डी या स्नायुतंत्र से सम्बंधित रोग लग जाते है । वाहन से हानि या क्षति हो सकती है । काले धन या संपत्ति का नाश हो जाता है । अचानक आग लग सकती है या दुर्घटना हो सकती है ।।

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ऐसे में हनुमान जी की आराधना करना, हनुमान जी को चोला अर्पित करना, हनुमान मंदिर में ध्वजा दान करना, बंदरो को चने खिलाना, हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, हनुमानाष्टक, सुंदरकांड का पाठ और ॐ हं हनुमते नमः का १०८ बार नित्य जप करना श्रेयस्कर होता है ।।

नाव की कील या काले घोड़े की नाल धारण कर सकते हैं । यदि कुंडली में शनि लग्न में हो तो भिखारी को ताँबे का सिक्का या बर्तन कभी न दें । यदि देंगे तो पुत्र को कष्ट होगा । यदि शनि आयु भाव में स्थित हो तो धर्मशाला आदि न बनवाएँ ।।

कौवे को प्रतिदिन रोटी खिलाएँ । तेल में अपना मुख देख वह तेल दान कर दें अर्थात अपनी छाया का दान करें । लोहा, काली उड़द, कोयला, तिल, जौ, काले वस्त्र, चमड़ा, काला सरसों आदि का दान करें ।।

मित्रों, राहू की बात करें तो राहू मानसिक तनाव, आर्थिक नुकशान, स्वयं को ले कर ग़लतफहमी, आपसी तालमेल की कमी, बात बात पर अपना आपा खो देना, वाणी का कठोर होना एवं अपशब्द बोलना ।।

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कुंडली में राहु के अशुभ होने पर हाथ के नाखून अपने आप टूटने लगते हैं । राजक्ष्यमा रोग के लक्षण प्रकट होते हैं । वाहन दुर्घटना, उदर कस्ट, मस्तिस्क में पीड़ा अथवा दर्द रहना, भोजन में बाल दिखना जैसे लक्षण दीखते हैं ।।

इतना ही नहीं अपयश की प्राप्ति, सम्बन्धों का स्वतः ही ख़राब होना तथा दिमागी संतुलन ठीक नहीं रहता है । शत्रुओं से मुश्किलें बढ़ने की संभावना बनी रहती है । जल स्थान में कोई न कोई समस्याओं का आना आदि ख़राब राहू के लक्षण हैं ।।

इसका उपाय ऐसे कर सकते हैं, जैसे गोमेद धारण करना । दुर्गा, शिव एवं हनुमान जी की आराधना करें । तिल, जौ किसी हनुमान मंदिर में या किसी यज्ञ स्थान पर दान करें । जौ या अनाज को दूध में धोकर बहते पानी में बहाएँ, कोयले को पानी में बहाएँ, मूली दान में देवें, भंगी को शराब, माँस दान में देने से भी राहू का अशुभ प्रभाव कम हो जाता है ।।

सिर में चोटी बाँधकर रखें । सोते समय सर के पास किसी पत्र में जल भर कर रखें और सुबह किसी पेड़ में डाल दें यह प्रयोग 43 दिन करें । इसके साथ हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, हनुमानाष्टक, हनुमान बाहुक, सुंदरकांड का पाठ करें । ॐ रां राहवे नमः का १०८ बार नित्य जप करना लाभकारी होता है ।।

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मित्रों, कुंडली में केतु के अशुभ प्रभाव में होने पर चर्म रोग, मानसिक तनाव, आर्थिक नुकशान, स्वयं को ले कर ग़लतफहमी, आपसी तालमेल में कमी, बात बात पर आपा खोना, वाणी का कठोर होना एवं अप्शब्द बोलना, जोड़ों का रोग या मूत्र एवं किडनी संबंधी रोग हो जाता है ।।

अशुभ केतु के वजह से संतान को पीड़ा होती है । वाहन दुर्घटना, उदर कष्ट, मस्तिस्क में पीड़ा अथवा दर्द रहना, अपयश की प्राप्ति, सम्बन्धों का ख़राब होना, दिमागी संतुलन ठीक नहीं रहता है, शत्रुओं से मुश्किलें बढ़ने की संभावना बनी रहती है ।।

इसके लिए माता दुर्गा, भगवान शिव एवं हनुमान जी की आराधना करें । तिल, जौ किसी हनुमान मंदिर में या किसी यज्ञ स्थान पर दान करें । कान छिदवाएँ, सोते समय सर के पास किसी बर्तन में जल भर कर रखें और सुबह किसी पेड़ में डाल दें और यह प्रयोग 43 दिन करें ।।

इसके साथ हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, हनुमानाष्टक, हनुमान बाहुक, सुंदरकांड का पाठ करें । ॐ कें केतवे नमः का १०८ बार नित्य जप करना लाभकारी होता है । अपने खाने में से कुत्ते, कौए को हिस्सा दें । तिल या कपिला गाय दान में दें । पंछियों को बाजरा दें, चिटिओं के लिए भोजन की व्यस्था करना अति महत्व्यपूर्ण होता है ।।

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मित्रों, कभी भी किसी भी उपाय को 43 दिन करना चाहिये तभी फल की प्राप्ति संभव होती है । मंत्रो के जप के लिए रुद्राक्ष की माला सबसे उचित मानी गई है । इन उपायों का गोचरवश प्रयोग करके कुण्डली में अशुभ प्रभाव में स्थित ग्रहों को शुभ प्रभाव में लाया जा सकता है ।।

सम्बंधित ग्रहों के देवताओं की आराधना और उनके मन्त्रों का जप, उनके सामग्रियों का दान वो भी उनकी होरा, उनके नक्षत्र में करना अत्यधिक लाभप्रद होते है । लेकिन उससे भी पहले किसी विद्वान् ज्योतिषी से अपनी कुण्डली दिखाकर सलाह लेकर उपाय करना ज्यादा श्रेयस्कर होता है ।।

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