सातवाँ “तक्षक” नामक कालसर्प योग ।।

सातवाँ “तक्षक” नामक कालसर्प योग ।। 7.Takshak Namak KaalSarpa Dosha

कालसर्प दोष के सभी भेदों में से सातवें ”तक्षक नामक कालसर्प दोष” को उदाहरण सहित एवं कुंडली प्रस्तुत करते हुए समझाने का प्रयास कर रहे है शायद आपलोगों को अच्छी तरह समझ में आये ।।

राहु सप्तम भाव में और केतु लग्न स्थान में हो तो तक्षक नामक कालसर्प योग बनता है । कालसर्प योग की शास्त्रीय परिभाषा में इस प्रकार का अनुदित योग परिगणित नहीं है । लेकिन व्यवहार में इस प्रकार के योग का भी संबंधित जातकों पर अशुभ प्रभाव पड़ता देखा जाता है ।।

तक्षक नामक कालसर्प योग से पीड़ित जातकों को पैतृक संपत्ति का सुख नहीं मिल पाता । या तो उसे पैतृक संपत्ति मिलती ही नहीं और मिलती है तो वह उसे किसी अन्य को दान दे देता है अथवा बर्बाद कर देता है ।।

Takshak Namak KaalSarpa Dosha

ऐसे जातक प्रेम प्रसंग में भी असफल होते देखे जाते हैं । गुप्त प्रसंगों में भी उन्हें धोखा खाना पड़ता है । वैवाहिक जीवन सामान्य रहते हुए भी कभी-कभी संबंध इतना तनावपूर्ण हो जाता है कि अलगाव तक कि नौबत आ जाती है ।।

जातक को अपने घर के अन्य सदस्यों की भी यथेष्ट सहानुभूति नहीं मिल पाती । साझेदारी में उसे नुकसान होता है तथा समय-समय पर उसे शत्रु षडयंत्रों का शिकार भी बनना पड़ता है । जुए, सट्टे व लाटरी की प्रवृत्ति उस पर हावी रहती है जिससे वह बर्बादी तक के कगार पर पहुंच जाता है ।।

संतानहीनता अथवा संतान से मिलने वाली पीड़ा उसे निरंतर क्लेश देती रहती है । उसे गुप्तरोग की पीड़ा भी झेलनी पड़ती है । किसी को दिया हुआ धन भी उसे समय पर वापस नहीं मिलता । यदि यह जातक अपने जीवन में एक बात करें कि अपना भलाई न सोच कर ओरों का भी हित सोचना शुरु कर दें साथ ही अपने मान-सम्मान के दूसरों को नीचा दिखाना छोड़ दें तो उपरोक्त समस्याएं लगभग नहीं आती ।।

दोष निवारण के कुछ सरल उपाय:-

१.कालसर्प दोष निवारक यंत्र घर में स्थापित करके, इसका नियमित पूजन करें ।।

२.सवा महीने जौ के दाने पक्षियों को खिलाएं ।।

३.देवदारु, सरसों तथा लोहवान – इन तीनों को उबालकर एक बार स्नान करें ।।

४.शुभ मुहूर्त में बहते पानी में मसूर की दाल सात बार प्रवाहित करें और उसके बाद लगातार पांच मंगलवार को व्रत रखते हुए हनुमान जी की प्रतिमा पर चमेली में घुला सिंदूर अर्पित करें और बूंदी के लड्डू का भोग लगाकर प्रसाद वितरित करें । अंतिम मंगलवार को सवा पांव सिंदूर, सवा हाथ लाल वस्त्र और सवा किलो बताशा तथा बूंदी के लड्डू का भोग लगाकर प्रसाद बांटे ।।

५.१०८ विल्वपत्रों पर केशर+चन्दन मिश्रित कर उससे राम लिखकर शिवलिंग की विधिवत पूजा करने के उपरांत सोमवार को चढ़ाए । ऐसा कम से कम ग्यारह सोमवार तक रेग्युलर करे ।।

इस प्रकार के छोटे-छोटे उपायों से इस प्रकार के दोषों से छुटकारा मिलता है और जीवन में सुख-शान्ति तथा व्यवसाय में उन्नति प्राप्त होती है ।।

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