दरिद्रता मिटाने वाली माँ अन्नपूर्णा की कथा-पूजा विधि।। Ma Annapurna Ki Katha-Pooja.
मित्रों, हृषिकेश पाञ्चांग (काशी विश्वनाथ पाञ्चांग) के अनुसार हर वर्ष मार्गशीर्ष पूर्णिमा को अन्नपूर्णा जयंती मनाई जाती है। इस दिन मां अन्नपूर्णा की पूजा-उपासना की जाती है। मान्यता है, कि प्रतिदिन विधि पूर्वक मां अन्नपूर्णा की पूजा करने से घर में विपरीत परिस्थिति में भी अन्न की कमी नहीं होती है। शास्त्रानुसार अन्न का सम्मान और ध्यान रखना चाहिए। भूलकर भी अन्न का अपमान नहीं करना चाहिए।।
साथ ही जितनी भूख हो, उतना ही भोजन परोसना या लेना चाहिए। भूलकर भी कभी अन्न को फेंकना नहीं चाहिए। अन्न को बरबाद करने से मां अन्नपूर्णा रूष्ट हो जाती हैं। इससे घर की लक्ष्मी भी चली जाती है और घर में दरिद्रता का वास होने लगता है। उपनिषदों में लिखा है - "अन्नाद्वै ब्रह्म" अर्थात ईश्वर का साक्षाद रूप अन्न है।।
पुराणों में मां अन्नपूर्णा की उत्पत्ति के बारे में विस्तार से बताया गया है। हमारे काशी में घर-घर में यह कहावत प्रसिद्ध है, कि एक बार पृथ्वी पर अन्न की कमी हो गई। इससे पृथ्वी पर हाहाकार मच गया। आधुनिक समय में वैज्ञानिकों का कहना है, कि आने वाले समय में दुनिया को अन्न प्रलय से गुजरना पड़ सकता है। उस समय पृथ्वी वासी ने त्रिदेव की उपासना कर उन्हें अन्न प्रलय की जानकारी दी।।
इसके पश्चात, आदिशक्ति मां पार्वती और भगवान शिव पृथ्वी लोक पर प्रकट हुए। प्रकृति की अनुपम रचना पर रहने वाले लोगों को दुखी देखकर मां पार्वती ने अन्नपूर्णा का स्वरूप ग्रहण कर भगवान् शिव को दान में अन्न दिया। वहीं, भगवान शिव ने अन्न को पृथ्वी वासियों में वितरित कर दिया। कालांतर में अन्न को कृषि में उपयोग किया गया। तब जाकर अन्न प्रलय समाप्त हुआ। अतः इस दिन से माता अन्नपूर्णा जयंती मनाई जाती है।।
यह घटना मार्गशीर्ष शुक्ल पुर्णिमा की है इसलिए प्रतिवर्ष मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि के दिन ही अन्नपूर्णा जयंती मनाई जाती है। इस दिन मां अन्नपूर्णा की पूजा की जाती है। माना जाता है, कि मां अन्नपूर्णा मां पार्वती का ही रूप हैं। जिन्होंने धरती पर अन्न की कमी की पूर्ति के लिए अन्नपूर्णा रूप धारण किया था। वो भगवान शिव की पत्नी के रूप में काशी में विराजती हैं। इसीलिये कहा जाता है, कि काशी में रहने वाला इंसान कभी भी भूखा नहीं रहता है।।
इस वर्ष 2021 में यह शुभ दिन 19 दिसंबर को है। वैसे पूर्णिमा शनिवार को ही लग जायेगी, इसलिए कहीं-कहीं अन्नपूर्णा जयंती 18 दिसंबर को भी मनाई जा रही है। लेकिन हमारे काशी में मां अन्नपूर्णा की जंयती रविवार को ही मनाया जाएगा। अन्नपूर्णा जयंती पर माँ अन्नपूर्णा जी कि विशेष आरती करनी चाहिए, ऐसा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।।
माँ अन्नपूर्णा की पूजा विधि।। Mata Ki Puja Vidhi.
इस दिन प्रातः काल उठकर सबसे पहले माता अन्नपूर्णा को प्रणाम करें। इसके बाद गृह के रसोई की साफ़-सफाई करें। मान्यता है, कि जो स्त्री घर के रसोई को साफ रखती हैं और अन्न का सम्मान करती हैं। उनके घर में मां अन्नपूर्णा वास करती हैं। अब गंगा जल युक्त पानी से स्नान कर स्वच्छ कपड़े धारण करें। माता के लिए पकवान पकाएं।।
उसके बाद मां अन्नपूर्णा यानी मां पार्वती और भगवान शिवजी की पूजा विधि पूर्वक करें। मां अन्नपूर्णो का 16 श्रृंगार कीजिए। सच्चे मन और पूरी आस्था से उनकी प्रार्थना करें। उसके बाद माता को हलवा-पूड़ी एवं अनेकों पकवानों का भोग लगाएं। साथ ही घर में पकें भोजन माता को अर्पित करें। अंत में आरती अर्चना कर घर में मां के विराजने की कामना करें। व्रती शारीररिक क्षमता अनुसार दिनभर व्रत रख सकती हैं। फिर माता की आरती करें।।
अन्नपूर्णा जी की आरती।। Ma Annapurna Ki Aarati.
बारम्बार प्रणाम, मैया बारम्बार प्रणाम। जो नहीं ध्यावे तुम्हें अम्बिके, कहां उसे विश्राम।। अन्नपूर्णा देवी नाम तिहारो, लेत होत सब काम॥ बारम्बार प्रणाम, मैया बारम्बार प्रणाम।।
प्रलय युगान्तर और जन्मान्तर, कालान्तर तक नाम। सुर सुरों की रचना करती, कहाँ कृष्ण कहाँ राम॥ बारम्बार प्रणाम, मैया बारम्बार प्रणाम।।
चूमहि चरण चतुर चतुरानन, चारु चक्रधर श्याम। चंद्रचूड़ चन्द्रानन चाकर, शोभा लखहि ललाम॥ बारम्बार प्रणाम, मैया बारम्बार प्रणाम।।
देवि देव! दयनीय दशा में, दया-दया तब नाम। त्राहि-त्राहि शरणागत वत्सल, शरण रूप तब धाम॥ बारम्बार प्रणाम, मैया बारम्बार प्रणाम।।
श्रीं, ह्रीं श्रद्धा श्रीं, ऐं विद्या, श्री क्लीं कमला काम। कांति, भ्रांतिमयी, कांति शांतिमयी, वर दे तू निष्काम॥ बारम्बार प्रणाम, मैया बारम्बार प्रणाम।।
॥ माता अन्नपूर्णा की जय ॥
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