पञ्चांग 25 अप्रैल 2026 दिन शनिवार।। Panchang 25 April 2026

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पञ्चांग 25 अप्रैल 2026 दिन शनिवार।। Panchang 25 April 2026

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आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 25 अप्रैल 2026 दिन शनिवार।।

मित्रों, तारीख 25 अप्रैल 2026 दिन शनिवार को वैशाख मास के शुक्ल पक्ष कि नवमी तिथि है। आज सीता नवमी का पवित्र दिवस है। अर्थात आज माता सीता की जन्म जयन्ती अर्थात जन्मोत्सव है। आज सम्पूर्ण दिवस रवियोग है। आज शनिवार की नवमी तिथि होने से सिद्धयोग का निर्माण हो जाता है। आज पूर्वदिशा में बुध देवता अस्त हो जायेंगे। आप सभी सनातनियों को "सीता नवमी अर्थात माता सीता के जन्मोत्सव" की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनायें एवं अनन्त-अनन्त बधाइयाँ।।

हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी), आज के योग और आज के करण। आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातकों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव ही सर्वश्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो। ऐसी मेरी आप सभी आज के अधिष्ठात्री देवों से हार्दिक प्रार्थना है।।

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वैदिक सनातन हिन्दू पञ्चांग, Vedic Sanatan Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi), 2:- वार (Day), 3:- नक्षत्र (Nakshatra), 4:- योग (Yog) और 5:- करण (Karan).

पञ्चांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग का श्रवण करते थे। शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।।

नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन-श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पञ्चांग को देखना, पढ़ना एवं सुनना चाहिए।।

पञ्चांग 25 अप्रैल 2026 दिन शनिवार।। Panchang 25 April 2026

आज का पञ्चांग 25 अप्रैल 2026 दिन शनिवार।।
Aaj ka Panchang 25 April 2026.

विक्रम संवत् - 2083.

संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर - रौद्र.

शक - 1948.

अयन – सौम्यायनम्.

गोल - याम्य.

ऋतु – बसन्त.

मास - वैशाख.

पक्ष - शुक्ल.

गुजराती पंचांग के अनुसार – वैशाख शुक्ल पक्ष.

Panchang 25 March 2026

तिथि - नवमी 18:29 PM बजे तक उपरान्त दशमी तिथि है।।

नक्षत्र - आश्लेषा 20:05 PM तक उपरान्त मघा नक्षत्र है।।

योग - गंड 23:44 PM तक उपरान्त वृद्धि योग है।।

करण - बालव 06:52 AM तक उपरान्त कौलव 18:29 PM तक उपरान्त तैतिल करण है।।

चन्द्रमा - कर्क राशि पर 20:05 PM तक उपरान्त सिंह राशि पर।।

सूर्य – मीन राशि एवं रेवती नक्षत्र पर गोचर कर रहे हैं।।

मुम्बई सूर्योदय - प्रातः 06:14:04

मुम्बई सूर्यास्त - सायं 18:58:17

वाराणसी सूर्योदय - प्रातः 05:35:35

वाराणसी सूर्यास्त - सायं 18:25:52

राहुकाल (अशुभ) - सुबह 09:25 बजे से 11:01 बजे तक।।

विजय मुहूर्त (शुभ) - दोपहर 12.24 बजे से 12.48 बजे तक।।

Panchang 25 March 2026

नवमी तिथि विशेष - नवमी तिथि को काशीफल (कोहड़ा एवं कद्दू) एवं दशमी को परवल खाना अथवा दान देना भी वर्जित अथवा त्याज्य होता है। नवमी तिथि एक उग्र एवं कष्टकारी तिथि मानी जाती है। इस नवमी तिथि की अधिष्ठात्री देवी माता दुर्गा जी हैं। यह नवमी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह नवमी तिथि शुक्ल पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है। नवमी तिथि के दिन लौकी खाना निषेध बताया गया है। क्योंकि नवमी तिथि को लौकी का सेवन गौ-मांस के समान बताया गया है।।

नवमी तिथि में माँ दुर्गा कि पूजा गुडहल अथवा लाल गुलाब के फुल करें। साथ ही माता को पूजन के क्रम में लाल चुनरी चढ़ायें। पूजन के उपरान्त दुर्गा सप्तशती के किसी भी एक सिद्ध मन्त्र का जप करें। इस जप से आपके परिवार के ऊपर आई हुई हर प्रकार कि उपरी बाधा कि निवृत्ति हो जाती है। साथ ही आज के इस उपाय से आपको यश एवं प्रतिष्ठा कि भी प्राप्ति सहजता से हो जाती है।।

आज नवमी तिथि को इस उपाय को पूरी श्रद्धा एवं निष्ठा से करने पर सभी मनोरथों कि पूर्ति हो जाती है। नवमी तिथि में वाद-विवाद करना, जुआ खेलना, शस्त्र निर्माण एवं मद्यपान आदि क्रूर कर्म किये जाते हैं। जिन्हें लक्ष्मी प्राप्त करने की लालसा हो उन्हें रात में दही और सत्तू नहीं खाना चाहिए, यह नरक की प्राप्ति कराता है।।

नवमी तिथि को जन्म लेने वाला व्यक्ति भाग्यशाली एवं धर्मात्मा होता है। इस तिथि का जातक धर्मशास्त्रों का अध्ययन कर शास्त्रों में विद्वता हासिल करता है। ये ईश्वर में पूर्ण भक्ति एवं श्रद्धा रखते हैं। धनी स्त्रियों से इनकी संगत रहती है तथा इसके पुत्र गुणवान होते हैं।।

Panchang 25 March 2026

आश्लेशा नक्षत्र  के जातकों का  गुण एवं स्वभाव:- आश्लेशा नक्षत्र में जन्मे व्यक्तियों का प्राकृतिक गुण सांसारिक उन्नति में प्रयत्नशीलता, लज्जा एवं सौदर्यौपसना होती है। इस नक्षत्र में जन्मे व्यक्ति की आँखों एवं वचनों में विशेष आकर्षण होता है। लग्न स्वामी चन्द्रमा के होने के कारण ऐसे जातक उच्च श्रेणी के डॉक्टर, वैज्ञानिक या अनुसंधानकर्ता भी होते हैं इसका कारण चन्द्रमा का औषधिपति होना ही हैं। इस नक्षत्र में जन्मे जातक बहुत चतुर बुद्धि के होते हैं। आप अक्सर जन्म स्थान  से दूर ही रहते हैं। आपका वैवाहिक जीवन भी मधुर नहीं कहा जा सकता है। आश्लेशा नक्षत्र का स्वामी चन्द्र एवं नक्षत्र स्वामी बुध है। गंड नक्षत्र होने के कारण आश्लेशा का सर्पों से घनिष्ठ सम्बन्ध होता है।।

आश्लेशा नक्षत्र में जन्मा व्यक्ति अक्सर अपने वचनों से मुकर जाता है। क्रोध आपकी नाक पर रहता है। किसी पर भी शीघ्र क्रोधित हो जाना आपके स्वभाव में होता है। बुध और चन्द्रमा में शत्रुता के कारण इस नक्षत्र में जन्मे व्यक्ति की विचारधारा संकीर्ण होती है और मन: स्थिति कर्तव्यविमूढ़ बन जाती है। अश्लेशा नक्षत्र का व्यक्ति स्वभाव से धूर्त, ईर्ष्यालु, शरारती, पाप कर्म करने से न हिचकने वाला होता है।  ऐसा व्यक्ति किसी भी प्रकार के नियम या आचरण को मानने वाला नहीं होता है।।

आश्लेशा नक्षत्र का जातक सदैव परकार्य सेवारत रहतें हैं। भाई की सेवा एवं नौकरी करना स्वाभाविक गुण होता है। स्वतंत्र होने पर परोपकारी होते हैं। अश्लेशा नक्षत्र में जन्मी स्त्रियाँ ऊँचे कद और सुन्दर परन्तु झगडालू प्रवृत्ति की होती हैं। यह सदा दूसरों का अहसान मानने वाली तथा उच्च कोटि की प्रेमिका साबित होती हैं। जिस से भी प्रेम करती है उसका साथ  मरते दम तक निभाती हैं। आश्लेशा के अंत में गंड है अतः व्यक्ति अल्पजीवी होता है, इसलिए अश्लेशा का विधि विधान से शांति करवाना आवश्यक होता है।।

ऐसी मान्यता है, कि जो उपकार पर उपकार करे वह अश्लेशा जातक हैं। सर्दी, कफ, वायु रोग, पीलिया  घुटनों का दर्द एवं विटामिन बी की कमी ऐसे जातकों में हो सकती है।।

प्रथम चरण:- आश्लेषा के चरण का स्वामी गुरु हैं। आश्लेशा नक्षत्र के प्रथम चरण में जन्मा व्यक्ति अत्यधिक धनवान होता है। परन्तु ज़्यादातर देखा गया है, कि इसकी आमदनी अनैतिक कार्यों से ही होती है। विदेशों में भाग्योदय एवं वृद्धावस्था में अंग भंग का खतरा रहता है। धार्मिक, राजनितिक और सामाजिक कार्यों में पूर्ण रूचि परन्तु सफलता के लिए अन्याय और असत्य का सहारा भी लेते हैं। सच्ची मित्रता में कतई विश्वास नहीं रखते।।

द्वितीय चरण:- आश्लेषा के द्वितीय चरण का स्वामी शनि होता हैं। अश्लेशा नक्षत्र के दूसरे चरण में जन्मा व्यक्ति धन एकत्रित करने में सदा असफल रहता है। पद प्रतिष्ठा में कोई कमी नहीं होती है परन्तु उसके हिसाब से धन प्राप्ति हेतु सारे  प्रयत्न विफल होते हैं।।

तृतीय चरण:- आश्लेशा नक्षत्र के तीसरे चरण का स्वामी भी शनि होता हैं। आश्लेशा नक्षत्र के तीसरे चरण में जन्मा व्यक्ति धन एकत्रित करने में सदा असफल रहता है। पद प्रतिष्ठा में कोई कमी नहीं होती है परन्तु उसके हिसाब से धन प्राप्ति हेतु सारे प्रयत्न विफल होते हैं।।

चतुर्थ चरण:- आश्लेशा नक्षत्र के चौथे चरण का स्वामी गुरु होता हैं। आश्लेशा नक्षत्र के चौथे चरण में जन्मे व्यक्ति की पद प्रतिष्ठा में कोई कमी नहीं होती है परन्तु धन का अभाव सदा बना ही रहता है।।

Panchang 25 March 2026

शनिवार को जूते-चप्पल, लोहे की बनी वस्तुयें, नया अथवा पुराना भी वाहन नहीं खरीदना चाहिये एवं नए कपड़े न खरीदना और ना ही पहली बार पहनना चाहिये।।

शनिवार का विशेष - शनिवार के दिन तेल मर्दन "मालिश" करने से हर प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती हैं - (मुहूर्तगणपति)।।

शनिवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से आयुष्य की हानि होती है। (महाभारत अनुशासनपर्व)।।

शनिवार को पीपल वृक्ष में मिश्री मिश्रित दूध से अर्घ्य देने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। पीपल के नीचे सायंकालीन समय में एक चतुर्मुख दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करने से सभी ग्रह दोषों की निवृति हो जाती है।।

दिशाशूल - शनिवार को पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो अदरख एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।।

Panchang 25 March 2026

जिस व्यक्ति का जन्म शनिवार को होता है उस व्यक्ति का स्वभाव कठोर होता है। ये पराक्रमी एवं परिश्रमी होते हैं तथा इनके ऊपर दु:ख भी आये तो ये उसे भी सह लेना जानते हैं। ये न्यायी एवं गंभीर स्वभाव के होते हैं तथा सेवा करना इन्हें काफी पसंद होता है।।

शनिवार को जन्म लेनेवाले जातक कुछ सांवले रंग के, साहसी, मैकेनिक अथवा चिकित्सक होते हैं। इनमें से कुछ अपने कार्य में सुस्त भी होते हैं, जैसे देर से जागना, देर तक सोना भी इनकी आदतों में शुमार होता है। पारिवारिक जिम्मेदारियां भी शुद्ध रहती है इसलिये ये एक मेहनतकश इंसान होते हैं। सफलता के मार्ग में रूकावटों का भी सामना करना पड़ता है।।

शनिवार को जन्मलेनेवाले जातकों के स्वभाव में साहस लक्षित होता है। सफलता के मार्ग में लाख रुकावटें आए, लेकिन ये इसे पार करके ही रहते हैं। ऐसे लोग अधिकांशतः सांवले रंग के होते हैं। इन जातकों को अपने कैरियर के लिये डॉक्टपर, इंजीनियर तथा मैकेनिक के क्षेत्र का चयन करना चाहिये। इनका शुभ अंक 3, 6 और 9 तथा इनका शुभ दिन शनिवार और मंगलवार होता है।।

आज का सुविचार - मित्रों, रात लम्बी और काली हो सकती है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं होता कि सुबह होगी ही नहीं। ठीक उसी तरह असफलता का दौर लम्बा हो सकता है, लेकिन इसका यह मतलब ये कतई नहीं होता कि आपको अब कभी सफलता मिलेगी ही नहीं।।

Panchang 25 March 2026

शनि देव मेहरबान हों तो इंजीनियर और चार्टर्ड एकाउंटेंट बनाते है।।....  आज के इस पुरे लेख को पढ़ने के लिये इस लिंक को क्लिक करें....  वेबसाईट पर पढ़ें:     &   ब्लॉग पर पढ़ें:

"मकर राशि वालों के मृत्यु का योग।। Makar Rashi Walo Ki Mrityu." - My Latest video.

"तुला राशि वालों की मृत्यु किस उम्र में होगी।। Tula Rashi Walo Ki Mrityu." - My Latest video.

"मिथुन राशि वालों की मृत्यु किस उम्र में होगी। Mithun Rashi Walo Ki Mrityu.

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Panchang 25 March 2026

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