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आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 13 मई 2026 दिन बुधवार।।
मित्रों, तारीख 13 मई 2026 दिन बुधवार को ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष कि एकादशी तिथि है। आज का यह एकादशी व्रत अपरा (अचला) एकादशी व्रत के नाम से जाना जाता है। आज की यह एकादशी व्रत स्मार्त और वैष्णव सभी के लिए है। अर्थात आज का यह एकादशी व्रत सभी कर सकते हैं। इसलिए मेरे विचार से आज अन्य सभी कार्यों से मन हटाकर अपरा (अचला) एकादशी का व्रत करना चाहिए। इस एकादशी के बारे में लिखा है:- अपरासेवानाद् राजन् विपाप्मा भवति ध्रुवम्। आज बुधवार की भद्रा तिथि है इसलिए सिद्धयोग का निर्माण होता है। शास्त्रानुसार एकादशी सर्वश्रेष्ठ एवं सर्वाधिक पुण्यदायी व्रत होता है। इसे हर एक व्यक्ति को अवश्य करना चाहिये। आज मृत्युबाण दिन में 06:08 AM बजे तक है। आप सभी सनातनियों को "अपरा (अचला) एकादशी व्रत" की हार्दिक शुभकामनायें।।
हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी), आज के योग और आज के करण। आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातकों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव ही सर्वश्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो। ऐसी मेरी आप सभी आज के अधिष्ठात्री देवों से हार्दिक प्रार्थना है।।
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वैदिक सनातन हिन्दू पञ्चांग, Vedic Sanatan Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi), 2:- वार (Day), 3:- नक्षत्र (Nakshatra), 4:- योग (Yog) और 5:- करण (Karan).
पञ्चांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग का श्रवण करते थे। शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन-श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पञ्चांग को देखना, पढ़ना एवं सुनना चाहिए।।
आज का पञ्चांग 13 मई 2026 दिन बुधवार।।
Aaj ka Panchang 13 May 2026.
विक्रम संवत् - 1323.
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर - रौद्र.
शक - 1948.
अयन – सौम्यायनम्.
गोल - याम्य.
ऋतु – बसन्त.
मास - शुद्ध ज्येष्ठ.
पक्ष - कृष्ण.
गुजराती पंचांग के अनुसार – शुद्ध वैशाख कृष्ण पक्ष.
Panchang 13 May 2026
तिथि - एकादशी 13:31 PM बजे तक उपरान्त द्वादशी तिथि है।।
नक्षत्र - पूर्वाभाद्रपद 01:18 AM तक उपरान्त उत्तराभाद्रपद नक्षत्र है।।
योग - विष्कुम्भ 20:55 PM तक उपरान्त प्रीति योग है।।
करण - बव 02:18 AM तक उपरान्त बालव 13:31 PM तक उपरान्त कौलव करण है।।
चन्द्रमा - मीन राशि पर।।
सूर्य – मीन राशि एवं कृत्तिका नक्षत्र पर गोचर कर रहे हैं।।
मुम्बई सूर्योदय - प्रातः 06:04:01
मुम्बई सूर्यास्त - सायं 19:05:00
वाराणसी सूर्योदय - प्रातः 05:24:47
वाराणसी सूर्यास्त - सायं 18:36:35
राहुकाल (अशुभ) - दोपहर 12:35 बजे से 14:13 बजे तक।।
विजय मुहूर्त (शुभ) - दोपहर 12:23 बजे से 12:47 बजे तक।।
Panchang 13 May 2026
एकादशी तिथि विशेष - एकादशी तिथि को चावल एवं दाल नहीं खाना चाहिये। चावल खाना इस एकादशी तिथि में त्याज्य बताया गया है। एकादशी को चावल न खाने अथवा रोटी खाने से व्रत का आधा फल सहज ही प्राप्त हो जाता है। एकादशी तिथि एक आनन्द प्रदायिनी और शुभफलदायिनी तिथि मानी जाती है। एकादशी को सूर्योदय से पहले स्नान के जल में आँवला या आँवले का रस डालकर स्नान करना चाहिये। ऐसा करने से पुण्यों कि वृद्धि, पापों का क्षय एवं भगवान नारायण के कृपा कि प्राप्ति होती है।।
एकादशी तिथि के देवता विश्वदेव होते हैं। नन्दा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। एकादशी तिथि एक आनंद प्रदायिनी और शुभ फलदायी तिथि मानी जाती है। इसलिये आज दक्षिणावर्ती शंख के जल से भगवान नारायण का पुरुषसूक्त से अभिषेक करने से माँ लक्ष्मी प्रशन्न होती है एवं नारायण कि भी पूर्ण कृपा प्राप्त होती है।।
एकादशी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है वो धार्मिक तथा सौभाग्यशाली होता है। मन, बुद्धि और हृदय से ऐसे लोग पवित्र होते हैं। इनकी बुद्धि तीक्ष्ण होती और लोगों में बुद्धिमानी के लिए जाने जाते है। इनकी संतान गुणवान और अच्छे संस्कारों वाली होती है, इन्हें अपने बच्चों से सुख एवं सहयोग भी प्राप्त होता है। समाज के प्रतिष्ठित लोगों से इन्हें मान सम्मान मिलता है।।
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Panchang 13 May 2026
वैदिक सनातन धर्म में एकादशी तिथि बहुत ही पुण्य फलदायी तिथि मानी जाती है। प्रत्येक मास में एकादशी तिथि दो बार आती है। इसके अनुसार प्रत्येक वर्ष में 24 एकादशी तिथियां आती हैं। लेकिन अधिक मास की एकादशियों के साथ इनकी संख्या 26 हो जाती है। वैदिक पञ्चांग की ग्यारहवीं तिथि एकादशी कहलाती है। इस तिथि का नाम ग्यारस या ग्यास भी है। यह तिथि चंद्रमा की ग्यारहवीं कला है, इस कला में अमृत का पान उमा देवी करती हैं।।
एकादशी तिथि का निर्माण शुक्ल पक्ष में तब होता है जब सूर्य और चंद्रमा का अंतर 121 डिग्री से 132 डिग्री तक होता है। वहीं कृष्ण पक्ष में एकादशी तिथि का निर्माण सूर्य और चंद्रमा का अंतर 301 से 312 डिग्री तक होता है। एकादशी तिथि के स्वामी विश्वेदेवा को माना गया है। संतान, धन-धान्य और घर की प्राप्ति के लिए इस तिथि में जन्मे जातकों को विश्वेदेवा की पूजा अवश्य करनी चाहिए।।
यदि एकादशी तिथि रविवार और मंगलवार को पड़ती है तो मृत्युदा योग बनाती है। इस योग में शुभ कार्य करना वर्जित है। इसके अलावा एकादशी तिथि शुक्रवार को होती है तो सिद्धा कहलाती है। ऐसे समय में किसी भी कार्य की सिद्धि प्राप्ति का योग निर्मित होता है। यदि किसी भी पक्ष में एकादशी सोमवार के दिन पड़ती है तो क्रकच योग बनाती है, जो अशुभ होता है। इसमें शुभ कार्य निषिद्ध बताये गये हैं। एकादशी तिथि नंदा तिथियों की श्रेणी में आती है। वहीं किसी भी पक्ष की एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा करना शुभ माना जाता है।।
Panchang 13 May 2026
उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के जातकों का गुण एवं स्वभाव:- यदि आपका जन्म उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में हुआ है तो आप स्वभाव से एक दयालु व्यक्ति होंगे। आप धार्मिक होने के साथ-साथ वैरागी भी होंगे। आप समाज में एक धार्मिक नेता, प्रसिद्द शास्त्र विद एवं मानव प्रेमी के रूप में प्रख्यात होंगे। आप कोमल हृदयी एवं दूसरों के साथ सदैव सद्भावना रखते हैं। यदि आपके साथ कोई दुर्व्यवहार भी करता है तो आप उसे क्षमा कर देते हैं।।
आप अपने दिल में भी किसी के प्रति कोई द्वेष नहीं रखते। आप महत्वाकांक्षी व्यक्ति नहीं हैं परन्तु इच्छाएं बढ़ी-चढ़ी होती हैं। मन ही मन आप उन्नत्ति के सर्वोच्च शिखर पर पहुँच भी जाते हैं। देश भक्ति एवं इमानदारी आपके प्रमुख गुण होंगे। आप मनमौजी परन्तु मजबूत विचारों वाले व्यक्ति होंगे। आप उन गिने चुने व्यक्तियों में से होंगे जिन्हें आम लोग आदर की दृष्टि से देखते हैं।।
उत्तराभाद्रपद में जन्मे जातक निष्पक्ष व्यक्तित्व के स्वामी होते हैं। आप किसी को भी उसकी आर्थिक एवं सामाजिक सम्पन्नता के आधार पर नहीं अपितु मानवता के आधार पर तौलते है। आप बहुत बुद्धिमान एवं विवेकशील व्यक्ति होंगे। एक प्रखर वक्ता होने के कारण अनायास ही लोग आपकी ओर खिचाव महसूस करते हैं। आपकी सबसे बड़ी कमी आपका क्रोध होगा जो किसी भी छोटी से छोटी बात पर आ जाता है।।
आप विपरीत लिंगियों के प्रति विशेष आकर्षण महसूस करते हैं और उनका साथ आपको बेहद प्रिय है। उत्तराभाद्रपद के जातक किसी भी कार्यक्षेत्र में उच्च पद को प्राप्त करने में सक्षम होते हैं। आप अपनी शैक्षणिक योग्यता के आधार पर नहीं अपितु अपने गुणों के कारण सफल होते हैं। आप अक्सर अपने से अधिक शिक्षित लोगों से भी अधिक सफलता पाते हैं। आप कठोर परिश्रमी एवं कार्य के प्रति बहुत अधिक समर्पित व्यक्ति होंगे।।
ऐसे लोग कभी भी किसी कार्य को बीच में छोड़ना पसंद नहीं करते। आप अपने करियर में बहुत मान-सम्मान और प्रशंसा पाते हैं। आप अधिक समय तक निचले पदों पर कार्यरत नहीं रहते हैं। अपनी लगन और मेहनत के कारण आपकी उच्च पदों के लिए तरक्की शीघ्र ही हो जाती है। आप अपने जीवन के 18वें या 19वें वर्ष से ही जीवन यापन में लग जाते हैं। जीवन के 19, 21, 28., 30, 35 और 42वां वर्ष आपके करियर में महतवपूर्ण बदलाव लायेगा।।
उत्तराभाद्रपद के जातक का बचपन कठिनाईयों में बीतता है। आपको अपने माता-पिता से अपेक्षित स्नेह नहीं प्राप्त होता है। हालाँकि पिता के कारण आप समाज में गौरवान्वित होते हैं। परन्तु पिता से आपको अपने जीवन में किसी भी प्रकार का कोई लाभ प्राप्त नहीं होता है। आपको सदा ही अपने जन्म स्थान से दूर रहना पड़ता है। आपका विवाह एक सुंदर और आज्ञाकारी स्त्री से होता है।।
इस कारण आपका दाम्पत्य जीवन बहुत सुखी एवं समृद्ध होता है। आपकी आज्ञाकारी संतान आपकी प्रसन्नता का कारण बनती है। उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में जन्मी जातिकायें बुद्धिमान और धर्म के प्रति रूचि रखने वाली होती हैं। आप धैर्यवान एवं गुणवान होती हैं। आप जीवन में सदा मान सम्मान एवं प्रतिष्ठा प्राप्त करती हैं। उत्तराभाद्रपद के जातकों का प्रमुख लक्षण है बातूनी होना। आपको पैरों से सम्बंधित रोग या चोट, हर्निया एवं बवासीर जैसी बीमारियाँ हो सकती है।।
प्रथम चरण:- उत्तराभाद्रपद नक्षत्र का स्वामी ग्रह शनि है। इस उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी सूर्य हैं। उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के प्रथम चरण में जन्मा जातक राजा के समान पराक्रमी होता है। लग्न स्वामी शनि एवं चरण स्वामी स्वामी सूर्य में परस्पर शत्रुता है। अतः सूर्य की दशा अशुभ फल देगी। शनि की दशा भी प्रतिकूल फल देगी। शनि में सूर्य या सूर्य में शनि की अन्तर्दशा मारक दशा का फल देगी। गुरु की दशा उत्तम स्वास्थ्य एवं राजयोग देने वाली होगी।।
द्वितीय चरण:- उत्तराभाद्रपद नक्षत्र का स्वामी ग्रह शनि है। इस उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के द्वितीय चरण का स्वामी बुध हैं। उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के दूसरे चरण में जन्मा जातक तस्करी में रूचि रखता है। लग्न नक्षत्र स्वामी शनि बुध का मित्र है। अतः शनि की दशा मध्यम, परन्तु बुध की दशा अति शुभ फल देगी। बुध की दशा में गृहस्थ सुख एवं भौतिक उपलब्धियां प्राप्त होंगी। गुरु की दशा भी जातक को उत्तम फल देगी।।
तृतीय चरण:- उत्तराभाद्रपद नक्षत्र का स्वामी ग्रह शनि है। इस उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के तृतीय चरण का स्वामी शुक्र हैं। उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के तीसरे चरण में जन्मा जातक पुत्रवान होता है। तीसरे चरण का स्वामी शुक्र है जो नक्षत्र स्वामी शनि का मित्र है। अतः शनि की दशा मध्यम परन्तु शुक्र की दशा शुभ फल देगी। शुक्र की दशा में पराक्रम बढेगा। लग्नेश गुरु की दशा भी अति उत्तम फल देगी।।
चतुर्थ चरण:- उत्तराभाद्रपद नक्षत्र का स्वामी ग्रह शनि है। इस उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के चतुर्थ चरण का स्वामी मंगल हैं। उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के चौथे चरण में जन्मा जातक संपूर्ण रूप से सुखी होता है। लग्नेश गुरु की शनि से शत्रुता है तथा लग्न नक्षत्र स्वामी शनि की नक्षत्र चरण स्वामी मंगल से भी शत्रुता है। अतः शनि की दशा अशुभ फल देगी एवं मंगल की दशा मध्यम फल देगी। जो लाभ मंगल की दशा में जातक को मिलना चाहिए था वह नहीं मिल पायेगा। गुरु की दशा राजयोग प्रदाता होती है।।
Panchang 13 May 2026
आज बुधवार के दिन यह सावधानी अवश्य रखें:- बुधवार को बालों से संबंधित कोई भी वस्तु न खरीदें, टूथ ब्रश आदि भी नहीं खरीदना चाहिए। बुधवार के दिन दूध की खीर या अन्य कोई व्यंजन जिसमें दूध जलने की संभावना हो नहीं बनाना चाहिए। अगर हो सके तो आज के दिन दूध न उबालें। बुधवार के दिन किसी को उधार पैसे न दें। इससे आपको धन संबंधित परेशानी हो सकती है।।
आज बुधवार के दिन ये विशेष उपाय करें - बुधवार गणपति, गजानन, विघ्नहर्ता श्री गणेशजी का दिन है। इसलिये आज के दिन इनकी पूजा का विशेष महत्त्व होता है। आज के दिन गणपति की पूजा के उपरान्त मोदक, बेशन के लड्डू एवं विशेष रूप से दूर्वादल का भोग लगाना चाहिये इससे मनोकामना की सिद्धि तत्काल होती है।।
अगर आपकी कुण्डली में बुध अच्छा हो तो इन कार्य क्षेत्र में आपको सफलता सहजता से मिल सकती है। बुधवार को भी इन कामों को करना चाहिए। जिससे आपके जीवन में सफलता प्राप्त हो जाएगी।।
ज्योतिष, शेयर, दलाली जैसे कार्यों के लिए भी यह दिन शुभ माना गया है। सिंदूर का तिलक या टीका लगाएं। इस दिन पूर्व, दक्षिण और नैऋत्य दिशा में यात्रा कर सकते हैं। इस दिन धन जमा करने से धन में बरकत होती है। माता दुर्गा के मंदिर जाना चाहिए। इस दिन किसी कन्या को साबुत बादाम भी दान में देना चाहिए।।
बुधवार का विशेष - बुधवार के दिन तेल मर्दन अथवा मालिश करने से माता लक्ष्मी प्रशन्न होती हैं और धनलाभ होता है - (मुहूर्तगणपति)।।
बुधवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से धन एवं पूण्य का लाभ होता है।। (महाभारत अनुशासनपर्व)।।
दिशाशूल - बुधवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो, यात्रा करनी ही हो तो धनिया, तिल की वस्तु, ईलायची अथवा पिस्ता खाकर यात्रा कर सकते है।।
Panchang 13 May 2026
मित्रों, बुधवार को जन्म लेने वाले व्यक्ति मधुर वाणी बोलने वाले होते हैं। इस तिथि के जातक पठन पाठन में रूचि रखते हैं और ज्ञानी होते हैं। ऐसे लोगों का लेखन में अत्यधिक रूचि होती है और अधिकांशत: इसे अपनी जीवका का साधन भी बना लेते हैं। ये जिस विषय का चयन करते हैं उसके अच्छे जानकार होते हैं। इनके पास धन तो होता है परंतु ऐसे लोग धोखेबाज भी होते हैं।।
ऐसे जातक सामन्य रंग-रूप, बुद्धिमान, लेखक, पत्रकार, प्रकाशक एवं द्विस्वभाव के होते हैं। किसी एक कार्य को न कर अनेक कार्य में जुटे होते हैं। वैसे शान्तिप्रिय रहना इनका स्वभाव होता है। अधिकांशतः मार्केटिंग के क्षेत्र में ऐसे लोगों को उत्तम सफलता मिलती है। बुधवार को जन्म लेने वाले हमेशा असमंजस के शिकार रहते हैं। वह एक समय कई कार्यों पर हाथ आजमाने की कोशिश करते हैं, कई बार सफलता मिल भी जाती है और कई बार गिरते भी हैं।।
इनमें छल-कपट नहीं होता और कई बार तो ये दूसरों की गलतियां खुद पर तक ले लेते हैं। इनको लेखन, पत्रकारिता, प्रकाशन, बैंकिंग और मार्केटिंग के क्षेत्र में अपना किस्मत आजमाना चाहिये। इन क्षेत्रों में इन्हें अच्छी सफलता की संभावना होती है। इनके लिये बुधवार एवं शुक्रवार का दिन भाग्यवर्धक होता है तथा 3 और 6 इनका लकी नम्बर होता है।।
आज का सुविचार - मित्रों, यदि जीवन में लोकप्रिय होना हो तो सबसे ज्यादा "आप" शब्द का, उसके बाद "हम" शब्द का और सबसे कम "मैं" शब्द का प्रयोग करना चाहिए। इस संसार में कोई किसी का हमदर्द नहीं होता, लाश को शमशान में रखकर अपने लोग ही पुछ्ते हैं.. और कितना वक़्त लगेगा।।
Panchang 13 May 2026
व्यापार एवं धन प्राप्ति के कुछ अत्यंत प्रभावी टिप्स।।.... आज के इस लेख को पूरा पढने के लिये इस लिंक को क्लिक करें..... वेबसाईट पर पढ़ें: & ब्लॉग पर पढ़ें:
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"मकर राशि वालों के मृत्यु का योग।। Makar Rashi Walo Ki Mrityu." - My Latest video.
"तुला राशि वालों की मृत्यु किस उम्र में होगी।। Tula Rashi Walo Ki Mrityu." - My Latest video.
"मिथुन राशि वालों की मृत्यु किस उम्र में होगी। Mithun Rashi Walo Ki Mrityu.
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Panchang 13 May 2026
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