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आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 18 मई 2026 दिन सोमवार।।
मित्रों, तारीख 18 मई 2026 दिन सोमवार को अधिक ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि है। आज चन्द्र दर्शन का बहुत बड़ा पूण्य होता है। इसे ही कहते हैं, दूज का चाँद। हमारे शास्त्रों में लिखा है:- सम श्रृंगम् सुभिक्षम्। अर्थात आज चन्द्र दर्शन हो तो यह सुभिक्ष का संकेत होता है। आज सर्वार्थसिद्धियोग दिन में 02:11 PM तक है। उपरान्त पुनः सर्वर्थामृतसिद्धियोग सम्पूर्ण दिवस है। आप सभी सनातनियों को "सम श्रृंगम्" की हार्दिक शुभकामनायें।।
हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी), आज के योग और आज के करण। आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातकों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव ही सर्वश्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो। ऐसी मेरी आप सभी आज के अधिष्ठात्री देवों से हार्दिक प्रार्थना है।।
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वैदिक सनातन हिन्दू पञ्चांग, Vedic Sanatan Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi), 2:- वार (Day), 3:- नक्षत्र (Nakshatra), 4:- योग (Yog) और 5:- करण (Karan).
पञ्चांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग का श्रवण करते थे। शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन-श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पञ्चांग को देखना, पढ़ना एवं सुनना चाहिए।।
आज का पञ्चांग 18 मई 2026 दिन सोमवार।।
Aaj ka Panchang 18 May 2026.
विक्रम संवत् - 2083.
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर - रौद्र.
शक - 1948.
अयन – सौम्यायनम्.
गोल - याम्य.
ऋतु – ग्रीष्म.
मास - अधिक ज्येष्ठ.
पक्ष - शुक्ल.
गुजराती पंचांग के अनुसार – अधिक ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष.
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तिथि - द्वितीया 17:55 PM बजे तक उपरान्त तृतीया तिथि है।।
नक्षत्र - रोहिणी 11:33 AM तक उपरान्त मृगशिरा नक्षत्र है।।
योग - सुकर्मा 21:49 PM तक उपरान्त धृति योग है।।
करण - बालव 07:47 AM तक उपरान्त कौलव 17:55 PM तक उपरान्त तैतिल करण है।।
चन्द्रमा - वृषभ राशि पर 22:07 PM तक उपरान्त मिथुन राशि पर।।
सूर्य – मीन राशि एवं कृत्तिका नक्षत्र पर गोचर कर रहे हैं।।
मुम्बई सूर्योदय - प्रातः 06:02:08
मुम्बई सूर्यास्त - सायं 19:07:01
वाराणसी सूर्योदय - प्रातः 05:22:41
वाराणसी सूर्यास्त - सायं 18:38:37
राहुकाल (अशुभ) - सुबह 07:40 बजे से 09:19 बजे तक।।
विजय (शुभ) मुहूर्त - दोपहर 12.23 बजे से 12.47 बजे तक।।
Panchang 18 May 2026
द्वितीया तिथि विशेष - द्वितीया तिथि को कटेरी फल का तथा तृतीया तिथि को नमक का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। द्वितीया तिथि सुमंगला और कार्य सिद्धिकारी तिथि मानी जाती है। इस द्वितीया तिथि के स्वामी भगवान ब्रह्माजी को बताया गया है। यह द्वितीया तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वितीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायिनी होती है।।
प्रजापति व्रत दूज को ही किया जाता है तथा किसी भी नये कार्य की शुरुआत से पहले एवं ज्ञान प्राप्ति हेतु ब्रह्माजी का पूजन अवश्य करना चाहिये। वैसे तो मुहूर्त चिंतामणि आदि ग्रन्थों के अनुसार द्वितीया तिथि अत्यन्त शुभ फलदायिनी तिथि मानी जाती है। परन्तु श्रावण और भाद्रपद मास में इस द्वितीया तिथि का प्रभाव शून्य हो जाता है। इसलिये श्रावण और भाद्रपद मास कि द्वितीया तिथि को कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिये।।
पंचाग की दूसरी तिथि द्वितीया कही जाती है। इस तिथि को सुमंगला भी कहा जाता है क्योंकि यह तिथि मंगल करने वाली होती है। इसे हिंदी में दूज, दौज, बीया और बीज भी कहते हैं। यह तिथि चंद्रमा की दूसरी कला है, इस कला में कृष्ण पक्ष के दौरान भगवान सूर्य अमृत पीकर खुद को ऊर्जावान रखते हैं और शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को वह चंद्रमा को लौटा देते हैं। द्वितीया तिथि का निर्माण शुक्ल पक्ष में तब होता है जब सूर्य और चंद्रमा का अंतर 13 डिग्री से 24 डिग्री अंश तक होता है। वहीं कृष्ण पक्ष में द्वितीया तिथि का निर्माण सूर्य और चंद्रमा का अंतर 193 से 204 डिग्री अंश तक होता है। द्वितीया तिथि के स्वामी ब्रह्मा जी माने गए हैं। इस तिथि में जन्मे लोगों को ब्रह्मा जी का पूजन अवश्य करना चाहिए।।
यदि द्वितीया तिथि सोमवार या शुक्रवार को पड़ती है तो मृत्युदा योग बनाती है। इस योग में शुभ कार्य करना वर्जित होता है। इसके अलावा किसी माह में यदि द्वितीया तिथि दोनों पक्षों में बुधवार के दिन पड़ती है तो यह सिद्धिदा कहलाती है। ऐसे समय शुभ कार्य करने से शुभ फल प्राप्त होता है। पञ्चांग के अनुसार भाद्रपद माह की द्वितीया शून्य होती है। वहीं शुक्ल पक्ष की द्वितीया में भगवान शिव माता पार्वती के समीप होते हैं। ऐसे में शिवजी बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। दूसरी ओर कृष्ण पक्ष की द्वितीया में भगवान शिव का पूजन करना उत्तम नहीं माना जाता है।।
द्वितीया तिथि में जन्मे जातक दूसरे लिंग के विपरीत बहुत जल्दी आकर्षित हो जाते हैं। यह भावनात्मक तौर पर बहुत कमजोर होते हैं। इन लोगों को लंबी यात्रा करना बहुत पसंद होता है। ये जातक प्रियजनों से ज्यादा परायों के प्रति अपना प्रेम दर्शाते हैं। ये जातक काफी मेहनती होते हैं और उन्हें समाज में मान सम्मान भी प्राप्त होता है। इन जातकों का अपनों के साथ हमेशा मतभेद बना रहता है। इनके पास मित्रों की अधिकता होती है जिसकी वजह से कभी कभार ये बुरी संगति में भी पड़ जाते हैं।।
कृष्ण पक्ष द्वितीया तिथि में यात्रा, विवाह, संगीत, विद्या एवं शिल्प आदि कार्य करना लाभप्रद होता है। इसके विपरीत शुक्ल पक्ष की द्वितीया में आप शुभ कार्य नहीं कर सकते हैं। इसके अलावा किसी भी पक्ष की द्वितीया को नींबू का सेवन करना वर्जित होता है। साथ ही उबटन लगाना भी शुभ नहीं माना गया है। दीपावली के तीसरे दिन भाईदूज का पर्व मनाया जाता है। यह पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को मनाया जाता है। इस दिन यमराज के पूजन का भी महत्व होता है। इसलिए इसे यम द्वितीया भी कहते हैं। इस पर्व पर बहन अपने भाई को तिलक करती है और यम की पूजा करने से अकाल मृत्यु का भय भी समाप्त हो जाता है।।
पद्म पुराण में कहा गया है, कि कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया को पूर्वाह्न में यम की पूजा करके यमुना में स्नान करने वाला मनुष्य यमलोक को नहीं देखता (अर्थात उसको मुक्ति प्राप्त हो जाती है)। द्वितीया तिथि को अशुन्यशयना तिथि भी होता है। इस व्रत को विधिपूर्वक करने से स्त्री विधवा नहीं होती और स्त्री पुरुष का परस्पर वियोग भी नहीं होता। क्षीर सागर में लक्ष्मी के समान भगवान विष्णु के शयन करने के समय यह व्रत होता है। श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की द्वितीया के दिन लक्ष्मी के साथ श्रीवत्सधारी भगवान श्री विष्णु का पूजन कर हाथ जोड़कर प्रार्थना करनी चाहिए।।
मित्रों, ज्योतिषशास्त्र कहता है, द्वितीया तिथि में जिस व्यक्ति का जन्म होता है, उस व्यक्ति का हृदय साफ नहीं होता है। इस द्वितीया तिथि में जन्मे जातक का मन किसी की खुशी को देखकर आमतौर पर खुश नहीं होता, बल्कि उनके प्रति ग़लत विचार रखता है। इनके मन में कपट और छल का घर होता है, ये अपने स्वार्थ को सिद्ध करने के लिए किसी को भी धोखा दे सकते हैं। इनकी बातें बनावटी और सत्य से बहुत दूर होती हैं। इनके हृदय में दया की भावना बहुत ही कम होती है तथा यह किसी की भलाई भी तभी करते हैं, जबकि उससे अपना भी कुछ लाभ हो। ये परायी स्त्री से अत्यधिक लगाव रखने वाले होते हैं जिसके वजह से कई बार इन्हें अपमानित भी होना पड़ता है।।
Panchang 18 May 2026
रोहिणी नक्षत्र के जातकों का गुण एवं स्वभाव:- रोहिणी नक्षत्र में जन्म लेने वाला व्यक्ति सदा दूसरों में गलतियां ढूँढता रहता है। आप कोई भी ऐसा मौका हाथ से नहीं जाने देते जिसमें कि सामने वाले की त्रुटियों की चर्चा आप न करें। आप शारीरिक रूप से कमज़ोर होते हैं इसलिए कोई भी छोटी से छोटी मौसमी बदलाव के रोग भी आपको अक्सर जकड लेते हैं। आप एक ज्ञानी परन्तु स्त्रियों में आसक्ति रखने वाले होतें हैं।।
रोहिणी नक्षत्र में जन्मे जातक सुन्दर एवं मीठा बोलने वाले होते हैं। आप घर और कार्य क्षेत्र में व्यवस्थित रहना ही पसंद करते हैं। आपको गन्दगी से बेहद नफरत होता है। घर का सामान भी आप सुव्यवस्थित ढंग से रखना पसंद करते हैं। स्वभाव से कोमल और सौन्दर्य के प्रति लगाव आपके प्रमुख गुणों में से एक होता है। रोहिणी नक्षत्र का स्वामी चन्द्रमा है। इसलिए इस नक्षत्र में जन्मे जातक स्त्रियों में विशेष आसक्ति रखते हैं।।
रोहिणी नक्षत्र में जन्मे जातक कभी-कभी बहुत ही कोमल और विनम्र स्वभाव के दीखते हैं तो कभी कठोर और अभद्र। अपने प्रियजनों की मदद के लिए सदा तत्पर रहतें हैं और कठिन से कठिन परिस्तिथियों में भी पीछे नहीं हटते। यदि आपको कोई कष्ट पहुंचाए तो आप उग्र रूप ले लेते हैं और किसी को भी अपने ऊपर हावी नहीं होने देते। आप दिमाग की अपेक्षा दिल की सुनते हैं।।
आप न तो योजनाबद्ध तरीके से चलते हैं और न ही बहुत लम्बे समय तक एक ही राह पर चलना पसंद करते हैं। अपने इसी दृष्टिकोण के कारण आप जीवन में अनेकों बार कठिनाईयों को झेलते हैं। आप मानवता में विश्वास रखते हैं परन्तु अत्यधिक संवेदनशील होने के कारण आप चोट पहुंचाने वालों को कभी क्षमा नहीं करते। स्वतंत्र सोच और धैर्य की कमी के कारण जीवन में आप बहुत बार निराशा का सामना करते हैं।।
सभी प्रकार के कार्यों में भाग्य आज़माना आपके लिए संकट की स्तिथि पैदा कर सकता है। दूसरों पर आँखे बंद कर के विश्वास कर लेना आपके स्वभाव में है। परन्तु व्यवसायिक क्षेत्र में यह स्वभाव आपको बहुत हानि पहुंचाएगा। 18 से 36 वर्ष का समय आपके लिए सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य के लिए संघर्ष पूर्ण रहेगा। परन्तु 36 से 50 वर्ष तक का समय आपके लिए शुभ होगा।।
पिता की अपेक्षा माता या मातृपक्ष से आपका अधिक स्नेह रहेगा। वैवाहिक जीवन में भी उतार चढ़ाव बना रहेगा। रोहिणी नक्षत्र में जन्मी महिलाएं दुबली पतली परन्तु विशेष रूप से आकर्षक होती हैं। सदा अपने से बड़ों और माता पिता की आज्ञाकारिणी होती हैं। आप अपने रहने और खाने पीने में सदा सतर्क और सावधान रहती हैं। पति के साथ सहमति बनाए रखना आपका स्वभाव है।।
इसलिए आपके वैवाहिक सम्बन्ध मधुर ही होते हैं। आपकी संतान पुत्र और पुत्री दोनों ही होते हैं। आप एक धनवान और ऐश्वर्यशाली जीवन व्यतीत करते हैं। विशाल आँखें बहुत ही खुबसूरत एवं आकर्षण का केन्द्र होता है। ज्यादातर रोहिणी नक्षत्र के जातकों को मुंह, गले, जीभ एवं गर्दन से सम्बंधित रोग होने की संभावनायें होती हैं।।
प्रथम चरण:- रोहिणी नक्षत्र का स्वामी ग्रह चन्द्रमा हैं तथा राशि स्वामी शुक्र माना जाता हैं। इसके प्रथम चरण का स्वामी ग्रह मंगल हैं। रोहिणी नक्षत्र के पहले चरण में जन्म होने के कारण जातक सौभाग्यशाली होगा। चन्द्रमा और मंगल की मित्रता के कारण धन एवं ख्याति भी मिलता है। चन्द्रमा एवं मंगल की दशा-अन्तर्दशा में जातक की उन्नत्ति होगी। लग्नेश शुक्र की दशा उन्नति में विशेष सहायक होगी।।
द्वितीय चरण:- रोहिणी नक्षत्र का स्वामी ग्रह चन्द्रमा हैं तथा राशि स्वामी शुक्र माना जाता हैं। इसके द्वितीय चरण का स्वामी ग्रह शुक्र हैं। रोहिणी नक्षत्र के दूसरे चरण में जन्म होने के कारण जातक को कुछ न कुछ पीड़ा बनी रहेगी। शुक्र की दशा-अन्तर्दशा में जातक की विशेष उन्नत्ति होगी।।
तृतीय चरण:- रोहिणी नक्षत्र का स्वामी ग्रह चन्द्रमा हैं तथा राशि स्वामी शुक्र माना जाता हैं। इसके तृतीय चरण का स्वामी ग्रह बुध हैं। रोहिणी नक्षत्र के तीसरे चरण में जन्म होने के कारण जातक डरपोक और भावुक होगा। चन्द्र एवं बुध की दशा अशुभ परन्तु लग्नेश शुक्र की दशा-अन्तर्दशा में जातक की विशेष उन्नत्ति होगी।।
चतुर्थ चरण:- रोहिणी नक्षत्र का स्वामी ग्रह चन्द्रमा हैं तथा राशि स्वामी शुक्र माना जाता हैं। इसके चतुर्थ चरण का स्वामी ग्रह चन्द्रमा हैं। रोहिणी नक्षत्र के चौथे चरण में जन्म होने के कारण जातक सत्यवादी एवं सौन्दर्य प्रेमी होगा। चन्द्रमा की दशा शुभ फल देगी एवं शुक्र की दशा-अन्तर्दशा में जातक की विशेष उन्नत्ति होगी।।
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सामान्यतया सोमवार शॉपिंग के लिए अच्छा दिन माना जाता है।।
सोमवार का विशेष - सोमवार के दिन तेल मर्दन अर्थात् तेल मालिश करने से चहरे और शरीर की कान्ति बढ़ती है - (मुहूर्तगणपति)।।
सोमवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से शिव भक्ति की हानि होती है। पुत्रवान पिता को तो कदापि नहीं करना चाहिये। (महाभारत अनुशासनपर्व)।।
दिशाशूल - सोमवार को पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई दर्पण देखकर घर से प्रस्थान कर सकते है।।
सोमवार के दिन ये विशेष उपाय करें - सोमवार को भगवान शिव का दर्शन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए। कच्चा दूध, शहद, काला तिल, बिल्वपत्र एवं पञ्चामृत शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है घर में कोई रोगी नहीं होता एवं सभी मनोकामनाओं की सिद्धि तत्काल होती है।।
Panchang 18 May 2026
मित्रों, जिस व्यक्ति का जन्म सोमवार को होता है, वो जातक शांत प्रवृत्ति के गौर वर्ण लिए हुये होते हैं। सोमवार चन्द्र प्रधान दिन होता है, इसलिये इस जातक में कल्पनाशीलता, दया भाव, नम्रता के गुण परिलक्षित होते हैं। माता के प्रिय एवं सद्गुणों से युक्त ये जातक कवि ह्रदय, सफेद वस्तुओं से लाभ पाने वाला, यात्रा का शौकीन, जलाशयों एवं प्रकृति का प्रेमी होता है।।
सोमवार को जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान होता है। इनकी प्रकृति यानी इनका स्वभाव शान्त होता है। इनकी वाणी मधुर और मोहित करने वाली होती है। ये स्थिर स्वभाव वाले होते हैं सुख हो या दु:ख सभी स्थिति में ये समान रहते हैं। धन के मामले में भी ये भाग्यशाली होते हैं तथा इन्हें सरकार एवं समाज से मान-सम्मान मिलता है।।
इस दिन जन्म लेने वाले जातक को पर्यावरण के क्षेत्र में, समुद्र विज्ञान के क्षेत्र में, पानी से जुड़े रोजगार जैसे मत्य् क पालन या मछली का व्यवसाय, पत्थरों का व्यवसाय, कपड़े का व्यंवसाय शुद्ध फलता है। इनके लिए सफेद रंग सदा शुभकारी होता है इसलिए कैरियर के लिहाज से आप जहां भी जायें सफेद रुमाल अपनी जेब में रखें और उस क्षेत्र को ही चुने जिसमें सफेद रंग की प्रधानता हो, जैसे पानी, कपड़ा, फूल, पत्थयर आदि से जुड़ा व्यवसाय।।
आज का सुविचार - मित्रों, जीना हैं, तो उस दीपक की तरह जियो जो बादशाह के महल में भी उतनी ही रोशनी देता हैं जितनी किसी गरीब की झोपड़ी में। जो भाग्य में हैं वह भाग कर आयेगा और जो भाग्य में नही हैं वह आकर भी भाग जायेगा। हँसते रहो तो दुनिया साथ हैं, वरना आँसुओं को तो आँखो में भी जगह नही मिलती।।
Panchang 18 May 2026
चन्द्रमा द्वारा निर्मित कुछ अतुलनीय धनदायक योग।।...... आज के इस पुरे लेख को पढ़ने के लिये इस लिंक को क्लिक करें.... वेबसाईट पर पढ़ें: & ब्लॉग पर पढ़ें:
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"मकर राशि वालों के मृत्यु का योग।। Makar Rashi Walo Ki Mrityu." - My Latest video.
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Panchang 18 May 2026
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