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आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 21 जून 2026 दिन रविवार।।
मित्रों, तारीख 21 जून 2026 दिन रविवार को ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि है। आज की सप्तमी को भानु सप्तमी कहा जाता है। आज भगवान श्रीसूर्य देवता की पुजा अर्चना करने से सूर्य ग्रहण काल में किये गये जप के समान सिद्धि मिल जाती है। सूर्य देवता धन और प्रतिष्ठा के कारक ग्रह माने जाते हैं, इसलिए जीवन में धन एवं प्रतिष्ठा की वृद्धि होती है। आज रविवार भी है, अतः यह संयोग और भी प्रभावी हो जाता है। आज सूर्योदय से पहले स्नान कर लेना चाहिये। इससे सम्पूर्ण तीर्थो के स्नान का पूण्य मिल जाता है। आज यायीजययोग एवं सर्वार्थसिद्धियोग तथा त्रिपुष्कर योग भी है। आप सभी सनातनी बंधुओं को "भानुसप्तमी के पावन व्रत" की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनायें एवं अनन्त-अनन्त बधाइयाँ।।
हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी), आज के योग और आज के करण। आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातकों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव ही सर्वश्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो। ऐसी मेरी आप सभी आज के अधिष्ठात्री देवों से हार्दिक प्रार्थना है।।
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।। पधारने हेतु भागवत प्रवक्ता - स्वामी धनञ्जय महाराज की ओर से आपका ह्रदय से धन्यवाद। आपका आज का दिन मंगलमय हो। अपने गाँव, शहर अथवा सोसायटी में भागवत कथा के आयोजन हेतु कॉल - 9375288850 करें या इस लिंक को क्लिक करें।।
वैदिक सनातन हिन्दू पञ्चांग, Vedic Sanatan Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi), 2:- वार (Day), 3:- नक्षत्र (Nakshatra), 4:- योग (Yog) और 5:- करण (Karan).
पञ्चांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग का श्रवण करते थे। शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन-श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पञ्चांग को देखना, पढ़ना एवं सुनना चाहिए।।
आज का पञ्चांग 21 जून 2026 दिन रविवार।।
Aaj ka Panchang 21 June 2026.
विक्रम संवत् - 2083.
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर - सिद्धार्थ.
शक - 1948.
अयन – याम्यायनम्.
गोल - सौम्य.
ऋतु – ग्रीष्म.
मास - शुद्ध ज्येष्ठ.
पक्ष - शुक्ल.
गुजराती पंचांग के अनुसार – शुद्ध ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष.
Panchang 21 June 2026
तिथि - सप्तमी 15:21 PM बजे तक उपरान्त अष्टमी तिथि है।।
नक्षत्र - पूर्वाफाल्गुनी 09:32 AM तक उपरान्त उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र है।।
योग - सिद्धि 11:22 PM तक उपरान्त व्यतिपात योग है।।
करण - गर 03:29 AM तक उपरान्त वणिज 15:21 PM तक उपरान्त विष्टि करण है।।
चन्द्रमा - सिंह राशि पर 15:40 PM तक उपरान्त कन्या राशि पर।।
सूर्य – मिथुन राशि एवं मृगशिरा नक्षत्र पर गोचर कर रहे हैं।।
मुम्बई सूर्योदय - प्रातः 06:00:38
मुम्बई सूर्यास्त - सायं 19:18:58
वाराणसी सूर्योदय - प्रातः 05:13:40
वाराणसी सूर्यास्त - सायं 18:47:52
राहुकाल (अशुभ) - सायं 17:40 बजे से 19:20 बजे तक।।
विजय (शुभ) मुहूर्त - दोपहर 12.28 PM से 12.52 बजे तक।।
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सप्तमी तिथि विशेष - सप्तमी तिथि को आँवला त्याज्य बताया गया है। सप्तमी तिथि मित्रप्रद तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह सप्तमी तिथि एक शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि के स्वामी भगवान सूर्य देवता हैं। यह सप्तमी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह सप्तमी तिथि शुक्ल पक्ष में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि को सुबह सर्वप्रथम स्नान करके भगवान सूर्य को सूर्यार्घ देकर उनका पूजन करना चाहिये। उसके बाद आदित्यह्रदयस्तोत्रम् का पाठ करना चाहिये। इससे जीवन में सुख, समृद्धि, हर्ष, उल्लास एवं पारिवारिक सुखों कि सतत वृद्धि होती है। सप्तमी तिथि में भगवान सूर्य की पुजा करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।।
मित्रों, सोमवार और शुक्रवार कि सप्तमी विशेष रूप से शुभ फलदायी नहीं मानी जाती बाकी दिनों कि सप्तमी सभी कार्यों के लिये शुभ फलदायी मानी जाती है। सप्तमी को भूलकर भी नीला वस्त्र धारण नहीं करना चाहिये तथा ताम्बे के पात्र में भोजन भी नहीं करना चाहिये। सप्तमी को फलाहार अथवा मीठा भोजन विशेष रूप से नमक के परित्याग करने से भगवान सूर्यदेव कि कृपा सदैव बनी रहती है।।
मित्रों, ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जिस व्यक्ति का जन्म सप्तमी तिथि में होता है, वह व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है। इस तिथि में जन्म लेनेवाला जातक गुणवान और प्रतिभाशाली होता है। ये अपने मोहक व्यक्तित्व से लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने की योग्यता रखते हैं। इनके बच्चे भी गुणवान और योग्य होते हैं। धन धान्य के मामले में भी यह व्यक्ति काफी भाग्यशाली होते हैं। ये संतोषी स्वभाव के होते हैं और इन्हें जितना मिलता है उतने से ही संतुष्ट रहते हैं।।
Panchang 21 June 2026
पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के जातकों का गुण एवं स्वभाव:- यदि आपका जन्म पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में हुआ है तो आप ऐसे भाग्यशाली व्यक्ति हैं जो समाज में सम्माननीय होता हैं और जिनका अनुसरण हर कोई करना चाहता है। आपमें आत्मविश्वास कूट-कूट कर भरा होता है तथा नेतृत्व की क्षमता आपमें बचपन से ही होता है। इन्ही सब कारणों से आपके अधीनस्थ कर्मचारी भी आपसे भय खाते हैं। परिवार में भी आप एक मुखिया की भूमिका में रहते हैं।।
परिवार के सभी छोटे बड़े कार्यों के लिए आपका परामर्श आवश्यक समझा जाता है तथा सभी सदस्य आपके द्वारा कहे गये वचनों को आज्ञा समझ कर पालन करते हैं। आपको अनुशासन में रहना पसंद है तथा आप परिवार या कार्यस्थल पर दूसरों से भी अनुशासन की अपेक्षा करते हैं। आपकी अनुशासनात्मक प्रवृत्ति पूर्ण रूप से सफल कही जा सकती है। आप प्रशासनिक क्षेत्रों में बेहद सफल होते हैं।।
पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र शुक्र का नक्षत्र है इसका पर्याय भाग्य भी होता है। इस नक्षत्र में जन्मा जातक स्वभाव से चंचल एवं त्यागी होगा। दृढनिश्चयी होने के साथ-साथ आप कामी भी होंगे। शुक्र एक कामुक ग्रह माना जाता है इस नक्षत्र में चन्द्रमा जैसे ही आता है जातक की काम एवं चपलता उसपर हावी हो जाती है। इस नक्षत्र में जन्मा जातक मनमोहक छवि और मीठा बोलने वाला होता है।।
ऐसे लोग दूसरों की मदद के लिए सदैव तत्पर रहते हैं और दान देने में भी नहीं हिचकिचाते। शुक्र के कारण आपका व्यवहार सौम्य एवं मीठा होता है। आपकी सरकारी क्षेत्र में कार्य करने की संभावनाएं अधिक होती है तथा अपने गुणों के कारण आप राज्य से घनिष्ठ सम्बन्ध भी बना लेते हैं। पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में जन्मी स्त्री सौम्य स्वभाव की होतीं हैं। दूसरों की मदद और दान करना इनका विशेष गुण होता है।।
पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में जन्म लेनेवाली स्त्री क्रोधी और दृढ इच्छा रखने वाली होती हैं। ऐसी स्त्रियों का दान पुण्य का सहज स्वभाव होता है। ऐसे जातकों का प्रेम में असफलता के कारण मानसिक कष्ट, कमर का दर्द, ह्रदय रोग, वायु एवं रक्त से सम्बंधित रोग होने की संभावनायें अधिक होती है।।
प्रथम चरण:- पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी सूर्य हैं। इस नक्षत्र में जन्मा जातक मीठा बोलने वाला एवं सुन्दर होता है। इस नक्षत्र के प्रथम चरण में जन्मा व्यक्ति सर्वगुण संपन्न एवं समर्थ होता है। लग्नेश सूर्य की दशा विशेष फलदायी तथा मंगल की दशा में जातक का भाग्योदय होने की संभावनायें अधिक होती हैं।।
द्वितीय चरण:- पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के द्वितीय चरण का स्वामी बुध हैं। बुध के प्रभाव के कारण जातक वेद शास्त्रों का ज्ञाता एवं धर्म शास्त्रों का मर्मज्ञ होता है। सूर्य की दशा जातक के लिए स्वास्थ्यवर्धक होति है तथा मंगल की दशा-अन्तर्दशा में जातक का भाग्योदय होता है। बुध की दशा में धन की प्राप्ति के योग बनते हैं।।
तृतीय चरण:- पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के तृतीय चरण का स्वामी शुक्र हैं। लग्नेश सूर्य के साथ शुक्र का सम्बन्ध क्रूरता भरा है। क्योंकि शुक्र दानवों का गुरु ग्रह है। फलस्वरूप इस नक्षत्र में जन्मा व्यक्ति क्रूर होगा। सूर्य की दशा जातक के लिए स्वास्थ्यवर्धक होगी तथा मंगल की दशा-अन्तर्दशा में जातक का भाग्योदय होगा। बुध की दशा में धन की प्राप्ति के योग बनेगे।।
चतुर्थ चरण:- पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण का स्वामी मंगल हैं। मंगल नक्षत्र स्वामी शुक्र का शत्रु एवं क्रूर ग्रह है। मंगल, सूर्य, शुक्र भी तेजस्वी ग्रह हैं। अतः जातक की आयु अधिक नहीं होगी। सूर्य की दशा माध्यम फल देगी एवं मंगल की दशा में जातक का भाग्योदय होगा।।
Panchang 21 June 2026
मित्रों, आज रविवार को सुबह भगवान सूर्य को ताम्बे के एक लोटे में लाल चन्दन, गुड़ और लाल फुल मिलाकर अर्घ्य इस मन्त्र से प्रदान करें। अथ मन्त्रः- एही सूर्य सहस्रांशो तेजो राशे जगत्पते। अनुकम्प्य मां भक्त्या गृहाणार्घ्य दिवाकर।। अथवा गायत्री मन्त्र से भी सूर्यार्घ्य दे सकते हैं।।
इसके बाद आदित्यह्रदयस्तोत्रम् का पाठ करना चाहिये। भोजन में मीठा भोजन करना चाहिये नमक का परित्याग करना अत्यन्त श्रेयस्कर होता है। इस प्रकार से किया गया रविवार का पूजन आपको समाज में सर्वोच्च प्रतिष्ठा एवं अतुलनीय धन प्रदान करता है। क्योंकि सूर्य धन और प्रतिष्ठा का कारक ग्रह है।।
दिशाशूल - रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।।
रविवार का विशेष - रविवार के दिन तेल मर्दन करने से ज्वर (बुखार लगता) होता हैं - (मुहूर्तगणपति)।।
रविवार को क्षौरकर्म (बाल, दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से बुद्धि और धर्म की हानि होती है। (महाभारत अनुशासनपर्व)।।
विशेष जानकारी - मित्रों, रविवार के दिन, चतुर्दशी एवं अमावस्या तिथियों में तथा श्राद्ध एवं व्रत के दिन स्त्री सहवास नहीं करना चाहिये। साथ ही तिल का तेल, लाल रंग का साग तथा कांसे के पात्र में भोजन करना भी शास्त्रानुसार मना है अर्थात ये सब नहीं करना चाहिये।।
Panchang 21 June 2026
रविवार ध्रुव प्रकृति का दिन माना जाता है। रविवार भगवान सूर्य का दिन होता है। यह भगवान विष्णु का दिन भी माना जाता है। वैदिक सनातन धर्म में इसे सर्वश्रेष्ठ वार माना गया है। अच्छा स्वास्थ्य व तेजस्विता पाने के लिए रविवार के दिन उपवास रखना चाहिए। प्रचलन से सप्ताह का पहला वार सोमवार को माना जाता है क्योंकि रविवार को छुट्टी का नाम घोषित है। परंतु सही मायने में तो रविवार सप्ताह का प्रथम वार ही है। परंतु रविवार को कुछ ऐसे कार्य जिसे यदि आप करते हैं तो इससे आपन नुकसान उठाना पड़ सकता है।।
रविवार के दिन पश्चिम और वायव्य दिशा में यात्रा न करें। इन दिशाओं में यात्रा करना जरूरी हो तो रविवार को दलिया, घी या पान खाकर या इससे पहले पांच कदम पीछे चलकर ही इस दिशा में जाएं क्योंकि इस दिन खासकर पश्चिरम में दिशा का शूल माना जाता है। रविवार को तांबे से निर्मित चीजों को बेचने से बचना चाहिए। तांबे के अलावा सूर्य से संबंधित अन्य धातु या वस्तुएं भी ना बेचें।।
रविवार के दिन नीले, काले, कत्थई और ग्रे कलर के कपड़े नहीं पहनना चाहिए। काले या नीले से मिलते जुलते कपड़े तो कदापि ना पहनें। रविवार को नमक नहीं खाना चाहिए। इससे स्वास्थ्य पर असर पड़ता है और हर कार्य में बाधा आती है। खास कर सूर्यास्त के बाद तो नमक बिलकुल भी नहीं खाना चाहिए।।
रविवार को दिन में सहवास करना और मांस एवं मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन शनि से संबंधित पदार्थों का सेवन भी नहीं करना चाहिए। आमतौर पर लोग रविवार को ही बाल कटाते हैं परंतु इस दिन बाल कटाने से सूर्य कमजोर होता है। इस दिन शरीर में तेल मालिश भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि यह सूर्य का दिन होता है और तेल शनि का होता है।।
Panchang 21 June 2026
मित्रों, रविवार सप्ताह का प्रथम दिन होता है, इसके अधिष्ठात्री देव सूर्य को माना जाता है। इस दिन जिस व्यक्ति का जन्म होता है वह व्यक्ति तेजस्वी, गर्वीले और पित्त प्रकृति के होते है। इनके स्वभाव में क्रोध और ओज भरा होता है तथा ये चतुर और गुणवान होते हैं। इस दिन जन्म लेनेवाले जातक उत्साही और दानी होते हैं तथा संघर्ष की स्थिति में भी पूरी ताकत से काम करते हैं।।
रविवार को जन्म लेनेवाले जातक सुन्दर एवं गेंहूए रंग के होते हैं। इनमें तेजस्विता का गुण स्वाभाविक ही होता है। महत्वाकांक्षी होने के साथ ही प्रत्येक कार्य में जल्दबाजी करते है और सफल भी होते हैं। उत्साह इनमें कूट-कूट कर भरा होता है तथा ये परिश्रम से कभी भी घबराते नहीं हैं। ये हर कार्य में रूचि लेने वाले होते हैं परन्तु ये लोग समय के पाबंद नहीं होते। ये जातक अपना करियर किसी भी क्षेत्र में अपने कठिन परिश्रम से बनाने की क्षमता रखते हैं। इनका शुभ दिन रविवार तथा शुभ अंक 7 होता है।।
आज का सुविचार - मित्रों, गलती कबूल़ करने और गुनाह छोङने में कभी देर ना करना। क्योंकि सफर जितना लंबा होगा वापसी उतनी ही मुशिकल हो जाती हैं। दुनिया में सिर्फ माँ-बाप ही ऐसे हैं जो बिना किसी स्वार्थ के प्यार करते हैं। कोई देख ना सका उसकी बेबसी जो सांसें बेच रहा हैं गुब्बारों में डालकर।।
Panchang 21 June 2026
सूर्य की महादशा में मंगल विजय और बुध कुष्ठ रोग देता है ।।.... आज के इस पुरे लेख को पढ़ने के लिये इस लिंक को क्लिक करें.... वेबसाईट पर पढ़ें: & ब्लॉग पर पढ़ें:
"मकर राशि वालों के मृत्यु का योग।। Makar Rashi Walo Ki Mrityu." - My Latest video.
"तुला राशि वालों की मृत्यु किस उम्र में होगी।। Tula Rashi Walo Ki Mrityu." - My Latest video.
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Panchang 21 June 2026
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