मंगल नवम भाव में प्रभाव और उपाय।।

Swami Ji Maharaj
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मंगल नवम भाव में प्रभाव और उपाय।। Mangal in Navam Bhav Effects & Remedies.

मंगल नवम भाव में प्रभाव और उपाय।। Mangal in Navam Bhav Effects & Remedies


नवम भाव और मंगल का संबंध।। Introduction.

मित्रों, नवम भाव को भाग्य भाव, धर्म भाव तथा पितृ भाव कहा जाता है। और यह त्रिकोण भाव होने के कारण समस्त भावों में सबसे शुभ माना गया है। इसी से जातक के भाग्य, धर्म के प्रति रुचि, गुरुजनों का आशीर्वाद, पिता से संबंध तथा दीर्घ यात्राओं का आकलन किया जाता है। यह भाव मनुष्य के जीवन में उस अदृश्य शक्ति का भी प्रतिनिधित्व करता है। जिसे हम भाग्य अथवा पूर्वजन्म के संचित पुण्य कहते हैं।।

अब मंगल की प्रकृति पर विचार करें तो यह साहस, पराक्रम, ऊर्जा तथा स्वतंत्र विचारों का तीव्र तथा क्रूर ग्रह भी माना गया है। मंगल जिस भाव में भी बैठता है, वहाँ अपनी ऊर्जा तथा तीव्रता का विशेष संचार करता है। तथा उस भाव के विषयों को गति प्रदान करता है। जब यह साहसी ग्रह भाग्य के भाव में बैठता है, तो एक अत्यंत रोचक संयोग उत्पन्न होता है, क्योंकि भाग्य स्वयं धैर्य तथा शांति का विषय है। जबकि मंगल शीघ्रता तथा साहस का प्रतीक है।।

यही द्वंद्व इस नवम भाव तथा मंगल ग्रह के संयोग की सबसे बड़ी पहचान बन जाता है। ऐसा जातक भाग्य की प्रतीक्षा करने की बजाय अपने साहस तथा पुरुषार्थ के बल पर भाग्य को स्वयं गढ़ना पसंद करता है। अर्थात यहाँ भाग्य कुछ हद तक कर्म से जुड़ जाता है। जब साहस के कारक मंगल इसी नवम भाव में स्थित होते हैं, तब जातक के भाग्योदय, धार्मिक प्रवृत्ति तथा पिता से संबंधों पर विशेष प्रभाव देखने को मिलता है।।

मंगल की स्थिति यदि बलवान एवं शुभ हो तो साहसपूर्ण भाग्योदय तथा गुरुजनों का आशीर्वाद प्रदान करती है। वहीं पीड़ित अथवा अशुभ मंगल पिता से मतभेद तथा भाग्य में बाधा भी उत्पन्न करता है। वैसे वास्तविक फल का निर्णय तो सदैव संपूर्ण जन्मकुंडली, दशा और गोचर के आधार पर ही किया जाता है।।

नवम भाव में मंगल का सामान्य स्वभाव।। General Nature of Mars in the Ninth House.

मित्रों, नवम भाव में मंगल जातक को स्वतंत्र विचारों वाला, साहसी तथा धर्म-कर्म के प्रति रुचि रखने वाला स्वभाव प्रदान करता है। ऐसे जातक अपने पुरुषार्थ से भाग्य निर्माण करने में विश्वास रखते हैं। तथा परंपरागत मान्यताओं पर प्रश्न उठाने से भी नहीं हिचकिचाते। इनकी धार्मिकता भी अंधश्रद्धा पर आधारित न होकर तर्क तथा अनुभव पर आधारित होती है। जिससे इनका धर्म के प्रति दृष्टिकोण अत्यंत व्यावहारिक बन जाता है।।

स्वभाव में साहस तथा स्वतंत्रता की प्रवृत्ति के कारण ये लंबी यात्राएँ करने तथा नए स्थानों की खोज करने में विशेष रुचि रखते हैं। इनके भीतर एक स्वाभाविक जिज्ञासा होती है, जो इन्हें नई संस्कृतियों, नए विचारों तथा नए अनुभवों की ओर आकर्षित करती है। तथा यही जिज्ञासा कई बार इन्हें अथवा इनके भाग्य को नई दिशा भी प्रदान देती है।।

कई बार अत्यधिक हठी स्वभाव के कारण गुरुजनों की सलाह की अनदेखी करने की प्रवृत्ति भी ऐसे लोगों में देखी जाती है। क्योंकि मंगल का स्वभाव स्वतंत्र निर्णय लेने का है। जबकि नवम भाव गुरुजनों के मार्गदर्शन को स्वीकार करने की अपेक्षा रखता है। यही टकराव कभी-कभी जातक तथा उसके गुरुजनों के बीच वैचारिक मतभेद का कारण भी बन जाता है।।

शुभ मंगल का नवम भाव में फल।। Effects of an Auspicious Mars in the Ninth House.

मित्रों, यदि नवम भाव का मंगल स्वराशि, उच्च राशि अथवा शुभ ग्रहों की दृष्टि से युक्त होकर बलवान हो तो जातक को साहसपूर्ण भाग्योदय, पिता से सहयोग तथा गुरुजनों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। ऐसे जातक धार्मिक कार्यों, तीर्थयात्राओं अथवा विदेश यात्राओं से विशेष लाभ प्राप्त करते हैं। तथा इनकी यात्राएँ प्रायः जीवन में महत्वपूर्ण मोड़ भी सिद्ध होती हैं।।

धर्म-कर्म में सफलता तथा उच्च शिक्षा में भी उन्नति के अवसर बनते रहते हैं। तथा जातक अपने साहसपूर्ण प्रयासों से भाग्य को अपने अनुकूल भी बना लेता है। पिता का सहयोग जीवन भर बना रहता है। तथा जातक धार्मिक अथवा दार्शनिक विषयों में गहन रुचि रखता है। जिससे समाज में इन्हें एक विचारशील तथा साहसी व्यक्ति के रूप में पहचान मिलती है।।

ऐसे जातक कठिन परिस्थितियों में भी अपने भाग्य पर विश्वास बनाए रखते हैं। तथा किसी भी बाधा को अवसर में बदलने की विशेष क्षमता रखते हैं। सिंह, मेष तथा वृश्चिक जैसी अग्नि तथा जल राशियों में स्थित शुभ मंगल विशेष रूप से जातक को साहसिक कार्यों तथा दूरगामी योजनाओं में सफलता दिलाने में सहायक सिद्ध होता है।।

अशुभ मंगल का नवम भाव में फल।। Effects of an Inauspicious Mars in the Ninth House.

मित्रों, यदि नवम भाव का मंगल नीचस्थ, पापग्रहों से पीड़ित अथवा निर्बल हो तो जातक को पिता से मतभेद अथवा दूरी की स्थिति का सामना करना पड़ता है। ऐसे जातकों में हठी स्वभाव के कारण गुरुजनों तथा धर्म-गुरुओं के प्रति अनादर की प्रवृत्ति भी कई बार देखी जाती है। जिससे धार्मिक तथा पारिवारिक दोनों संबंधों में तनाव उत्पन्न होता है।।

यात्राओं में बाधा अथवा दुर्घटना की प्रवृत्ति भी देखी जा सकती है। विशेषकर विदेश यात्राओं के दौरान सावधानी आवश्यक होती है। शीघ्रता में लिए गए निर्णयों के कारण भाग्य में बाधा तथा धार्मिक कार्यों में विघ्न उत्पन्न हो जाता है। तथा कभी-कभी अत्यधिक आत्मविश्वास के कारण जातक अनावश्यक जोखिम भी उठा लेता है। ऐसे में भी बिना मतलब के नुकशान हो जाती है।।

ऐसे जातकों को अपने साहस को धैर्य के साथ संतुलित करना सीखना चाहिए। क्योंकि भाग्य के भाव में शीघ्रता प्रायः अनुकूल परिणाम नहीं देती। पिता तथा गुरुजनों के साथ संवाद बनाए रखना तथा उनकी सलाह को सम्मान देना भी इस नवम भाव में मंगल की स्थिति के अशुभ प्रभाव को नियंत्रित करने में विशेष रूप से सहायक सिद्ध होता है।।

स्वास्थ्य पर प्रभाव।। Health Effects.

मित्रों, वैदिक ज्योतिष के अनुसार नवम भाव का संबंध जांघों तथा कूल्हों से माना गया है। और मंगल का संबंध रक्त तथा शरीर की ऊर्जा से होता है। नवम भाव में मंगल यदि शुभ हो तो शारीरिक शक्ति तथा लंबी यात्राओं को सहन करने की क्षमता बनी रहती है। तथा जातक में असाधारण सहनशक्ति भी देखी जाती है।।

परन्तु इसके विपरीत यदि मंगल अशुभ हो तो जांघों अथवा कूल्हों में चोट की सम्भावना तथा यात्रा के दौरान दुर्घटना के जोखिम भी उत्पन्न हो जाती है। रक्त संबंधी विकार अथवा उच्च रक्तचाप जैसी समस्याएँ भी इसी प्रकार के पीड़ित मंगल की स्थिति से जुड़ी मानी जाती हैं। विशेषकर जब मंगल अत्यधिक क्रूर ग्रहों से प्रभावित हो तब ज्यादा जोखिम हो जाता है।।

ऐसी स्थिति में सावधानी बरतने के साथ-साथ आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सकीय परामर्श भी अवश्य लेना चाहिए। यात्रा के दौरान विशेष रूप से सतर्क रहना चाहिए। तथा जल्दबाजी में लिए गए निर्णयों से बचना ही सबसे उत्तम स्वास्थ्य-रक्षा का उपाय है। और मंगल से सम्बंधित बताये गए उपायों को पुर मन से श्रद्धापूर्वक करना चाहिए।।

मंगल को बलवान बनाने के वैदिक उपाय।। Vedic Remedies to Strengthen Mars in the Ninth House.

मित्रों, नवम भाव के मंगल को शुभ अथवा बलवान बनाए रखने के लिए आप मंगल देवता के मंत्र "ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः" का श्रद्धापूर्वक जप करें। पिता तथा गुरुजनों का सम्मान करना चाहिए तथा साथ ही हनुमान जी की उपासना भी करनी चाहिए। यह सब उपाय अत्यन्त शुभ फलदायी माना गया है। क्योंकि हनुमान जी को साहस तथा भक्ति दोनों का संगम माना जाता है।।

एक किसी विकल्प को देखें तो मंगलवार का व्रत रखना भी श्रेयस्कर होता है। तथा तीर्थयात्रा एवं धार्मिक अनुष्ठानों में सम्मिलित होना भी शुभ माना जाता है। लाल वस्तुओं का दान करना नवम भाव के मंगल को संतुलित बनाने में सहायक माना जाता है। तथा मंगलवार के दिन मंगल से सम्बंधित दान विशेष रूप से फलदायी सिद्ध होता है।।

और मेरी सलाह तो यही रहेगी कि साहस के साथ-साथ धैर्य को भी अपने स्वभाव में सम्मिलित करना चाहिए। क्योंकि भाग्य के भाव में यही संतुलन सबसे बड़ा उपाय भी सिद्ध होता है। पिता के साथ नियमित संवाद तथा उनकी सलाह को सुनने की आदत भी इस नवम भाव और मंगल ग्रह की स्थिति को अत्यंत सुदृढ़ बनाती है।।

शास्त्रीय प्रमाण।। Scriptural References.

मित्रों, बृहत्पाराशर होरा शास्त्र में मंगल को साहस, पराक्रम तथा ऊर्जा का प्रमुख कारक ग्रह बताया गया है। फलदीपिका के अनुसार नवम भाव में स्थित बलवान मंगल जातक को साहसपूर्ण भाग्योदय तथा गुरु कृपा प्रदान करता है। जबकि पीड़ित मंगल भाग्य में बाधा उत्पन्न करता है।।

बृहज्जातक में नवमस्थ मंगल को धर्म तथा साहसिक यात्राओं में सफलता का प्रमुख कारक ग्रह माना गया है। इसी प्रकार जातक पारिजात में भी नवम भाव के मंगल को भाग्य तथा पिता दोनों पर प्रत्यक्ष प्रभाव डालने वाला ग्रह बताया गया है। परन्तु इसका अंतिम फल नवमेश की स्थिति तथा संपूर्ण जन्मकुंडली के समन्वित अध्ययन के पश्चात ही निश्चित किया जाना चाहिए।।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न।। Frequently Asked Questions. (FAQ)

Q 1. नवम भाव में शुभ मंगल क्या फल देता है? Effects of Auspicious Mars in 9th House.

उत्तर:- नवम भाव का शुभ मंगल साहसपूर्ण भाग्योदय, पिता से सहयोग, गुरु कृपा तथा धार्मिक कार्यों में सफलता जैसे उत्तम फल प्रदान करता है।।

Q 2. नवम भाव में अशुभ मंगल क्या नुकसान देता है? Problems Caused by Malefic Mars in 9th House.

उत्तर:- नवम भाव का अशुभ मंगल पिता से मतभेद, यात्राओं में बाधा तथा भाग्य में विलंब जैसी बाधाएँ उत्पन्न करता है।।

Q 3. नवम भाव के मंगल से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएँ कौन-सी हैं? Health Issues Linked to Mars in 9th House.

उत्तर:- वैदिक ज्योतिष में नवम भाव का संबंध जांघों तथा कूल्हों से माना गया है। पीड़ित मंगल इन क्षेत्रों से जुड़ी चोट लगने का संकेत देता है। ऐसे में ज्योतिषीय परामर्श के साथ-साथ डॉक्टर से इलाज भी आवश्य करवाना चाहिए।।

Q 4. नवम भाव के मंगल को बलवान बनाने का सबसे प्रभावी वैदिक उपाय क्या है? Most Effective Remedy for Mars in 9th House.

उत्तर:- "ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः" इस मंत्र का जप, पिता तथा गुरुजनों का सम्मान, मंगलवार का व्रत और तीर्थयात्रा ज्योतिषीय दृष्टिकोण से सबसे प्रभावी उपाय माना जाता है।।

Q 5. क्या नवम भाव का मंगल विदेश यात्रा के योग बनाता है? Does Mars in 9th House Indicate Foreign Travel.

उत्तर:- हाँ, नवम भाव दीर्घ यात्राओं का भाव माना जाता है। अतः यहाँ स्थित मंगल विदेश यात्रा तथा भाग्य में विदेश से जुड़े लाभ के योग बनाता है। परंतु इसका पूर्ण निर्णय संपूर्ण कुंडली देखकर ही किया जाता है।।

लेख का निष्कर्ष।। Conclusion.

मित्रों, कुंडली के नवम भाव में बैठा मंगल शुभ हो तो जातक को साहसपूर्ण भाग्योदय, धर्म-कर्म में रुचि तथा पिता से सहयोग प्रदान करता है। वहीं अशुभ होने पर पिता से मतभेद तथा भाग्य में बाधा जैसी चुनौतियाँ भी उत्पन्न करता है। यह नवम भाव और मंगल ग्रह के संयोग हमें यह सिखाता है कि भाग्य केवल प्रतीक्षा करने की वस्तु नहीं। बल्कि साहस तथा पुरुषार्थ से भी गढ़ा जा सकता है। परन्तु इस साहस के साथ विनम्रता तथा धैर्य का संतुलन भी उतना ही आवश्यक होता है।।

वैदिक ज्योतिष के अनुसार मंगल देवता के मंत्र का जप, पिता-पितृतुल्य लोग-गुरुजनों का सम्मान, मंगलवार का व्रत तथा तीर्थयात्रा इसे संतुलित एवं बलवान बनाने में सहायक मानी गई है। और यहाँ मैं यही कहूँगा कि साहस को यदि विवेक की डोर से बाँध दिया जाए, तो यही मंगल जातक को भाग्य के शिखर तक पहुँचा सकता है। अन्यथा वही साहस अनावश्यक जोखिम में भी बदल सकता है।।

परन्तु मेरी आपको यही सलाह है कि किसी भी विशेष उपाय अथवा निर्णायक निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले किसी अनुभवी, विद्वान एवं योग्य ज्योतिषी से संपूर्ण जन्मकुंडली का विश्लेषण विधिपूर्वक अवश्य करवाना चाहिए। ताकि सही एवं व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्राप्त हो सके।।

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