माता कालरात्रि की विशेष भोग-पूजन विधि एवं विशिष्ट मंत्र।।

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माता कालरात्रि की विशेष भोग-पूजन विधि एवं विशिष्ट मंत्र।। Ma Kalratri Special Bhog And Mantras.

माता कालरात्रि की विशेष भोग-पूजन विधि एवं विशिष्ट मंत्र।। Ma Kalratri Special Bhog And Mantras


माता कालरात्रि के पूजन का परिचय।। Introduction.

मित्रों, नवरात्रि के सप्तम दिवस माँ दुर्गा के सप्तम स्वरूप, माता कालरात्रि की उपासना की जाती है। माता का यह स्वरूप अत्यंत उग्र तथा भयंकर प्रतीत होता है। क्योंकि इनका वर्ण काजल के समान घोर काला है और केश बिखरे हुए हैं। साथ ही गले में विद्युत के समान चमकने वाली माला सुशोभित होती है। परंतु यह स्वरूप जितना भयावह दिखाई देता है। अपने भक्तों के लिए यह उतना ही कल्याणकारी तथा शुभ फल प्रदान करने वाला है। इसीलिए इन्हें "शुभंकरी" भी कहा जाता है। माता गर्दभ अर्थात गधे पर आरूढ़ होकर, अपने चार हाथों में खड्ग, लौह-कंटक, अभय-मुद्रा तथा वर-मुद्रा धारण करती हैं।।

वैदिक शास्त्रों में माता कालरात्रि को शनि ग्रह का भी अधिष्ठाता माना गया है। अतः इनकी उपासना से साधक के भीतर भय, तंत्र-बाधा, शत्रु-पीड़ा तथा समस्त नकारात्मक-शक्तियों के नाश की सामर्थ्य उत्पन्न होती है। जो साधक अपने जीवन में भूत-प्रेत बाधा, काल-भय अथवा किसी गूढ़ संकट से मुक्ति की कामना रखते हैं। उनके लिए सप्तम दिवस का यह पूजन सर्वाधिक फलदायी माना जाता है।।

परन्तु आप बिलकुल घबराएँ नहीं। आज हम इसी विषय पर विस्तार से समझेंगे कि माता कालरात्रि का पूजन किस प्रकार करना चाहिए। इन्हें कौन सा भोग सर्वाधिक प्रिय होता है। किस विशिष्ट श्रृंगार एवं विशिष्ट मंत्र के जप से माता की शीघ्र प्रसन्नता प्राप्त होती है। तथा इस पूजन से कौन सा विशिष्ट फल प्राप्त होता है। आज के इस लेख में हम इसी विषय को विस्तार से समझेंगे।।

माता कालरात्रि की पूजन-विधि।। Puja Vidhi Of Maa Kalratri.

मित्रों, नवरात्रि के सप्तम दिवस प्रातःकाल ब्रह्म-मुहूर्त में उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके पश्चात पूजा-स्थान को शुद्ध करके, माता कालरात्रि की प्रतिमा अथवा चित्र को एक स्वच्छ चौकी पर स्थापित करना चाहिए।।

सर्वप्रथम श्रीगणेश जी तथा कलश का स्मरण करके पूजन आरंभ करना चाहिए। तत्पश्चात माता कालरात्रि का आवाहन करना चाहिए। माता को रोली-अक्षत अर्पित करने के पश्चात लाल अथवा रातरानी जैसे गहन-सुगंधित पुष्प अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके पश्चात धूप-दीप प्रज्वलित करके माता जी की आरती करनी चाहिए। तथा अंत में क्षमा-प्रार्थना के साथ पूजन संपन्न करना चाहिए।।

माता को सर्वाधिक प्रिय भोग, गुड़ तथा गुड़ से निर्मित वस्तुओं का योग।। The Bhog Most Dear To The Mother, The Offering Of Jaggery And Its Preparations.

मित्रों, शास्त्रों के अनुसार माता कालरात्रि को गुड़ अथवा गुड़ से निर्मित भोग सर्वाधिक प्रिय माना जाता है। जिसे माता को अर्पित करने के पश्चात ब्राह्मणों को दान करने से साधक को समस्त प्रकार के दुःख-दर्द तथा शोक से मुक्ति प्राप्त होती है। तथा उसे अकाल-मृत्यु के भय से भी रक्षा मिलती है।।

इसके साथ ही माता को गुड़ से निर्मित मिठाई, जैसे गुड़-तिल के लड्डू का भोग लगाना भी अत्यंत प्रिय माना जाता है। कुछ विद्वानों के अनुसार माता को शहद तथा उड़द से निर्मित वस्तुओं का भोग अर्पित करना भी विशेष रुप से शुभ फलदायी सिद्ध होता है। जिससे साधक के जीवन से समस्त गूढ़ तथा तांत्रिक बाधाओं का नाश होता है।।

माता का विशिष्ट श्रृंगार, लाल वस्त्र तथा सिंदूर का योग।। Special Adornment Of The Mother, Red Attire And Vermillion.

मित्रों, माता कालरात्रि यद्यपि श्याम-वर्ण तथा उग्र स्वरूपा हैं। तथापि इन्हें लाल रंग के वस्त्र तथा सिंदूर अत्यंत प्रिय माना जाता है। जो इनके भीतर छिपी हुई कल्याणकारी तथा शुभंकरी शक्ति का प्रतीक होता है। इनके श्रृंगार में लाल चुनरी अर्पित करना तथा दीपक जलाकर माता को प्रकाशित करना विशेष शुभ माना जाता है। क्योंकि प्रकाश ही अंधकार अर्थात काल पर विजय का प्रतीक है।।

इसके साथ ही माता को लाल पुष्पों की माला पहनाना भी अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है। इस प्रकार के साहसपूर्ण तथा तेजस्वी श्रृंगार से माता शीघ्र प्रसन्न होकर साधक को समस्त भय तथा बाधाओं से मुक्ति का आशीर्वाद प्रदान करती हैं।।

माता कालरात्रि के विशिष्ट मंत्र, जप से शीघ्र प्रसन्नता का योग।। Special Mantras Of Maa Kalratri, The Yoga Of Swift Grace Through Chanting.

मित्रों, माता कालरात्रि की प्रसन्नता प्राप्त करने के लिए अग्रलिखित मूल-मंत्र का श्रद्धापूर्वक नियमित जप करना चाहिए। "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्र्यै नमः।।" इसके साथ ही ध्यान-मंत्र के रूप में निम्न श्लोक का भी पाठ करना चाहिए।।

"एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी।।"

मित्रों, इस मंत्र में माता के उग्र तथा भयंकर स्वरूप का वर्णन किया गया है। जो वास्तव में भक्तों के समस्त भय तथा शत्रुओं का नाश करने वाला है। प्रातः तथा सायं दोनों समय, विशेषकर रात्रि के समय इस मंत्र का कम से कम एक माला अर्थात एक सौ आठ बार जप करने से माता शीघ्र प्रसन्न होती हैं। मंत्र-जप के समय सावधानियाँ रखनी चाहिए। जैसे मंत्र-जप सदैव स्वच्छ आसन पर बैठकर, दक्षिण अथवा पश्चिम दिशा की ओर मुख करके करना चाहिए।।

क्योंकि माता कालरात्रि को तामसिक-शक्तियों के शमन की देवी भी माना गया है। जप के समय रुद्राक्ष की माला का प्रयोग विशेष रूप से शुभ माना जाता है। चूँकि माता का स्वरूप उग्र होता है, अतः साधक को पूर्ण निर्भीकता, श्रद्धा तथा संयमित भाव से ही जप करना चाहिए। मन में किसी भी प्रकार का भय अथवा संदेह नहीं लाना चाहिए।।

इस पूजन से प्राप्त होने वाला विशिष्ट फल।। Special Fruit Obtained From This Worship.

मित्रों, जो साधक नवरात्रि के सप्तम दिवस विधिपूर्वक माता कालरात्रि का पूजन, निर्धारित भोग-अर्पण तथा मंत्र-जप करता है। उसे समस्त प्रकार के भय, विशेषकर अग्नि-भय, जल-भय, काल-भय तथा शत्रु-भय से मुक्ति प्राप्त होती है। इसके साथ ही सहस्रार-चक्र के जागृत होने से साधक को आध्यात्मिक-जागृति, तंत्र-बाधाओं तथा भूत-प्रेत-बाधाओं से रक्षा। साथ ही समस्त नकारात्मक-ऊर्जाओं के नाश जैसा विशिष्ट फल प्राप्त होता है। इसी कारण माता कालरात्रि को तांत्रिक-साधना में भी अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त होता है।।

और मेरी सलाह तो यही रहेगी कि इन उपायों को केवल औपचारिकता के लिए नहीं। बल्कि पूर्ण श्रद्धा तथा निरंतरता के साथ करना चाहिए। माता का पूजन शुद्ध मन, निर्भीक भाव तथा सच्ची भक्ति-भावना के साथ ही करना चाहिए। क्योंकि बाह्य आडंबर की अपेक्षा आंतरिक साहस तथा श्रद्धा ही माता की वास्तविक प्रसन्नता का कारण बनता है।।

शास्त्रीय प्रमाण।। Scriptural References.

मित्रों, देवी भागवत पुराण तथा दुर्गा-सप्तशती में माता कालरात्रि को नवदुर्गाओं में सप्तम तथा सहस्रार-चक्र की अधिष्ठात्री देवी बताया गया है। स्कंद पुराण में भी यह उल्लेख मिलता है कि सप्तम नवरात्रि में इनकी विधिपूर्वक उपासना करने से साधक को समस्त ग्रह-बाधाओं तथा दुष्ट-शक्तियों से रक्षा प्राप्त होती है।।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न।। Frequently Asked Questions. (FAQ)

प्रश्न 1. माता कालरात्रि को कौन सा भोग सर्वाधिक प्रिय है।। Which Bhog Is Most Dear To Maa Kalratri.

उत्तर:- गुड़ अथवा गुड़ से निर्मित मिठाई, जैसे गुड़-तिल के लड्डू माता को सर्वाधिक प्रिय मानी जाती है।।

प्रश्न 2. माता कालरात्रि का मूल-मंत्र क्या है।। What Is The Primary Mantra Of Maa Kalratri.

उत्तर:- "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्र्यै नमः।।" यह माता का मूल-मंत्र माना जाता है। जिसका नियमित जप माता की शीघ्र प्रसन्नता प्रदान करता है।।

प्रश्न 3. माता कालरात्रि की उपासना से क्या विशिष्ट फल प्राप्त होता है।। What Special Fruit Is Obtained From The Worship Of Maa Kalratri.

उत्तर:- माता की उपासना से समस्त प्रकार के भय, तंत्र-बाधा, भूत-प्रेत-बाधा तथा शत्रु-पीड़ा से मुक्ति जैसा विशिष्ट फल प्राप्त होता है। जिस कारण इन्हें "शुभंकरी" भी कहा जाता है।।

प्रश्न 4. माता कालरात्रि किस चक्र की अधिष्ठात्री देवी हैं।। Which Chakra Is Maa Kalratri The Presiding Deity Of.

उत्तर:- माता कालरात्रि को सहस्रार-चक्र की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है। जो आध्यात्मिक-जागृति तथा नकारात्मक-शक्तियों के नाश का संचार करती हैं।।

प्रश्न 5. मंत्र-जप कितनी बार तथा किस समय करना चाहिए।। How Many Times And At What Time Should The Mantra Be Chanted.

उत्तर:- प्रातः तथा सायं, विशेषकर रात्रि के समय, कम से कम एक माला अर्थात एक सौ आठ बार मंत्र-जप करना चाहिए। जिससे माता शीघ्र प्रसन्न होती हैं।।

लेख का निष्कर्ष।। Conclusion.

मित्रों, नवरात्रि के सप्तम दिवस माता कालरात्रि की विधिपूर्वक उपासना, गुड़ के भोग का अर्पण, तेजस्वी श्रृंगार तथा "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्र्यै नमः" इस मंत्र के नियमित जप से साधक को माता की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह पूजन न केवल आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है। बल्कि साधक के जीवन से समस्त भय, बाधा तथा नकारात्मक-शक्तियों का नाश भी करता है। जो आगामी नवरात्रि-साधना के लिए अत्यंत आवश्यक मानी जाती है।।

परन्तु मेरी आपको यही सलाह है कि इस पूजन को विधिपूर्वक संपन्न करने हेतु किसी विद्वान तथा अनुभवी ब्राह्मण अथवा आचार्य से विस्तृत मार्गदर्शन अवश्य प्राप्त करना चाहिए। ताकि पूजन में किसी प्रकार की त्रुटि न रह जाए तथा माता की पूर्ण कृपा प्राप्त हो सके।।

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