बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष केन्द्र।।
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आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 16 अक्टूबर 2026 दिन शुक्रवार।।
मित्रों, तारीख 16 अक्टूबर 2026 दिन शुक्रवार को अश्विन मास के शुक्ल पक्ष कि षष्ठी तिथि है। आज माता जगतजननी जगदंबा के छठे स्वरुप माता श्री कात्यायनी देवी की पुजा-अर्चना एवं आराधना का सुअवसर होता है। आज माताजी का आवाहन-आमंत्रण और अधिवासन पूर्वक पूजन करना चाहिए। आज मूल नक्षत्र भी है तो माता सरस्वती देवी का भी आवाहन-पूजन करना चाहिए। साथ ही आज माता कात्यायनी को बिल्व पत्र से विधिवत अर्चना करनी चाहिए। आज रवियोग भी है। आप सभी सनातनियों को "माता श्री कात्यायनी देवी की पुजा-अर्चना एवं आराधना" की हार्दिक शुभकामनायें।।
हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी), आज के योग और आज के करण। आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातकों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव ही सर्वश्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो। ऐसी मेरी आप सभी आज के अधिष्ठात्री देवों से हार्दिक प्रार्थना है।।
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।। पधारने हेतु भागवत प्रवक्ता - स्वामी धनञ्जय महाराज की ओर से आपका ह्रदय से धन्यवाद। आप का आज का दिन मंगलमय हो। अपने गाँव, शहर अथवा सोसायटी में भागवत कथा के आयोजन हेतु कॉल - 9375288850 करें या इस लिंक को क्लिक करें।।
वैदिक सनातन हिन्दू पञ्चांग, Vedic Sanatan Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi), 2:- वार (Day), 3:- नक्षत्र (Nakshatra), 4:- योग (Yog) और 5:- करण (Karan).
पञ्चांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग का श्रवण करते थे। शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन-श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पञ्चांग को देखना, पढ़ना एवं सुनना चाहिए।।
आज का पञ्चांग 16 अक्टूबर 2026 दिन शुक्रवार।।
Aaj ka Panchang 16 October 2026.
विक्रम संवत् - 2083.
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर - रौद्र.
शक - 1948.
अयन – सौम्यायनम्.
गोल - याम्य.
ऋतु – शरद.
मास - अश्विन.
पक्ष - शुक्ल.
गुजराती पंचांग के अनुसार – अश्विन शुक्ल पक्ष.
#Panchang_16_October_2026
तिथि - पञ्चमी 03:26 AM बजे तक उपरान्त षष्ठी तिथि है।।
नक्षत्र - ज्येष्ठा 06:48 AM तक उपरान्त मूल नक्षत्र है।।
योग - शोभन 22:06 PM तक उपरान्त अतिगण्ड योग है।।
करण - बालव 03:26 AM तक उपरान्त कौलव 16:39 PM तक उपरान्त तैतिल करण है।।
चन्द्रमा - वृश्चिक राशि पर 06:48 AM तक उपरान्त धनु राशि पर।।
सूर्य – कन्या राशि एवं चित्रा नक्षत्र पर गोचर कर रहे हैं।।
मुम्बई सूर्योदय - प्रातः 06:34:36
मुम्बई सूर्यास्त - सायं 18:12:18
वाराणसी सूर्योदय - प्रातः 06:16:41
वाराणसी सूर्यास्त - सायं 17:44:31
राहुकाल (अशुभ) - सुबह 10:57 बजे से 12:24 बजे तक।।
विजय मुहूर्त (शुभ) - दोपहर 12.12 बजे से 12.36 बजे तक।।
#Panchang_16_October_2026
षष्ठी तिथि विशेष - मित्रों, षष्ठी तिथि को तैल कर्म अर्थात शरीर में तेल मालिश करना या करवाना एवं सप्तमी तिथि को आँवला खाना तथा दान करना भी वर्ज्य बताया गया है। इस षष्ठी तिथि के स्वामी भगवान शिव के पुत्र स्वामी कार्तिकेय जी को बताया गया हैं। यह षष्ठी तिथि नन्दा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह षष्ठी तिथि शुक्ल एवं कृष्ण दोनों पक्षों में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस तिथि में स्वामी कार्तिकेय जी के पूजन से सभी कामनाओं की पूर्ति होती है। विशेषकर वीरता, सम्पन्नता, शक्ति, यश और प्रतिष्ठा कि अकल्पनीय वृद्धि होती है।।
आपके उपर यदि मंगल कि दशा चल रही हो और आप किसी प्रकार के मुकदमे में फंस गये हों तो षष्ठी तिथि को भगवान कार्तिकेय स्वामी का पूजन करें। मुकदमे में अथवा राजकार्य से सम्बन्धित किसी भी कार्य में सफलता प्राप्ति के लिये षष्ठी तिथि को सायंकाल के समय में किसी भी शिवमन्दिर में षण्मुख के नाम से छः दीप दान करें। कहा जाता है, कि स्वामी कार्तिकेय को एक नीला रेशमी धागा चढ़ाकर उसे अपने भुजा पर बाँधने से शत्रु परास्त हो जाते हैं। साथ ही सर्वत्र विजय कि प्राप्ति होती है।।
मित्रों, जिस व्यक्ति का जन्म षष्ठी तिथि को होता है, वह व्यक्ति सैर-सपाटा पसंद करने वाला होता है। इन्हें देश-विदेश घुमने का कुछ ज्यादा ही शौक होता है अत: ये काफी यात्राएं करते रहते हैं। इनकी यात्रायें मनोरंजन और व्यवसाय दोनों से ही प्रेरित होती हैं। इनका स्वभाव कुछ रूखा जैसा होता है। परन्तु ऐसे जातक छोटी छोटी बातों पर भी लड़ने को तैयार हो जाता हैं।।
#Panchang_16_October_2026
मित्रों, आज नवरात्रा की षष्ठी तिथि है। इसलिए आज के दिन आदिशक्ति माता श्री जगतजननी जगदम्बिका माता श्री दुर्गा देवी के छठे रूप माता श्री कात्यायनी की पूजा-अर्चना की जाती है। महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर आदिशक्ति ने उनके यहां पुत्री के रूप में जन्म लिया था। इसलिए वही आदिशक्ति जगतजननी माता कात्यायनी कहलाती हैं।।
नवरात्रि में उपवास एवं साधना करनेवाले भक्तों के लिए आज के दिन हमारे पूर्वज ऋषियों द्वारा ऐसा अनुभव किया गया है, कि उनका मन आज आज्ञाचक्र में स्थित होता है। आज माता कात्यायनी की उपासना से साधकों के आज्ञा चक्र जाग्रत होकर सिद्धियों को स्वयंमेव ही प्राप्त हो जाता है। वह इस लोक में स्थित रहकर भी अलौकिक तेज और प्रभाव से युक्त हो जाता है। तथा उसके रोग, शोक, संताप, भय आदि सर्वदा के लिए विनष्ट हो जाते हैं।।
मित्रों, इनका स्वरूप अत्यन्त ही दिव्य और स्वर्ण के समान देदीप्यमान है। इनकी चार भुजायें हैं, इनका दाहिना ऊपर का हाथ अभय मुद्रा में है। तथा नीचे का हाथ वरदमुद्रा में रहता है। बांये ऊपर वाले हाथ में तलवार और निचले हाथ में कमल का फूल लिए रहती हैं। और इनका वाहन सिंह है। आज के दिन साधक का मन आज्ञाचक्र में स्थित होता है। योगसाधना में आज्ञाचक्र का महत्त्वपूर्ण स्थान है।।
इस चक्र में स्थित साधक कात्यायनी के चरणों में अपना सर्वस्व अर्पित कर देता है। पूर्ण आत्मदान करने से साधक को सहजरूप से माँ के दर्शन हो जाते हैं। माँ कात्यायनी की भक्ति से मनुष्य को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति सहज ही हो जाती है। माता की आराधना से भक्त का हर काम सरल एवं सुगम हो जाता है। जिनकी भुजाओं में चन्द्रहास नामक तलवार शोभायमान हो रहा है। श्रेष्ठ सिंह जिसका वाहन है, ऐसी असुर संहारकारिणी देवी कात्यायनी हमारा कल्याण करें।।
माता दुर्गा के छठा रूप महर्षि कात्यायन की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर उनके यहां पुत्री के रूप में पैदा हुई थीं। महर्षि कात्यायन ने इनका पालन-पोषण किया तथा महर्षि कात्यायन की पुत्री और उन्हीं के द्वारा सर्वप्रथम पूजे जाने के कारण देवी दुर्गा के इस रूप को कात्यायनी कहा गया है। देवी कात्यायनी अमोघ फलदायिनी हैं। इनकी पूजा अर्चना द्वारा भक्तों के सभी संकटों का नाश हो जाता है।।
माता कात्यायनी के पूजन से भक्तों के भीतर एक अद्भुत शक्ति का संचार होता है। इस दिन साधकों के साधारण पूजन से ही माता कात्यायनी सहज रूप से ही अपने भक्तों को दर्शन दे देती हैं। जो साधक कुण्डलिनी जागृत करने की इच्छा से देवी की अराधना में समर्पित होते हैं। उन्हें दुर्गा पूजा के छठे दिन माँ कात्यायनी जी की सभी प्रकार से विधिवत पूजा अर्चना करनी चाहिए। फिर मन को आज्ञा चक्र में स्थापित करने हेतु माता से प्रार्थना करनी चाहिए।।
किसी विशिष्ट कामना की पूर्ति हेतु माँ कात्यायनी का विशिष्ट सामग्रियों से पूजा-विधि एवं विशेष भोग।। इस लेख को पूरा पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें:
#Panchang_16_October_2026
ज्येष्ठा नक्षत्र के जातकों का गुण एवं स्वभाव:- यदि आपका जन्म ज्येष्ठा नक्षत्र में हुआ है तो आप दृढ निश्चयी और मज़बूत व्यक्तित्व के स्वामी है। आप नियम से जीवन व्यतीत करना पसंद करते हैं। आपकी दिनचर्या सैनिकों की तरह अनुशासित और सुव्यवस्थित होती है। आप शारीरिक रूप से गठीले और मज़बूत होते हैं तथा कार्य करने में सैनिकों के समान फुर्तीले होते हैं।।
किसी के बारे में आपके विचार शीघ्र नहीं बदलते और दूसरों को आप हठी प्रतीत होतें है। आप एक बुद्धिमान और बौधिक विचारधारा पर चलने वाले व्यक्ति हैं। आप बुद्धिमान व्यक्तियों का सम्मान करते हैं और सदैव सच्चे लोगो के बीच रहना पसंद करते हैं। आप अपने हठीले स्वभाव के कारण जीवन में कई बार कठिनाईयों का सामना भी करते हैं। आप अपने विचारों पर इतना दृढ रहते हैं की आपको बदलते हुए समय और स्तिथियों के अनुसार ढालना बहुत कठिन कार्य है।।
आप अपने साथ बहुत साजो सामान रखना पसंद नहीं करते जबकि ओरों को आप घमंडी प्रतीत होते है। वास्तविकता इसके बिलकुल उलट होती है। आप ह्रदय से एकदम सच्चे और पवित्र होते है। आपकी सबसे बड़ी कमी है, किसी भी राज़ को आप राज़ नहीं रहने देते। चाहे फिर वह आपका अपना हो या किसी और का। ज्येष्ठा नक्षत्र के जातकों को अक्सर शराब या नशीले पदार्थों का सेवन करते हुए देखा गया है।।
क्योंकि आपमें स्तिथियों से निपटने की अंदरूनी ताकत नहीं होती है। दिखावे में आपका विश्वास नहीं है इसलिए आपके मित्र भी बहुत कम होते हैं। आप बहुत कम उम्र से ही कमाने लग जाते हैं और आजीवन किसी की मदद लेना पसंद नहीं करते हैं। करियर के कारण आप अपने घर से दूर रहते हैं और 18 से 26 वर्ष तक बहुत से व्यवसाय बदलते हुए आगे बढ़ते हैं।।
अधिक बदलाव के कारण धन की कमी भी आपको होती है। 27 वर्ष के बाद कुछ स्थिरता आती है और आप अपनी मेहनत और लगन के कारण तरक्की पाते हैं। ज्येष्ठा नक्षत्र के जातक अपने जीवन साथी के कारण सुख और ख़ुशी का अनुभव करते हैं। परन्तु पति/पत्नी के रोगी होने पर उनसे दूरी बनाना इनके लिए मजबूरी बन जाता है। ज्येष्ठा नक्षत्र की जातिका स्वभाव से झगडालू एवं जिद्दी होती है।।
ज्येष्ठा नक्षत्र की जातिकाओं में घात लगाकर सामने वाले से बदला लेने का स्वभाव होता है। अपनी कर्कश जुबान और तीखे व्यक्तित्व के कारण समाज में अक्सर इनकी निंदा की जाती है। ज्येष्ठा नक्षत्र का जातक अक्सर दूसरों को मुसीबत में देखकर आनंद उठाने वाला होता है। ज्येष्ठा नक्षत्र के जातकों को अक्सर हाथ और कन्धों के जोड़ों का दर्द, आंत से सम्बंधित रोग तथा खांसी जुकाम जैसे रोगों का सामना करना पड़ता है।।
प्रथम चरण:- ज्येष्ठा नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी बृहस्पति होता है। इस नक्षत्र चरण में जन्मा जातक क्रूर होता है। बृहस्पति लग्नेश मंगल का शत्रु है तथा नक्षत्र स्वामी बुध का भी शत्रु है। अतः बुध या मंगल की दशा में बृहस्पति की अन्तर्दशा अशुभ फल ही देती है। बृहस्पति की अपनी दशा शुभ फलदायी होगी। मंगल की दशा-अन्तर्दशा शुभ फलों से परिपूर्ण होगी।।
द्वितीय चरण:- ज्येष्ठा नक्षत्र के द्वितीय चरण का स्वामी बुध होता है। इस नक्षत्र चरण में जन्मा जातक भोग और विलासितापूर्ण जीवन जीता है। इस चरण का स्वामी बुध है तथा नक्षत्र स्वामी भी बुध होने के कारण बुध की दशा उत्तम फल देती है। बुध में मंगल का अंतर या मंगल में बुध का अंतर कष्टदायी होता है।।
तृतीय चरण:- ज्येष्ठा नक्षत्र के तृतीय चरण का स्वामी शनि होता है। इस नक्षत्र चरण में जन्मा जातक विद्वान् व्यक्ति होगा। शनि लग्नेश मंगल का शत्रु है परन्तु बुध का मित्र है। अतः शनि में बुध का अंतर या बुध में शनि का अंतर शुभ फलदायी होता है। लग्नेश मंगल की दशा-अन्तर्दशा शुभ फल देनेवाली होती है।।
चतुर्थ चरण:- ज्येष्ठा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का स्वामी शुक्र होता है। इस नक्षत्र चरण में जन्मे जातक को पुत्र सुख अवश्य प्राप्त होता है। शुक्र लग्नेश मंगल का मित्र है परन्तु बुध का शत्रु है। अतः शुक्र की दशा मिश्रित फल देगी और बुध की दशा अत्यंत शुभ फल देगी। मंगल की दशा भी शुभ फलदायी होगी।।
#Panchang_16_October_2026
शुक्रवार का विशेष - शुक्रवार के दिन तेल मर्दन अर्थात तेल शरीर में मालिश करने से बिघ्न बाधायें आती हैं - (मुहूर्तगणपति)।।
शुक्रवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से लाभ और यश की प्राप्ति होती है । (महाभारत अनुशासनपर्व)।।
दिशाशूल - शुक्रवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो दही खाकर यात्रा कर सकते है।।
शुक्र के अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए यह उपाय करना चाहिए। शुक्र की अशुभता दूर करने के लिए अपने सामर्थ्य के अनुसार रुई और दही किसी मंदिर में दान करना चाहिए। किसी भी स्त्री एवं अपनी पत्नी का भी कभी भी अपमान या निरादर नहीं करना चाहिए। उन्हें सदैव आदर और सम्मान देने का प्रयास करना चाहिए।।
शुक्रवार को सफ़ेद वस्त्र धारण करना चाहिए। इत्र एवं परफ्यूम लगाने से अशुभ शुक्र का दु:ष्प्रभाव दूर होता है। किसी नेत्रहीन व्यक्ति को सफ़ेद वस्त्र या मिठाई दान करने से अशुभ शुक्र का दु:ष्प्रभाव दूर होता है। दश वर्ष से कम आयु की कुवांरी कन्याओं को गाय के दूध से बने खीर खिलाने से अशुभ शुक्र का दु:ष्प्रभाव दूर होता है। मछलियों को आटे की गोलियां खिलाने से अशुभ शुक्र का दु:ष्प्रभाव दूर होता है। चाँदी का कड़ा पहनने एवं श्रीसूक्त का पाठ करने से अशुभ शुक्र का दु:ष्प्रभाव दूर होता है।।
शुक्रवार का विशेष टिप्स - मित्रों, आज शुक्रवार को दक्षिणावर्ती शंख से भगवान नारायण (शालिग्राम भगवान) का अभिषेक करें। यथोपचार से पूजन करें और पूजन के उपरान्त अथवा मध्य में ही श्वेत चन्दन में केशर मिलाकर भगवान को श्रद्धापूर्वक तिलक लगायें। शुक्रवार को इस प्रकार किया गया भगवान नारायण का पूजन माता महालक्ष्मी को बलात आपके घर की ओर खिंच लाता है। आज लक्ष्मी घर में आयें इसके लिये घर के ईशान कोण में देशी गाय के घी से रुई के जगह लाल धागे की बत्ती का एक दीपक जलायें।।
#Panchang_16_October_2026
शुक्रवार को भूलकर भी ये काम न करें:- हमारे वैदिक सनातन धर्म में हर दिन किसी न किसी देवी-देवता का होता है। जिसके अनुसार शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी का होता है। शुक्रवार के दिन जो भक्त मां लक्ष्मी की पूजा विधिपूर्वक करते हैं, उन्हें संसार के सभी सुखों की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में लक्ष्मी मां को धन की देवी माना गया है। मान्यता अनुसार शुक्रवार के दिन माँ की पूजा-आराधना करने से उनका आशीर्वाद सदैव बना रहता है।।
लेकिन इस दिन कुछ काम जिसे कभी भूलकर भी नहीं करना चाहिए। दैनिक जीवन में भी कुछ ऐसे काम होते हैं, जैसे भूलकर भी कभी किसी को भी शुक्रवार के दिन धन ना दें और ना ही उधार लें। मान्यता है, कि शुक्रवार के दिन दिया गया धन वापस लौटकर नहीं आता है। इसदिन किसी को कर्ज देने से मां लक्ष्मी नाराज होती हैं और संबंध भी खराब होते हैं।।
वैसे तो आपको कभी किसी का अपमान नहीं करना चाहिए, लेकिन शुक्रवार के दिन इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इस दिन भूलकर भी महिलाओं, कन्याओं और किन्नरों का अपमान नहीं करना चाहिए। उनके बारे में अपशब्द नहीं बोलने चाहिए। महिलाओं में मां लक्ष्मी का वास होता है और उनके अपमान करने से मां लक्ष्मी भी नाराज हो जाती हैं।।
शुक्रवार के दिन अगर आप व्रत-पूजन नहीं भी करते हैं तो तामसिक भोजन खासतौर पर मांसाहार और मदिरा के सेवन से परहेज रखना चाहिए। इस दिन पूर्ण सात्विक भोजन करना चाहिए। अगर संभव हो सके तो इसको आप अपनी आदत भी बना लें।।
शुक्रवार के दिन भूलकर भी किसी को भी शक्कर नहीं देनी चाहिए। क्योंकि ज्योतिष में शक्कर का संबंध शुक्र और चंद्र दोनो से हैं। इसलिए शुक्रवार के दिन शक्कर देने से आपका शुक्र कमजोर होता है और शुक्र भौतिक सुखों का स्वामी है। शुक्र के नाराज होने से भौतिक सुख-सुवधिओं में कमी आती है और आर्थिक स्थिति भी खराब होती है।।
शुक्रवार के दिन माता लक्ष्मी के साथ नारायण की भी पूजा करनी चाहिए। लक्ष्मी के साथ नारायण की पूजा करने से देवी-देवता प्रसन्न होते हैं और दोनों का आशीर्वाद भी बना रहता है। अगर संभव हो सके तो सुबह या शाम किसी भी एक समय मीठा घर में जरूर बनाना चाहिए और उसको सबसे पहले घर की सबसे बड़ी स्त्री को देना चाहिए।।
शुक्रवार के दिन किसी से अपशब्दन न बोलें। ऐसा करने से माता लक्ष्मी आप से अप्रसन्नम हो जाती हैं और फिर आपके साथ धन संबंधी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। घर में अपव्यमय बढ़ जाता है। लोग बीमार रहने लगते हैं। व्यापार धंधे में नुकसान होने लगता है।
साफ-सुथरे रसोईघर में मां लक्ष्मी का वास होता है। इससे घर में वैभव और सुख-शांति का प्रवाह निरंतर होता रहता है। भूलकर भी रात के समय किचन में गंदे बर्तन छोड़ना चाहिए, इससे लक्ष्मी माता रूठ जाती है और घर में अशांति फैल जाती है। साथ ही स्वास्थ्य के खराब रहने की आशंका बनी रहती है।।
#Panchang_16_October_2026
मित्रों, जिस व्यक्ति का जन्म शुक्रवार को होता है वह व्यक्ति चंचल स्वभाव का होता है। ये सांसारिक सुखों में लिप्त रहने वाले होते हैं तथा तर्क करने में निपुण और नैतिकता में बढ़ चढ कर होते हैं। ऐसे लोग धनवान और कामदेव के गुणों से प्रभावित रहते हैं और इनकी बुद्धि अत्यन्त तीक्ष्ण होती है। ये ईश्वर की सत्ता में अंधविश्वास नहीं रखते हैं तथा कला के प्रति रूचि रखने वाले, सुन्दर एवं आकर्षक व्यक्तित्व के धनी होते हैं।।
ऐसे लोग सौंदर्यप्रेमी, मधुरभाषी, यात्राओं के शौकिन, सुंदर स्थानों पर घुमने वाले एवं कलाकार स्वभाव के होते हैं। इनमें सेक्स की भावना अन्यों के मुकाबले अधिक होती है। सुन्दर कपडे़ पहनने के शौकिन तथा आभूषण अर्थात ज्वेलरी प्रिय होते हैं। इनको अपना कैरियर पर्यटन से जुडे क्षेत्र, फैशन डिजायनर, कलाकार, सेक्स विशेषज्ञ, मनोचिकित्सक अथवा ज्वेलरी से सम्बन्धित व्यदवसायों में आजमाना चाहिये। इनका शुभ अंक 7 होता है तथा इनका शुभ दिन बुधवार और शुक्रवार होता है।।
आज का सुविचार - मित्रों, अगर कोई आपको नीचा दिखाना चाहता हैं तो इसका मतलब हैं आप उससे ऊपर हैं। जिनमें आत्मविश्वास की कमी होती हैं वही दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं। मुझे कौन याद करेगा इस भरी दुनिया में, हे प्रभु! बिना मतल़ब के तो लोग तुझे भी याद नही करते।।
#Panchang_16_October_2026
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