बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष केन्द्र।।
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आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 15 अक्टूबर 2026 दिन गुरुवार।।
मित्रों, तारीख 15 अक्टूबर 2026 दिन गुरुवार को अश्विन मास के शुक्ल पक्ष कि पञ्चमी तिथि है। आज माँ स्कंदमाता की उपासना का दिन है। इनके लिए लिखा है - "पंचम्याम् अंगरागन्च एवं शक्त्यालंकरणानि च" अर्थात आज माता के भक्तों को चाहिए कि वो आज माता को अंगराग एवं अपने सामर्थ्य के अनुसार माता का अलंकार से शृंगार करें। आज उपांग ललिता व्रत भी है। आज रवियोग भी है। आप सभी सनातनियों को "माँ स्कंदमाता के उपासना" की हार्दिक शुभकामनायेँ।।
हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी), आज के योग और आज के करण। आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातकों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव ही सर्वश्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो। ऐसी मेरी आप सभी आज के अधिष्ठात्री देवों से हार्दिक प्रार्थना है।।
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वैदिक सनातन हिन्दू पञ्चांग, Vedic Sanatan Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi), 2:- वार (Day), 3:- नक्षत्र (Nakshatra), 4:- योग (Yog) और 5:- करण (Karan).
पञ्चांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग का श्रवण करते थे। शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन-श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पञ्चांग को देखना, पढ़ना एवं सुनना चाहिए।।
आज का पञ्चांग 15 अक्टूबर 2026 दिन गुरुवार।।
Aaj ka Panchang 15 October 2026.
विक्रम संवत् - 2083.
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर - रौद्र.
शक - 1948.
अयन – सौम्यायनम्.
गोल - याम्य.
ऋतु – शरद.
मास - अश्विन.
पक्ष - शुक्ल.
गुजराती पंचांग के अनुसार – अश्विन शुक्ल पक्ष.
#Panchang_15_October_2026
तिथि - चतुर्थी 01:14 AM बजे तक उपरान्त पञ्चमी तिथि है।।
नक्षत्र - अनुराधा 04:04 AM तक उपरान्त ज्येष्ठा नक्षत्र है।।
योग - सौभाग्य 21:15 PM तक उपरान्त शोभन योग है।।
करण - विष्टि 01:14 AM तक उपरान्त बव 14:17 PM तक उपरान्त बालव करण है।।
चन्द्रमा - वृश्चिक राशि पर।।
सूर्य – कन्या राशि एवं चित्रा नक्षत्र पर गोचर कर रहे हैं।।
मुम्बई सूर्योदय - प्रातः 06:34:15
मुम्बई सूर्यास्त - सायं 18:13:04
वाराणसी सूर्योदय - प्रातः 06:16:39
वाराणसी सूर्यास्त - सायं 17:44:45
राहुकाल (अशुभ) - सुबह 13:52 बजे से 15:19 बजे तक।।
विजय मुहूर्त (शुभ) - दोपहर 12.12 बजे से 12.36 बजे तक।।
#Panchang_15_October_2026
पञ्चमी तिथि विशेष:- पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। पञ्चमी तिथि को खट्टी वस्तुओं का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य है। पञ्चमी तिथि धनप्रद अर्थात धन देनेवाली तिथि मानी जाती है। पञ्चमी तिथि को पूर्णा संज्ञक तिथियों में स्थान प्राप्त है। नन्दा, भद्रा, जया, रिक्ता और पूर्णा—इन पाँच संज्ञाओं में पूर्णा संज्ञा की तिथि सभी प्रकार की सिद्धि, पूर्णता तथा समृद्धि प्रदान करने वाली मानी गई है। इस कारण इस पञ्चमी तिथि में प्रारम्भ किए गए कार्य प्रायः सफलता को प्राप्त होते हैं। शास्त्रों में पञ्चमी तिथि को विद्या, ज्ञान, औषधि, नागोपासना तथा ऋषि-पूजन के लिए विशेष प्रशस्त बताया गया है। विशेषतः यदि यह पञ्चमी तिथि शुभ नक्षत्र के साथ संयोग करे तो अध्ययन, दीक्षा, मन्त्र ग्रहण, शास्त्र अध्ययन तथा विद्यारम्भ के लिए अत्यन्त उत्तम मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ और कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायीनी मानी जाती है।।
यद्यपि पञ्चमी शुभ तिथि मानी जाती है, तथापि अनावश्यक हिंसा, वृक्षों का विनाश, सर्प अथवा अन्य जीवों को कष्ट देना, कटु वचन बोलना, ऋषि, गुरु तथा माता-पिता का अपमान, इनसे विशेष रूप से बचना चाहिए। नागों के अधिपत्य वाली इस पञ्चमी तिथि में जीवों के प्रति दया का विशेष महत्व बताया गया है। आयुर्वेद और लोकपरम्परा में पञ्चमी को शरीर की शुद्धि तथा औषधि सेवन प्रारम्भ करने के लिए भी शुभ माना गया है। अनेक वैद्य आज भी औषधि सिद्धि एवं नई चिकित्सा के प्रारम्भ के लिए शुभ तिथि का विचार करते हैं।।
पञ्चमी तिथि में जिनका जन्म होता है:- पञ्चमी तिथि बहुत ही शुभ मानी जाती है। इस तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति गुणवान होता है। इस तिथि में जिस व्यक्ति का जन्म होता है वह माता पिता की सेवा को ही सर्वश्रेष्ठ धर्म समझता है। इनके व्यवहार में उत्तम श्रेणी का एक सामाजिक व्यक्ति दिखाई देता है। इनके स्वभाव में उदारता और दानशीलता स्पष्ट दिखाई देती है। ये हर प्रकार के सांसारिक भोग का आनन्द लेते हैं और धन धान्य से परिपूर्ण जीवन का आनंद उठाते हैं। पञ्चमी तिथि में जन्म लेने वाला जातक सामान्यतः बुद्धिमान, मधुरभाषी, दयालु, धर्मप्रिय, माता-पिता का सेवक, गुरुजन का सम्मान करने वाला, आर्थिक दृष्टि से उन्नति करने वाला, उत्तम सलाहकार, समाज में प्रतिष्ठा प्राप्त करने वाला होता है। ऐसे व्यक्ति कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखते हैं तथा जीवन में धीरे-धीरे उत्तम सफलता प्राप्त करते हैं। इनमें धार्मिक प्रवृत्ति, तीर्थाटन तथा देवपूजन के प्रति विशेष श्रद्धा देखने को मिलती है।।
#Panchang_15_October_2026
मित्रों, माता जगतजननी, जगदम्बा भवानी माता दुर्गा देवी के पांचवें स्वरूप को स्कन्दमाता के रूप में जाना जाता है। इन्हें स्कन्द कुमार कार्तिकेय की जननी के वजह से स्कन्दमाता के नाम से जाना जाता है। कार्तिकेय को पुराणों में कुमार, शौर, शक्तिधर आदि के नाम से भी इनके शौर्य का वर्णन किया गया है। इनका वाहन मयूर है अतः इन्हें मयूरवाहन के नाम से भी जाना जाता है। इन्हीं भगवान स्कन्द की माता होने के कारण दुर्गा के इस पांचवें स्वरूप को स्कन्दमाता कहा जाता है।।
नवरात्रि के नव दिनों तक व्रत और उपवास करनेवाले साधक का मन इस दिन अर्थात पांचवें दिन विशुद्ध चक्र में होता है। क्योंकि माँ स्कन्दमाता की पूजा नवरात्रि में पांचवें दिन की जाती है। इनके विग्रह में स्कन्द जी बालरूप में माता की गोद में बैठे रहते हैं। स्कन्द मातृस्वरूपिणी देवी की चार भुजायें हैं। ये दाहिनी ऊपरी भुजा में भगवान स्कन्द को गोद में पकड़े हैं। और दाहिनी निचली भुजा जो ऊपर को उठी है, उसमें कमल का फुल पकड़ा हुआ है।।
माता का वर्ण पूर्णतः शुभ्र है और कमल के पुष्प पर विराजित रहती हैं। इसी वजह से इन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है। परन्तु मूल रूप में इनका भी वाहन सिंह ही है। स्कन्द माता की पूजा भक्तों को उनके माता के वात्सल्य से भर देता है। एकाग्रभाव से मन को पवित्र करके माँ की स्तुति करने से समस्त दुःखों से मुक्ति मिलती है। तथा व्यक्ति का मोक्ष का मार्ग भी सुलभ हो जाता है।।
रूप और सौंदर्य की अद्वितिय आभा लिए हुए माता अभय मुद्रा में कमल के पुष्प पर विराजित रहती हैं। पद्मासना देवी, विद्यावाहिनी दुर्गा तथा सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी यही स्कन्दमाता ही हैं। इनकी उपासना से साधक अलौकिक तेज प्राप्त कर लेता है। क्योंकि यही हिमालय की पुत्री पार्वती भी हैं। इन्हें ही माहेश्वरी और गौरी के नाम से जाना जाता है। जो अपने पुत्रों से अत्यधिक प्रेम करती हैं।।
इनको अपने पुत्र के नाम के साथ संबोधित किया जाना अच्छा लगता है। जो भक्त माता के इस स्वरूप की पूजा करते है मां उस पर अपने पुत्र के समान ही स्नेह लुटाती हैं। स्कंदमाता की पूजा उसी प्रकार से करना चाहिए जैसे अन्य सभी देवियों का पूजन किया जाता है। शुद्ध चित से देवी का स्मरण करना चाहिए। तथा पंचोपचार, षोडशोपचार या फिर अपने सामर्थ्य के अनुसार स्कन्दमाता की पूजा करने के पश्चात भगवान शिव जी की पूजा करनी चाहिए।।
जो भक्त देवी स्कन्द माता की भक्ति-भाव सहित पूजन करते हैं उसे देवी की सम्पूर्ण कृपा प्राप्त होती है। देवी की कृपा से भक्त की मुराद पूरी होती है और घर में सुख, शांति एवं समृद्धि सदैव बनी रहती है। वात, पित्त, कफ जैसी बीमारियों से पीड़ित व्यक्ति को स्कंदमाता की पूजा करनी चाहिए। कुमार कार्तिकेय की माता के रूप में इनकी पूजा करने से माता पूर्णत: वात्सल्य लुटाती हुई नज़र आती हैं। और नि:संतानों की गोद भी अनायास ही भर देती हैं।।
नि:सन्तानों की गोद भरनेवाली स्कन्दमाता का विशेष भोग एवं पूजा-विधि।। पूरा लेख यहाँ इस लिंक को क्लिक करके पढ़ें:
#Panchang_15_October_2026
ज्येष्ठा नक्षत्र के जातकों का गुण एवं स्वभाव:- यदि आपका जन्म ज्येष्ठा नक्षत्र में हुआ है तो आप दृढ निश्चयी और मज़बूत व्यक्तित्व के स्वामी है। आप नियम से जीवन व्यतीत करना पसंद करते हैं। आपकी दिनचर्या सैनिकों की तरह अनुशासित और सुव्यवस्थित होती है। आप शारीरिक रूप से गठीले और मज़बूत होते हैं तथा कार्य करने में सैनिकों के समान फुर्तीले होते हैं।।
किसी के बारे में आपके विचार शीघ्र नहीं बदलते और दूसरों को आप हठी प्रतीत होतें है। आप एक बुद्धिमान और बौधिक विचारधारा पर चलने वाले व्यक्ति हैं। आप बुद्धिमान व्यक्तियों का सम्मान करते हैं और सदैव सच्चे लोगो के बीच रहना पसंद करते हैं। आप अपने हठीले स्वभाव के कारण जीवन में कई बार कठिनाईयों का सामना भी करते हैं। आप अपने विचारों पर इतना दृढ रहते हैं की आपको बदलते हुए समय और स्तिथियों के अनुसार ढालना बहुत कठिन कार्य है।।
आप अपने साथ बहुत साजो सामान रखना पसंद नहीं करते जबकि ओरों को आप घमंडी प्रतीत होते है। वास्तविकता इसके बिलकुल उलट होती है। आप ह्रदय से एकदम सच्चे और पवित्र होते है। आपकी सबसे बड़ी कमी है, किसी भी राज़ को आप राज़ नहीं रहने देते। चाहे फिर वह आपका अपना हो या किसी और का। ज्येष्ठा नक्षत्र के जातकों को अक्सर शराब या नशीले पदार्थों का सेवन करते हुए देखा गया है।।
क्योंकि आपमें स्तिथियों से निपटने की अंदरूनी ताकत नहीं होती है। दिखावे में आपका विश्वास नहीं है इसलिए आपके मित्र भी बहुत कम होते हैं। आप बहुत कम उम्र से ही कमाने लग जाते हैं और आजीवन किसी की मदद लेना पसंद नहीं करते हैं। करियर के कारण आप अपने घर से दूर रहते हैं और 18 से 26 वर्ष तक बहुत से व्यवसाय बदलते हुए आगे बढ़ते हैं।।
अधिक बदलाव के कारण धन की कमी भी आपको होती है। 27 वर्ष के बाद कुछ स्थिरता आती है और आप अपनी मेहनत और लगन के कारण तरक्की पाते हैं। ज्येष्ठा नक्षत्र के जातक अपने जीवन साथी के कारण सुख और ख़ुशी का अनुभव करते हैं। परन्तु पति/पत्नी के रोगी होने पर उनसे दूरी बनाना इनके लिए मजबूरी बन जाता है। ज्येष्ठा नक्षत्र की जातिका स्वभाव से झगडालू एवं जिद्दी होती है।।
ज्येष्ठा नक्षत्र की जातिकाओं में घात लगाकर सामने वाले से बदला लेने का स्वभाव होता है। अपनी कर्कश जुबान और तीखे व्यक्तित्व के कारण समाज में अक्सर इनकी निंदा की जाती है। ज्येष्ठा नक्षत्र का जातक अक्सर दूसरों को मुसीबत में देखकर आनंद उठाने वाला होता है। ज्येष्ठा नक्षत्र के जातकों को अक्सर हाथ और कन्धों के जोड़ों का दर्द, आंत से सम्बंधित रोग तथा खांसी जुकाम जैसे रोगों का सामना करना पड़ता है।।
प्रथम चरण:- ज्येष्ठा नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी बृहस्पति होता है। इस नक्षत्र चरण में जन्मा जातक क्रूर होता है। बृहस्पति लग्नेश मंगल का शत्रु है तथा नक्षत्र स्वामी बुध का भी शत्रु है। अतः बुध या मंगल की दशा में बृहस्पति की अन्तर्दशा अशुभ फल ही देती है। बृहस्पति की अपनी दशा शुभ फलदायी होगी। मंगल की दशा-अन्तर्दशा शुभ फलों से परिपूर्ण होगी।।
द्वितीय चरण:- ज्येष्ठा नक्षत्र के द्वितीय चरण का स्वामी बुध होता है। इस नक्षत्र चरण में जन्मा जातक भोग और विलासितापूर्ण जीवन जीता है। इस चरण का स्वामी बुध है तथा नक्षत्र स्वामी भी बुध होने के कारण बुध की दशा उत्तम फल देती है। बुध में मंगल का अंतर या मंगल में बुध का अंतर कष्टदायी होता है।।
तृतीय चरण:- ज्येष्ठा नक्षत्र के तृतीय चरण का स्वामी शनि होता है। इस नक्षत्र चरण में जन्मा जातक विद्वान् व्यक्ति होगा। शनि लग्नेश मंगल का शत्रु है परन्तु बुध का मित्र है। अतः शनि में बुध का अंतर या बुध में शनि का अंतर शुभ फलदायी होता है। लग्नेश मंगल की दशा-अन्तर्दशा शुभ फल देनेवाली होती है।।
चतुर्थ चरण:- ज्येष्ठा नक्षत्र के चतुर्थ चरण का स्वामी शुक्र होता है। इस नक्षत्र चरण में जन्मे जातक को पुत्र सुख अवश्य प्राप्त होता है। शुक्र लग्नेश मंगल का मित्र है परन्तु बुध का शत्रु है। अतः शुक्र की दशा मिश्रित फल देगी और बुध की दशा अत्यंत शुभ फल देगी। मंगल की दशा भी शुभ फलदायी होगी।।
#Panchang_15_October_2026
गुरुवार शॉपिंग के लिये अच्छा दिन माना जाता है।।
गुरुवार का विशेष - गुरुवार के दिन तेल मर्दन करने से धन एवं यश की हानि होती है - (मुहूर्तगणपति)।।
गुरुवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से तथा सर के बाल धोना, कपड़े धुलना अथवा धोबी के घर डालना, घर-आँगन की गोबर आदि से लिपाई करना इस प्रकार के कार्य नहीं करने चाहियें इससे धन एवं पूण्य की हानी होती है और लक्ष्मी घर छोड़कर चली जाती है।। (महाभारत अनुशासनपर्व)।।
महिलाओं की जन्मकुंडली में बृहस्पति पति का कारक ग्रह होता है। साथ ही बृहस्पति ही संतान का कारक ग्रह भी होता है। इसलिये बृहस्पति ग्रह अकेले ही स्त्री के संतान और पति दोनों के जीवन को प्रभावित करता है। अतः बृहस्पतिवार को सिर धोना बृहस्पति को कमजोर बनाता है जिससे कि बृहस्पति के शुभ प्रभाव में कमी आती है। इसी कारण से इस दिन बाल धोना या कटवाना भी नहीं चाहिए। इसका असर संतान और पति के जीवन पर पड़ता है और उनकी उन्नति बाधित होती है।।
वास्तु अनुसार घर के ईशान कोण का स्वामी गुरु होता है। ईशान कोण का संबंध परिवार के नन्हे सदस्यों यानी कि बच्चों से होता है। साथ ही घर के पुत्र संतान का संबंध भी इसी कोण से ही होता है। ईशान कोण धर्म और शिक्षा की दिशा है इसलिये घर में शुद्ध वजन वाले कपड़ों को धोना, कबाड़ घर से बाहर निकालना, घर को धोना या पोछा लगाना इत्यादि घर के ईशान कोण को कमजोर करता है। उससे घर के बच्चों, पुत्रों, घर के सदस्यों की शिक्षा, धर्म आदि पर गुरु का शुभ प्रभाव कम होता है।।
#Panchang_15_October_2026
गुरुवार भगवान लक्ष्मी नारायण का दिन होता है। इसलिये इस दिन लक्ष्मी और नारायण का एक साथ पूजन करने से जीवन में अपार खुशियाँ आती है। इस दिन लक्ष्मी और नारायण का एक साथ पूजन करने से पति-पत्नी के बीच कभी दूरियाँ नहीं आती है साथ ही धन की वृद्धि भी होती है। जन्मकुंडली में गुरु ग्रह के प्रबल होने से उन्नति के रास्ते आसानी से खुलते हैं। परन्तु यदि गुरु ग्रह को कमजोर करने वाले कार्य किए जाए तो प्रमोशन होने में भी रुकावटें आती है।।
गुरुवार को गुरु ग्रह को कमजोर किए जाने वाले काम करने से धन की वृद्धि रुक जाती है। जैसे - सिर के बाल धोना, भारी कपड़े धोना, बाल कटवाना, शेविंग करवाना, शरीर के बालों को साफ करना, फेशियल करवाना, नाखून काटना, घर से मकड़ी के जाले साफ करना, घर के उन कोनों की सफाई करना जिन कोनों की रोज सफाई नहीं की जाती हो। ये सभी काम गुरुवार को करने से धन हानि होता है तथा तरक्की रुक जाती है।।
दिशाशूल - गुरुवार के दिन दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो दही खा कर यात्रा कर सकते है।।
गुरुवार के दिन ये विशेष उपाय करें - गुरु धन एवं प्रतिष्ठा का कारक ग्रह होता है। जिस व्यक्ति पर गुरु की कृपा होती है उसकी आर्थिक स्थिति अच्छी रहती है। गुरुवार के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान ध्यान करें और घी का दीप जलाकर भगवान विष्णु की पूजा करें। इसके बाद विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें बिगड़े काम भी बन जायेंगे।।
#Panchang_15_October_2026
बृहस्पतिवार को जिनका जन्म होता है, वह व्यक्ति विद्या एवं धन से युक्त होता है अर्थात ये ज्ञानी और धनवान होते हैं। ये विवेकशील होते हैं और शिक्षण को अपना पेशा बनाते हैं। ये लोगों के सम्मुख आदर और सम्मान के साथ प्रस्तुत होते हैं तथा उच्च स्तर के सलाहकार भी होते हैं। गुरुवार में जन्मे जातक सभ्य, खिलते रंग के, सुशील एवं मधुर स्वभाव के होते हैं तथा धर्म के प्रति सचेत होते हैं।।
ये सभी सद्गुणों से संपन्न होने के वजह से किसी के साथ विश्वासघात नहीं करते हैं। ऐसे लोग किसी का हक नहीं मारते तथा न्याय के प्रति सजग होते हैं। यह सफल राजनीतिज्ञ, न्यायधीश, क्लर्क, प्रकाशक एवं धर्मगुरु आदि के रूप में सफल होते हैं। गुरुवार को जन्मं लेने वाले व्यसक्ति बेहद मिलनसार और मधुर स्वभाव के होते हैं। ये जीवन को उत्सफव की तरह जीते हैं इसलिए हमेशा खिले-खिले रहते हैं।।
ऐसे व्यक्ति धर्म में विशेष रुचि रखने वाले होते हैं। धार्मिक प्रवृत्ति के कारण ये कभी किसी के साथ विश्वाससघात नहीं कर सकते हैं। यह किसी का हक भी नहीं मारते, न्याय के प्रति सजग होते हैं। इनको अपने जीवन में सफलता हेतु धर्मगुरु, राजनीतिज्ञ, पत्रकार, लेखक, प्रकाशक एवं न्यायधीश आदि के क्षेत्र में भाग्य आजमाना चाहिये। इनका शुभ दिन मंगलवार और बृहस्पितिवार तथा शुभ अंक 4 होता है।।
आज का विचार - मित्रों, हम अपनी पिछली गलतियों से सबक लेकर अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं। परन्तु याद रहे कि होशियार लोग अपनी गलती से लेते हैं, जबकि ज्यादा होशियार लोग दूसरों की गलतियों से गलतियों को दुहराना सीखते हैं। इसलिये अपनी गलतियों को सुधारना ही व्यक्ति में इंसानियत लाता है।।
#Panchang_15_October_2026
जन्मकुण्डली के अनुसार आपके जीवन में धन कैसे और कब आयेगा?।।.... आज के इस लेख को पूरा पढने के लिये इस लिंक को क्लिक करें..... वेबसाईट पर पढ़ें: & ब्लॉग पर पढ़ें:
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