बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष केन्द्र।।
पञ्चांग, Panchang, आज का पञ्चांग, Aaj ka Panchang, Panchang 2026,आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 24 अक्टूबर 2026 दिन शनिवार।।
मित्रों, तारीख 24 अक्टूबर 2026 दिन शनिवार को अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि है। आज भगवान सूर्य देवता चित्रा नक्षत्र से चलकर स्वाति नक्षत्र पर (रात्रि:- 03:02 AM बजे) चले जायेंगे। जिसका विवरण इस प्रकार है:- स्त्री.पु.-सू.चं. योग, मेष वाहन, वह्नि नाड़ी, जिसका स्वामी मंगल है। इसमें सामान्य वर्षा का योग है। आज यायिजययोग है। आज रवियोग एवं पुनः रवियोग है। आप सभी सनातनियों को "चित्रा से स्वाति नक्षत्र के संक्रांति" की हार्दिक शुभकामनायें।।
हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी), आज के योग और आज के करण। आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातकों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव ही सर्वश्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो। ऐसी मेरी आप सभी आज के अधिष्ठात्री देवों से हार्दिक प्रार्थना है।।
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।। पधारने हेतु भागवत प्रवक्ता - स्वामी धनञ्जय महाराज की ओर से आपका ह्रदय से धन्यवाद। आप का आज का दिन मंगलमय हो। अपने गाँव, शहर अथवा सोसायटी में भागवत कथा के आयोजन हेतु कॉल - 9375288850 करें या इस लिंक को क्लिक करें।।
वैदिक सनातन हिन्दू पञ्चांग, Vedic Sanatan Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi), 2:- वार (Day), 3:- नक्षत्र (Nakshatra), 4:- योग (Yog) और 5:- करण (Karan).
पञ्चांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग का श्रवण करते थे। शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन-श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पञ्चांग को देखना, पढ़ना एवं सुनना चाहिए।।
आज का पञ्चांग 24 अक्टूबर 2026 दिन शनिवार।।
Aaj ka Panchang 24 October 2026.
विक्रम संवत् - 2083.
संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर - रौद्र.
शक - 1948.
अयन – सौम्यायनम्.
गोल - याम्य.
ऋतु – वर्षा.
मास - अश्विन.
पक्ष - शुक्ल.
गुजराती पंचांग के अनुसार – अश्विन शुक्ल पक्ष.
#Panchang_24_October_2026
तिथि - त्रयोदशी 13:38 PM बजे तक उपरान्त चतुर्दशी तिथि है।।
नक्षत्र - उत्तराभाद्रपद 20:33 PM तक उपरान्त रेवती नक्षत्र है।।
योग - व्याघात 20:02 PM तक उपरान्त हर्षण योग है।।
करण - कौलव 02:13 AM तक उपरान्त तैतिल 13:38 PM तक उपरान्त गर करण है।।
चन्द्रमा - मीन राशि पर।।
सूर्य – तुला राशि एवं चित्रा नक्षत्र पर गोचर कर रहे हैं।।
मुम्बई सूर्योदय - प्रातः 06:37:35
मुम्बई सूर्यास्त - सायं 18:06:33
वाराणसी सूर्योदय - प्रातः 06:22:35
वाराणसी सूर्यास्त - सायं 17:38:52
राहुकाल (अशुभ) - सुबह 09:30 बजे से 10:56 बजे तक।।
विजय मुहूर्त (शुभ) - दोपहर 12.11 बजे से 12.35 बजे तक।।
#Panchang_24_October_2026
त्रयोदशी तिथि विशेष:- त्रयोदशी तिथि को बैंगन त्याज्य होता है। अर्थात आज त्रयोदशी तिथि में भूलकर भी बैंगन की सब्जी या भर्ता नहीं खाना चाहिए। त्रयोदशी तिथि जयकारी अर्थात विजय दिलवाने वाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों क्षेत्रों में सिद्धियों को देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी होती है।।
इस त्रयोदशी तिथि के देवता मदन अर्थात कामदेव जी को बताया गया है। भगवान कामदेव जी शास्त्रों के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण और देवी माता रुक्मिणी के पुत्र हैं। कामदेव जी प्रेम और आकर्षण के देवता माने जाते हैं। आज की त्रयोदशी तिथि में भगवान के अंशावतार भगवान कामदेव की पूजा करने के बाद उपरोक्त मन्त्र का (मन्त्र वेबसाइट के निचे के लिंक पर है) जप आपका वर्षों का खोया हुआ प्रेम वापस दिला सकता है। कामदेव का मन्त्र - ॐ रतिप्रियायै नम:। अथवा - ॐ कामदेवाय विद्महे रतिप्रियायै धीमहि। तन्नो अनंग: प्रचोदयात्।।
आज की त्रयोदशी तिथि में सपत्निक कामदेव की मिट्टी कि प्रतिमा बनाकर सायंकाल में पूजा करने के बाद उपरोक्त मन्त्र का जप आपका वर्षों का खोया हुआ प्रेम वापस दिला सकता है। आपके चेहरे की खोयी हुई कान्ति अथवा आपका आकर्षण आपको पुनः प्राप्त हो सकता है इस उपाय से। जो युवक-युवती अपने प्रेम विवाह को सफल बनाना चाहते हैं उन्हें इस उपाय को करना चाहिये। जिन दम्पत्तियों में सदैव झगडा होते रहता है उन्हें अवश्य आज इस उपाय को करना चाहिये।।
त्रयोदशी तिथि ज्योतिषशास्त्र में अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है। इस तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति महापुरूष होता है। इस तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान होता है और अनेक विषयों की अच्छी जानकारी रखने वाला होता है। यह व्यक्ति काफी विद्वान होता है तथा अन्यों के प्रति दया भाव रखने वाला एवं किसी की भी भलाई करने हेतु सदैव तत्पर रहने वाला होता है । इस तिथि के जातक समाज में काफी प्रसिद्धि हासिल करते ही हैं।।
#Panchang_24_October_2026
उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के जातकों का गुण एवं स्वभाव:- यदि आपका जन्म उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में हुआ है तो आप स्वभाव से एक दयालु व्यक्ति होंगे। आप धार्मिक होने के साथ-साथ वैरागी भी होंगे। आप समाज में एक धार्मिक नेता, प्रसिद्द शास्त्र विद एवं मानव प्रेमी के रूप में प्रख्यात होंगे। आप कोमल हृदयी एवं दूसरों के साथ सदैव सद्भावना रखते हैं। यदि आपके साथ कोई दुर्व्यवहार भी करता है तो आप उसे क्षमा कर देते हैं।।
आप अपने दिल में भी किसी के प्रति कोई द्वेष नहीं रखते। आप महत्वाकांक्षी व्यक्ति नहीं हैं परन्तु इच्छाएं बढ़ी-चढ़ी होती हैं। मन ही मन आप उन्नत्ति के सर्वोच्च शिखर पर पहुँच भी जाते हैं। देश भक्ति एवं इमानदारी आपके प्रमुख गुण होंगे। आप मनमौजी परन्तु मजबूत विचारों वाले व्यक्ति होंगे। आप उन गिने चुने व्यक्तियों में से होंगे जिन्हें आम लोग आदर की दृष्टि से देखते हैं।।
उत्तराभाद्रपद में जन्मे जातक निष्पक्ष व्यक्तित्व के स्वामी होते हैं। आप किसी को भी उसकी आर्थिक एवं सामाजिक सम्पन्नता के आधार पर नहीं अपितु मानवता के आधार पर तौलते है। आप बहुत बुद्धिमान एवं विवेकशील व्यक्ति होंगे। एक प्रखर वक्ता होने के कारण अनायास ही लोग आपकी ओर खिचाव महसूस करते हैं। आपकी सबसे बड़ी कमी आपका क्रोध होगा जो किसी भी छोटी से छोटी बात पर आ जाता है।।
आप विपरीत लिंगियों के प्रति विशेष आकर्षण महसूस करते हैं और उनका साथ आपको बेहद प्रिय है। उत्तराभाद्रपद के जातक किसी भी कार्यक्षेत्र में उच्च पद को प्राप्त करने में सक्षम होते हैं। आप अपनी शैक्षणिक योग्यता के आधार पर नहीं अपितु अपने गुणों के कारण सफल होते हैं। आप अक्सर अपने से अधिक शिक्षित लोगों से भी अधिक सफलता पाते हैं। आप कठोर परिश्रमी एवं कार्य के प्रति बहुत अधिक समर्पित व्यक्ति होंगे।।
ऐसे लोग कभी भी किसी कार्य को बीच में छोड़ना पसंद नहीं करते। आप अपने करियर में बहुत मान-सम्मान और प्रशंसा पाते हैं। आप अधिक समय तक निचले पदों पर कार्यरत नहीं रहते हैं। अपनी लगन और मेहनत के कारण आपकी उच्च पदों के लिए तरक्की शीघ्र ही हो जाती है। आप अपने जीवन के 18वें या 19वें वर्ष से ही जीवन यापन में लग जाते हैं। जीवन के 19, 21, 28., 30, 35 और 42वां वर्ष आपके करियर में महतवपूर्ण बदलाव लायेगा।।
उत्तराभाद्रपद के जातक का बचपन कठिनाईयों में बीतता है। आपको अपने माता-पिता से अपेक्षित स्नेह नहीं प्राप्त होता है। हालाँकि पिता के कारण आप समाज में गौरवान्वित होते हैं। परन्तु पिता से आपको अपने जीवन में किसी भी प्रकार का कोई लाभ प्राप्त नहीं होता है। आपको सदा ही अपने जन्म स्थान से दूर रहना पड़ता है। आपका विवाह एक सुंदर और आज्ञाकारी स्त्री से होता है।।
इस कारण आपका दाम्पत्य जीवन बहुत सुखी एवं समृद्ध होता है। आपकी आज्ञाकारी संतान आपकी प्रसन्नता का कारण बनती है। उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में जन्मी जातिकायें बुद्धिमान और धर्म के प्रति रूचि रखने वाली होती हैं। आप धैर्यवान एवं गुणवान होती हैं। आप जीवन में सदा मान सम्मान एवं प्रतिष्ठा प्राप्त करती हैं। उत्तराभाद्रपद के जातकों का प्रमुख लक्षण है बातूनी होना। आपको पैरों से सम्बंधित रोग या चोट, हर्निया एवं बवासीर जैसी बीमारियाँ हो सकती है।।
प्रथम चरण:- उत्तराभाद्रपद नक्षत्र का स्वामी ग्रह शनि है। इस उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी सूर्य हैं। उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के प्रथम चरण में जन्मा जातक राजा के समान पराक्रमी होता है। लग्न स्वामी शनि एवं चरण स्वामी स्वामी सूर्य में परस्पर शत्रुता है। अतः सूर्य की दशा अशुभ फल देगी। शनि की दशा भी प्रतिकूल फल देगी। शनि में सूर्य या सूर्य में शनि की अन्तर्दशा मारक दशा का फल देगी। गुरु की दशा उत्तम स्वास्थ्य एवं राजयोग देने वाली होगी।।
द्वितीय चरण:- उत्तराभाद्रपद नक्षत्र का स्वामी ग्रह शनि है। इस उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के द्वितीय चरण का स्वामी बुध हैं। उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के दूसरे चरण में जन्मा जातक तस्करी में रूचि रखता है। लग्न नक्षत्र स्वामी शनि बुध का मित्र है। अतः शनि की दशा मध्यम, परन्तु बुध की दशा अति शुभ फल देगी। बुध की दशा में गृहस्थ सुख एवं भौतिक उपलब्धियां प्राप्त होंगी। गुरु की दशा भी जातक को उत्तम फल देगी।।
तृतीय चरण:- उत्तराभाद्रपद नक्षत्र का स्वामी ग्रह शनि है। इस उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के तृतीय चरण का स्वामी शुक्र हैं। उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के तीसरे चरण में जन्मा जातक पुत्रवान होता है। तीसरे चरण का स्वामी शुक्र है जो नक्षत्र स्वामी शनि का मित्र है। अतः शनि की दशा मध्यम परन्तु शुक्र की दशा शुभ फल देगी। शुक्र की दशा में पराक्रम बढेगा। लग्नेश गुरु की दशा भी अति उत्तम फल देगी।।
चतुर्थ चरण:- उत्तराभाद्रपद नक्षत्र का स्वामी ग्रह शनि है। इस उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के चतुर्थ चरण का स्वामी मंगल हैं। उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के चौथे चरण में जन्मा जातक संपूर्ण रूप से सुखी होता है। लग्नेश गुरु की शनि से शत्रुता है तथा लग्न नक्षत्र स्वामी शनि की नक्षत्र चरण स्वामी मंगल से भी शत्रुता है। अतः शनि की दशा अशुभ फल देगी एवं मंगल की दशा मध्यम फल देगी। जो लाभ मंगल की दशा में जातक को मिलना चाहिए था वह नहीं मिल पायेगा। गुरु की दशा राजयोग प्रदाता होती है।।
#Panchang_24_October_2026
शनिवार को जूते-चप्पल, लोहे की बनी वस्तुयें, नया अथवा पुराना भी वाहन नहीं खरीदना चाहिये एवं नए कपड़े न खरीदना और ना ही पहली बार पहनना चाहिये।।
शनिवार का विशेष - शनिवार के दिन तेल मर्दन "मालिश" करने से हर प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती हैं - (मुहूर्तगणपति)।।
शनिवार को क्षौरकर्म (बाल दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से आयुष्य की हानि होती है। (महाभारत अनुशासनपर्व)।।
शनिवार को पीपल वृक्ष में मिश्री मिश्रित दूध से अर्घ्य देने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। पीपल के नीचे सायंकालीन समय में एक चतुर्मुख दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करने से सभी ग्रह दोषों की निवृति हो जाती है।।
दिशाशूल - शनिवार को पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो अदरख एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।।
#Panchang_24_October_2026
जिस व्यक्ति का जन्म शनिवार को होता है उस व्यक्ति का स्वभाव कठोर होता है। ये पराक्रमी एवं परिश्रमी होते हैं तथा इनके ऊपर दु:ख भी आये तो ये उसे भी सह लेना जानते हैं। ये न्यायी एवं गंभीर स्वभाव के होते हैं तथा सेवा करना इन्हें काफी पसंद होता है।।
शनिवार को जन्म लेनेवाले जातक कुछ सांवले रंग के, साहसी, मैकेनिक अथवा चिकित्सक होते हैं। इनमें से कुछ अपने कार्य में सुस्त भी होते हैं, जैसे देर से जागना, देर तक सोना भी इनकी आदतों में शुमार होता है। पारिवारिक जिम्मेदारियां भी शुद्ध रहती है इसलिये ये एक मेहनतकश इंसान होते हैं। सफलता के मार्ग में रूकावटों का भी सामना करना पड़ता है।।
शनिवार को जन्मलेनेवाले जातकों के स्वभाव में साहस लक्षित होता है। सफलता के मार्ग में लाख रुकावटें आए, लेकिन ये इसे पार करके ही रहते हैं। ऐसे लोग अधिकांशतः सांवले रंग के होते हैं। इन जातकों को अपने कैरियर के लिये डॉक्टपर, इंजीनियर तथा मैकेनिक के क्षेत्र का चयन करना चाहिये। इनका शुभ अंक 3, 6 और 9 तथा इनका शुभ दिन शनिवार और मंगलवार होता है।।
आज का सुविचार - मित्रों, रात लम्बी और काली हो सकती है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं होता कि सुबह होगी ही नहीं। ठीक उसी तरह असफलता का दौर लम्बा हो सकता है, लेकिन इसका यह मतलब ये कतई नहीं होता कि आपको अब कभी सफलता मिलेगी ही नहीं।।
#Panchang_24_October_2026
शनि देव मेहरबान हों तो इंजीनियर और चार्टर्ड एकाउंटेंट बनाते है।।.... आज के इस पुरे लेख को पढ़ने के लिये इस लिंक को क्लिक करें.... वेबसाईट पर पढ़ें: & ब्लॉग पर पढ़ें:
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