पञ्चांग 25 अक्टूबर 2026 दिन रविवार।।

Swami Ji Maharaj
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 बालाजी वेद, वास्तु एवं ज्योतिष केन्द्र।।

पञ्चांग 25 अक्टूबर 2026 दिन रविवार।। Panchang 25 October 2026

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आज का लेख एवं आज का पञ्चांग 25 अक्टूबर 2026 दिन रविवार।।

मित्रों, तारीख 25 अक्टूबर 2026 दिन रविवार को अश्विन मास के शुक्ल पक्ष कि चतुर्दशी तिथि है। आज व्रत की पूर्णिमा है। आज शरत्पूर्णिमा का परम पावन त्यौहार है। आज कोजागरी का भी पावन त्यौहार है। आज रात्रि में लक्ष्मी-इन्द्र-कुबेर देवता की पूजा करनी चाहिए। आज चतुर्दशी तिथि के अवसर पर ग्रहदोषों की शांति कर्म आदि करवाया जाय, तो सफलता की गारंटी होती है। साथ ही स्वयं भी आज शिवलिंग के ऊपर पहले पञ्चामृत और बाद में शहद का लेपन अवश्य करें। इससे आपके जटिल-से-जटिल रोग सहज ही समाप्त हो जायेंगे। आज कुछ और इसी प्रकार के विशिष्ट उपाय अपने और अपने परिवार के भले के लिए अवश्य ही करना चाहिए। जैसे किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति हेतु आज आँवले के जड़ में घी के दीपक में एक चुटकी हल्दी डालकर जला देवें। इससे बिटिया की शादी में विलम्ब हो रहा हो तो नहीं होगा अर्थात शीघ्र ही विवाह का योग बन जाएगा। आज यायिजययोग, सर्वार्थसिद्धियोग और रवियोग भी है। आज से पंचक अर्थात पचखा की निवृत्ति हो जाएगी। आप सभी को "व्रत के पूर्णिमा" की हार्दिक शुभकामनायें।।

हे आज की तिथि (तिथि के स्वामी), आज के वार, आज के नक्षत्र (नक्षत्र के देवता और नक्षत्र के ग्रह स्वामी), आज के योग और आज के करण। आप इस पंचांग को सुनने और पढ़ने वाले जातकों पर अपनी कृपा बनाए रखें। इनको जीवन के समस्त क्षेत्रो में सदैव ही सर्वश्रेष्ठ सफलता प्राप्त हो। ऐसी मेरी आप सभी आज के अधिष्ठात्री देवों से हार्दिक प्रार्थना है।।

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।। पधारने हेतु भागवत प्रवक्ता - स्वामी धनञ्जय महाराज की ओर से आपका ह्रदय से धन्यवाद। आपका आज का दिन मंगलमय हो। अपने गाँव, शहर अथवा सोसायटी में भागवत कथा के आयोजन हेतु कॉल - 9375288850 करें या इस लिंक को क्लिक करें।।

वैदिक सनातन हिन्दू पञ्चांग, Vedic Sanatan Hindu Panchang पाँच अंगो के मिलने से बनता है, ये पाँच अंग इस प्रकार हैं :- 1:- तिथि (Tithi), 2:- वार (Day), 3:- नक्षत्र (Nakshatra), 4:- योग (Yog) और 5:- करण (Karan).

पञ्चांग का पठन एवं श्रवण अति शुभ माना जाता है। इसीलिए भगवान श्रीराम भी पंचाग का श्रवण करते थे। शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है। वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।।

नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापों का नाश होता है। योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है। करण के पठन-श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलों की प्राप्ति के लिए नित्य पञ्चांग को देखना, पढ़ना एवं सुनना चाहिए।।

पञ्चांग 25 अक्टूबर 2026 दिन रविवार।। Panchang 25 October 2026

आज का पञ्चांग 25 अक्टूबर 2026 दिन रविवार।।
Aaj ka Panchang 25 October 2026.

विक्रम संवत् - 2083.

संकल्पादि में प्रयुक्त होनेवाला संवत्सर - सिद्धार्थ.

शक - 1948.

अयन – याम्यायनम्.

गोल - सौम्य.

ऋतु – शरद.

मास - अश्विन.

पक्ष - शुक्ल.

गुजराती पंचांग के अनुसार – अश्विन शुक्ल पक्ष.

#Panchang_25_October_2026

तिथि - चतुर्दशी 11:57 AM बजे तक उपरान्त पूर्णिमा तिथि है।।

नक्षत्र - रेवती 19:23 PM तक उपरान्त अश्विनी नक्षत्र है।।

योग - हर्षण 17:23 PM तक उपरान्त वज्र योग है।।

करण - गर 00:52 AM तक उपरान्त वणिज 12:03 PM तक उपरान्त विष्टि करण है।।

चन्द्रमा - मीन राशि पर 19:23 PM तक उपरान्त मेष राशि पर।।

सूर्य – तुला राशि एवं चित्रा नक्षत्र पर गोचर कर रहे हैं।।

मुम्बई सूर्योदय - प्रातः 06:38:01

मुम्बई सूर्यास्त - सायं 18:05:54

वाराणसी सूर्योदय - प्रातः 06:23:40

वाराणसी सूर्यास्त - सायं 17:37:52

राहुकाल (अशुभ) - सायं 16:41 बजे से 18:07 बजे तक।।

विजय (शुभ) मुहूर्त - दोपहर 12.10 PM से 12.34 बजे तक।।

#Panchang_25_October_2026

चतुर्दशी तिथि विशेष - चतुर्दशी तिथि को शहद त्याज्य होता है। चतुर्दशी तिथि को एक क्रूरा तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं चतुर्दशी तिथि को उग्रा तिथि भी माना जाता है। यह चतुर्दशी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्दशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। इस चतुर्दशी तिथि के देवता भगवान शिवजी हैं।।

इसीलिये चतुर्दशी तिथि को भगवान शिव का ज्यादा-से-ज्यादा पूजन, अर्चन एवं अभिषेक करना करवाना चाहिये। सामर्थ्य हो तो विशेषकर कृष्ण पक्ष कि चतुर्दशी तिथि को विद्वान् वैदिक ब्राह्मणों से विधिवत भगवान शिव का रुद्राभिषेक करवाना चाहिये। आज चतुर्दशी तिथि में भगवान् शिव का रुद्राभिषेक यदि शहद से किया करवाया जाय तो इससे मारकेश कि दशा भी शुभ फलदायिनी बन जाती है। जातक के जीवन कि सभी बाधायें निवृत्त हो जाती है और जीवन में सभी सुखों कि प्राप्ति सजह ही हो जाती है।।

जिस व्यक्ति का जन्म चतुर्दशी तिथि को होता है वह व्यक्ति नेक हृदय का एवं धार्मिक विचारों वाला होता है। इस तिथि को जन्मा जातक श्रेष्ठ आचरण करने वाला होता है अर्थात धर्म के मार्ग पर चलने वाला होता है। इनकी संगति भी उच्च विचारधारा रखने वाले लोगों से होती है। ये बड़ों की बातों का पालन करते हैं तथा आर्थिक रूप से सम्पन्न होते हैं। देश तथा समाज में इन्हें उच्च श्रेणी की मान-प्रतिष्ठा प्राप्त होती है।।

#Panchang_25_October_2026

रेवती नक्षत्र के जातकों का गुण एवं स्वभाव:- यदि आपका जन्म रेवती नक्षत्र में हुआ है तो आप एक माध्यम कद और गौर वर्ण के व्यक्ति होंगे। रेवती नक्षत्र में जन्मे जातकों के व्यक्तित्व में संरक्षण, पोषण और प्रदर्शन प्रमुख होते है। आप एक निश्चल प्रकृति के व्यक्ति होंगे जो किसी के साथ छल कपट करने में स्वयं डरता है। परंतु आप को क्रोध शीघ्र ही आ जाता है।।

किसी की ज़रा सी विपरीत बात आपसे सहन नहीं होती है। क्रोध में आप आत्म नियंत्रण भी खो देते हैं। परन्तु क्रोध जितनी जल्दी आता है उतनी जल्दी चला भी जाता है। साहसिक कार्य और पुरुषार्थ प्रदर्शन की आपको ललक सदा ही रहती है। आध्यात्मिक होते हुए भी आपका दृष्टिकोण व्यवहारिक होगा। आप किसी भी बात को मानने से पहले भली भाँती जांचते हैं।।

यही दृष्टिकोण आपका अपने मित्रों और सम्बन्धियों के साथ भी रहेगा। आप आँख बंद करके किसी पर भी भरोसा नहीं करेंगे। आप एक बुद्धिमान परन्तु मनमौजी व्यक्ति होंगे जो स्वतंत्र विचारधारा में विश्वास रखता है। आप परिवार से जुड़े हुए व्यक्ति होंगे जो दूसरों की मदद के लिए सदा तैयार रहते हैं। आपके जीवनकाल में विदेश यात्राओं की संभावनाएं प्रबल होंगी।।

रेवती नक्षत्र में पैदा हुए जातक संवेदनशील होते हैं इसलिए शीघ्र ही भावुक हो जाते हैं। आप सिद्धांतों और नैतिकता पर चलने वाले व्यक्ति होंगे जो सबसे अधिक अपनी आत्मा की सुनना और उसी पर चलना भी पसंद करता है। आप किसी भी निर्णय पर पहुँचने से पहले सभी तथ्यों के बारे में जान लेना आवश्यक समझते हैं, और निर्णय लेने के उपरान्त बदलते नहीं हैं।।

बाहरी दुनिया के लिए आप एक जिद्दी और कठोर स्वभाव के व्यक्ति होंगे। परन्तु जीवन में कई बार आप कठिनाईयों से घबराए एवं हारे हुये लगेंगे। इश्वर में पूर्ण आस्था के कारण आप जीवन में सभी अडचनों को साहस के साथ पार कर लेंगे। अपनी कुशाग्र बुद्धि के कारण आप किसी भी प्रकार के कार्यक्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के योग्य होंगे।।

रेवती नक्षत्र के जातकों को सरकारी नौकरी, बैंक, शिक्षा, लेखन, व्यापार, ज्योतिष एवं कला के क्षेत्र में कार्य करते देखा गया है। अपने जीवन के 23वें वर्ष से 26वें वर्ष तक आप अनेक सकारात्मक परिवर्तन देखेंगे। परन्तु 26वें वर्ष के बाद का समय कुछ रुकावटों भरा होगा जो कि 42वें वर्ष तक चलेगा। 50वें वर्ष के उपरान्त आपके जीवन में स्थिरता, संतुष्टि एवं शांति का अनुभव होगा।।

अपने स्वतंत्र विचारों और स्वभाव के कारण अपने कार्यों में किसी का हस्तक्षेप आपको कतई पसंद नहीं होगा। और न ही आप किसी क्षेत्र में स्थिर होकर कर कार्य कर पाते हैं। अपने बदलते कार्यक्षेत्रों के कारण आपको अपने परिवार से भी दूर रहना पड़ सकता है। अपने कार्यों के प्रति निष्ठा और परिश्रम के कारण आप करियर की ऊँचाईयों तक पहुंच जाते हैं।।

परन्तु मेहनत के अनुरूप जीवन में अपेक्षित मान-सम्मान और पहचान नहीं मिल पाती है। अपने जीवन में रेवती नक्षत्र के जातकों को माता पिता का सहयोग कभी नहीं प्राप्त होता है। यही नहीं आपके करीबी मित्र या रिश्तेदार भी कष्ट के समय आपके साथ नहीं होते हैं। परन्तु आपका दाम्पत्य जीवन बहुत खुशहाल होगा।।

विवाह के उपरान्त आपका जीवन साथी आपके साथ हर प्रकार से सहयोग करेगा तथा आपका जीवन सुखमय और आनंदित रहेगा। रेवती नक्षत्र के जातकों का प्रमुख लक्षण उनका साहस एवं सदव्यहार होता है। रेवती नक्षत्र के जातकों को बुखार, मुख, कान और आंतड़ियों से सम्बंधित रोग होने की संभावनाएं होती हैं।।

प्रथम चरण:- रेवती नक्षत्र के देवता पूषा हैं तथा नक्षत्र स्वामी बुध है। इस रेवती नक्षत्र के प्रथम चरण का स्वामी गुरु हैं। रेवती नक्षत्र के प्रथम चरण में जन्मा जातक ज्ञानी होता है। लग्न नक्षत्र स्वामी बुध, नक्षत्र चरण स्वामी से शत्रुता रखता है। अतः गुरु की दशा अत्यंत शुभ फल देती है। गुरु की दशा में जातक को पद प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है एवं यह दशा जातक के लिए स्वास्थ्य वर्धक रहेगी। बुध की दशा माध्यम फल देनेवाली होती है।।

द्वितीय चरण:- रेवती नक्षत्र के देवता पूषा हैं तथा नक्षत्र स्वामी बुध है। इस नक्षत्र के दूसरे चरण का स्वामी शनि हैं। रेवती नक्षत्र के दूसरे चरण में जन्मे जातक की रूचि तस्करी में होती है। नक्षत्र चरण के स्वामी शनि से लग्नेश गुरु शत्रुता रखता है तथा नक्षत्र स्वामी बुध की भी गुरु से शत्रुता है। अतः गुरु और शनि की दशा माध्यम फलदायी होती है। तथा बुध की दशा अत्यंत शुभ फल देती है। बुध की दशा में गृहस्थ सुख एवं भौतिक उपलब्धियां प्राप्त होंगी।।

तृतीय चरण:- रेवती नक्षत्र के देवता पूषा हैं तथा नक्षत्र स्वामी बुध है। इस नक्षत्र के तीसरे चरण का स्वामी शनि हैं। रेवती नक्षत्र के तीसरे चरण में जन्मा जातक कोर्ट कचेहरी के मुकदमे अथवा वाद विवाद में सदैव विजयी होता है। नक्षत्र चरण स्वामी शनि लग्नेश गुरु का शत्रु है परन्तु बुध से शनि की मित्रता है। अतः गुरु की दशा मध्यम परन्तु शनि की दशा उत्तम फल देती है। बुध की दशा में गृहस्थ सुख एवं भौतिक उपलब्धियां प्राप्त होंगी।।

चतुर्थ चरण:- रेवती नक्षत्र के देवता पूषा हैं तथा नक्षत्र स्वामी बुध है। इस नक्षत्र के चौथे चरण का स्वामी गुरु हैं। रेवती नक्षत्र के चौथे चरण में जन्मा जातक सदैव गृह कलेश में ही उलझा रहता है। लग्नेश और नक्षत्र चरण स्वामी दोनों ही गुरु हैं अतः गुरु की दशा में जातक को अति उत्तम फलों की प्राप्ति होती है। गुरु की दशा में जातक पद प्रतिष्ठा की प्राप्ति करेगा। गुरु की नक्षत्र स्वामी बुध में परस्पर शत्रुता है। अतः बुध की दशा जातक के लिए माध्यम फलदायी होती है।।

#Panchang_25_October_2026

मित्रों, आज रविवार को सुबह भगवान सूर्य को ताम्बे के एक लोटे में लाल चन्दन, गुड़ और लाल फुल मिलाकर अर्घ्य इस मन्त्र से प्रदान करें। अथ मन्त्रः- एही सूर्य सहस्रांशो तेजो राशे जगत्पते। अनुकम्प्य मां भक्त्या गृहाणार्घ्य दिवाकर।। अथवा गायत्री मन्त्र से भी सूर्यार्घ्य दे सकते हैं।।

इसके बाद आदित्यह्रदयस्तोत्रम् का पाठ करना चाहिये। भोजन में मीठा भोजन करना चाहिये नमक का परित्याग करना अत्यन्त श्रेयस्कर होता है। इस प्रकार से किया गया रविवार का पूजन आपको समाज में सर्वोच्च प्रतिष्ठा एवं अतुलनीय धन प्रदान करता है। क्योंकि सूर्य धन और प्रतिष्ठा का कारक ग्रह है।।

दिशाशूल - रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।।

रविवार का विशेष - रविवार के दिन तेल मर्दन करने से ज्वर (बुखार लगता) होता हैं - (मुहूर्तगणपति)।।

रविवार को क्षौरकर्म (बाल, दाढी अथवा नख काटने या कटवाने) से बुद्धि और धर्म की हानि होती है। (महाभारत अनुशासनपर्व)।।

विशेष जानकारी - मित्रों, रविवार के दिन, चतुर्दशी एवं अमावस्या तिथियों में तथा श्राद्ध एवं व्रत के दिन स्त्री सहवास नहीं करना चाहिये। साथ ही तिल का तेल, लाल रंग का साग तथा कांसे के पात्र में भोजन करना भी शास्त्रानुसार मना है अर्थात ये सब नहीं करना चाहिये।।

#Panchang_25_October_2026

रविवार ध्रुव प्रकृति का दिन माना जाता है। रविवार भगवान सूर्य का दिन होता है। यह भगवान विष्णु का दिन भी माना जाता है। वैदिक सनातन धर्म में इसे सर्वश्रेष्ठ वार माना गया है। अच्छा स्वास्थ्य व तेजस्विता पाने के लिए रविवार के दिन उपवास रखना चाहिए। प्रचलन से सप्ताह का पहला वार सोमवार को माना जाता है क्योंकि रविवार को छुट्टी का नाम घोषित है। परंतु सही मायने में तो रविवार सप्ताह का प्रथम वार ही है। परंतु रविवार को कुछ ऐसे कार्य जिसे यदि आप करते हैं तो इससे आपन नुकसान उठाना पड़ सकता है।।

रविवार के दिन पश्चिम और वायव्य दिशा में यात्रा न करें। इन दिशाओं में यात्रा करना जरूरी हो तो रविवार को दलिया, घी या पान खाकर या इससे पहले पांच कदम पीछे चलकर ही इस दिशा में जाएं क्योंकि इस दिन खासकर पश्चिरम में दिशा का शूल माना जाता है। रविवार को तांबे से निर्मित चीजों को बेचने से बचना चाहिए। तांबे के अलावा सूर्य से संबंधित अन्य धातु या वस्तुएं भी ना बेचें।।

रविवार के दिन नीले, काले, कत्थई और ग्रे कलर के कपड़े नहीं पहनना चाहिए। काले या नीले से मिलते जुलते कपड़े तो कदापि ना पहनें। रविवार को नमक नहीं खाना चाहिए। इससे स्वास्थ्य पर असर पड़ता है और हर कार्य में बाधा आती है। खास कर सूर्यास्त के बाद तो नमक बिलकुल भी नहीं खाना चाहिए।।

रविवार को दिन में सहवास करना और मांस एवं मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन शनि से संबंधित पदार्थों का सेवन भी नहीं करना चाहिए। आमतौर पर लोग रविवार को ही बाल कटाते हैं परंतु इस दिन बाल कटाने से सूर्य कमजोर होता है। इस दिन शरीर में तेल मालिश भी नहीं करना चाहिए। क्योंकि यह सूर्य का दिन होता है और तेल शनि का होता है।।

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मित्रों, रविवार सप्ताह का प्रथम दिन होता है, इसके अधिष्ठात्री देव सूर्य को माना जाता है। इस दिन जिस व्यक्ति का जन्म होता है वह व्यक्ति तेजस्वी, गर्वीले और पित्त प्रकृति के होते है। इनके स्वभाव में क्रोध और ओज भरा होता है तथा ये चतुर और गुणवान होते हैं। इस दिन जन्म लेनेवाले जातक उत्साही और दानी होते हैं तथा संघर्ष की स्थिति में भी पूरी ताकत से काम करते हैं।।

रविवार को जन्म लेनेवाले जातक सुन्दर एवं गेंहूए रंग के होते हैं। इनमें तेजस्विता का गुण स्वाभाविक ही होता है। महत्वाकांक्षी होने के साथ ही प्रत्येक कार्य में जल्दबाजी करते है और सफल भी होते हैं। उत्साह इनमें कूट-कूट कर भरा होता है तथा ये परिश्रम से कभी भी घबराते नहीं हैं। ये हर कार्य में रूचि लेने वाले होते हैं परन्तु ये लोग समय के पाबंद नहीं होते। ये जातक अपना करियर किसी भी क्षेत्र में अपने कठिन परिश्रम से बनाने की क्षमता रखते हैं। इनका शुभ दिन रविवार तथा शुभ अंक 7 होता है।।

आज का सुविचार - मित्रों, गलती कबूल़ करने और गुनाह छोङने में कभी देर ना करना। क्योंकि सफर जितना लंबा होगा वापसी उतनी ही मुशिकल हो जाती हैं। दुनिया में सिर्फ माँ-बाप ही ऐसे हैं जो बिना किसी स्वार्थ के प्यार करते हैं। कोई देख ना सका उसकी बेबसी जो सांसें बेच रहा हैं गुब्बारों में डालकर।।

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सूर्य की महादशा में मंगल विजय और बुध कुष्ठ रोग देता है।।.... आज के इस पुरे लेख को पढ़ने के लिये इस लिंक को क्लिक करें.... वेबसाईट पर पढ़ें:  &  ब्लॉग पर पढ़ें:

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